टूटा हुआ खिलौना खुद ही मरहम पट्टी कर पहले जैसा जुड़ जाएगा

देखने सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन कल्पना की जा सकने वाली बात को साकार कर दिखाया है विज्ञान ने. दरअसल वैज्ञानिकों ने अब एक ऎसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे टूटे खिलौनों, चश्मों के टुकड़े जोड़ने के लिए किसी तरह के पदार्थ की ज़रुरत नहीं होगी. न कोई क्विक्फिक्स ना कोई एरलडाईट! अब इस नई तकनीक से प्लास्टिक के टूटे टुकड़े खुद ही अपने आप जुड़ जायेंगे.

वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस अलग तरह का प्लास्टिक टूटने या कटने की स्थिति में स्वयं जुड़ जाएगा। गोया खुद ही अपना इलाज कर रहा हो

इस सुपर मॉलीक्यूलर पॉलीमर को नीदरलैंड की इंदहोवन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और एक रसायन कंपनी एक्जोनोबल ने मिल कर तैयार किया है। इसे नाम दिया गया है सुपरा पोलिक्स। यह पानी की रासायनिक संरचना की तरह काम करता है. जो हाइड्रोजन बौन्डिंग से संभव होता है

 

self-healing-plastic

सुपरा पोलिक्स को वैज्ञानिकों ने ढेरों हाइड्रोजन बांड से तैयार किया है। ये हाइड्रोजन बांड प्लास्टिक या पॉलीमर के अणुओं के बीच में रहते हैं। इस तरह यह प्लास्टिक के अन्य प्रकार की तरह मजबूत बने रहते हैं, लेकिन इन्हें आपस में जुड़ने के लिए किसी तरह की रासायनिक क्रिया की जरूरत नहीं पड़ती।

 


(तकनीक का प्रदर्शन करता 47 सेकेण्ड का वीडियो )

इस पदार्थ से ऐसे खिलौने तैयार किए जा सकेंगे, जो टूटने पर खुद ही आसानी से जुड़े जाएंगे। इनका इस्तेमाल कार का ढांचा बनाने में बनाने में हो सकेगा ताकि किसी दुर्घटना के दौरान होने वाली टूट-फूट होने पर आने वाले खर्च से बचा जा सकेगा। हालांकि अभी वैज्ञानिक इसकी मदद से खरोंच न पड़ने वाला पदार्थ बनाने पर काम कर रहे हैं। इस पदार्थ का उपयोग वाहनों, लैपटॉप और अन्य उपकरणों को बनाने में किया जा सकता है।
मैं तो अब, आने वाले समय में किसी कल्पनाशील विज्ञान वाली फ़िल्म के दृश्यों को साकार होते देख रहा

है ना हैरानगी की बात?

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14 Thoughts to “टूटा हुआ खिलौना खुद ही मरहम पट्टी कर पहले जैसा जुड़ जाएगा”

  1. anitakumar

    काश ऐसी कोई तकनीक आदमी के शरीर का इलाज करने के लिए भी इजाद हो जाए। बिमार आदमी रात को सोये और सुबह तक एकदम भला चंगा उठे, रात भर में शरीर खुद को रिपेअर कर ले…॥

    1. Distort

      कुदरत ने मानव शरीर को ऐसा ही बनाया है किंतु अन्य कारकों ने उसे वैसा रहने ना दिया

  2. वाह गजब की तकनीक है ।

    1. Smile

      जहाँ चाह वहाँ राह

  3. कोई इस तकनीक से टूटे अंग भी जोड़ दें।

    1. Pleasure

      एक दिन ऐसा भी हो ही जाएगा

  4. वाह। मजेदार तकनीक।

    बढिया जानकारी।

  5. तकनीक को बढते देख खुशी भी होती है और भय भी यह सोंचकर कि ये सारी तकनीकें बढती हुई कहीं मनुष्‍य को निकम्‍मा न बना दे !!

    1. Sad

      किसी भी चीज का दुरूपयोग ज़्यादा हताश करता है

  6. बेहद शानदार गुरु जी।

  7. तकनीक क्या क्या कमाल दिखाती है !

  8. ▬● अच्छा लगा आपकी पोस्ट को देखकर… साथ ही आपका ब्लॉग देखकर भी अच्छा लगा… काफी मेहनत है इसमें आपकी…
    नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आपके लिए सपरिवार शुभकामनायें…

    समय निकालकर मेरे ब्लॉग्स की तरफ भी आयें तो मुझे बेहद खुशी होगी…
    [1] Gaane Anjaane | A Music Library (Bhoole Din, Bisri Yaaden..)
    [2] Meri Lekhani, Mere Vichar..
    .

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