आज मेरी अगली पीढ़ी, 23 वर्ष की हो गयी

सन 1986 के मई माह का वह एक रविवार था। शाम को दूरदर्शन पर फिल्म चल रही थी -हमराही। 9 बजे ही थे एकाएक ही रिमोट कंट्रोल बोल उठा ‘हॉस्पिटल’। हमने अपनी जावा मोटरसायकल उठायी और रिमोट कंट्रोल के साथ धीमे-धीमे चल पड़े अपने संस्थान के अस्पताल की ओर। ऑपरेशन थियेटर के दरवाज़े के सामने अकेले खड़े-खड़े अनचाहा तनाव बढ़ते ही जा रहा था। 25-26 मई की मध्य रात्रि 12 बज कर 20 मिनट पर वह दरवाजा खुला। आधे लटके हुये मास्क के पीछे से एक मुस्कुराता सा चेहरा नज़र आया जो अपने हाथों में, सफेद एनेमल चढ़ी हुयी बड़ी सी ट्रे में मेरी अगली पीढ़ियों को लिए खड़ी थी। मेरी आंखों में एकाएक ही आंसू आ गये। नज़दीक आने व छू कर देखने के लिए जब कहा गया तो एक अनजान से डर ने मुझे हिलने ही नहीं दिया। लेकिन जब मुझे बताया गया कि इनमें से एक लड़का है और एक लड़की तो मेरे कदम खुद-बखुद बढ़ गये। जी भर निहारा मैंने उन अजीब तरह से कुलबुलाते हुये प्रकृति की अनुपम देन को।

(दुर्ग जिले के बालोद स्थित तांदुला बांध के सामने का एक दृश्य -1991)

आज उस घटनाक्रम को 23 वर्ष बीत चुके हैं, किंतु अक्सर ऐसा प्रतीत होता है जैसे कल की ही बात हो। अपने छोटे बेटे की 16 वर्ष की आयु में हुयी अकाल मृत्यु से माता जी बेहद अवसादग्रस्त थी। उनके भरपूर भावनात्मक उद्वेग के कारण मुझे समय से पहले ही फेरे लेने पड़ गये। माता जी हमारी आने वाली संतान को अपने पास ही रखे जाने के लिए झोली फैला चुकीं थीं। एक ही संतान का सिद्धांत पालन करने की मानसिकता लिए, सख्त लहजे में हमने उन्हें बता दिया था कि चाहे लड़का हो या लड़की, फिर आप अपने कदम पीछे नहीं लेंगे। वे इसके लिए भी तैयार थीं। लेकिन ‘सुपर प्रोग्रामर’ को हमारा ईमानदारी भरा सिद्धांत शायद पसंद नहीं आया। उसने अलग-अलग स्थानों में रह रहे दोनों परिवारों की झोली भर दी।

(विभिन्न स्थानों पर, बचपन के क्षण)
बचपन के शुरूआती चार वर्ष दादा-दादी के पास बिता कर पुत्र गुरूप्रीत हमारे पास आ गया। पिता जी की सख्ती के कारण हमारी माता जी ने अपना मन बदला था क्योंकि अपनी दादी के लाड़-प्यार से गुरूप्रीत बिगड़ रहा था (ऐसा हमारे पिता जी का कहना था)। यहीं भिलाई के सेक्टर 10 में कपूर मैडम के नर्सरी स्कूल से पढ़ाई की शुरूआत कर दोनों ही साथ-साथ, सेक्टर 10 व सेक्टर 4 के स्कूल तक रहे। जुड़वाँ होने के बावज़ूद, दोनों के स्वभाव में बेहद अंतर पाया हमने। शायद अलग अलग बनावट के कारण। किन्तु एक टेलोपैथी जैसा भी है दोनों के बीच। किसी एक को कोई खुशी या परेशानी हो तो भौगोलिक अंतर के बावज़ूद दूसरे को पता लग ही जाता है और हमें भी!

(धमतरी के गंगरेल बांध स्थित बगीचे में रंजीत -2009)

नाज़ुक सी मेरी बिटिया बेहद संवेदनशील है। मानवीय रिश्तों को, सीमायों में रह कर निभाना उसे बखूब आता है। हरे-भरे जंगल, पालतू पशु, शांत माहौल, छोटे बच्चों से उसे बेहद लगाव है। अच्छी प

आज मेरी अगली पीढ़ी, 23 वर्ष की हो गयी
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16 Thoughts to “आज मेरी अगली पीढ़ी, 23 वर्ष की हो गयी”

  1. dhiru singh {धीरू सिंह}

    बहुत बहुत मुबारका . ईश्वर से प्रार्थना है उनेह दुनिया की तमाम खुशियाँ मिले . और आपका नाम दुनिया भर में रोशन करे दोनों

  2. मीनाक्षी

    बहुत भावात्मक लेख…दोनों बच्चों के बारे में पढ़कर बहुत अच्छा लगा…23 वर्षीय पीढ़ी के लिए ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद …

  3. Udan Tashtari

    दोनों बच्चों को जन्म दिन पर खूब बधाई, मुबारकबाद एवं शुभाशीष.

    सुन्दर आलेख-आपको भी बहुत बहुत बधाई इस विशिष्ट दिवस की.

  4. ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey

    आपकी पोस्ट से जो स्नेह संतोष भाव झलक रहा है – वह अमूल्य है पाबला जी। बहुत बधाई।

  5. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    दोनों को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाइयाँ। सुबह फोन पर पाबला जी से बात हुई। रंजीत और गुरुप्रीत दोनों घर नहीं थे। उन्हें बधाई देने से रह गया। पाबला जी कहने लगे। उन्हें खुद देना। इस बीच कोई अन्य फोन आ गया। वह भी बधाई के लिए ही था। रंजीत और गुरुप्रीत दोनों ने पाबला जी की बगिया को महकाया हुआ है। कामना है कि ऐसे बेटे बेटी सब को मिलें।

  6. संगीता पुरी

    दोनो बच्‍चों के बारे में जानकर बहुत अच्‍छा लगा .. दोनो को जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई।

  7. yunus

    बढिया है । बहुत बहुत बधाई । डबल केक का इंतज़ार

  8. rajesh sharma

    aapake poore parivaar ko badhaai

    rich dad poor dad ke baare mein sameer lal jee bhii likh chuke hain
    dekhiye http://udantashtari.blogspot.com/2007_02_01_archive.html

  9. निरन्तर- महेन्द्र मिश्र

    दोनों बच्चों को बहुत बहुत बधाई…

  10. अनूप शुक्ल

    आपके बच्चों के लिये मंगलकामनायें। आपको मुबारकबाद!

  11. Manvinder

    ranjit or gurpreet ko bahut bahut badhaiyan……bachpan dekhna ….use mahsoos karna…..sach main achcha lagta hai

  12. Vijay Kumar Sappatti

    paabala ji ,

    aapke baccho ki janamdin ki shubkaaamnaye.. deri se hi sahi ..
    aapke blog ke dwara aapko jaane ka mauka mila .. mujhe bahut khushi hui .. aapki dusari saari posts bhi padhi , ab to jab bhi bhilai aaunga ji aapse jarur milunga.. bacche to bus bacche hi hote hai .,wo to kabhi bhi bade nahi hote hai …

    aapke pariwaar ko meri shubkaamanye..

    agar ho sake to meri nayi kavita par kuch comment jarur deve. khushi hongi ..

    aapka
    vijay
    http://www.poemsofvijay.blogspot.com

  13. Harkirat Haqeer

    पाबला जी ,
    आज आपके परिवार के बारे में जानकर बहुत ख़ुशी हुई …इतने होनहार बच्चे ….शायद आपके ही संस्कारों की दें होंगें ….आपको नमन और बच्चों को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें ……!!

  14. Sanjeet Tripathi

    मुआफी, आप तो जानते हैं हम आजकल ब्लॉग जगत पर कमेंटियाने के मामले मे लेट लतीफ हो गए हैं।

    सो दोनो ही बच्चों को बधाई व शुभकामनाएं ( देर से ही सही)

  15. anitakumar

    लेटलतीफ़ों की लाइन में हम भी खड़े हैं और वो भी सबसे पीछे, तो हमको भी माफ़ी से नवाजा जाए और दोनों बच्चों के लिए मेरी शुभकामनाएं । आप ने कहा रंजीत बहुत संवेदनशील है। ये तो सच है पर आप ये नहीं बताया कि वो बहुत जहीन भी है। भगवान ऐसे अच्छे बच्चे सभी मां बाप को दें

  16. Shastri

    वाह वाह! मजा आ गया! बच्चों के लिये ही तो मैं आप जी रहे हैं.

    दोनों को बहुत बहुत आशीर्वाद्!!

    मेरे बच्चे अब 27 और 25 के हो गये हैं अत: आप के हर्ष को समझना आसान है!!

    सस्नेह — शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

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