गूगल ग्लास से देखी जाये अब दुनिया

टर्मिनेटर श्रंखला की फिल्मों में मुख्य पात्र की भूमिका निभाते अर्नाल्ड श्वाजनेगर हमेशा एक ऐसा चश्मा पहने रहते हैं, जो फ़िल्म के कथानक में एक कंप्यूटर है.

वह मशीनी मानव अपने चश्मे की सहायता से जिस ओर भी देखता है उस दृश्य में आये व्यक्ति या जगह का सारा डाटा पलक झपकने की रफ़्तार सरीखा आँखों के सामने आता रहता है.

फ़िल्म के ऐसे दृश्यों से मुझे हमेशा ही रोमांच का अनुभव होता रहा है.

वर्षों पहले आई इन फिल्मों की ऎसी कल्पना को बाद में गूगल ने Google Goggles के नाम से साकार किया. इस तकनीक में आपको अपने मोबाईल कैमरा द्वारा किसी स्थान/ व्यक्ति/ वस्तु का फोटो लिया जाए तो उससे संबंधित सारी जानकारी मोबाईल स्क्रीन पर उभर आती है.

टर्मिनेटर का चश्मे वाला कम्प्यूटर

अप्रैल 2012 में गूगल ने घोषणा की थी कि इस तकनीक को वास्तविक रूप में चश्मे के रूप में विकसित किया जाएगा. इस गुप्त परियोजना को नाम दिया गया प्रोजेक्ट ग्लास

उसी समय आई एक रिपोर्ट का कहना था कि एंड्राइड आधारित इस चश्मे के द्वारा 3G या 4G नेटवर्क, जी पी एस तथा कुछ विशिष्ट सेंसर्स की सहायता से राह चलते ई-मेल पढ़े जा सकेंगे, फेसबुक, ट्विटर अपडेट कर सकेंगे, वीडियो-ऑडियो चैट हो सकेगी, चित्र खींचे जा सकेंगे, जिसे तुरंत सोशल मीडिया पर शेयर किया जा सकेगा. मौसम की जानकारी और नक्शों के ज़रिए रास्ता बताने की सुविधा भी होगी. संभावनाएं अनंत हैं .

गूगल ग्लास पहने एक युवती
गूगल ग्लास पहने एक युवती

यह चश्मा, स्मार्टफोन की तरह, अपने पहनने वाले की आवाज़ से निर्देश प्राप्त करेगा और गूगल का कहना है कि इस पर कोई विज्ञापन नहीं दिखेगा, आप जो तलाश करेंगे करेंगे वही जानकारी आपके सामने आएगी, इसी आधार पर एक डाटा बैंक तैयार होगा और आगे आपको उसी के अनुसार अपडेट दिए जाएंगे।

वैसे व्यावसायिक नजरिये से देखा जाए तो आपको कई सारे लुभावने प्रस्ताव भी मिलेंगे। जैसे कि अगर आप सड़क पर यह चश्मा पहनकर जा रहे हैं कि तभी आपको किसी रेस्टारेंट के बारे में अपने अनुभव लिखने को कहा जाएगा और अगर आप ऐसा करते हैं तो बदले में आपको मिलेगा कॉफी शॉप में फ्री कॉफी कूपन.

अगर आपने किसी उत्पाद का वीडियो बनाकर शेयर किया तो आपको उस उत्पाद की कंपनी की तरफ से उपहार या अन्य कोई प्रस्ताव भी मिल सकता है।

गूगल ने कभी नहीं बताया कि डिज़ाइन मे फ़ैशन का भी पूरा ध्यान रखे जाने वाला यह चश्मा कब तक बाज़ार में आयेगा, लेकिन अब गूगल ने घोषणा की है कि सामान्य उपभोक्तायों के लिए कैमरा, मॉनिटर, माइक्रोफोन से लैस यह अनूठा कम्प्यूटर चश्मा इस वर्ष, 2013 के अंत तक 1500 डॉलर (लगभग 80,000 रूपये) से भी कम कीमत पर उपलब्ध करवा दिया जाएगा.

मुझे तो यह ब्लूटूथ तकनीक का उन्नत स्वरूप लगता है

(गूगल चश्मे से हो सकने वाले कार्यों का एक दिलचस्प वीडियो)

Google Glass की आधिकारिक वेबसाईट पर आप जान सकते हैं कि इसे पहन कर कैसा लगेगा, यह क्या क्या कर सकता है और इसे कैसे पाया जा सकता है.

मैं तो सोच रहा था कि अब सैमसंग के गैलेक्सी 2 को छोड़ कर कुछ नया सा स्मार्टफोन लिया जाए लेकिन अब तो इरादा बन रहा कि समय रहते अच्छी कीमत पर अपना कंप्यूटर बेच कर इस चश्मे से दुनिया देखे जाने का इंतजार करूं.

आपका क्या प्रोग्राम है?

गूगल ग्लास से देखी जाये अब दुनिया
5 (100%) 1 vote
Print Friendly, PDF & Email

Related posts

10 Thoughts to “गूगल ग्लास से देखी जाये अब दुनिया”

  1. इस साल की शुरुआत में BBC ने अपने हिंदी शो में इसके बारे में बताया था। वैसे मुझे लगता है कि ये गैजेट धूम मचा सकता है। इसके बारे में विस्तार से आपने बताया इसके लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद।

    नया लेख :- पुण्यतिथि : पं . अमृतलाल नागर

  2. क्या ये गैजेट इंसान की सोचने की शक्ति छीनने के लिए तो नहीं बनाया जा रहा ?

    अगर इंसान हमेशा जीपीएस का इस्तमाल करता रहा हो वो तो टेक्नोलोजी पे डिपेंड ही रह जायेगा…

    विज्ञान – एक अभिशाप भी…

  3. बहुत जबरदस्‍त चीज है।

    जब आप खरीद ही रहे हैं, तो फिर पहले खरीदने का रिस्‍क क्‍यों उठाया जाए। ::)
    आपके अनुभव जानकर सोचा जाएगा….
    टिप्पणीकर्ता Dr. Zakir Ali Rajnish ने हाल ही में लिखा है: सर्वाइकल स्पाँडिलाइटिस : कारण और निवारणMy Profile

  4. बस यही डर लगता है कि कहीं ध्यान न भटक जाये।

  5. बहुत दिनों बाद आपका लेख पढ़ने को मिला. इस गैजेट के बारे में विस्तार से बताने के लिये धन्यवाद.
    टिप्पणीकर्ता indian citizen ने हाल ही में लिखा है: ब्लैंक चेक, शोक संदेश वाले ड्राफ्ट के प्रयोग का समयMy Profile

  6. जब मैंने भी पहली बार इसके बारे में थोड़ी जानकारी हासिल की तो लगा की ये बहुत विशेष तकनीक होगी जो हमारी जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगी

    पर जैसे जैसे इसके बारे में और ज्यादा जानकारी मिलती गयी डर लगने लगा है इससे
    दुरूपयोग की सम्भावना बहुत ही ज्यादा है पहले से मोबाइल कैमरों ने “गंद” फैला रखा है इससे स्तिथि और भयावह ही होगी

    और सिनेमाघरों में इसका बैन होना तो जरुरी ही है ……..
    और भी न जाने कितनी समस्याएं होंगी
    🙁
    टिप्पणीकर्ता नवीन प्रकाश ने हाल ही में लिखा है: दो टूल आपके Android के लिएMy Profile

  7. यहाँ एक और बात कहना चाहूँगा
    आपकी ये साईट मोबाइल पर खुलने में काफी समय लेती है
    शायद मोबाइल टेम्पलेट है नहीं या उसमें कोई समस्या है कृपया इस पर भी ध्यान दीजियेगा
    टिप्पणीकर्ता नवीन प्रकाश ने हाल ही में लिखा है: दो टूल आपके Android के लिएMy Profile

  8. t s daral

    adbhut jankari di hai.

  9. वाकई , नयी तकनीक है मैने भी वो फिल्म देखी है जिसमें आंखो पर लगा कम्पयूटर सब कुछ देख सकता है

Leave a Comment


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
[+] Zaazu Emoticons