आखिर GMail के सर्वर ध्वस्त क्यों हो गये?

ज़िंदगी के मेले

मैं गूगल की GMail सेवा का दीवाना हूँ। Yahoo!, Hotmail पर पता नहीं पिछली बार कब ऑनलाईन हुया था। गूगल की कई सेवायें मुझे बहुत आकर्षित करती हैं व अधिकतर का पूरा दोहन करता हूँ। वैसे तो कई बार थोड़े-थोड़े समय के लिए GMail में आये व्यवधान से पाला पड़ता रहता है लेकिन इस बार मंगलवार, 24 फरवरी को GMail की नाकामी से मेरे जैसे कई उपयोगकर्ता खासे परेशान हुए। लेकिन GMail ने अपनी सफाई में जो कुछ कहा है, उसे भी मैं आसानी से हजम नहीं कर पा रहा। वैसे गूगल ने स्वीकार किया है कि उसने खुद ही अपने डाटा केन्द्र ध्वस्त कर दिए थे जिससे ईमेल सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी थीं।

अकेले भारत में चार घंटे तक जीमेल उपयोगकर्तायों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, जानकार इस सफाई को सही नहीं मान रहे। गूगल ने कहा कि यूरोपीय डाटा केंद्रों में से एक के नित्य किए जाने वाले रखरखाव के वक्त उन्होंने ट्रैफिक को दूसरे सर्वर की ओर निर्देशित कर दिया था। बुधवार, 25 फरवरी की सुबह GMail के विश्वस्तता प्रबंधक अकासियो क्रूज ने कहा कि उन्होंने साथ ही नया कोड इस्तेमाल किया, ‘जिसने डाटा को भौगोलिक रूप से उसके मालिक के करीब रखने की कोशिश की। इससे यूरोप में एक और डाटा केन्द्र ओवरलोड हो गया। इसके चलते एक डाटा केंद्र से दूसरे तक सिलसिलेवार समस्या पैदा होती चली गई।’ बोले तो गूगल ने अपने सर्वर जाम कर दिए थे। उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। हालांकि जानकारों का मानना है कि इसे ‘अपनी गलती’ बताकर गूगल अपनी नाकामी को छिपा रही है।

देर शाम को गूगल ने Captcha प्रणाली का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इसमें अंग्रेजी के कुछ अक्षरों को पहचानने के बाद ही उपयोगकर्ता आगे बढ़ सकता है। इसके साथ ही जीमेल की वेबसाइट पर एक संदेश भी था। संदेश में कहा गया था, ‘हम क्षमा चाहते हैं लेकिन आपकी पूछताछ, कंप्यूटर वायरस या spyware अनुप्रयोग जैसी लग रही है।’ इसके नीचे उपयोगकर्तायों को एक बक्से में दिए अक्षर टाइप करने को कहा गया था, जिन्हें सही टाइप करने के बाद ही वे अपने ईमेल खाते तक पहुँच सकते थे।

एक भारतीय विश्लेषक ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहना था ‘अगर यह रखरखाव से जुड़ा मसला होता तो उन्हें इस बात की जानकारी होती कि कहां से ट्रैफिक भार बढ़ रहा है। अगर समस्या उनके छोर से थी तो उन्होंने कैप्चा प्रणाली क्यों लगाई?’ उन्होंने कहा कि अगर यह कोड टेस्टिंग नाकामी होती तो प्रायोगिक जाँचों के वक्त भी ऐसे प्रभाव देखने को मिलने चाहिए थे। इसके अलावा अगर समस्या गूगल की ओर से पैदा हुई होती तो उसे दुरुस्त करने में चार घंटे का वक्त नहीं लगता।

एक दूसरी कहानी यह बताई जा रही है कि गूगल ने एक ऑनलाईन जाँच के दौरान यह जांचने के लिए खुद ही अपने सर्वर ध्वस्त कर दिए कि क्या वे ऐसे बाहरी हमलों की सीमा में है? आम तौर पर ऐसे परीक्षण नियंत्रित हालात में किए जाते हैं, इसलिए इस पर विश्वास करना मुश्किल है । एक दूसरे विश्लेषक ने कहा, ‘अगर सच में गूगल ने ऐसा खुद किया या कोई हमला हुआ था तो भी वह सार्वजनिक स्तर पर कभी ऐसा स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने से कई सवाल पूछे जायेंगे।’

यह हम सभी के लिए चेतावनी की तरह है। कम से कम मुझे तो यह जानकारी हो गई है कि गूगल भी ऐसी समस्याओं से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, भले उसने यह खुद किया हो। प्रायोगिक चरण में चल रहे GMail में, 2008 से अब तक चार बार गूगल ऐसी स्थिति का सामना क

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6 thoughts on “आखिर GMail के सर्वर ध्वस्त क्यों हो गये?

  1. मुझे लगता है कि इधर गूगल पर लोड कुछ अधिक है या कर्मचारी कम।

  2. हमें तो पता ही नहीं चला। सूचना के लिए आभार।

  3. हम भी काफ़ी preshaan हुए थे ……ये दिक्कत काफी देर तक चली है ……

  4. बढ़िया जानकारी परक विश्लेषण. आपसे आग्रह है कि स्नैपशॉट डिसेबल कर दें. यह पढ़ने में बहुत डिस्टर्ब करता है.

  5. मुझे लगता है कि यह हिंदी भाषियों के शाप का नतीजा है। गूगल जल्दी एडसेंस हिंदी में शुरू कर दे, सब ठीक हो जाएगा! गूगल को हिंदीवालों से इतने अशीश मिलेंगे कि उसकी सब तकलीफें दूर हो जाएंगी!

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