चिट्ठाजगत वालों से बात हुई तो स्वार्थ सामने दिखा उनका

पिछले वर्ष जब हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर चिट्ठाजगत यकायक ओझल हो गया तो इसकी आदत डाल चुके बहुतेरे ब्लॉगर निराश होते दिखे थे। आँख-मिचौली का खेल खेलते कभी कभी इसकी झलक दिखती भी रही लेकिन आखिरकार वापस लौटने की तमाम अटकलों को झुठलाते हुए चिट्ठाजगत विलुप्त हो गया फिर एकाएक पहले की तरह नए ब्लॉगों की सूचना देती ई-मेल आनी शुरू हो गईं। तब से अब तक इसका मोबाईल संस्करण ही उपलब्ध है लेकिन आधा-अधूरा।


कई बार मन किया कि अच्छे खासे चलते फिरते गैरविवादास्पद रहे इस एग्रीगेटर के कर्णधारों से संवाद कायम किया जाए। एक मोबाईल नम्बर मिला मुम्बई का। पाश्चात्य नव-वर्ष 2011 पर बधाई देने के बहाने उस पर कॉल किया गया तो किसी ने रिसीव ही नहीं किया। 10-15 मिनट बाद भी कोई ज़वाब नहीं। बात आई गई हो गई।

लेकिन बात होनी थी तो होनी ही थी। पिछले दिनों पुणे प्रवास के दौरान एक शाम बस यूँ कहिए कि बिल्ली के भाग से छींका फूटा। सारथी वाले जे सी फिलिप शास्त्री जी से बात करते करते हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर चिट्ठाजगत के संचालकों में से एक डॉ विपुल जैन का नम्बर मिल गया। फिर क्या था, मैंने झट से उस पर कॉल कर लिया।

स्वभाविक तौर पर एक अनजान से नम्बर को देख संशय भरे स्वर में मेरा परिचय पूछा गया। बताते ही झट से पहचान भी लिया उन्होंने। बातें धीरे धीरे शुरू हुईं और सीधे ही चिट्ठाजगत की स्थिति पर आ कर टिक गईं।

डॉ विपुल जैन ने बताया कि किराए पर लिए गए कम्प्यूटर सर्वर पर बोझ बढ़ते ही जा रहा था और चिट्ठाजगत का धराशायी होना तो प्रतीक्षित ही था। कई माह के बाद आखिरकार जब सर्वर ने दम तोड़ दिया तो सर्वर वाले भाग खड़े हुए कि जान बची तो लाखों पाए। मान-मनौवल्ल भी काम ना आई। बुझते दीपक सा लपलपा कर आखिरकार चिट्ठाजगत ओझल हो गया इंटरनेट की दुनिया से।

तब जा कर विपुल जी ने एक सुखद जानकारी दी कि चिट्ठाजगत को नए रंग-रूप में लाए जाने के क्रम में नए कोड लिखे जा रहे हैं, नया हार्डवेयर गया है, नया सर्वर 4 वर्ष के लिए ले लिया गया है। एक बार फिर से चिट्ठ्हाजगत सामने आने के बाद कम से कम वर्ष 2015 तक सलामत रहेगा इसकी गारंटी है। भले ही आंधी आए, तूफ़ान आए, बारिश हो चिट्ठाजगत चलता रहेगा क्योंकि हमारा स्वार्थ है इसमें।

मैं मन-ही-मन चौंका! स्वार्थ? कैसा। अपनी रौ में बात बढ़ाते हुए विपुल जी कह रहे थे कि चिट्ठाजगत चलता रहेगा क्योंकि हमारा स्वार्थ है इसमें। वह स्वार्थ है हिंदी से प्रेम। हिंदी का प्रयोग हम कोडिंग में करते रहें हैं और अब भी करेंगे। इसीलिए कुछ देर भी हो रही इसको पुन: सामने लाने में। अब समान विचारों वाले बतिया रहे हों तो बातें लम्बी खिंचनी ही थीं। मैंने भी हिंदी इंटरफ़ेस वाली दो वेबसाईट्स ब्लॉग मंच और ब्लॉग मंडली का जिक्र किया और फिर बातचीत का रूख बदलते हुए अनौपचारिकता बढ़ती गई।

शिकायत सी करते हुए डॉ सा’ब ने बताया कि चिट्ठाजगत के ओझल हो जाने के बाद से उस पर उपलब्ध 22 हजार ब्लॉग धारकों में से किसी ने भी उनसे इस बारे में सम्पर्क नहीं किया! इस मुद्दे पर मुझे मिला कर उनसे संपर्क करने वाल़े कुल चार व्यक्ति रहे। इससे पहले समीरलाल ‘उड़न तश्तरी’ और जे सी फिलिप शास्त्री ‘सारथी’ बातचीत कर चुके हैं। लेकिन प्रफुल्लित होते हुए उन्होंने यह भी बताया कि जब भी चिट्ठाजगत के बारे में कॉल आती है तो खून का दौरा तेज हो जाता है, मन करता है कूद फांद करते उठें और चिट्ठाजगत को फिर से सामने लाने के काम को जल्दी से निपटाएं।

मैं ठहाका मार कर हंस पड़ा। ‘मैं बारिश कर दूं पैसों की, जो तू हो जाए मेरी’ फिल्मी गीत का जिक्र करते हुए मैंने कहा कि आप कहें तो इस सम्बन्ध में फोन काल्स की झड़ी लगवा दूं? वे भी हँस पड़े।

आमने सामने मिलने का वादा करते, आधा घंटा से अधिक चली हमारी बातचीत जब समाप्त हुई तो मैं सोचता रह गया कि उनका वह कथित ‘स्वार्थ’ क्या केवल उन्हीं का है?

चिट्ठाजगत शुरू करने के संबंध में आपके विचार क्या है, बताएं। आपकी भावनाएं वहां तक पहुँच रही हैं।

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38 Thoughts to “चिट्ठाजगत वालों से बात हुई तो स्वार्थ सामने दिखा उनका”

  1. ali

    हमें पांचवें नंबर पर गिन लीजिए उनका फोन नंबर नहीं था / है वर्ना हम भी बात कर चुके होते !

  2. अविनाश

    फोन नहीं किया तो क्‍या हुआ
    पोस्‍टें तो लगाई ही थीं
    क्‍या उनका महत्‍व नहीं है
    और हाल पूछते रहे
    समीर लाल जी से बार बार।

    हमें तो पहले मालूम ही नहीं था
    विपुल जैन जी के बारे में
    फिर नंबर कहां मिलता
    और नंबर तो अभी भी नहीं है।

    तो क्‍या चिंतित हम नहीं हैं
    हम भी हैं चिंतित
    और हैं बहुत सारे
    जिनके मन में स्‍वार्थ ने हैं पांव पसारे
    हिन्‍दी स्‍वार्थ के
    चाहे अर्थ न मिले
    पर अर्थ से जुड़े

    चिट्ठाजगत की रेल
    फिर तेजी से चले
    हम मान लेंगे कि
    उस पर कब्‍जा कर लिया गया था
    जैसे पिछले दिनों
    रेल पटरियों पर हुआ था।

    वो तो सरकार ने हटा दिया
    इसे हिन्‍दी ब्‍लॉगर हटायेंगे
    आप नंबर तो दीजिए
    सही कहा है
    फोनबारिश से विपुल जैन जी को
    मन के भीतर तक नहलायेंगे।

  3. अविनाश

    अब बतलायें विपुल जैन जी
    इस प्रेम बारिश में नहाने के लिए
    30 अप्रैल 2011 को
    दिल्‍ली के हिन्‍दी भवन में आयेंगे
    वजह जानने के लिए
    हमारा स्‍वार्थ साधन के लिए
    नुक्‍कड़ पर आपको पूरी
    जानकारी हासिल हो जाएगी।

  4. नरेश सिह राठौड़

    पाबला जी सुबह सुबह अच्छी खबर सुनकर मजा आया | चिट्ठाजगत के दुबारा शुरू होने का बेताबी से इन्तजार रहेगा |

  5. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

    अंतिम अपडेट: चिट्ठाजगत के धडाम होने के बाद तुरंत ट्विटर पर विपुल जी को कई बार मेंशन किया

    परिणाम: …… अब तक कोई जवाब नहीं |

    आपकी सूचना से प्रसन्नता है ……हालाकि टाइटल ने तो डरा ही दिया था|

  6. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

    अंतिम अपडेट: चिट्ठाजगत के धडाम होने के बाद तुरंत ट्विटर पर विपुल जी को कई बार मेंशन किया

    परिणाम: …… अब तक कोई जवाब नहीं |

    आपकी सूचना से प्रसन्नता है ……हालाकि टाइटल ने तो डरा ही दिया था|

  7. अजय कुमार झा

    चिट्टाजगत का वापस आना एक सुखद समाचार हैं और यदि प्रतीक्षा सिर्फ़ फ़ोन कॉल्स की है तो बस नंबर मिल जाए …एक बार फ़ोन कॉल्स तो इतने आएंगे कि …….चलिए सर हम भी इंतज़ार करते हैं

  8. प्रवीण पाण्डेय

    फोन नम्बर दे दीजिये, शुभकामनायें देने के लिये।

  9. राजीव तनेजा

    चिट्ठाजगत वापिस लौट रहा है…इससे बढकर सुखद समाचार हिन्दी प्रेमियों के लिए और भला क्या हो सकता है?..

  10. ajit gupta

    चिठ्ठा जगत के लिए तो पलक पाँवड़े बिछाकर बैठे हैं। अच्‍छी सूचना के लिए आभार।

  11. सतीश सक्सेना

    कई लोगों ने प्रयास किया था मगर सफल नहीं हो पाए ! ! शुभकामनायें आपको !

  12. खुशदीप सहगल

    कहते हैं,
    जहां न रवि पहुंचे, वहां कवि पहुंचे…
    मैं कहता हूं,
    जहां कवि भी न पहुंचे, वहां पाबला जी पहुंचे…

    चिट्ठा जगत के लौटने का बेसब्री से इंतज़ार…

    जय हिंद…

  13. अखिलेश कुमार त्रिपाठी

    पाबला जी, मैने स्वयं समीर जी से इस बारे में पूछा था तो उन्होने कहा कि- जल्दी ही वापसी होगी चिट्ठाजगत की। आप मुझे भी फोन करने वालों की लिस्ट में डाल सकते है क्योंकि आपने स्वयं हमारी भावनायें विपुल जी को बता दी है। रही हिन्दी प्रेम की, वो तो हमारी आपकी जिन्दगी है। भला आत्मा के बिना जीवन कैसा?

  14. अखिलेश कुमार त्रिपाठी

    पाबला जी, मैने स्वयं समीर जी से इस बारे में पूछा था तो उन्होने कहा कि- जल्दी ही वापसी होगी चिट्ठाजगत की। आप मुझे भी फोन करने वालों की लिस्ट में डाल सकते है क्योंकि आपने स्वयं हमारी भावनायें विपुल जी को बता दी है। रही हिन्दी प्रेम की, वो तो हमारी आपकी जिन्दगी है। भला आत्मा के बिना जीवन कैसा?

  15. भारतीय नागरिक - Indian Citizen

    कृपया आप cman@in.com पर डा०साब का नम्बर मेल कर दें, मै उनसे बात करना चाहता हूं. यूं एक ठो पोस्ट तो मैंने भी ठेली थी. बहरहाल आपके लेख से दिल को शांति पहुंची.

  16. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अच्छी खबर!!

  17. Rahul Singh

    एक फोन कॉल हमारा भी गिन लें.

  18. honesty project democracy

    सुखद खबर दी है आपने पावला जी…विपुल जैन जी का इस पोस्ट पे मोबाईल नंबर भी डाल देते तो लोग उनसे आपका पोस्ट पढने के बाद बात भी कर लेते….

  19. शिवम् मिश्रा

    "हम इंतज़ार करेंगे … तेरा क़यामत तक … खुदा करे क़यामत हो और तू आये …"
    इस खुशखबरी के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

  20. shekhar suman

    अजी नंबर होता तो कब का मिला दिया होता….
    एक कॉल हम भी जोड़ा जाये…

  21. Bhaskar

    चिट्ठाजगत वापिस लौट रहा है…इससे बढकर सुखद समाचार हिन्दी प्रेमियों के लिए और भला क्या हो सकता है..और मेरे लिए भी …आपकी सूचना से प्रसन्नता है ….हालाकि टाइटल ने तो डरा ही दिया था|…आपकी इस जानकारी और खुशखबरी देती पोस्ट के लिए हार्दिक आभार l

  22. अविनाश वाचस्पति

    किसको चाहिए विपुल जैन जी का नंबर ….. किसको ………. किसको ……….. अपना नंबर बतलाएं

  23. rashmi ravija

    बढ़िया खबर है….चिट्टाजगत का वापस आना एक सुखद समाचार हैं

  24. Atul Shrivastava

    इंतजार रहेगा हमें भी।

  25. Udan Tashtari

    यह अच्छी खुशखबरी है..

  26. विष्णु बैरागी

    निस्‍सन्‍देह मैंने किसी से बात नहीं की, कोई फोन नहीं किया और चिट्ठा जगत में भूले-भटके ही (आपवादिक) पाठकीय भागीदारी की होगी। किन्‍तु विश्‍वास कीजिए – इसमें मेरा भी स्‍वार्थ है।

    मुझ जैसा काम बताइएगा।

  27. dhiru singh {धीरू सिंह}

    कोई निर्धारित शुल्क हो ऎग्रीगेटर का तो शायद हमेशा काम करेगा वह . मुफ़्त माल दिले बेरहम ….. हम लोग भी अगर एक दो ब्लागो से काम चला ले तो उन पर ज्यादा लोड नही पडेगा .लेइक्न मुफ़्त के चक्कर में जब मन आया तो एक नया ब्लाग बना लेते है हम …मै भी कोई पीछे नही हूं कई ब्लाग बनाये है जिन्हे खुद ही भूल गया

  28. Anil

    अजी कोशिश तो हमने भी की थी चिट्ठाजगत वालों को ढूंढने की, लेकिन साइट ही नहीं चल रही थी, इसलिये मन मार कर रह गया. लेकिन यह जानकर खुशी हुयी कि यह करामाती साइट फिर से शुरू हो रही है. जानकारी के लिये धन्यवाद. जिस दिन शुरू हो, कृपया जरूर बताइयेगा.

  29. Ashok Pandey

    यह शुभ संदेश सुनाने के लिए धन्‍यवाद। काश.. ऐसा ही स्‍वार्थ हिन्‍दी के साहित्‍यकारों में भी होता जिनमें से अधिकांश सिर्फ अपने लिए हिन्‍दीसेवा करते हैं। डॉ. जैन को प्रणाम और उनका हार्दिक आभार।

  30. Poorviya

    bhai hamne to is liya phone nahi kiya ki ki jain sahab dacter hai pata nahi unk is jagat se kuch lena dena hai ki nahi……

    jai baba banaras….

  31. POOJA...

    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, जो आपने चिठ्ठाजगत से जुडी खबर दी…
    स्वार्थ… हम जैसे ब्लोगिंग के शिष्यों से पूछिए जिन्हें यदि थोड़ी-सी पहचान मिली तो सिर्फ चिठ्ठाजगत के कारण…
    डॉ. साहब से बात नहीं कि, परन्तु जिनसे पूछ सकते थे, सबसे पता किया कि हमारा स्कूल आख़िर गायब कहाँ हुआ और क्यों हुआ??? परन्तु जवाब निराशाजनक ही मिलता था…
    परन्तु यकीन मानिए आज बड़ी खुशी हुई…

  32. अनामिका की सदायें ......

    neki aur poochh poochh aji janaab aap dr. sahab ka ek baar no. to dijiye…ham jhadi laga de calls ki.

    besabri se intzar hai ji chitthajagat ka.

  33. anitakumar

    विपुल जी की शिकायत तो जायज नहीं , उनका नंबर होता तो लोग फ़ोन करते न, वैसे कई बार कहा था कि हम भी चिठ्ठाजगत का इंतजार कर रहे हैं। वो वापस आ रहा है जान कर अच्छा लगा। इतनी अच्छी खबर सुनाने के लिए आप का आभार

  34. Shah Nawaz

    लगता है ब्लोगिंग के वोह पुराने सुहाने दिन लौटने वाले हैं… बहुत बढ़िया!

  35. दीपक 'मशाल'

    खुशखबरी है ये तो.. सबको बधाई.. आपका और जैन साब का आभार. नंबर वाली बात सब सही कह रहे हैं.

  36. Arvind Mishra

    एक बड़ी खुशखबरी !

  37. Arvind Mishra

    फोन भले नहीं ब्लॉग जगत में बहुत कुछ लिखा गया उस पर

  38. रौशन जसवाल विक्षिप्त

    सुखद समाचार। प्रतीक्षा रहेगी।

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