ऑनलाईन फोरम www.blogmanch.com : चिंतन बैठक से निकला एक और निर्णय

ब्लॉग बुख़ार

दो सप्ताह पूर्व हिन्दी ब्लॉगरों की एक आकस्मिक चिंतन बैठक में सभी ने अपने अपने तरीके से ब्लॉग जगत की अच्छाईयों बुराईयों की जम कर चर्चा की थी।

जहाँ एक ओर कथित गुटबाजी को चंद व्यक्तियों का शोशा ही माना गया तो इस विधा से बन रहे ई-रिश्तों की भूरि भूरि प्रशंसा भी हुई

दोपहर का भोजन सत्र देर से शुरू हुया, सो समाप्त होते होते अंधेरा घिर चुका था। बालकृष्ण अय्यर के अनुरोध को देखते हुए अनिल पुसदकर जब अप्रत्याशित रूप से भिलाई आ पहुँचे तो दोनों पुराने मित्रों का वर्षों बाद मिलना एक यादगार क्षण ही था।

दोनों पता नहीं कितनी ही पुरानी बातें याद कर, भावुक हो, एकाएक खामोश हो कर, फिर चहकने लग पड़ते थे।

इसी बीच अनिल जी के पुराने साथी, ललित शर्मा ने किन्ही क्षणों में ऐसा ही प्रेम भाव बनाए रखने का आशीर्वादमांगा तो पल भर में उनकी मुराद पूरी हो गई।

पिछली पोस्ट में यह बताया जा चुका है कि छत्तीसगढ़ के हिन्दी ब्लॉगरों की एसोसिएशन के गठन की प्रक्रिया जारी है तथा हिन्दी ब्लॉग्स की चर्चा का वेबसाईट आधारित मंच www.chitthacharcha.com का कार्य भी प्रगति पर है।
तत्संबंध में लगातार मिल रही साथियों की ईमेल्स बेहद उत्साहवर्धक हैं।
उस चिंतन बैठक में जो निर्णय लिए गए, उनमें एक निर्णय हिन्दी चिट्ठाकारों के आपसी सहयोग से संचालित होने वाले वेबसाईट आधारित, एक ऑनलाईन फोरम का गठन भी था।
यह ऑनलाईन ब्लॉग मंच, हिन्दी ब्लॉगरों की विभिन्न तकनीकी समस्याओं, जिज्ञासाओं, मदद आदि का आपसी संवाद से निराकरण कर सकने में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास करेगा।
इसका कार्य भी प्रगति पर है। वेबसाईट का नाम है www.blogmanch.com , जिसके बारे में सझाव, अपेक्षाएँ, प्रतिक्रिया suggest@blogmanch.com या hindiblogmanch@gmail.com पर भेजे जा सकते हैं। इसकी औपचारिक शुरूआत संभवत: फरवरी 2010 के प्रारंभ में हो पाएगी।
पिछले दो महत्वपूर्ण निर्णयों के पश्चात इस ब्लॉग मंच की घोषणा के अतिरिक्त और भी कई निर्णय लिए गए हैं। जिनमें से एक निर्णय की सूचना अब, अगले माह होने वाली मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के ब्लॉगरों की संभावित बैठक के बाद की जाएगी। उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों से सामने आने वाले ऐसे परिणामों से हिन्दी ब्लॉगिंग, अपने शुभचिंतकों के स्नेह से नई राह की ओर अग्रसर होगी।इन निर्णयों पर आपका क्या कहना है?

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22 thoughts on “ऑनलाईन फोरम www.blogmanch.com : चिंतन बैठक से निकला एक और निर्णय

  1. आपका यत्न सफल हो। बस रंजिशों, गिले शिकवों रहित हो। किसी की अनदेखी न हो, किसी को चोट न पहुंचे,कुछ ऐसा न हो। जैसी सोच के साथ शुरू हो..वैसी ही सोच के साथ निरंतर सफलता की तरफ बढ़े बस इतना ही सुझाव है।

    अहिंसा का सही अर्थ

  2. बेहद जरूरी पहल । चिन्तन बैठक के मंथन का एक और नवनीत !
    आभार।

  3. अभी हाल ही मैंने इस तरह के एक मंच की चर्चा डा. दराल और दो एक ब्लोगर से हुई थी.
    अब आपका यह पहल देखा, ख़ुशी की लहर दौड़ गयी.

    अभी शुभकामनाएं और आगे भी सलाह शिकायत समाधान से जुड़े रहेंगे.

    – सुलभ

  4. एक बढिया रिपोर्टिंग के लिये बधाई पाब्लाजी, उम्मीद है जल्द मुलाकात होगी और हम आगे की योजना पर कार्य प्रारंभ कर पायेंगे.

  5. शुभकामनाएँ।
    कारवाँ बनता रहे, बढता रहे।

  6. स्वामी अनिलानंद महाराज के आशीर्वाद से बालक ललितानंद धन्य हो गया, पावला सिरियल ब्लास्ट की कड़ी मे इस ब्लास्ट के लिए-आभार

  7. वाह सर ,
    लगता है कि अब सचमुच परिवर्तन का दौर शुरू हो गया है और मुझे खुशी है कि हम सब आने वाल समय में हिंदी ब्लोग्गिंग का चेहरा बदलने वाले हैं …जो यकीनन बहुत ही खूबसूरत होगा । शुभकामनाएं ॥

  8. हिन्दी चिट्ठाकारी के उज्जवल भविष्य हेतु एक बहुत ही अच्छा प्रयास…..
    शुभकामनाऎँ!!!!!!

  9. छत्‍तीसगढ़ के छत्‍तीस ब्‍लॉगशेर अपनी दहाड़ से गुंजा दो पूरे ब्‍लॉगजगत को, यही कामना है मेरी।

  10. वाह पाबला जी,
    समाज को बदल डालो कि तर्ज़ में …..ब्लाग को बदल डालो ….लग रहा है…
    बहुत ही मज़बूत कदम है यह….आशा है आगे और भी कदम बढ़ेंगे….इसी मजबूती से..
    बधाई…आप सबको….!!

  11. हम तो पहले ही कह चुके हैं कि बहुत ही बड़िया निर्णय लिये गये उस ब्लोगर मीट में। बस अब इंतजार है फ़रवरी का

  12. आपको मेल किया था आपका जवाब नही मिला अगर आपको लगे कि मै भी इनमे सहयोग कर सकता हु तो मुझे बेहद खुशी होगी.

    आपका
    नवीन प्रकाश

  13. @ नवीन प्रकाश,

    आपका कोई मेल इस संबंध में नहीं मिला है।

    रही बात सहयोग वाली तो वह आप बिना किसी की इच्छा के भी कर सकते हैं। बस एक बार इसके आरंभ होने की देर है। आप जैसे क्षमतावान व्यक्तियों के सहयोग से ही यह प्रयास कार्यरूप में परिणित हो पाएगा।

    हाँ, चिट्ठाचर्चा डॉट कॉम से संबंधित एक मेल मिला था, मैंने उसका जवाब स्वागत करते हुए दिया था।

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