जनमदिन पर आपके स्नेह ने मुझे भावुक कर दिया

ज़िंदगी के मेले

अब तक स्तब्ध हूँ, हतप्रभ हूँ, मुदित हूँ। 20-21 सितम्बर की मध्य रात्रि से शुरू हुया स्नेहाशीषों का सिलसिला अब तक जारी है। इस बार शुरूआत हुई 20 सितम्बर की शाम से। अजय झा जी की एक समस्या का निराकण करते हुए GTalk पर चल रही बातों के बीच सोमवार 21 सितम्बर (ईद) की छुट्टी का जिक्र आया। अजय जी ने बस यूँ ही पूछ लिया कि कल क्या कर रहे हैं? मैंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए बताया कि सोच रहा हूँ अपने मोबाईल बंद कर किसी नदी के ठंडे पानी में घुटनों तक पैर डुबो कर बैठूँ और हाथ में हो ठंडी बीयर! दन्न से उनका प्रश्न दगा -क्यों, कल जनमदिन है क्या आपका? मेरा एक ठहाका गूँजा और बेसाख्ता बोल पड़ा कि बिल्कुल सही पहचाना आपने, कल मेरा जनमदिन ही है। वे मचल उठे। फिर तो कई अनौपचारिक बातें भी हुईं।

रात्रि लगभग 11 बजे मैं नाईट शिफ्ट में था। चंद कदमों की दूरी पर ही स्थित इमारत से एक विभागीय सहकर्मी ने फोन कर पूछा कि मुलाकात करने के लिए आ सकता हूँ क्या? मैंने कारण जानना चाहा तो कहा गया कि बस दो मिनट रूकूँगा फिर वापस लौट जाऊँगा। मेरी सहमति मिलते ही उसने रवानगी की सूचना दी और मैं अपनी इमारत से उतर कर नीचे पोर्च में उनका इंतज़ार करने लग गया। चंद मिनटों बाद मिठाई का डब्बा लिए व ‘हैप्पी बर्थडे सर’ का उद्घोष करते वह मेरे सामने थे। अब बारी मेरे अचकचाने की थी। विनम्रता का भाव किए वह तब तक खड़े रहे जब तक मैंने दोनों हाथों से मिठाई नहीं उठा ली। कुछ क्षणों बाद ही अभिवादन करते ये जा और वो जा!
ठीक 12:01 पर चहकते हुए सुपुत्र गुरूप्रीत का फोन आ गया। बधाई के बाद, सीधे पार्टी का स्थान पूछा जाने लगा! इसी बीच दूसरे फोन पर शरद कोकास जी बल्ले बल्ले करते आ गए। चंद मिनटों बाद अनिता कुमार जी ने मोबाईल की घंटी बजाई। 2 बजते बजते मोबाईल ने रौशन के बधाई वाले ईमेल की सूचना दी। 4 नहीं बजे थे कि समीर लाल ‘उड़न तश्तरी वाले’ का ईमेल बधाई संदेश देता मोबाईल कूक पड़ा। 4:30 पर Batchmates.com की बधाई देती मेल, ई-कार्ड सहित आ पहुँची। नाईट शिफ्ट खत्म होते रिपोर्टिंग काल में कई सहकर्मियों ने भी बधाई देना याद रखा।
घर पहुँचते ही आभास हुया कि डेज़ी को भी पता चल चुका है मेरे जनमदिन का। आम दिनों की बनिस्बत कुछ अधिक ही उछल-कूद कर लाड़ जता रही थी। माता – पिता के चरण छू आशिर्वाद लिया। बिटिया ने एक व्यवहारिक तोहफा दिया, बदले में पाई एक ‘मुच्छी-पप्पी’। नाश्ता कर जब ऑनलाईन हुया तो सबसे पहले चैट पर ऑफलाईन होने के दौरान आर सी मिश्र जी का बधाई संदेश मिला। जवाब दिया गया तो शायद वह कहीं और व्यस्त हो चुके थे। इस बीच संगीता पुरी जी आवाज़ पर चुहलबाजी करते हुये बधाई दे चुकी थीं।
9 बजे के आसपास TechGuy की बधाई वाली ईमेल आई। दिनेशराय द्विवेदी जी ने जनमदिन की जानकारी कथित रूप से छुपाने का उलाहना देते हुए मोबाईल पर बधाई दी। कुछ देर बाद ही शरद कोकास जी ने उपहार न ढ़ूँढ़ पाने की लाचारी बताते हुए उपहार स्वरूप बल्ले बल्ले करती एक ब्लॉग-पोस्ट लिखे जाने की सूचना दी। जब तक उस उपहार का आनंद उठा पाता, तब तक Electronic Circuits Projects की ओर से बधाई आ गई। एक झपकी ले कर जब वापस आया तो फेस बुक की दीवार पर शुभम मंगला , गिरिन्द्रनाथ झा , रजनीश झा अपना संदेश लिख चुके थे, Thats का संदेश आ चुका था। उधर ऑर्कुट पर शिवम मिश्रा बधाई दे रहे थे।

मुदित सा मैं, सूचना विस्फोट की परिकल्पना को साकार होता देख हैरान हो रहा था तो सिद्धेश्वर जी अपनी रौबीली आवाज़ में बधाई देने मोबाईल घनघनाते आ गए। थोड़ी देर बाद ही अविनाश वाचस्पति जी ने मोबाईल पर शुभकामनाएँ देते हुए उपहार स्वरूप नुक्कड़ के खुश होने की सूचना दी। मैं भी खुश हो रहा था कि ताऊ आ पहुंचे, लट्ठ लिए मोबाईल पर, कि पार्टी कहाँ है? ताऊ को अभी मना ही रहा था कि हँसते रहो का जयकारा करते राजीव तनेजा जी दस्तक देने लगे मोबाईल पर। ताऊ मान ही नहीं रहे थे, मोबाईल पर दस्तकें बढ़ने लगी थीं। ताऊ आखिर भिलाई आ कर पार्टी लेने का आश्वासन पा कर ही गए। राजीव जी हंसते रहो का आशीर्वाद देकर पार्टी की बुकिंग करवा कर पलटे ही थे कि मोबाईल ने सूचना दी -कोई आया। अंगूठे को हरकत दी तो अलबेला खत्री जी को अपनी चुलबुली बधाईयों का टोकरा ले कर सामने पाया। प्रतीक पांडे फेसबुक पर हाजिर थे। दोपहर भोजन के बाद कुछ मीठा खाने की इच्छा हुई तो राजीव माहेश्वरी जी गुलाबजामुनों का बाऊल लिए हाजिर हो गये। अभी गुलाबजामुन का स्वाद लिया ही जा रहा था कि राज भाटिया जी की, पूरे परिवार की मंगलकामना करते बधाई वाली ईमेल आ गई। उधर ज़िंदगी के मेले में भी हलचल शुरू हो चुकी थी।
ब्लॉगर साथियों की आत्मीयता से मैं अभिभूत हुए जा रहा था। इतना स्नेह? हिंदी ब्लॉग जगत में पारिवारिक तत्वों को नकारने वालों का ख्याल भी बीच में आया। साथ ही याद आ गई अदरक और मानव प्रतिरूप चौपाये से जुड़ी कहावत की!
शाम की चाय की चुस्कियों के पहले मोहन वशिष्ठ जी अपनी विशिष्ठ बधाई देने मोबाईल पर पधारे। इस बीच ही नन्ही लेखिका, रश्मि स्वरूप का ई-कार्ड मिला। तब तक सुपुत्र महाशय अपनी चाहत लिए पधार चुके थे। उनकी चाहत को अंजाम तक ले जाने के मकसद से ऑनलाईन बैंकिंग का उपयोग करने हेतु भारतीय स्टेट बैंक के अपने खाते में लॉगिन किया तो एक चलता-फिरता बधाई संदेश सामने था।
फेसबुक की दीवार पर सतीश चन्द्र सत्यार्थी संदेश लिख चुके थे, वन्दना दुबे जी का बधाई संदेश ईमेल में आ चुका था। तब आकस्मिक आगमन हुया धमतरी से चाचा जी के परिवार का। नवजात नाती-पोतों की किलकारियों के बीच चाचा जी का आशीर्वाद पा कर मन हर्ष से झूम उठा। उन्हें वापस लौटने की जल्दी थी इसलिए समय से पहले हलचल शुरू हुई जनमदिन के केक काटे जाने वाले अवसर की। शोरगुल, हंगामे, तालियों, हैप्पी बर्थडे की ध्वनियों से पूरा माहौल खुशनुमा हो उठा था। हंगामे से परेशान, कुछ दूर बंधी डेज़ी अपने अंदाज़ में नाराज़ सी गुर्रा रही थी। अभी साँस ली ही थी कि सुपुत्र गुरूप्रीत का स्टाफ भी बधाई देने आ पहुँचा। थोड़ी देर में उसके मित्र भी आ पहुँचे।
नवरात्रि
पर्व के चलते, यारों ने अगले माह का समय उदारतापूर्वक स्वयं ही तय कर दिया था, इसलिए अब मैं आराम से बैठ सकता था। कम्प्यूटर बाबा के पास गए तो आशीष खंडेलवाल जी हैपी ब्लॉगिंग सहित हैपी बर्थडे का संदेश लिए ईमेल पर मिले। पंडित डी के शर्मा ‘वत्स‘ हैप्पी बड्डे कह्ते ईमेल पर आए तो हमने उन्हें आभासी जश्न का न्यौता दे डाला। लौटती मेल से मुझे नवरात्रि के उपवास का हवाला दिया गया तो हमने भी पासा पलटते हुए शाकाहारी आईसक्रीम का ऑफर दे डाला। मनीष कुमार फेसबुक की दीवार पर बधाई संदेश लिख रहे थे तभी मोबाईल में हलचल हो कर शांत हो गई। नज़र डालते ही आभास हो गया कि यह कोई अंतर्राष्ट्रीय कॉल रही होगी।
अभी पलटा ही था कि मोबाईल ने फिर बुलाया। नम्बर देखते ही सीधे अभिवादन किया -राज जी, सति श्री अकाल्। अगले छोर पर राज भाटिया जी हैरान -कैसे पता चला? बधाई की गर्मजोशी के बाद कुछ अनौपचारिक बातें हुईं तो उन्हें अपने ननिहाल के क्षेत्र से पाया। भाटिया जी से बातें हो ही रहीं थीं कि ललित शर्मा जी व संजीव तिवारी जी के एसएमएस ने दस्तक दी। अभी एसएमएस पढ़ कर मोबाईल रखा ही था कि युनूस खान जी पार्टी की वसूली कर लेंगे कहते हुए, गुब्बारों सहित आ पहुँचे, ईमेल की मार्फत।
गुब्बारे पा कर खेलने की सोच ही रहे थे कि याद आया शाम को अजय झा जी ने सूचना दी थी कि इस जनमदिन पर मुझे उपहार स्वरूप चने के झाड़ पर चढ़ा डाला गया है और धमकी दी है कि वहीं टिके रहियेगा। भागे भागे तलाश कर जब देखा तो हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए। कुछ भी … कभी भी कहते हुए ग्यारह बारह ब्लॉगर साथी -दम लगा के हैय्या करते हुए चढ़ाते ही चले जा रहे थे।

ब्लॉग पोस्ट की शैली देखते हुए हमने तुरंत अजय झा (के मोबाईल) की घंटी बजाई और कह दिया कि देख लूंगा देख लेना, आप बहुत आगे जायोगे। उधर से पूछा गया कितना आगे? फिर याद आया कि इन्होंने तो मुझे (ऊपर) चढ़ाया है। मैंने कहा कि आप बहुत ऊपर जायोगे। आगे-ऊपर में उलझ कर वे लजा से गए। इधर हम भी मन ही मन मुस्कुरा रहे थे थे कि मुझे ऊपर चढ़ाया ना, मैंने इन्हें चढ़ा दिया। हिसाब बराबर। इसी बीच एक ब्लॉगर, अपना नाम गुप्त रखने की गुजारिश करते हुए फुसफुसा कर चले गए कि एक रिटायर्ड फौजी ताऊ, एक लोहार की कहते हुए किसी बालक पाबला का पहला जनमदिन मना रहा है, कैंटीन से बोतल भी आ चुकी है। पार्टी का बिल भिलाई आ कर लिए जाना भी तय कर लिया गया है। हम भागे एक हाथ से अपना निक्कर माऊस संभाले। तब तक दो-चार दीवाने बोतल खोल भी चुके थे। अब बालक पाबला का कोई काम नहीं था दीवानों के बीच, सो चुपके से खिसक लिए।

वापस लौटे तो उड़न तश्तरी एक शेर लिए हाजिर थी। घूमे थे जिनकी गरदनों में हाथ डालके/ वो दोस्त हो गए हैं सभी साठ साल के। यह शेर द
िखा कर उन्हें ख़लील धनतेजवी जी ने साठ का पाठ पढ़ाया था। सो, डाँट की आशंका पर उन्हें ही सामने कर दिया। द्विवेदी जी के सुपुत्र वैभव भी अपनी शुभकामनाएँ लिए मोबाईल पर हाजिर हुए। उधर नाईट शिफ्ट में मोबाईल ने बताया कि सुरेश शर्मा जी अपनी शुभकामनाएँ लिए ईमेल पर मौज़ूद हैं। 12 बजे तारीख बदलते ही संजीत त्रिपाठी, आवारा-बंजारा जैसे घूमते हुए ज़िंदगी के मेले में पहुँच गए और वहाँ जा कर हैप्पी वाला बड्डे का संदेश दिया फिर वापस आ कर जीते रहने का आशीर्वाद, मेल में दिया। प्रायमरी के मास्टर प्रवीण त्रिवेदी जी आज सुबह मेल में बधाई पहुँचा गए लेकिन किसी आशंका के चलते मोबाईल पर भी हैप्पी बर्थडे कह ही दिए। थोड़ी देर बाद निर्मला कपिला जी 2-3 ब्लॉग्स पर बधाई दे चुकने के बावज़ूद अपना स्नेह बरसाती ईमेल पर आईं। बिटिया ने खबर दी कि गूगल बाबा भी आपको बधाई दे रहे हैं।
कुमारेन्द्र सेंगर जी दोपहर को बधाई देने आए तो धीरे से इंटरनेट देव की शरण में विचरण किए जाने पर पाया कि कल आधी रात को बारह बजने के पहले इरफान खान जी ने सारी परम्परायें तोड़, मुझ जैसे अदना का कैरीकैचर बना कर अपने ब्लॉग पर ज़र्रानवाज़ी करते, इतनी सी बात बताते हुए खूबसूरत शब्दों से बधाईनुमा ईदी दे डाली है।
साथियों के विभिन्न ब्लॉगों पर अब तक आ रही ढ़ेरों बधाईयों को भी देखूँ तो रह रह कर मन भर आता है आपकी मुहब्बत देख। अब कोई बताए कि जनमदिन पर इन देखे-अनदेखे साथियों के जोश भरे स्नेह से मुझ जैसा मानव, भावुक नहीं होगा क्या?
जिन ब्लॉगर साथियों ने पास पड़ोस में कुछ भी कभी भी बस इतनी सी बात है कह एक लोहार की भांति, नुक्कड़ खुश हुया का धमाल मचाते हुए हुए मुझे अपनी विशिष्ट शैली में, टिप्पणीकर्तायों के साथ याद किया उनका तहेदिल से शुक्रिया। तमाम संचार माध्यमों पर पधारे आप सभी आत्मीय जाने-अनजाने साथियों का आभार जो आपने मुझ नादान को इतना मान दिया। स्नेह बनाए रखिएगा। यथासमय पार्टी ड्यू रही!
जनमदिन पर आपके स्नेह ने मुझे भावुक कर दिया
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23 thoughts on “जनमदिन पर आपके स्नेह ने मुझे भावुक कर दिया

  1. इतनी सारी बधाइयों के बाद तो पार्टी बकाया हो गई है। आप की ओर नहीं हमारी ओर, पर कोटा आ कर लेनी पड़ेगी।

  2. लो अब तक मैं ही सब कुछ जैसा का तैसा लिख डालता था….अब आपकी बारी आयी तो आपने भी…हा….हा…हा….उस दिन जब रात को मैंने आपको फ़ोन किया तो …जानते हैं…जालंधर नेटवर्क की क्या टिप्पणी थी…लो अब तक तो ये लैपटौप ही मुई सौतन की तरह थी…अब पाबला जी भी ……इतनी खुशी और चहक तो मैंने आपको अपने बर्थ डे पर भी नहीं पाया….खैर..काम की बात ..पार्टी ड्यू है..एक दम नोट कर ली है…

  3. हमने बधाई भेजी थी। पता नहीं किस साजिश से आप तक पहुंची नहीं। आप तो अपनी सितम्बरी पार्टी के हो। इसीलिये कलाकार हैं। हमारी जन्मदिन की हुई बधाईयां एडजस्ट कर लीजिये। बाकी हिसाब-किताब फ़िर होगा कभी। बिलेटेड-सिलेटड नहीं। उसी दिन एडजस्ट करिये वर्ना दो दिन पहले की किसी पोस्ट में एडजस्ट करके शुक्रिया का तगादा ठोंक देंगे। 🙂

  4. पावला साब मैं भी उमर के ४२ पड़ाव पे हूँ ऐसा जन्मदिन मैंने अपनी जिन्दगी में नहीं देखा जी,
    जो सारी दुनिया ने मनाया हो,शायद ही किसी का मना हो,सब ने अपने अपने अंदाज में शुभकामनायें दी,ये हमारे भारत की अनेकता में एकता हैं,जो हमें आपस में फेविकोल से जोड़ती हैं,ऐसा जन्म दिन तो किसी दुनिया के रास्ट्रपति का यहाँ तक ओबामा का भी नहीं मना होगा.
    मजा आ गया,
    लै लो मजा जिन्दगी दे मेले दा
    पता नई हुंदा आण वाले वेल्ले दा

  5. चलिये अब पार्टी तो पक्की हो गई, लेकिन मजा आ गया आज की पोस्ट पढ कर. धन्यवाद

  6. पाबला जी, यही तो है एक विस्तृत परिवार के साथ रहने का अहसास!!

    कितना अच्छा लगता है जब सब सुख दुख में शरीक होते हैं.

  7. देर आयद दुरुस्त आयद:)
    इन्टरनेट डाउन था तो तीन दिन तक यहां क्या चल रहा है उसकी खबर ही नहीं थी। अब देखा तो आपका बड्डॆ तो बीत गया … चलिए… देर से ही सही हमारा नाम भी आपके शुभचिंतकों में जोड़ लीजिए:)

    जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां॥

    पुन्श्च: गुलाब जामुन में थोडा शीरा कम रखा कीजिए.. कपडे गीले हो गए:-)

  8. पाबला जी, ऎसे मौकों पर ही तो एक परिवार होने का अहसास होता है!!
    आपकी भेजी आईस्क्रीम बोहत मजेदार लगी,लेकिन थोडी कम थी:))
    खैर कोई बात नहीं बाकी की कसर आपके यहाँ आकर निकाल लेंगें:)

  9. पाबला जी फेस बुक पर आपके लिये गिफ्ट ढूढने के चक्कर मे अपना तो रत जगा हो गया लेकिन आपका बर्थ डे मेरे भीतर कहीं दबे छुपे बैठे व्यंगकार को जगा गया । मेरी पोस्ट बल्ले बल्ले पर ढेरों बधाईयाँ आईं आपके लिये और मैने "पैसे पप्पू देगा " के अन्दाज़ में सबसे कहा " धन्यवाद पाबला जी देंगे " अपने आप को को भी एक मेल मैने भेज दी " पार्टी पाबला जी देंगे " सो अब अपनी इज़्ज़त तो रखनी ही पड़ेगी । ठीक है ..मिलते हैं ब्रेक के मतलब नवरात्र के बाद ।

  10. यही तो है अपना गांव
    जहां ठिठकते नहीं पांव

    मिलती है अपनों की छांव
    जहां ठिठकते हैं अब पांव

    इस पोस्‍ट को पढ़कर कवि मन मचल उठा और दो-दो पंक्तियां उपर और आंखों से खुशी की, भावुकता की चार-चार बूंदें ढलक पड़ीं हैं। ऐसा जीवंत पाठ, पल पल हर पल का वर्णन, जन्‍म के पहले दिन ही।

    जय हो।

  11. पाबला जी, दिस इस ऩॉट फेयर…एलियंस से चुपके चुपके शरद कोकास जी की पोस्ट के ज़रिए सबसे पहला गिफ्ट दिलवाया हमने और हमे ही भूल गए वो भी… बीएसपी एंड केडीएस फ्री स्माइल्स कंपनी के अपने पार्टनर को…ठीक है पाबलाजी ई-मेल, फोन पर बधाई देने वालों का तो एक-एक का नाम याद रखा…और हम शरदजी की पोस्ट पर आपको सबसे पहला कमेंट कर खुद को ओंझ ई फन्ने खां समझ रहे थे…चलो देर आए दुरुस्त आए…हुण त्वाडे लई ऐ ई ओ सज़ा वे कि इस ई-मेल पते sehgalkd@gmail.com ते फौरन अपना गुनाह कबूल करो…ताकि अगली वार असी वी सीधे ई-मेल या फोन ते ही बधाई देइए…हां, पार्टी मैं अपने आप ही फाइव स्टार विच जाकर ले लेई सी…बिल संभाल कर रख्या वे…दसो केड़े अड्रैस ते भेजना वे….

  12. अभीभूत हूं आपकी इस धन्यवाद पोस्ट को लिखने की स्टायल से, बहुत शुभकामनाएं. आप इसी तरह हंसते खिलखिलाते रहें.

    रामराम.

  13. बीएसपी एंड केडीएस फ्री स्माइल्स कंपनी के अपने पार्टनर खुशदीप जी

    अंदेशा तो मुझे था कि ई-मेल, फोन पर बधाई देने वालों का नाम लिख रहा हूँ तो विभिन्न ब्लॉगों पर (अब तक आए) 99 शुभेच्छुयों की बधाईयों का जिक्र न किया जाना एक गुनाह बन सकता है।

    लेकिन उन उत्साही मित्रों के टिप्पणीकर्तायों पर धावा बोल कर उठा लाना मुझे एक तरह की धृष्टता लगी। सो वहीं सभी को विनम्रता पूर्वक धन्यवाद दे आया।

    इसके बाद भी अगर सजा का हकदार समझें तो मेरा सर झुका हुया है।

    (निर्मल सत्य)

  14. भाई पाबला जी, हम भी एक ईकार्ड भेजना चाहते थे आपको पर आपके प्रोफाइल पर आपके ईमेल को पच्चीसों बार क्लिकियाने के बावजूद वह खुला ही नहीं। आज आपका पोस्ट पढ़कर फिर एक बार आपके प्रोफाइल में आपके ईमेल को क्लिक करके देखा पर वही टाँय टाँय फिस्स।

    हमें तो मायूस कर दिया आपने।

  15. पाब्ला जी हम तो सिर्फ़ क्षमा ही मांग सकते है,एक तो हमे पता नही था और दूसरे नेट भी बंद पड़ा था और इस्लिये पता ही नही चल पाया।दूसरी बात आपने फ़ोन पर मुझसे बात भी की लेकिन बताया तक़ नही ये तो आपकी सरासर नाइंसाफ़ी रही।शायद आपको ड़र रहा होगा कि मै भिलाई ना आ जाऊं,खैर देर से सही जन्म दिन की बधाई हो।

  16. आप इस परिवार में सबों के जन्‍मदिन मनाने का नया कांसेप्‍ट लेकर आए हैं .. भला हम आपको आपके ही जन्‍मदिन पर भूल सकते हैं .. ब्‍लागर परिवार की बातें पढकर अच्‍छा लगा .. वरना कभी कभी तो मन बिल्‍कुल उचाट सा हो जाता है !!

  17. सर आप इतने अच्छे और आपके विचार शांत नदी के शीतल स्पर्श की तरह है इसलिए ऐसे स्नेहिल इंसान को शुभकामनाएं देने का मौका कोई शायद ही छोड़ना चाहेगा।

  18. अब बताइए हम तो पिछड़ गए न. सोमवार को छुट्टी थी तो हमने पूरे दिन सोकर ही बिता दिया. एक बार भी ऑनलाइन ना हुए. पर अब अगले साल से नहीं छोडेंगे 🙂 और पार्टी तो हम लेंगे ही, आप तो मुंबई आ ही रहे हैं अक्टूबर में. हम नहीं छोड़ने वाले 🙂

  19. ब्लागजगत का यह व्यवहार चमत्कृत कर देता है!
    बधाई पाबला जी!

  20. बॉस , बधाईयां तो ठीक है वो आपके काम की थी, थोक के भाव में मिली।
    लेकिन पार्टी जो हमारे काम की थी, वो किधर है?

    😉

  21. अपनी इस पोस्ट से आप ने 'सेंटी' तो कर ही दिया है , डरते है कहीं 'मेंटल' भी ना हो जाएँ !!
    KEEP SMILING,It looks good on you.

  22. पाबला जी!!

    सुपर बिलेटेड बधाई फिर से!!!!!

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