अगली मानव प्रयोगशाला, चाँद पर: आप तैयार हैं?

इस ब्रह्मांड के अनेकों ऐसे रहस्य हैं, जिन्हें खोजना रोमांचकारी तो है, लेकिन वहां तक जाने के लिए तमाम खतरों के अलावा खर्चा भी बहुत आता है। ऐसे में एक विचार यह है कि ऐसे अभियानों के लिए चांद, मंगल और उससे भी आगे की उम्मीद में अगर इंसानों की जगह रोबॉट भेजे जाएं, तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है। ऐसा भरोसा किया जा रहा है कि वहां जरूर ऐसे रहस्य छिपे होंगे जो एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

प्रोफेसर बर्नार्ड फोइंग, यूरोपियन स्पेस ऐजेंसी के स्पेस साइंस विभाग में सीनियर रिसर्च कोऑर्डिनेटर हैं। फोइंग स्पेस प्रोब्स में लगने वाले उपकरण बनाते हैं और साथ ही उन्हें चांद पर हुए एक सफल मिशन स्मार्ट-1 का जन्मदाता भी माना जाता है। इनका अगला कदम होगा लूनर लैंडर्स और रोवर डिवेलप करने में अपने अनुभवों का इस्तेमाल करना। लूनर लैंडर्स और रोवर वे vआहन हैं जो अन्तरिक्ष यान से बाहर आ कर चांद की सतह पर घूम-घूम कर नमूने इकट्ठे करते हैं। फोइंग के मुताबिक उनकी टीम फिलहाल स्मार्ट-1 से मिले डेटा को खंगाल कर रही है। 18 महीने के मिशन के दौरान स्मार्ट-1 में माइक्रो कैमरों, इन्फ्रारेड और एक्स-रे उपकरणों की सहायता से चांद के ढेरों फोटो भी खींचे गए थे। इस मिशन से मिले रासायनिक आंकडे़ चांद के जन्म पर रोशनी डालेंगे, वहीं हाई रिजोल्यूशन फोटो उन जगहों के चुनाव में मददगार साबित होगी जहां भविष्य में चांद पर उतरा जा सकेगा।

फोइंग चांद को एक ऐसी प्रयोगशाला के तौर पर देखते हैं जहां से अंतरिक्ष में और आगे बढ़ा जा सकेगा। वह कहते हैं ‘मैं दूसरे ग्रहों पर जीवन के प्रसार में रुचि रखता हूं। मसलन, हम ऐसे इलाकों की खोज कर सकते हैं जहां पर हम बैक्टीरिया से जुड़े प्रयोग या फिर जीव विज्ञान से जुड़े प्रयोग कर सकें। इनसे जीवन को बढ़ावा देने वाली प्रणाली विकसित करने में मदद मिलेगी। इन्हीं प्रयोगों से मिले नतीजों की मदद से हम अंतरिक्ष में भी इंसानों की बस्ती बसा सकेंगे।’

इस बस्ती के बसने से पहले ही कई भारतीय चाँद पर जायदाद खरीद चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम, जर्मनी में बसे अमृतसर के हरजिंदर सिंह, हैदराबाद के राजीव बागडी , चंडीगढ़ के श्रीमती और श्री रमेश शर्मा , भोपाल के श्रीमती श्री राजविंद आहलूवालिया (संदर्भ: भास्कर समूह की पत्रिका, अहा!जिंदगी, जुलाई २००५) और छत्तीसगढ़, भिलाई के गुरूप्रीत सिंह आदि

इन्हे मिले दस्तावेजों के मुताबिक, ये सभी अपने प्लॉट (!?) के ५ किलोमीटर नीचे और ८ किलोमीटर ऊपर मिलने वाले खनिज/ द्रव्य/ गैस के मालिक होंगें

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