छाती ठोक कर गूगल का डाका ! कर लो क्या करना है !!

मैंने बहुतेरे ब्लॉग्स पर उनके ‘लेखकों’ द्वारा सूचना देती पंक्तियाँ देखीं हैं कि यहाँ लिखी गई सभी पोस्ट्स कॉपीराइट कानून के तहत हैं, जो कोई भी इसका उपयोग या उल्लेख करना चाहे, छापना चाहे तो उसे ‘लेखक’ से अनुमति लेनी होगी. कई ब्लॉग्स पर ‘ताला’ लगा रहता है कि कोई चोर उनकी रचना ना चुरा ले!

ज़्यादातर ब्लॉगर, मुफ्त प्लेटफार्म वाले ब्लॉग पर लिखी गई हर चीज पर अपना मालिकाना हक़ मानते है. एक ब्लॉगर तो ऎसी भी देखी मैंने जो अपनी टिप्पणियों को भी अपनी मिलकियत मानती हैं. लेकिन अब गूगल ने जो नई नीति अपनाने का फैसला लिया है उसके चलते, गूगल की दया पर चलने वाले ब्लॉग्स के हर हिस्से का उपयोग वह खुद करेगा. आपको मंजूर है तो ठीक वरना दफा हो जायो उसके दरवाज़े से.

इससे पहले मैं आगे कुछ कहूँ. अपनी एक पसंदीदा बोधकथा बताता हूँ.

एक मानव को ना जाने क्या सूझी कि सौ वर्षों तक तपस्या कर भगवान को प्रसन्न कर मुंहमांगा वरदान ले लिया जाए. वह ऊंचे पहाड़ों पर जा जंगल में एक चट्टान पर बैठ गया और लगा तपस्या करने. करते ना करते सौ वर्ष हो गए. एक युग सा बीत गया. भगवान प्रसन्न हुए, प्रकट हुए. मांग भक्त क्या मांगता है! अब उस मानव के मन में अहंकार आ गया -मुझे मेरी सौ वर्ष की तपस्या का फल दे दो भगवन!!

इससे पहले भगवान कुछ कहते, वो चट्टान बोल पड़ी जिस पर बैठ कर मानव ने तपस्या की थी -हे मानव, तू मुझ पर सौ वर्ष बैठा रहा, टस से मस ना हुआ, तू मेरी छाती पर बैठा रहा पहले तू तो मुझसे हिसाब किताब पूरा कर ले फिर भगवान से बात करना.

google-bspabla

बस ऐसा ही कुछ गूगल करने जा रहा है जिस के सहारे ‘लेखक’ अपनी अभिव्यक्ति/ रचना/ कविता/ सृजन पर खुद का हक़ माने बैठे हैं और दूसरों पर उसके ‘अपना’ होने की धौंस दिखाते हैं. कहीं छप जाए नोटिस भिजवाते हैं अखबार वालों को .

गूगल ने अपने उपभोक्तायों के लिए सेवा की शर्तों में जो ताज़ा बदलाव किया है वह आने वाले कुछ घंटों बाद लागू हो जाएगा. उसके अनुसार गूगल के यू-ट्यूब, ब्लॉग, प्लस, प्ले जैसे समस्त उत्पादों पर आपका प्रोफ़ाइल नाम, फ़ोटो, आपके द्वारा लिखे, साझा किए गए लेख, टिप्पणियाँ, किसी उत्पाद को एकाध स्टार देने या +वन करने जैसी अन्य हरकतें आदि को अपने द्वारा प्रायोजित विज्ञापनों में दिखायेगा.

ये वही विज्ञापन हैं, जिनसे गूगल हर साल अरबों रूपये कमाता है. वित्तीय परिणामों के अनुसार पिछले साल इसने 2,73,45,68,856 रूपये (43.686 मिलियन डॉलर) कमाए थे. इस साल के नौ महीनों में वह 2,27,82,77,050 रूपये (36.505 मिलियन डॉलर) कमा चुका है. कमाने की रफ्तार तो अब और बढ़ने वाली है.

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हालांकि गूगल का कहना है कि किसी सीमा तक आप इस पर नियंत्रण कर सकते हैं लेकिन प्रोफ़ाइल नाम और फ़ोटो का उपयोग Google Play जैसे अन्य स्थानों पर तो किया ही जाएगा इस पर आपकी एक ना सुनी जायेगी.

वो तो यह कह ही चुका है कि उसकी सेवाओं का उपयोग आप उनकी शर्तों से सहमत हो कर ही कर रहे हैं और उन सेवाओं का उपयोग करते हुए आप यह सहमति भी देते हैं कि गूगल ऎसी सामग्री, लेखन का उपयोग अपनी नीतियों के अनुसार कर सकता है.

11 नवंबर 2013 से लागू होने वाली इस नीति में स्पष्ट किया गया है कि जब आप उनके द्वारा दी जा रही मुफ्त सेवा (जैसे कि ब्लॉग) पर कोई लेखन कार्य संपन्न करते हैं तो आप Google को उसका उपयोग करने, संग्रहित करने, संशोधित करने, कहीं प्रकाशित करने, सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करने और वितरित करने का विश्वव्यापी लाइसेंस देते हैं और अगर आप इन सेवाओं का उपयोग बंद कर देते हैं, तब भी यह लाइसेंस जारी रहता है

गूगल ने साफ़ साफ़ कह दिया है कि अगर आप इन नई संशोधित शर्तों से सहमत नहीं हैं, तो आपको उस सेवा का अपना उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए. यदि आप इन शर्तों का पालन नहीं करते हैं, और वो तत्‍काल कोई कार्यवाही नहीं करता तो इसका यह मतलब नहीं कि गूगल, भविष्‍य में कार्यवाही जैसे अपने किसी अधिकार को छोड़ रहा है.

google-bspabla

इन सबका लब्बोलुआब यह हुया कि आपका खाता गूगल पर है और उसके सहारे (ब्लॉग आदि पर) कभी किसी रेस्टारेंट, होटल, मॉल, चटनी, पिज़्ज़ा, प्याज, इमारत, कंप्यूटर, मोबाईल, मिठाई, किसी ख़ास डॉक्टर और इन जैसी हजारों बातों पर अपने विचार रखें हैं तो आपकी फ़ोटो और वह लिखा हुआ उन विज्ञापनों पर दिखेगा जो उपरोक्त वस्तुयों की खोज करते दिखाई देते हैं/ देंगे. गूगल ने अपने इस कृत्य को नाम दिया है साझा सिफारिशें/ Shared Endorsements!

फेसबुक तो पहले से ही ऐसे काम में भिड़ा हुया है Sponsored Stories का नाम ले कर. जैसे कि आपने अगर मेकमायट्रिप के पेज पर चार शब्द लिख दिए तारीफ़ के, तो मेकमायट्रिप वाले उन चार शब्दों को अपने विज्ञापन में जोड़ कर दुनिया को दिखाने के लिए फेसबुक को पैसे देगा.

हालांकि फेसबुक की नीतियों के खिलाफ मुकद्दमा करने वालों को भारी भरकम मुआवजा भी मिला है, ऐसा ही कुछ गूगल के साथ भी हो तो हैरानी नहीं. एक बज्ज ने तो उसकी बैंड बजा दी थी. इस लेख को लिखे जाते खबर मिली फ्रांस की अदालत द्वारा गूगल के खिलाफ निजता के हनन के आरोप में सुनाये गए आदेश की

फेसबुक तो अपने तक ही सीमित है लेकिन गूगल की व्यापक सेवायों के मद्देनज़र, उसके उपयोगकर्ता की निजता पर इसका असर पड़ना अवश्यंभावी है. जी-मेल पर तो इसकी शुरुआत हो ही चुकी है

अब इस नीति से भले ही गूगल और बाजारवाद को लाभ हो और भले ही कोई खुश हो कि उसकी फोटो, विचार दुनिया को विज्ञापन रूप में दिखाए जायेंगे लेकिन शुद्ध हिंदी में कहें तो उसकी निजता सरे बाज़ार नीलाम हो रही होगी. इसीलिए मैं कह रहा कि छाती ठोक कर गूगल का डाका ! कर लो क्या करना है !!

आखिर अब आप क्या करेंगे?

छाती ठोक कर गूगल का डाका ! कर लो क्या करना है !!
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37 Thoughts to “छाती ठोक कर गूगल का डाका ! कर लो क्या करना है !!”

  1. बहुत बढ़िया दृष्टांत के साथ बढ़िया व काम की जानकारी
    टिप्पणीकर्ता Ratan singh ने हाल ही में लिखा है: एक ने झटके से दुपट्टे के तार निकाले तो दुसरे ने घोड़े को हाथ से उठा लियाMy Profile

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      शुक्रिया रतन जी

  2. जिसने ठिकाना दिया वह किराया तो वसूलेगा ही।
    टिप्पणीकर्ता चलत मुसाफ़िर ने हाल ही में लिखा है: हैप्पी दीवाली: कुछ उनकी, कुछ अपनीMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Approve
      बिलकुल वसूलेगा

  3. shikha varshney

    हम क्या करेंगे ? हम संघर्ष करेंगे.नारे लगाएंगे .. हा हा हा .

    1. बी एस पाबला

      Slam-Dunk
      जिंदाबाद जिंदाबाद

    2. नहीं शिखा…क्या करेंगे…

      हवन करेंगे, हवन करेंगे, हवन करेंगे…

      और क्या…

      जय हिंद…

  4. archanachaoji

    ह्म्म्म!!

    1. बी एस पाबला

      Ssshh

  5. अब तो बहुत सावधानी से प्रयोग करना पडेगा गूगल की फ्री सर्विस का । लगता है अब ब्लागिंग प्लेटफार्म बदलना पडेगा ।

    1. बी एस पाबला

      Smile
      सोचिए सोचिए

  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार को (08-11-2013) “मेरा रूप” (चर्चा मंच 1423) “मयंक का कोना” पर भी होगी!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
    टिप्पणीकर्ता डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने हाल ही में लिखा है: “दोहावली” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)My Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart
      आभार रूपचन्द्र जी

  7. यह सामान्य सा नियम है कि जिसने प्लेटफार्म दिया है वह उसका लाभ लेना चाहेगा ही. रही बात निजता के हनन की तो यह बात सोचने लायक है.

    1. बी एस पाबला

      Smile
      बहुतेरों को तो यह निजता नाम की चिड़िया का पता ही नहीं है

  8. सोमेश सक्सेना

    इससे तो बेहतर है कि गूगल ब्लॉगर के पैसे लेना शुरू कर दे. मुफ्त की सेवा लेकर एहसान लो और बदले में अपनी निजता उनके हाथों में सौंप दो इससे बेहतर है कि शुल्क चुकाकर साधिकार सेवा लें.

    ऐसा करने से बहुत से फालतू के ब्लॉग भी बंद हो जायेंगे… 🙂

    1. बी एस पाबला

      Delighted
      ये भी ठीक है

  9. satish saxena

    यह तो गलत है , गूगल को हमारी सामग्री पर हक़ कैसे हो गया ! हैम भी कोर्ट में जा सकते हैं , आपके हिसाब से क्या करना चाहिए ?

    1. बी एस पाबला

      Smile
      मामला आपके सामने है , फैसला भी आप ही लेंगे

  10. लगे हाथों मुफ्त की डोमेन सेवा पर भी चर्चा कर देते तो हम भी ब्लोगर छोड़कर अन्यत्र शिफ्ट करने की सोचते !
    वैसे आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है.कम से कम जानकारी तो हो ही गई कि गूगल क्या करने वाला है.

    1. बी एस पाबला

      Smile
      इस पर चचाएँ http://www.BlogManch.com पर हो रहीं हैं
      आप भी पधारें

  11. थैंक्स फॉर इनफार्मेशन

    1. बी एस पाबला

      Heart
      स्वागत है आपका .

  12. राजीव सर जी से सहमत हूँ, डोमेन सेवा पर चर्चा भी करे चाहे वो मुफ्त हो या फिर भुगतान वाली डोमेन सेवा हो !! आभार।

    1. बी एस पाबला

      Heart
      शुक्रिया

  13. समस्या तो आप ने बता दी … अब ‘संकटमोचन’ इस का उपाए भी तो बताएं !! Afraid
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: स्व॰ श्री विपिनचंद्र पाल जी की १५५ वीं जयंतीMy Profile

    1. बी एस पाबला

      .Smile
      इस पर चचाएँ http://www.BlogManch.com पर हो रहीं हैं
      आप भी पधारें

  14. तुम्ही ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना..मूर्ख जानकर ..मूर्ख जानकर कोई अच्छी सलाह देना..तुम्हीं ने…

    1. बी एस पाबला

      Overjoy

  15. हमने यही आशंका बहुत पहले से थी, अतः डोमेन नाम ख़रीद लिया था।

    1. बी एस पाबला

      Approve
      ये ठीक किया आपने

  16. कर ले गूगल जो चाहे.. सब चीजें आंशिक ही हैं इस दुनिया में.. कुछ भी स्थायी नहीं.. क्या मेरा है क्या तेरा है.. ये गूगल भगवान हैं.. कुछ भी करेंगे.. उनकी वाही वाही ही होगी.. अब गूगल हमें भी बेचेगा और हमारे से संबंधित, लिखी गई चीजें भी बेचकर पैसे कमायेगा, बस हमें पैसे नहीं देगा.. जय हो गूगल देवता ।
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: ब्लॉगिंग की शुरूआत के अनुभव (भाग २)My Profile

    1. बी एस पाबला

      Sad
      हम सब तो बेगारी ही करते हैं, गूगल के लिए

  17. वन्दना गुप्ता

    अब आप ही उपाए बताएं क्या किया जाए हम तो वैसे भी तकनीक के मामले में अनाड़ी हैं

    1. बी एस पाबला

      Smile.
      इस पर चचाएँ http://www.BlogManch.com पर हो रहीं हैं
      आप भी पधारें

  18. nitesh

    पहली बार पड़ा और मुरीद हो गए आपके…

  19. आप गूगल की बात कर रहे हैं यहां तो फेसबुकिये ब्लॉगर ही दूसरों का माल कराये जा रहे हैं१ १बहुत ज्ञानवर्द्धस्क आलेख१

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