एक चोखेर बाली का ब्लॉग, 27 महीनों बाद फिर आबाद हुआ

सुजाता जी ने अपनी एक पोस्ट में निराशा के भाव में एक जानी-मानी ह्स्ती के ब्लॉग का जिक्र करते हुये लिखा था

‘यह ब्लॉग जो अब नही लिखा जाता ,लेकिन अगर लिखा जा रहा होता तो अपने आप में एक दस्तावेज़ से कम नही होता। लिखा जाना क्यो कर बन्द हो गया , अन्दाज़ा नही है पर इसे देखते ही जो उम्मीदें बन्धी थीं वे टूट कर बिखर गयीं।’

लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी की थी कि यह ब्लॉग फिर से गुलज़ार हो|

लगता है, सुपर प्रोग्रामर ने उनकी आवाज सुन ली और ब्लॉगजगत पर 27 महीनों की लम्बी चुप्पी के बाद उस ब्लॉग पर एक ताजा पोस्ट नमूदार हुयी है Who’s Human Rights?

आप भी देखिये और टिप्पणियों की क्रेन के सहारे उनसे लगातार लिखने का वादा ले लें।

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एक चोखेर बाली का ब्लॉग, 27 महीनों बाद फिर आबाद हुआ” पर 12 टिप्पणियाँ

  1. टीवी पर हिंदी कार्यक्रम तो किरण बेदी चला ही रही हैं…लगे हाथ उनसे हिंदी ब्‍लॉग शुरू करने की भी गुजारिश कीजिए 🙂

  2. आप का यह प्रयास किरन बेदी को हिन्दी ब्लागिंग में ला सकता है।

  3. अच्‍छी जानकारी दी आपने। किन्‍तु चाह कर भी रिनजी के चिट्ठे पर टिप्‍पणी नहीं कर सका। कर पाता तो कहता – अंग्रेजी के पिंजरे से मुक्‍त होकर हिन्‍दी के अनन्‍त आकाश में आएं।

  4. मुझे ऐसी ईमेल मिल रहीं हैं कि किरण जी के ब्लॉग पर टिप्पणी नहीं कर पा रहे हैं। इच्छुक व्यक्ति उनके उपलब्ध ईमेल पते kiranbedioffice@gmail.com या उनकी पिछली, 31 जनवरी की पोस्ट पर टिप्पणी कर सकते हैं। उनकी वेबसाईट पर फीडबै्क भी दिया जा सकता है।

  5. बल्ले बल्ले आपने सतीश जी के ब्लॉग कंटेंट चोरी होने पर बल्ले बल्ले की थी तभी मई चोरी कर रहा हु

    मैं गूगल की GMail सेवा का दीवाना हूँ। Yahoo!, Hotmail पर पता नहीं पिछली बार कब ऑनलाईन हुया था। गूगल की कई सेवायें मुझे बहुत आकर्षित करती हैं व अधिकतर का पूरा दोहन करता हूँ। वैसे तो कई बार थोड़े-थोड़े समय के लिए GMail में आये व्यवधान से पाला पड़ता रहता है लेकिन इस बार मंगलवार, 24 फरवरी को GMail की नाकामी से मेरे जैसे कई उपयोगकर्ता खासे परेशान हुए। लेकिन GMail ने अपनी सफाई में जो कुछ कहा है, उसे भी मैं आसानी से हजम नहीं कर पा रहा। वैसे गूगल ने स्वीकार किया है कि उसने खुद ही अपने डाटा केन्द्र ध्वस्त कर दिए थे जिससे ईमेल सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी थीं।

    अकेले भारत में चार घंटे तक जीमेल उपयोगकर्तायों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, जानकार इस सफाई को सही नहीं मान रहे। गूगल ने कहा कि यूरोपीय डाटा केंद्रों में से एक के नित्य किए जाने वाले रखरखाव के वक्त उन्होंने ट्रैफिक को दूसरे सर्वर की ओर निर्देशित कर दिया था। बुधवार, 25 फरवरी की सुबह GMail के विश्वस्तता प्रबंधक अकासियो क्रूज ने कहा कि उन्होंने साथ ही नया कोड इस्तेमाल किया, ‘जिसने डाटा को भौगोलिक रूप से उसके मालिक के करीब रखने की कोशिश की। इससे यूरोप में एक और डाटा केन्द्र ओवरलोड हो गया। इसके चलते एक डाटा केंद्र से दूसरे तक सिलसिलेवार समस्या पैदा होती चली गई।’ बोले तो गूगल ने अपने सर्वर जाम कर दिए थे। उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। हालांकि जानकारों का मानना है कि इसे ‘अपनी गलती’ बताकर गूगल अपनी नाकामी को छिपा रही है।

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