डेटॉल के गरारे !

आज संध्या, फेसबुक पर डॉ आराधना चतुर्वेदी की गले में इन्फेक्शन वाली समस्या बताता एक स्टेट्स अपडेट देखा तो मुझे कई वर्षों पहले हुया एक दिलचस्प वाकया याद आ गया!

ऐसे ही एक दिन गले में संक्रमण संबंधित अपनी समस्या के लिए अपनी कंपनी द्वारा संचालित अस्पताल में नाक – कान – गला विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ देवांगन के पास पहुंचा. वे आजकल सेवानिवृत्त हो भिलाई के श्रेयस कॉम्प्लेक्स में परामर्श केंद्र चला रहे.

पिता जी से डॉ सा’ब का बहुत पुराना परिचय है. मैं उन्हें अंकल ही पुकारता हूँ. उन्होंने मेरे मुंह को दरियाई घोड़े जैसे खुलवा कर टॉर्च मार कर गला देखा. निराशा में सर हिलाया. कुछ दवाईयां लिखी और कुर्सी पर पीछे की ओर टिकते हुए कहा “सुबह शाम, दोनों समय डेटॉल के गरारे भी कर लेना गुनगुने पानी के साथ.

डेटॉल के गरारे . मैं जैसे आसमान से गिरा. मन ही मन सोचा अजीब डॉक्टर है ये अंकल भी. डेटॉल के गरारे? बाप रे! लगता है अंकल की उम्र हो गई अब! मैंने एक बार फिर पूछा ‘अंकल, डेटॉल के गरारे?’ उन्होंने हाँ कहते हुए अगले रोगी के लिए घंटी बजवा दी और विदा करते हुए दिलासा दी कि एकाध दिन में आराम हो जाएगा.

घर लौटते हुए मुझे श्रीलाल शुक्ल रचित ‘राग दरबारी’ याद आ रही थी. उसमे सुदूर क्षेत्रों में दीवारों पर दिखते एक दवा के विज्ञापन का जिक्र है जिसे घाव पर लगायो तो घाव ठीक, पी लो तो गैस की समस्या हल, माथे पर लगा लो तो सरदर्द गायब! लेखक ने कटाक्ष करते हुए उस दवा निर्माता को नोबेल पुरस्कार ना मिलने पर निराशा व्यक्त की है. कुछ ऐसा ही मुझे उस समय डेटॉल के बारे में लग रहा था.

डेटॉल की शीशी पर दिए गए निर्देश

घर पहुँचते ही सबसे पहले तो डेटॉल की शीशी उठाई और गौर से उसके लेबल को पढ़ने लगा और हैरान रह गया. कमबख्त साफ़ साफ़ लिखा था (आज भी लिखा आता है) गरारे करने की मात्रा का निर्देश. मरता क्या ना करता. गिलास में गरम पानी लिया डेटॉल की ज़रूरी मात्रा डाली. लेकिन मुंह के पास ले जाते ही उसकी गंध के मारे हिम्मत ही नहीं हुई होंठों से लगाने की. आखिर नहीं कर पाया गरारे डेटॉल के

कुछ ऐसा ही हुया तब, जब मेरा हर्निया का ऑपरेशन हुया था और मलहम के रूप में रोजाना बेटाडीन लगाई जाती थी. महीनों बाद इन्ही डॉ देवांगन ने गले की समस्या के चलते जब बेटाडीन के गरारे करने की सलाह दी तो मैं बिदक गया. वो तो फिर उन्होंने मेरे पूछे जाने पर बताया कि मलहम और गरारे के लिए अलग अलग बेटाडीन आती है.

मैंने तो नहीं किये ये अनोखे गरारे, लेकिन आप कर पायेंगे ?

डेटॉल के गरारे !
लेख का मूल्यांकन करें
Print Friendly, PDF & Email

Related posts

19 Thoughts to “डेटॉल के गरारे !”

  1. ऐसे अनोखे गरारों से तो भगवान् बचाएं.
    हां मीठा मीठा लिस्तारीन से गरारे करने को कहा जाए तो मंजूर हैं.
    बहुत बढ़िया लिखा आपने.
    धन्यवाद.
    चन्द्र कुमार सोनी
    http://www.chanderksoni.com

  2. हा हा हा कैसे होंगे
    टिप्पणीकर्ता Girish Billore ने हाल ही में लिखा है: इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुतMy Profile

  3. गरारे तो मैंने भी नहीं किए है आज तक … जरूरत ही नहीं पड़ी हाँ जब नई नई दाड़ी बनाने की शुरुआत की थी तब जरूर शेव के लिए पानी मे डाला करता था … 😉
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: ‘बीटिंग द रिट्रीट’My Profile

  4. भाई इस पर तो कभी ध्यान ही नही गया और ना ही किसी डाक्टर से ऐसा परामर्श मिला

  5. वाह रोचक प्रसंग। पहले तो मुझे लगा डॉ॰ साहब ने आपसे परिचय के चलते मजाक किया होगा पर जब विदा करने पर भी उन्होंने कुछ और नहीं कहा तो लगा कि वाकयी इसके गरारे होते होंगे।

  6. Anupam Singh

    डेटाल से गरारा किया जा सकता है, आप के लेख से ही पता चला। सालों से डेटाल की शीशी खरीदने के बाद भी रेपर पर कभी ध्यान ही नहीं दिया था।

  7. अरे, आप चौंके. हम तो बचपन से सुनते आये हैं. डिटॉल के गरारे भी और बीटाडीन के भी 🙂

  8. समझदार वही जो दूसरे की नादानी से अकल ले। आपने तो समझदारी बरती। आपकी समझदारी से समझदारी लेना और बेहतर रहेगा।

  9. शीशी पे ये नहीं लिखा कि सब्जी में कितनी बंूदें डालनी हैं? 🙂

  10. हम भी नहीं कर पायेंगे..

  11. t s daral

    बीटाडीन माउथ वाश एक मान्यता प्राप्त दवा है जिसका इस्तेमाल गार्गल्स के लिए किया जाता है। इसमें आयोडीन की मात्रा 1-2 % होती है जो कि त्वचा पर इस्तेमाल किये जाने वाले आयोडीन ( 5-10%) से अपेक्षाकृत काफी कम होती है। दोनों ही दशा में यह एंटीसेप्टिक का काम करती है। लेकिन डिटोल तो बाहरी सतह के लिए ही बना है। म्युकोसा में इस्तेमाल करने से म्युकोसा के जलने का खतरा रहता है।

  12. आगे से अब लोगों को यही राय देंगे 🙂
    टिप्पणीकर्ता रतन सिंह शेखावत ने हाल ही में लिखा है: Delhi Police ladies Recruitment 2013My Profile

  13. मैं तो डॉ. साब पर ही नाराज़ हो रहा था

  14. यह तो हमें भी पहली बार ही पता चला है ।

  15. हमारे एक सम्बन्धी डेटाल के गरारे लेते हैं, हमें लगता था कि कितना गलत करते हैं, उनके गरारे छुड़वा दिये और आज!
    टिप्पणीकर्ता indian citizen ने हाल ही में लिखा है: सरोकार की पत्रकारिता और वेब-साइट पर तस्वीरेंMy Profile

  16. कर क्या लेंगें? हमने तो कर रखें हैं. अक्सर यह अजीब सी बात लगती है पर है फ़ायदेमंद.

    रामराम.
    टिप्पणीकर्ता ताऊ रामपुरिया ने हाल ही में लिखा है: एक गौरैया, फ़ुदकती थी यहां, अब कहां हैMy Profile

  17. shikha varshney

    पहली बार ही सुने दोनों ही तरह के गरारे ..

  18. वाह, अच्छा है !
    टिप्पणीकर्ता abeautyfulheart ने हाल ही में लिखा है: खूबसूरत दक्षिणी अभिनेत्रियाँMy Profile

Leave a Comment


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
[+] Zaazu Emoticons