क्लिक किए जाने पर भी चित्र बड़ा नहीं दिखता! क्या किया जाए: अजय कुमार झा की दिक्कत

जिन दिनों अजय कुमार झा को टिप्पू सिंह बनाया जा रहा था उन दिनों वह बड़ी मासूमियत से पूछते रहते थे कि कुछ विशिष्ट ब्लॉगर उनको जबरन टिप्पू चाचा क्यों बनाने पर तुले हुए हैं। वे कहते थे कि बड़ी मुश्किल से तो अविनाश वाचस्पति जी से किसी वाक्य या शब्द का लिंक बनाना सीख पाया हूँ। टिप्पू जितना सीखने में जाने कितना वक्त लगेगा!

एक बात मुझे उनकी बहुत भाती है कि वे नि:संकोच अपनी तकनीकी उलझन का हल पूछ लेते हैं, जबकि कई ब्लॉगर हिचकिचाते रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ। वे एक कतरन को अपने ब्लॉग लेख पर लगाना चाह रहे थे। चित्र के रूप में वह कतरन लग तो गई लेकिन पाठकों की शिकायत आई कि कुछ भी पढ़ने में नहीं आ रहा। टिप्पणीकर्ताओं ने उसका भी हल बता दिया
अजय जी ने कुछ मायूस से हो कर इसका स्थायी समाधान चाहा। मैंने बताना चाहा तो उनका कहना था कि लिख ही दें तो बेहतर रहेगा, कुछ और साथी भी देख लेंगे और हमेशा के लिए रह भी जाएगा!
आईए देखा जाए कि क्या है समस्या और उसका हल
समस्या: ब्लॉग पोस्ट में एक चित्र है यदि उसे बड़ा कर देखने की कोशिश की जाए तो भी उसमें लिखे अक्षर पढ़े नहीं जाते। पढ़ने लायक करने के लिए यदि उस पर आवर्धक लेंस का चिन्ह हो तो एक बार और क्लिक कर पढ़ा जा सकता है।
हल: अब देखा जाए
उदाहरण के तौर पर, एक चित्र पोस्ट में सामने दिख रहा है। इस पर हाथ का चिन्ह दिख रहा है तो क्लिक कर इसे बड़ा करने की कोशिश की जाती है।
अब खुले चित्र पर यदि आवर्धक लेंस का चिन्ह हो तो एक बार और क्लिक कर इसे अधिक बड़ा किया जा सकता है
जिससे चित्र ऐसा दिखेगा
अजय जी चाहते हैं कि एक क्लिक किए जाते ही वह पढ़ने लायक दिखे! इसके लिए थोड़ा सा प्रयास करना पड़ेगा।
संपादन के दौरान कम्पोज Compose की बजाए HTML संपादित करें का चुनाव करें
पूरे कोड पर नज़र दौड़ाएँ जहाँ s1600 दिखे
(चित्र को क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है)
वहाँ उसके बाद -h जोड़ दें जिससे वह दिखने लगेगा s1600-h
(चित्र को क्लिक कर बड़ा किया जा सकता है)


बस अब पोस्ट प्रकशित कर लें।

इसके बाद जितनी बार भी चित्र पर क्लिक किया जाएगा उतनी बार वह खुल कर अपने मूल आकार में ही दिखेगा बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के
क्या यह मुश्किल भरा काम है?
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16 Thoughts to “क्लिक किए जाने पर भी चित्र बड़ा नहीं दिखता! क्या किया जाए: अजय कुमार झा की दिक्कत”

  1. Mahfooz Ali

    नहीं….बिलकुल भी मुश्किल काम नहीं है…. किसने कहा?

  2. राज भाटिय़ा

    बहुत सुंदर जानकारी जी. धन्यवाद

  3. अजय कुमार झा

    ओह तो ये मामला था , अब समझ गया सर । कि मुश्किल नहीं है बिल्कुल भी ।

    हुआ भी तो अपने महफ़ूज़ मियां हैं न ,उन्हीं को रेफ़र किया जाएगा ।

  4. काजल कुमार Kajal Kumar

    1. Nice 🙂

    3. दूसरे, यदि स्कैन करते समय DPI ही बढ़ा दिया जाए तो टंटा ही ख़त्म हो जाता है. आमतौर से स्कैनर डिफ़ाल्ट रूप से 72 या 100 DPI पर सैट होते हैं. ऐसे में अख़बार की कटिंग को 100 पर स्कैन करना भी पर्याप्त नहीं होता है क्योंकि अख़बार की कटिंग का फ़ांट पहले ही काफी छोटा होती है 🙂

  5. बी एस पाबला

    @ काजल कुमार जी

    DPI बढ़ाते जाने पर फाईल का साईज़ भी बढ़ते चला जाता है
    इसके अलावा यह तकनीकी दिक्कत फिर भी बनी रहती है।

  6. ललित शर्मा

    काम की जानकारी के लिए आभार

  7. काजल कुमार Kajal Kumar

    पाबला जी, हां यह फ़ाइल का साइज़ बढ़ने की बात तो है, मैं एकदम सहमत हूं. (अशुद्धियों के चलने फिर मिटा कर लिखना ही ठीक लगा)

  8. योगेन्द्र मौदगिल

    wahwa….Asardaar Sardaar…

  9. राजीव तनेजा

    बढ़िया जानकारी भरा आलेख

  10. शिवम् मिश्रा

    जय हो श्री श्री १०००८ पबलानंद महाराज की !!
    आपकी महिमा अपरमपार !!

    बहुत बहुत आभार आपका और अजय भाई का भी !!

  11. जी.के. अवधिया

    बहुत अच्छी और काम की जानकारी!

  12. नीरज जाट जी

    पाबला जी,
    हमारा चित्र वैसे तो एक क्लिक करते ही बडा हो जाता है, लेकिन एक बार आपका दिया नुस्खा जरूर आजमाऊंगा।

  13. अविनाश वाचस्पति

    तकनीक तो गजब की है। -h पर याद रह जाए तब।

  14. अन्तर सोहिल

    इतनी बढिया तकनीक और इतनी आसान
    बहुत काम की जानकारी दी जी आपने, धन्यवाद

  15. shikha varshney

    अरे वाह ये तो बड़े काम कि जानकारी है …आभार

  16. उद्गार

    मेरे पास कंप्यूटर नहीं है. मोबाइल पर ही मैनें ओपेरा मिनी ब्राउज़र का इस्तेमाल करके अपना एक ब्लॉग बनाया है. समस्या ये है कि टिप्पणियां नहीं मिलती. संभव है कि यह पाठकों की नज़रों से दूर है. क्या करूँ?

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