दीवारों से बात करता मैं दीवाना

कल की दुनिया

बचपन से सुनते-पढ़ते आया हूँ कि जब दो व्यक्ति बात कर रहे हों और उनमें से एक व्यक्ति दूसरे की कतई न सुने, तो दूसरा कहता है, ‘क्या मैं दीवारों से बात कर रहा हूं?’ या फिर किसी कमरे में कोई अकेले ही अपने आप से बात करे तो भी देखने वाले कहते हैं ‘दीवाना हो गया है, दीवारों से बात कर रहा!

कोई बिलकुल ही आपकी बात ना सुने, तो बंदा कहता है कि इससे बात करने से बेहतर है दीवार से सर फोड़ लिया जाए. दीवारों के कान होने की बात भी तब उठती है जब यह शुबहा होता है कहीं कोई आपकी बात ना सुन ले.

बोलचाल की भाषा में आजकल एक और दीवार मशहूर है -फेसबुक वाल. इस नई तकनीक वाली दीवार -फेसबुक वाल को मजाकिया तौर पर जेल की दीवार के समकक्ष भी कहा जाता है

लेकिन अब लगता है इन सब बातों का अर्थ बदल जाएगा क्योंकि जिस दीवार की बात मैं करने वाला हूँ वह इंटरनेट के आदी लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। दिन-रात ऑनलाइन रहने वाले लोगों के लिए अब घर की सारी दीवारें ही किसी स्क्रीन की तरह ही काम करेंगी। इन दीवारों पर आप ऑनलाइन स्क्रीन की तरह काम कर सकते हैं। इस वॉल पर फेसबुक अपडेट से लेकर आदमकद आकार में मित्रों से लाइव चैटिंग भी हो सकेगी.

दीवार पर उभरे दोस्त से बात करती युवती
दीवार पर उभरे दोस्त से बात करती युवती

एक स्पैनिश डिजाइन एजेंसी थिंक बिग फैक्टरी

के निदेशक क्यूरस मॉन्स के अनुसार इस ओपनआर्च प्रणाली का हार्डवेयर पूरी तरह से बनकर तैयार है लेकिन सॉफ्टवेयर पर चालीस प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।

अपने घर की इस डिजिटल दीवार को ऑनलाइन गतिविधियों के लिए आप कहीं से भी नियंत्रित कर सकते हैं। बोल कर या किसी शारीरिक गतिविधि से आप अपने निर्देशों को नियंत्रित कर सकते हैं। घर की हर चीज को संचार माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इस सबको चलाने के लिए घर में एक व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी होगी।

घर के किसी भी कोने से स्काइप को शुरू करते ही आप इस तकनीक की मदद से हाथ के इशारे से घर की बत्तियां जला-बुझा सकते हैं। किसी घरेलू उपकरण को ऑन कर सकते हैं और संगीत भी सुन सकते हैं।

(इस तकनीक से बदले हुए आम जीवन की झलक दिखलाता एक वीडियो)

क्यूरस का कहना है कि ऐसा घर दिखने में कुछ अलग नहीं होगा। लेकिन तकनीक की मदद से दीवारें वो काम करेंगी जो आप अपने लैपटॉप, कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर करते हैं। आप अपने कमरे में दीवारों पर सोशल नेटवर्किग साइट से लेकर मैग्जीन सर्फ करने से लेकर वीडियो गेम तक खेल सकते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट के किनेक्ट कैमरे के जरिए प्रोटोटाइप तकनीक व्यक्ति की गतिविधियों को कैद करती है और उसके हिसाब से ही घर के अंदर दिशा-निर्देशों का संचार करती है। इस प्रणाली में मौजूदा बाज़ार में उपलब्ध प्रोजेक्टरों और सेंसरों की मदद से दीवार को स्क्रीन में परिवर्तित किया जाएगा।

कहा जा रहा कि इस तकनीक का मूल उद्देश्य की-बोर्ड और माऊस पर निर्भरता समाप्त करना है. लेकिन मुझे याद आ रहा कि आज भी भारत के कई प्राचीन स्थानों पर किसी एक स्थान पर फुसफुसा कर बात की जाये तो दूर कहीं अन्य स्थान पर वह उतने ही सफाई से सुनाई देता है जैसे कि कोई आप के कान में फुसफुसा रहा हो. सामान्य आवाज में बोलने की जरूरत नहीं है. कहीं उस समय ऎसी कोई उन्नत तकनीक थी?

concept-house-bspabla

कहा जाता है कि दीवार से बात करने के कई लाभ हैं। दीवार न बुरा मानेगी, न खुश होगी। किसी मनुष्य से बात करें, तो वह जवाब देगा। उसे चोट लगे, तो आपको चोट पहुंचाने का इंतजार करेगा। दीवार के साथ वह खतरा नहीं। लेकिन इस दीवार के आने से भई मैं तो बहुत डर रहा. कभी किसी ने मुझे ऐसे किसी दीवार से बात करते देख लिया तो दीवाना तो ठहरा ही देगा खामखाह

आपका क्या होगा ज़नाबे-आली?

दीवारों से बात करता मैं दीवाना
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16 thoughts on “दीवारों से बात करता मैं दीवाना

  1. …जब मैं बात करती हूँ और कोई नहीं सुनता तब मै कहती हूँ…’ क्या मैं भूत हूँ जो मेरी आवाज किसी के कानों तक नहीं पहुँच रही?…यह तो हुआ मज़ाक!

    …आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है पाबाला जी!…हार्दिक आभार!

  2. तकनीक जरूर उन्नत हो गई है लेकिन मन की दूरियां बहुत बढ़ गई है। बिल्कुल पास में मोबाइल फोन है दोस्तों के नंबर हैं लेकिन बात करने की इच्छा नहीं, अजीब सी स्थिति है।

  3. डरने की कोई बात नहीं तब दीवार दीवार नहीं कम्प्यूटर स्क्रीन होगी।

  4. दिलचस्प जानकारी।
    लेकिन पड़ोसी के साथ सांझी दीवार का क्या करेंगे ? 🙂

  5. आश्चर्यजनक !
    हैदराबाद के गोलकुंडा फोर्ट में फुसफुसाने पर या ताली बजने पर दूर तक सुने जाने की तकनीक है ..

  6. हे भगवान, अगले दस सालों में पता नहीं और क्या-क्या हो जाए !

  7. टैक्लॉलॉजी के तेजी से बढते कदम िन्सान को अंत में अकेला बना कर छोडेंगे । फिर तो दीवाना बनना ही है ।

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