एक दिमाग से दूसरे दिमाग में संदेश, इंटरनेट के सहारे!!

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने ‘दिमाग से दिमाग तक संचार’ वाली प्रणाली तैयार करने का दावा किया है। साउथेम्पटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनकी प्रणाली किसी के विचार, शब्द और तस्वीरें दूसरे लोगों के दिमाग तक पहुंचाने में मदद करेगी, खासतौर से विकलांग लोगों के दिमाग तक।

मुख्य वैज्ञानिक डॉ. क्रिस्टोफर जेम्स के मुताबिक उनकी इस प्रणाली को इंटरनेट का भविष्य कहा जा रहा है जो बिना की-बोर्ड और टेलीफोन के संचार का नया तरीका उपलब्ध कराएगा। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है जो न तो बोल सकते हैं और न ही पलकें हिला सकते हैं।

(प्रयोग का एक चित्र: साउथेम्पटन यूनिवर्सिटी से साभार)
वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली के लिए ‘ब्रेन कम्पयूटर इंटरफेसिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक में कम्पयूटर दिमाग के सिग्नलों का विश्लेषण करता है और दिमाग में आए विचारों को इंटरनेट कनेक्शन के जरिए मीलों दूर बैठे व्यक्ति के दिमाग मेंपहुंचा देता है।

डॉ. जेम्स के मुताबिक ट्रांसमिशन (संचरण) के दौरान दो लोगों को इलैक्ट्रोड से जोड़ा गया। ये इलैक्ट्रोड दिमाग के खास भागों की कार्यप्रणाली मापते हैं। पहले व्यक्ति ने शून्य और एक की श्रृंखला भेजी जिससे यह अंदाजा लगाया गया कि शून्य के लिए उन्होंने अपना बायां हाथ उठाया और एक के लिए दायां हाथ। जैसे ही पहले व्यक्ति के कम्पयूटर ने बायनरी (द्विआधारी) विचारों को पहचाना, उसे इंटरनेट पर भेज दिया और बाद में दूसरे व्यक्ति के कम्पयूटर पर। इसके बाद शून्य और एक की विभिन्न आवृतियों पर एक एलईडी लैंप जलाया गया।

दूसरे व्यक्ति के दिमाग के सिग्नलों का विश्लेषण इस एलईडी लैंप पर गौर करने के बाद किया गया, जिसमें कम्पयूटर ने अंकों की श्रृंखला को पकड़ा। डॉ. जेम्स ने बताया कि यह टैलीपेथी (दूर संवेदन) नहीं है। उन्होंने बताया कि इस दौरान व्यक्ति के मन में विचार पहले से ही नहीं आए होते हैं और न ही दूसरे के मन में ये विचार होते हैं।


(इस परिकल्पना का सिद्धांत व वास्तविक प्रयोग दर्शाता एक वीडियो)
एक चुलबुले वैज्ञानिक का कहना है कि इस दिशा में अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना है। वैसे अगले 30 वर्षों में ऐसा होगा कि आपने पत्नी के लिए कुछ सोचा और वह अगले ही क्षण उसके मोबाईल पर प्रदर्शित हो जाएगा। लेकिन यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि संदेश आपकी पत्नी के मोबाईल पर ही जाए, दूसरे की पत्नी के मोबाईल पर नहीं या फिर, वैसा ही कुछ, कोई और सोच बैठे तो!?

संबंधित खबर यहाँ देखी जा सकती है। कुछ अधिक जिज्ञासा हो तो इस परियोजना की वेबसाईट देख लें।

एक दिमाग से दूसरे दिमाग में संदेश, इंटरनेट के सहारे!!
लेख का मूल्यांकन करें
Print Friendly

Related posts

8 Thoughts to “एक दिमाग से दूसरे दिमाग में संदेश, इंटरनेट के सहारे!!”

  1. M VERMA

    अच्छी जानकारी दी आपने

  2. Udan Tashtari

    रोचक जानकारी है.

  3. राज भाटिय़ा

    अरे यह नया पंगा क्यो ले रहे है..लेकिन इस से एक तो लाभ हो सकता है कि जो वोट मांगने के लिये नेता आये उस के विचार पहले ही पढ ले…
    धन्यवाद

  4. शरद कोकास

    ब्लॉगिंग मे तो यह चमत्कार होने लगा है .. यही सोच रहे है ना आप ?

  5. खुशदीप सहगल

    पाबला जी,
    इसकी ज़रूरत ही क्या थी…आप तो बिना किसी ऐसे यंत्र के सबको अपना बना लेने वाले व्यवहार से हर एक की वेवलैंथ पकड़ लेते हैं…ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए साधुवाद…

    जय हिंद…

  6. Arvind Mishra

    पाबला भाई लक्ष्मी जी को अब तो हटाईये ये पोस्ट नहीं पढने दे रही हैं !

  7. अर्शिया

    उत्साह जनक समाचार, आभार।
    ( Treasurer-S. T. )

  8. Dr.Rakesh

    तो क्या वो दिन भी दूर नहीं जब एक-दूसरे के मस्तिष्क को जोड़कर एक दूसरों की जिंदगियों को स्थाई या अस्थाई रूप से जिया जा सकेगा ।

Leave a Comment

टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)

[+] Zaazu Emoticons