क्या आप दुनिया के सबसे असुरक्षित तरीके से इंटरनेट पर जाते हैं!?

मुझे यह कहने में कतई संकोच नहीं कि सब कुछ जानते बूझते हुए भी मैं चौंका था जब इस विषय पर लिखने की तैयारी की। फिर भी, अपने सबसे लोकप्रिय ब्लॉग पर, पिछले 500 पाठकों के आंकड़े इकट्ठा करते वक्त जब मैंने देखा कि पूरी दुनिया के उलट, इंटरनेट विचरण के लिए हिन्दी के पाठक सबसे असुरक्षित तरीका अपनाते हैं तो हैरानी अधिक नहीं हुई, क्योंकि अभी कुछ दिन पहले ही यह रिपोर्ट आई थी कि स्पैम के मामलों में भारत का स्थान, सबसे पहले स्थान पर रहे अमेरिका के बाद है, अर्थात दूसरा! जबकि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट संबंधित अपराधों में भारत का स्थान पांचवां है।

आम इंटरनेट उपभोक्ता यह जान कर अचंभित हो सकता है कि इंटरनेट से जुड़ते ही कम्प्यूटर पर प्रति सेकेंड 100 से अधिक आक्रमण होने शुरू हो जाते हैं। प्रत्येक आक्रमण घातक नहीं होता किन्तु हर साढ़े चार सेकेंड में कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाने वाली प्रक्रिया हो ही जाती है। कोढ़ में खाज वाली बात यह भी है कि सुरक्षा फर्म सायमनटेक के मुताबिक इनसे निजात दिलाने वाले कई सॉफ़्टवेयर खुद किसी बदनीयती से परे नहीं होते।

बेशक, इन सब बातों के मद्देनज़र बात होनी चाहिए कम्प्यूटर सुरक्षा की किन्तु आज केवल ब्राऊज़र के बारे में ही लिखूँगा।

हुआ यह कि एक ब्लॉगर मित्र ने पिछले माह सम्पर्क किया और लगभग रूआंसे से होते हुए कहा कि मेरा ब्लॉग तहस-नहस हो गया है अभी घर पर सब ठीक छोड़ कर आया था यहाँ ऑफ़िस में सब गड़बड़ दिख रहा। मैंने छूटते ही पूछा ब्राऊज़र कौन सा इस्तेमाल कर रहे? उन्होंने पलट कर प्रश्न दाग दिया कि यह ब्राऊज़र क्या होता है!?

एक असफल सी कोशिश करते हुए मैंने बताया कि इंटरनेट पर विचरण करने के लिए आप जिस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करते हैं उसे ब्राऊज़र कहा जाता है। साथ ही मैंने पूछ भी लिया कि आप ब्लॉग को कहीं इंटरनेट एक्सप्लोरर 6 के जरिए तो नहीं देख रहे? उन्होंने बड़ी मासूमियत से जिज्ञासा प्रकट की, कि यह कैसे पता चलेगा? तब उन्हें विभिन्न ब्राऊज़रों के संस्करण जांचने की प्रक्रिया बताई जो कि इस प्रकार है। यह लगभग हर सॉफ़्टवेयर पर लागू होती है।

उदाहरण के तौर पर File > Help > About… या फिर इन चित्रों का सहारा लें, जिन पर गोल घेरों में संस्करण दर्शाए गए हैं (इन चित्रों को सीधे क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है)

इंटरनेट एक्सप्लोरर
फायरफ़ॉक्स

गूगलक्रोम

ओपेरासफ़ारी


फ्लोक

इस लेख के लिखे जाते समय, इंटरनेट एक्सप्लोरर का ताज़ा संस्करण 8.0.6 , फायरफॉक्स का 3.6.8 , गूगल क्रोम का 5.0.375.125, ओपेरा का 10.60 तथा सफ़ारी का 5.0.1 प्रचलन में है।

इंटरनेट की लोकप्रियता के शुरुआती दिनों में आए माइक्रोसॉफ्ट का इंटरनेट एक्सप्लोरर आज भी नंबर वन है और इसने ब्राउजर बाजार के करीब 60 फीसदी हिस्से पर कब्जा किया हुआ है। इंटरनेट एक्सप्लोरर को बढ़त इसलिए मिली क्योंकि पूरी दुनिया में कंप्यूटर को चलाने के लिए जिस ऑपरेटिंग सिस्टम को सबसे अधिक पसंद किया गया, वो माइक्रोसॉफ्ट का था। इंटरनेट एक्सप्लोरर माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज के साथ आता था, और वेब ब्राउजिंग के लिए लोग उसी का इस्तेमाल करते थे। इन सब बातों के बावज़ूद हमारे परिवार में कोई भी इंटरनेट एक्सप्लोरर का उपयोग नहीं करता, बल्कि मेरे कम्प्यूटर में तो है ही नहीं! आदत ही नहीं रह गई।

इसका कारण है कि नेटस्केप ब्राऊज़र के मुकाबले उतरे माईक्रोसॉफ़्ट के इस ब्राऊज़र की लोकप्रियता को देखते हुए सायबर अपराधियों ने अपनी कोशिशों को सफल करने के लिए इसे अपना निशाना बनाया और सफ़लता हासिल कर ली जो आज भी किसी हद तक बदस्तूर जारी है। यह कमी सबसे ज़्यादा इंटरनेट एक्सप्लोरर-6 में है जो कंप्यूटर पर ख़तरनाक प्रोग्रामों को चलने से रोक नहीं पाता। नई तकनीकें जो विकसित हो रही हैं उनके लिए इंटरनेट एक्सप्लोरर 6 बहुत पुराना हो चुका है और यह तकनीकें उस पर नहीं चलती। उदाहरण के लिए नए जावा कोड और HTML 5 तथा नए CSS कोड, इंटरनेट एक्सप्लोरर 6 समर्थित नहीं है। इंटरनेट एक्सप्लोरर -6 पर वे ब्लॉग तो बिल्कुल गड़बड़ दिखते हैं जिनमें आधुनिक टैंपलेट लगाया गया है। एडसेंस वाले विज्ञापन जिस स्थान पर आपको नजर आते है, आपके पाठकों को किसी और स्थान पर दिखते है, साईडबार साईड पर नहीं पोस्ट के नीचे नजर आती है।
बात इतनी बिगड़ चुकी है कि इसी वर्ष 2010 की जनवरी में जर्मनी सरकार के सूचना सुरक्षा विभाग ने जर्मनी में रहने वालों को इंटरनेट एक्सप्लोरर का इस्तेमाल न करने की सलाह दे दी। अधिकारियों के मुताबिक इसमें सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं जिससे गोपनीय जानकारी लीक हो सकती है। फ्रांस ने भी अपने नागरिकों को कोई और ब्राउज़र इस्तेमाल करने की सलाह दे दी। अमेरिका की सरकार ने तो अरसा पहले ही कह दिया था कि इंटरनेट एक्सप्लोरर से बच कर रहें। प्रसिद्ध कम्प्यूटर पत्रिका ZDNet ने भी यही सलाह दी कि यह समय है इंटरनेट एक्सप्लोरर त्यागने
क्या आप दुनिया के सबसे असुरक्षित तरीके से इंटरनेट पर जाते हैं!?
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क्या आप दुनिया के सबसे असुरक्षित तरीके से इंटरनेट पर जाते हैं!?” पर 26 टिप्पणियाँ

  1. बहुत धन्यवाद। चेक कर लिया। अपडेटेड है।

  2. @ डॉ महेश सिन्हा

    व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर, मैं कुछ एड-ऑन्स के साथ फायरफॉक्स को सामान्य उपयोगकर्ता के लिए सुरक्षित मानता हूँ

    बी एस पाबला

  3. आपका बहुत बहुत आभार ………….बेहद जरूरी और काम की जानकारी दी आपने !

  4. यहाँ भी सब अपडेटेड है ! बस नेट ही स्लो रहता है !

  5. अच्छी जानकारी के लिए आभार.
    हम तो शुरू से FIREFOX ही प्रयोग कर रहे हैं. ये तो सही है न?
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

  6. एक बात मैं यहाँ रखना चाहूँगा.. आज भी Lotus Notes Web Based या Outlook Web Based ईमेल IE द्वारा ही अच्छे से और अपनी पूर्ण सुविधा के साथ दिखती है..
    इसका मतलब मुझे IE का समर्थक ना माना जाए.. मैंने तो मात्र उसकी एक खूबी गिनाई है जिसके कारण से मैं उसे अपने कम्प्युटर से डिलीट नहीं करने वाला हूँ.. 🙂
    वैसे मैं FireFox ही प्रयोग में लाता हूँ..

  7. एक्स्प्लोरर को काफी समय से उपयोग में नहीं लिया …
    फायरफोक्स और गूगल क्रोम के बाद अब इपिक बहुत सुविधाजनक लग रहा है …
    सुरक्षित है या नहीं …ये आप बताएं …!

  8. सही बात है ध्यान न दिया जाए तो यह हाईवे के ठीक बीच में चलने जैसा है.

  9. एक ज्ञानवर्धक पोस्ट. जो लोग अभी तक IE 6.x का इस्तेमाल करते है वो सबसे ज्यादा असुरक्षित है. वैसे तो एंटी वाईरस कंपनी खुद वाइरस बनाने के लिए संदेह के घेरे में रहती है, लेकिन फिर भी सुरक्षा की दृष्टी से वो सब कंप्यूटर जो इन्टरनेट से जुड़ते है उनमे एक एंटी वाइरस सॉफ्टवेर और एक एंटी स्पाईवेयर तो कम से कम इंस्टाल होना ही चाहिए.

  10. सर पोस्ट को बुकमार्क कर लिया है ….

    सर एक बात बताईये मैं तो इससे भी असुरक्षित तरीके से इंटरनेट पर जाता हूं ………खुल्लम खुल्ला श्रीमती जी के सामने ही कंप्यूटर खोल कर बैठ जाता हूं ………कंप्यूटर टूटने तक का खतरा होता है इसमें …इससे बचने के लिए कौन सा ब्राउजर इस्तेमाल करूं

  11. @ वाणी गीत

    आपको दिए जाने वाला ज़वाब तो पहले ही डॉ महेश सिन्हा को दे चुका

  12. @ अजय कुमार झा

    एक का पता तो मुझे है, वह बहुत प्रसिद्ध भी है और अक्सर उसकी सलाह दी जाती है

    एकाध इन्क्वारी और आने दीजिए फिर उसका नाम बताता हूँ 🙂

  13. बहुत बढ़िया पाबला जी !
    काम की जानकारी ! शुभकामनायें !

  14. उबुन्टू +फायरफोक्स = सुरक्षा ही सुरक्षा
    हम तो इसी फार्मूले का इस्तेमाल कर सुखी है

  15. सुरक्षा हमेशा से कमजोर लोगों का अस्त्र रहा है विरोधी इसी का फायदा उठाते हैं

  16. मैं तो chrome की launching के १५ दिन बाद से ही chrome उपयोग करने लगा और यही सबसे अच्छा लग रहा है क्यंकी ओपेरा गति बहुत काम कर देता है और firfox में भी कुछ गंभीर सुरक्षा संबंधी समस्याएं हैं विशेषकर अगर password save कर के रखते हैं या अपना ही कंप्यूटर होने के कारण हर बार har site se logout नहीं करते हैं ……..safari की भी गति धीमी है .पर सबसे बड़ी बात अपना खुद का ब्रोव्से भी बनाया जा सकता है ?
    कैसे ?
    जल्दी बताइए और बनाइये .फिर हम आपका बनाया हुआ ही उपयोग करेंगे 🙂 और खुद का भी बनायेंगे

  17. बढ़िया जानकारी। आभार।
    ओपेरा में देवनागरी ठीक नहीं दिखती, कोई उपाय है क्या?
    घुघूती बासूती

  18. बहुत ही उपयोगी जानकारी है। पाबला जी आभार ।

  19. दरअसल आजकल का आदमी बहुत जल्‍दी में रहत है, बिना श्रम और समय लगाए बहुत कुछ पाने का आकांक्षी, इसी चक्‍कर में….
    टिप्पणीकर्ता Dr. Zakir Ali Rajnish ने हाल ही में लिखा है: जीत के जश्‍न का इंट्रीपास ले लें….My Profile

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