कौन पिलाएगा मुझे, खमीर उठा जौ का रस!

ज़िंदगी के मेले

सोशल मीडिया मंच, फेसबुक एक सुविधा देता है स्टेटस लिखने वालों को कि वे इस वक्त क्या कर रहें हैं/ क्या पी रहे हैं/ क्या खा रहे हैं/ क्या सुन रहे हैं या कैसा महसूस कर रहे इस वक्त?

Drinking Lemon Tea/ Feeling Naughty/ Watching BBC World जैसे कई उपयोग मैं भी अक्सर करता हूँ.  इन्हीं में एक है Drinking खमीर उठा जौ का रस! जिस पर कई बार चुहलबाजियाँ भी हो चुकीं.

जो थोड़ा अनभिज्ञ हैं इस ‘खमीर उठा जौ का रस’ से वे कई बार प्रतिक्रिया देते हैं कि हमें कब पिलायेंगे यह जौ का रस? अकेले अकेले पी रहे हैं, अच्छी बात नहीं है! इसके बनाने की विधि क्या है?

मेरे लिए दुविधा तब हो जाती है जब कोई महिला टिप्पणी करती है ‘अगली बार हमें भी बुला लीजिएगा खमीर उठा जौ का रस पीने के लिए!’ या फिर ‘हम भी अगली बार बच्चों को खमीर उठा जौ का रस पिलायेंगे!’

मुझे मैसेज बॉक्स में जा कर बताना पड़ता है कि ये है क्या? तब झेंपते हुए अपनी टिप्पणी हटा देती हैं वे.

परिचितों द्वारा इसे सरसों का साग या लस्सी जैसा कुछ समझ कई बार आग्रह भी किया गया कि अगली बार बनाएंगे घर पर तो हमें भी स्वाद चखा दीजिएगा!!

तो ऐसा है कि खमीर उठा जौ का रस मैंने करीब 22 वर्ष पहले तब लेना शुरू किया जब गुर्दे की पथरी की समस्या गहरा गई और बताया गया कि पथरी ऐसे धंसी हुई है कि गुर्दे के उस हिस्से को काट कर निकालना पडेगा.  हमारे इलाके में लिथोट्रिप्सी जैसे तकनीक तब प्रचलन में नहीं आ पाई थी.

उस समय सर्जिकल विशेषज्ञ डॉ पात्रा ने हँसते हुए कहा कि अगर ऑपरेशन नहीं करवाना है तो ऐसे ही चलाओ कुछ नहीं होगा. बस, जब दर्द महसूस हो तब ‘खमीर उठा जौ का रस’ ले लेना. मैं भी उनकी सलाह पर मुस्कुराया.

फिर क्या था! माचिस की तीली जला कर गुर्दे में उसे टकरा कर बुझा देने जैसा दर्द जब भी उठे हम तैयार हो जाएँ इस खमीर उठे जौ के रस के लिए.

वैसे भी जौ का रस, जिसे Barley Water के रूप में ज़्यादा जाना जाता है, स्वास्थ्य के लिए प्राचीन काल से बेहद मुफीद माना जाता रहा है. अब यह तुरंत फुरंत तो कहीं मिल नहीं सकता इसलिए सर्वसुलभ खमीर उठा जौ का रस जिंदाबाद!

जौ, सबसे प्राचीन काल से अनाजों में से एक है. संस्कृत में इसे ‘यव’ कहते हैं. भारतीय संस्कृति में अनाज के साथ पूजन की पौराणिक परंपरा है. धार्मिक अनुष्ठानों, शादी-ब्याह, होली में लगने वाले नव भारतीय संवत् में नवा अन्न खाने की परंपरा बिना जौ के पूरी नहीं की जा सकती.

जौ का उपयोग बेटियाें के विवाह के समय होने वाले द्वाराचार में भी होता है. महिलाओं द्वारा वर पक्ष के लोगों पर मंगल गीत गाते हुए दूल्हे सहित अन्य लोगाें पर इसकी बौछार करना शुभ माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के बाद होने वाले कर्मकांड बिना जौ के पूरे नहीं हो सकते.

खमीर उठा जौ का रस बनता है इससे

कई बार मित्रों से बहस भी हुई तो मेरा ज़वाब रहता है कि जब दूध में खमीर उठा कर बना दही खा सकते है, आटे में खमीर उठा तन्दूरी रोटी पसंद करते हो, खमीर उठे दाल-चावल की इडली डोसा हड़प जाते हो, खम्मण ढोकले पर लार टपकाते हो, आटे मैदे में खमीर से बनी डबलरोटी का नाश्ता करते हो, खमीर उठे मैदे से बनी जलेबी खाते थकते नहीं हो तो इस खमीर उठाए जौ के रस से क्या दिक्कत है!?

एक मित्र ने प्रश्न दागा कि आखिर शरीर को इससे फ़ायदा क्या होता है? तब मैंने आराम से बताया कि इसमें मैग्नीशियम, सेलेनियम और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं तथा क्रोमियम, विटामिन बी और बायोटिन भी होता है. अच्छी मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट पाया जाता है. हड्डियों के लिए फायदेमंद सिलीकॉन पाया जाता है. यह शरीर के अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल स्तर को बढाता है. इसमें पाया जाने वाला जैंथोह्यूमोल नामक तत्व याददाश्त को बेहतर और दिमाग को सजग रखने में मददगार है. इस खमीर उठे जौ के रस में मौजूद हेट्रोसाइकिलिक अमीन्स, शरीर में कैंसर पैदा करने वाले हानिकारक तत्वों को दूर करने में मदद करता है. वगैरह वगैरह वगैरह

हैरान मित्र की उत्सुकता बढ़ गई कि यार इसे बनाया कैसे जा सकता है? मैंने हँसते हुए कहा कि यह तो बना बनाया मिलता है हर शहर गाँव कस्बे में !! उसकी आँखें फटी रह गईं जब मैंने बताया कि ‘हिंदी’ में इसे बीयर

कहते हैं

खमीर उठा जौ का रस

तब से मुझे कोई छेड़ता नहीं है इस ‘खमीर उठाए जौ के रस’ के जिक्र पर. उम्मीद है कि इसे पढ़ने के बाद खमीर उठा जौ का रस पिलाने की बात कोई मित्र एकाएक नहीं करेगा.

पसंद नहीं आया आपको यह खमीर उठा जौ का रस!?

कौन पिलाएगा मुझे, खमीर उठा जौ का रस!
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32 thoughts on “कौन पिलाएगा मुझे, खमीर उठा जौ का रस!

  1. हमको तो पता था पर फ़िर से बताने के लिये आभार! 🙂
    टाइफ़ाइड के इलाज के दौरान जो बार्ली वाटर दिया जाता है वह भी जौ का पानी ही है शायद बिना खमीर उठा हुआ!
    टिप्पणीकर्ता वाणी गीत ने हाल ही में लिखा है: टोटा…. लघु कथाMy Profile

  2. वाह ये भी क्या सही बात बताई है, हमें तो इसमें बहुत बदबू लगती है, पता नहीं पीते कैसे होंगे
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: धर्म वैज्ञानिकों की मशीनों से मधुमेह को काबू में किया गयाMy Profile

    1. Beer
      इसीलिए इसे चिल्ड पीया जाता है, जिससे कड़वाहट का अहसास ख़त्म हो जाए

  3. जलती बलती गर्मी के लिए ठीक है, वैसे मैने एक साल पहले दोनो गुर्दों की पथरी लिथोट्रिप्सी से निकलवाई। इस खर्चे में तो एक साल तक लगातार खमीर उठा जौ का रस पीया जा सकता था। जब सूरज सर पर हो और पैर जल रहे हों ४५ डिग्री टेम्परेचर में तो एक बोतल चिल्ड ताप का असर बहुत कम कर देती है। 🙂

    1. Heart
      सही है, गर्मी में इससे बेहतर कुछ नहीं

  4. मैं भी इसको सत्तू की तरह से कोई अनाज का रस समझ रहा था. बाकी मैंने फ्रूट बीयर आज तक नहीं पी, फिर आपका जौ का रस खमीर उठा आपको ही मुबारक हो. वैसे मेरे भी मूत्र मार्ग में पत्थरी फंस गई थी. तब मैंने आपरेशन ही करवा था और उसके एक साल बाद फिर थोड़ी सी समस्या हुई थी. तब कुछ नशे की आदी लोगों ने मुझे बीयर पीने की सलाह दी थी और कह रहे थें कि इसको पीने से कभी पत्थरी की शिकायत नहीं होगी. लेकिन मैंने जब भी “आयुवैदिक” दवा खाई और उसके बाद अपने खान-पान में कुछ घरेलू चीजों का सेवन बंद कर दिया है. बाकी जितना ज्यादा हो सकता है पानी का खूब सेवन करता हूँ.

  5. bahut achchhi or kaam ki jaankaari di hain aapne.
    by the way,
    main in sabse duur hi hoon.
    dhanyawaad.
    CHANDER KUMAR SONI

    1. Approve
      हर अच्छी बात का पता होना चाहिए

  6. सादर प्रणाम
    आदरणीय पाबला जी
    Delighted Delighted अदभुत ,पूरा लेख पढ़े बिना समझ नही पाया था।
    अत्यंत सुंदर चित्रण बियर का,इसकी हिंदी खमीर उठा जौ का रस बहुत अच्छा लगा।

    सुंदर लेखन,नई नई जानकारियो से भरपूर,
    पथरी की समस्या से ग्रसित लोगो से अनुरोध करूँगा की आपरेशन को जाने से पहले एक बार होमियोपैथी खा के देख सकते है ,इसमें वर्णित दवाईयो से पथरी घुल जाती हैं।

  7. Approve
    निश्चित तौर पर होम्योपैथी कारगर है पथरी के लिए. मेरी इसी पथरी का एक बड़ा हिस्सा होम्योपैथी की एक ही खुराख से मूत्र नली की राह निकला था.

  8. बेयर को सामान्य परिवार शराब के बराबर soch के उपयोग नहीं करते और जो अपने डोसा इडली ढोकला का उदाहरण दिया सभी घर में लगभग आधे से ज्यादा भारत में खाया जाता हे इसलिए खमीरी जौ का रस सब के लिए नहीं he

  9. जनाब खमीर उठा जौ का रस तो है ही शानदार ।
    एक वाकया है जब मंडी हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव
    होने के कारण सभी ठेके बंद थे तब ख़मीर उठा चावल का रस पिया था जिसे स्थानीय भाषा में लुगड़ी कहते हैं।
    कभी मौका मिले तो जरूर पीना।
    लाजवाब पोस्ट।

  10. पाबला जी,
    मैं किंगफिशर पीता हूँ। 5000पीने का कोई विशेष कारण हो ​तो बताईए,आप तो काफी रिसर्च करके निर्णय लेते हैं।heineken भिलाई में मिलती है क्या? जरूर बताईये।

    1. Pleasure
      5000 का कोई ख़ास कारण नहीं. बस्स स्वाद पसंद आया और स्ट्रोंग तो है ही
      Heineken भिलाई में मिलती है लेकिन रेगुलर नहीं

  11. पाबला जी ..क्या ये पेट का घेरा बड़ा नही करता .????
    बाकि प्लस-माइनस तो हर जगह है …ज्ञान के लिए शुक्रिया .
    खुश रहें |

  12. Smile
    नॉर्मली तो कोई फर्क नहीं अशोक जी

    आपका आशीर्वाद नई ऊर्जा देता है

  13. बड़े भैय्या पाब्ला जी,
    हालाँकि हम एक ही विभाग में हैं, पर बहुत दिनों से आपसे मुलाकात नहीं हुई है. पर अब इस लेख को पड़ने के बाद पता लगा की मेरी याददाश्त इतनी कमज़ोर क्यों हो गई है. आप मिलते रहते थे तो याददाश्त तेज रहती थी, अब मुलाकात होगी तो फायदेमंद सिलिकॉन, और जैन्थोहुमोल की पूर्ती करवा दीजियेगा. मैं आपका बड़ा आभारी रहूंगा.

  14. अच्छा हुआ जो मैने लेख पढ़ लिया और तमाम टिप्पणियाँ भी वरना मैं तो जौ का सत्तू ही समझ रही थी ! शुक्रिया –

  15. पाबला जी, मुझे शक तो पहले से ही था, लेकिन आपने ये क्यों छुपाया कि यह दिमाग को थोड़ा मदमस्त भी बना देता है, ?

    1. Ssshh
      ऐसा तो खमीर वाली हर चीज में थोड़ा बहुत होता है जीतू जी

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