उत्तर भारत की यात्रा: दो नौजवान ब्लॉगरों से हुई पहली मुलाकात

12 ब्लॉगरों की खुशनुमा शाम के बाद अगले दिन 20 दिसम्बर को मुझे भिलाई लौटना था। हजरत निज़ामुद्दीन स्टेशन से दोपहर 3:25 को चलने वाली ट्रेन में वातानूकूलित शयनयान का आरक्षण करवाते समय नवम्बर माह में भी वेटिंग दर्शा रहा रहा था। अब इंतज़ार था चार्ट बनने का। तब कहीं जा कर पता चलता बर्थ नम्बर का।

पिछले शाम की बैठक में, भिलाई रवाना होने के पहले संजू-राजीव तनेजा दंपति द्वारा उनके निवास पर दोपहर-भोज के आग्रह को स्वीकार कर चुका था। इस लिहाज से मुझे जल्दी निकलना था। राजीव जी ने सुबह एक बार फोन कर फिर याद दिलाया। मैंने 10 बजे तक उनके निवास की ओर रवानगी का भरोसा दिया और मेट्रो स्टेशन पहुँच कर उन्हें बता भी दिया। वे मुझे लेने के लिए स्टेशन पर मौज़ूद रहेंगे, यह कह हमारी बात खतम हुई।

टिकट के लिए कतार में खड़े अभी मेरी बारी आ भी नहीं पाई थी कि मोबाईल पर बुआ जी का नाम उभरा। बात हुई तो उन्होंने याद दिलाया कि मेरे भिलाई वापस जाने के पहले उन्होंने एक अत्यावश्यक कार्य के लिए घर आने का आदेश दिया था। इस बात का मुझे स्मरण ही नहीं रहा। राजीव तनेजा जी को फोन कर क्षमा मांगते हुए वस्तुस्थिति बताई और चल पड़ा बुआ जी के घर की ओर।

निज़ामुद्दीन स्टेशन पर जब फुफेरे भाई ने मुझे छोड़ा तो दोपहर का 1 बज चुका था। इस बीच टी एस दराल जी व अंतर सोहिल जी मोबाईल पर सम्पर्क कर चुके थे। दराल जी से अगली बार मिलने का वादा ही किया जा सका और अन्तर सोहिल जी ने कुछ ही देर में स्टेशन पहुँचने की बात की।

मैं बार बार अपने मोबाईल पर IRCTC द्वारा अधिकृत सॉफ़्टवेयर ngpay का उपयोग करते हुए अपनी शायिका के पुष्टिकरण की चेष्टा कर रहा था। बार बार लिखा मिलता था कि अभी चार्ट नहीं बना है और जब चार्ट बन जाने की सूचना दिखी तो पता चला कि प्रतीक्षा सूची वहीं की वहीं है बर्थ कन्फ़र्म ही नहीं हुई

अब शुरू हुई भागमभाग्। पवन चन्दन जी को सोते से उठा कर मदद की गुहार लगाई गई। उन्होंने एक अधिकारी का पता बताया कि कुछ हो सकता है तो हो जाएगा वरना…. उन अधिकारी महोदय ने जनरल डब्बे वाला टिकट खरीद कर प्लेटफॉर्म पर टीटीई से सम्पर्क करने की बात कही और ज़रूरत पड़ने पर खुद भी पहुँच जाने का आश्वासन दिया।

139 पर पता किया गया किराए का। बताया गया 410 रूपए। जेब में नगद थे 586 रूपए। अतिरिक्त आरक्षण, टीटीई का सेवा शुल्क, राह का खाना-पीना वगैरह वगैरह याद आया। एटीएम तक लगी दौड़। कुल चार एटीएम में से तीन खराब। एक ने कार्ड को पहचानने से इंकार कर दिया। अब !? वापस लौटूँ या …

कुछ सोच पाता इससे पहले ओशो के प्रशंसक, अन्तर सोहिल मेरे सामने थे। मैंने शायद पहले कभी गौर से उनका चित्र नहीं देखा था। इस मुलाकात से होने वाली स्वभाविक प्रसन्नता झलक रही थी उनके चेहरे पर्। पहली नज़र में उनका विनम्र व्यवहार मन को भा गया। मेरी महाराष्ट्र यात्रा के दौरान उस भयावह रात वाले हादसे की चर्चा सहित औपचारिक बातें खतम होने के पहले ही वे भाँप गए कि कोई दिक्कत है। हिचकिचाते हुए मैंने वस्तुस्थिति बताई तो उन्होंने अपना पर्स सामने कर दिया।

टिकट तो ले लिया गया और अब हम थे प्लेटफॉर्म पर ढ़ेर सारी बातें करते हुए। वे बता रहे थे कि कैसे अमित गुप्ता के ब्लॉग तक पहुँचे थे और कुछ जानकारी मांगे जाने पर बातें सुननी पड़ी थी। हुया यह था कि एक अमित गुप्ता (दुनिया मेरी नज़र से वाले) को दूसरे अमित गुप्ता (अन्तर सोहिल) द्वारा अपना नाम उपयोग करते देख संशय हो गया था। बाद में यह गलतफहमी दूर हुई

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चाय बिस्कुट के दौर में अन्तर जी ने सूचना दी कि नीरज जाट ‘मुसाफ़िर’ भी आ रहे हैं। वाह! एक से भले दो, दो से भले तीन (ब्लॉगर)!!

bspabla-sweetतब तक अन्तर जी मुझे एक मीठी सी भेंट दे चुके थे, अपने शहर से लाई हुई। यकीन कीजिए बहुत ही स्वादिष्ट थी मिठाई। मैंने तो अगली बुकिंग भी करवा दी है 🙂

नीरज द्वारा की जा रहीं यात्रायों ने भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों का बेहतरीन दर्शन करवाया है। उनके द्वारा लिए गए चित्रों का ध्यान आते ही मैंने उनका कैमरा देखना चाहा। झट से उन्होंने कैमरा निकाला और कुछ चित्र भी ले लिए।

बातें कुछ अधिक नहीं हो पाईं क्योंकि ट्रेन आ लगी थी।

जब प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आई तो सभी टीटीई नदारद। शंटिंग इंजिन जैसे मैं और अन्तर, ट्रेन के एक सिरे से दूसरे सिरे के बीच भागते रहे। इस बीच नीरज जी जनरल डब्बे में एक सीट कब्जा चुके थे। कुल मिला कर यह हुया कि टीटीई ने हाथ खड़े कर दिए और पवन चन्दन जी के साथी ने अपनी आमद नहीं दी।

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नीरज जाट, बी एस पाबला, अन्तर सोहिल

 

वर्षों बाद जनरल डब्बे में बैठने का अवसर आया था। आने-जाने के लिए एसी का रिज़र्वेशन करवाया था सो ओढ़ने बिछाने को कुछ नहीं था पास में। जो होगा देखा जाएगा का भाव लिए मैं रवाना हो गया, नीरज जाट और अन्तर सोहिल को मन ही मन शुक्रिया कहते, टाटा बाय बाय करते।

अब बताएँ आगे क्या हुआ उस डब्बे में?

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24 Thoughts to “उत्तर भारत की यात्रा: दो नौजवान ब्लॉगरों से हुई पहली मुलाकात”

  1. शिवम् मिश्रा

    सर जी, जनरल में तो सब जनरल ही हुआ होगा … स्पेशल तो होने से रहा ! वैसे अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा ! अंतर जी और नीरज जी से मिलवाने का बहुत बहुत आभार !

  2. बी एस पाबला

    जैसा कि कभी कभी हो जाता है वैसा ही इस पोस्ट के साथ हुआ। बड़े मनोयोग से इस पोस्ट को विस्तृत विवरण के साथ लिखता रहा था मैं, लेकिन न जाने क्यों दो बार इसका काफी बड़ा हिस्सा गायब हो गया। झुंझला कर आनन-फानन में पिछली रात ही इसे पूर्ण किया, कई बातें विवरण छूट गए हैं

  3. Rahul Singh

    परदेस गए अउ रुख चढ़े एक बरोबर.

  4. ajit gupta

    बहुत कठिन है डगर जनरल डिब्‍बे की।

  5. राजीव तनेजा

    रोचक विवरण…
    अगली कड़ी की प्रतीक्षा रहेगी इस उम्मीद के साथ कि अगली बार आप हमारे यहाँ …हमारे साथ भोजन करेंगे

  6. POOJA...

    नीरज जी और सोहिल जी का दर्शन करवाने का शुक्रिया… और अब आपकी अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा, जनरल डिब्बे के नॉट-जनरल वाले experience जानने के लिए…

  7. राज भाटिय़ा

    पाबला जी मै इन दोनो से कई बार मिल चुका हुं, बस इन की तारीफ़ नही करुंगा, लेकिन इन जेसे दोस्त मुश्किल से मिलते हे यही कहुंगा,ब्लाग मिलन मे मेरा तो सिर्फ़ नाम था, सारा कर्ता धर्ता तो अंतर सोहिल ही था, सारी इस की मेहनत थी, क्योकि मुझे तो वहां के बारे कुछ भी नही पता था, ओर आप को भी यह हीरे मिल गये.
    लोहड़ी, मकर संक्रान्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई

  8. अन्तर सोहिल

    शर्मिन्दा कर रहे हैं जी आप (खासतौर पर पैसे वाली बात के लिये)
    और राज भाटिया जी की तो पूरी कोशिश यही है कि मैं जमीन में गड जाऊं
    तस्वीरें बहुत बढिया आई हैं, मैने भी सेव कर ली हैं

    प्रणाम

  9. अन्तर सोहिल

    नौजवान मेरे लिये लिखा है और दाढी भी मेरी ही सफेद है 🙂

    प्रणाम

  10. अन्तर सोहिल

    आगे का हाल जानने की बेताबी तो मुझे भी है
    शायद नीरज अन्दाजा लगा सके कि आगे क्या हुआ होगा

  11. प्रवीण पाण्डेय

    बैकग्राउण्ड में रेलवे के चित्र, प्रचार मूल्य लगेगा। बहुत ही सुन्दर फोटो आयी है।

  12. ललित शर्मा

    हमने भी पिछले साल एसी 1 का टिकिट खरीद कर दिल्ली से रायपुर तक स्लीपर में जनरल जैसी यात्रा की:(
    होता है कभी-कभी

    इन दोनो काबिल नौजवानों के तो कहने ही क्या हैं, चीयर्स।

    लोहड़ी और संक्रांति पर्व की शुभकामनाएं।

  13. डॉ टी एस दराल

    ओह जी ! ठण्ड में बिना रिजर्वेशन !
    ये तो बड़ा बुरा हुआ । अजी इसे अच्छा तो रुक ही जाते एक दिन और ।
    फिर सबसे मिल भी लेते । खैर फिर कभी सही ।

  14. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    आगे का हाल बताइये..

  15. ZEAL

    जनरल डिब्बा ही असली भारत की तस्वीर है।

  16. ZEAL

    Interesting narration as well !

  17. vinay

    अच्छा लगा आपका जीवंत वर्णण ।

  18. माधव( Madhav)

    रोचक विवरण

  19. ali

    जनरल डिब्बे की घटनाओं का इंतजार है !

  20. सतीश सक्सेना

    फ़ोन क्यों स्विच ऑफ़ कर रखा है सरदार !
    बात करनी है भाई !

  21. निर्मला कपिला

    इस ब्लागर मिलन के लिये बधाई।

  22. हरकीरत ' हीर'

    लीजिये अब हम क्या बताएं क्या हुआ डिब्बे में …..
    ये तो आप ही बतायेंगे न ……
    अंतर सोहिल जी और नीरज जाट जी से मिल कर ख़ुशी हुई …
    आप गुवाहाटी आये थे क्या ….?

  23. निर्मला कपिला

    ज़िन्दगी के ये मेले यूँ ही चलते रहें। शुभकामनायें।

  24. भाई जी ये दिलदार दिल्ली वाले हैं
    ये सदा हाथ में लिये नेह-निवाले हैं
    वो अन्नाभाई मुन्ना भाई बीमार है वर्ना
    उसने नेह के कई मोर्चे सम्हाले हैं..
    अच्छा लगा यात्रा विवरण देख के
    टिप्पणीकर्ता गिरीश बिल्लोरे मुकुल ने हाल ही में लिखा है: लिव-इन रिश्ते बनाने से पहले अपने कल के बारे में अवश्य सोचियेMy Profile

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