क्या आपने खाने पीने की नकली दुनिया में सैर की है?

‘ऊपर वाले’ सुपर प्रोग्रामर ने इंसान के दिमाग में ना जाने कैसी प्रोग्रामिंग की है कि कोई बात सामने आते ही उससे जुड़े अनेकों मुद्दे यादें मसले सामने दिखने लगते हैं. वो भी अक्सर कोई अच्छे नहीं, बुरे और नकारात्मक ख्यालों के साथ.

ऐसा ही तब हुआ जब हालिया खबर आई चीन के साथ अरबों खरबों के व्यापार समझौते की. चीन के सस्ते सामान का ख्याल करते मुझे याद आया चीन में खाने पीने की वस्तुयों वाली नकली दुनिया पर आधारित एक अधूरा लेख. इसे तब लिखा था जब चीन में नकली दूध पाउडर का मामला उजागर हुया.

और फिर आज सुबह जब मित्र मोहम्मद उमर कैरानवी ने एक वीडियो लिंक भेजी तो मैं दोबारा लिखने बैठ गया खाने पीने के सामानों वाली नकली दुनिया की बातें.

मैं मिलावट की बात नहीं कर रहा! नकली माने कि नकली. ऐसा कुछ, जो दिखने में हूबहू असल जैसा ही दिखे, महसूस हो. लेकिन असल जैसा उसमें ना कुछ हो ना उसका असर हो. वह नकली माल महज कुछ इधर उधर की चीजों से बना हो लेकिन असल का नामोनिशान ना हो.

इस दुनिया में नकली सामानों की भरमार है. नकली बाबा, नकली घड़ी, नकली मूर्तियाँ, नकली सिक्के, नकली गहने, नकली आईफोन, नकली करेंसी नोट, नकली पेन ड्राइव, नकली दवाएं! क्या नहीं है यहाँ!! लेकिन जब बात खाने पीने की आ जाए तो आप कल्पना नहीं कर सकते कि क्या कुछ हो रहा है.

यह जानकारियाँ आपको भयभीत कर सकती है, विश्वास खो सकता है आपका. इसलिए आगे पढ़ने के लिए बढ़ें तो मन थोड़ा मज़बूत कर लें.

खाने पीने की नकली दुनिया में भारत

खाद्य पदार्थों के मामले में मेरा सबसे पहला सामना हुआ था नकली दूध से. मैंने फटी फटी आँखों से पढ़ा कि कैसे ग्लूकोज पाउडर में शौचालय साफ करने वाला डिटरजेंट, खेतों में डाली जाने वाली यूरिया खाद, साइट्रिक अम्ल, हाइड्रोजन पराक्साइड का मिश्रण कर दूध जैसा दिखने वाला द्रव बनाया जाता है और दूध का ही स्वाद लाने के लिए सुगंधित पदार्थ मिला देते हैं.

जाँच किये जाने पर यह कारनामा पकड़ में ना आए इसलिए वसा की मात्रा के लिए वनस्पति घी को मिलाया जाता है. वसा इतनी रखी जाती है कि असली दूध भी नकली के सामने फेल हो जाए. इसी से फिर हो जाता है मक्खन, मलाई और दही भी तैयार.

मध्‍यप्रदेश में मुरैना जिले की ऐसी ही एक खबर का लिंक देखिये यहाँ क्लिक कर

फिर एक बार मेरा सामना हुआ नकली पनीर से. छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे महाराष्ट्र के एक ढाबे में जब हम दोस्तों ने पनीर बटर मसाला मंगवाया तो एक मित्र को शक हुआ पनीर को तोड़ते चबाते. आराम से पूछने पर नहीं लेकिन धमकी देने पर माफी मांगते बताया गया कि ये पेंसिल का लिखा मिटाने वाली रबर है जिसको एक ‘सलूशन’ में रात भर डुबो कर पनीर जैसा मुलायम बनाया जाता है.

बाद में खबरें आईं कि ये कुछ ‘अच्छे’ रेस्टारेंट तो दीवारों पर किये जाने वाले पेंट, कॉस्मेटिक, चमड़े के रसायन, प्लास्टिक, एल्युमीनियम वर्क, माचिस, चमकीले कागज़ जैसे सामान बनाने में उपयोग होने वाले Casein जैसे पदार्थ को भी पनीर जैसा बना कर परोसते हैं.

Casein के दुर्भावनापूर्व प्रयोग के बारे में यह लिंक क्लिक कीजिए

फिर तो उसके बाद नकली खोवा, नकली घी की ख़बरों से कई बार दो चार हुआ. जो दिखते तो हूबहू वैसे ही हैं लेकिन वो है नहीं

पत्ता गोभी की नकली दुनिया

आइये अब चला जाए चीन की ओर. करीब दो साल पहले मुझे एक ऐसा वीडियो मिला जिसे देखते ही सिट्टी पिट्टी गुम हो गई. वह वीडियो था कुछ रसायनों को मिला कर बनाई गई हूबहू पता गोभी.

वही पत्‍ता गोभी जिसे हम बंद गोभी के नाम से भी जानते हैं, जिसमें विटामिन, लौह तत्व और पोटेशियम भरपूर मात्रा में होते है. ऐसे कई लाभदायक तत्‍व भी होते है जो कैंसर से बचाव करने में सहायक होते है

लेकिन चीन में बनाई गई कृत्रिम पता गोभी से ऐसा कुछ नहीं बल्कि कैंसर होने का खतरा पैदा हो जाता है.

नकली दुनिया वाली पत्ता गोभी

रसायनों को मिला कर यह कृत्रिम पत्ता गोभी कैसे बनाई जाते है, इसका प्रदर्शन ऊपर दिए वीडिओ में किया गया है. जिसे वहीँ क्लिक कर देखा जा सकता है.

नकली दुनिया में है मुर्गी का अंडा

कम लागत और अधिक मुनाफे के लिए इंसान क्या कुछ कर गुजरता है यह साबित होता है नकली मुर्गी के अंडे से.

एक सांचे में मोम, कैल्शियम कार्बोनेट, जिलेटिन, बेंज़िक अम्ल जैसी चीजों को मिला कर अंडे का नकली सफेद भाग बनाया जाता है. भूरे शैवाल से निकाला गया Sodium Alginate अंडे के सफेद भाग को मनचाहा लसीलापन गाढ़ापन देता है.

अंडे के नकली पीले भाग के लिए ऐसे ही तत्व इस्तेमाल में लाए जाते हैं जिनमें रंग मिला दिया जाता है

सांचे में एक बार सही आकर आ गया तो फिर पैराफिन मोम, जिप्सम पाउडर और कैल्शियम कार्बोनेट से इसका सटीक खोल बना देते हैं.

नकली दुनिया का अंडा

इस संबंध में ऊपर दिए वीडियो को वहीँ क्लिक करे देखा जा सकता है. कलाकारों का कहना है कि ऐसे ही वे अंगूर भी बढ़िया बना लेते हैं, जो खाए जा सकते हैं.

नकली अंडा बनाने की विधि इस लिंक पर क्लिक कर पढी समझी जा सकती है.

नकली दुनिया का चावल
चीन में खाने पीने के नकली सामानों में वो चावल भी शुमार है जिन्हें आलू, शकरकंद और औद्योगिक कृत्रिम रेसिन को मिला कर बनता है. ऐसी कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह कल्पना नहीं हकीकत है इस दुनिया की.

इस बारे में यह लिंक क्लिक कर जानकारी ली जा सकती है.

नकली दुनिया के चावल

बोलचाल की भाषा में इसे प्लास्टिक चावल कह पुकारा जाता है. इसकी एक टीवी रिपोर्ट देखिये ऊपर दिए गए वीडियो पर क्लिक कर

मलयालम भाषा के अखबार मातृभूमि ने भी अपनी एक वीडियो रिपोर्ट के जरिए बताया है कि यह प्लास्टिक चावल अब केरल सहित भारत के अन्य हिस्सों में भी बिक रहा है.

इसके अलावा भारत में यह नकली चावल बनाने की मशीन बाकायदा विज्ञापन दे कर बेची जा रही है.

ऐसे ही 2010 में दक्षिणी चीन के इलाके में 50 ऐसी फैक्टरियां पकड़ी गई थीं जो सड़े हुए अनाज और जहरीले रसायनों को मिला कर रोजाना 500 टन तक चावल के नूडल्स बनाती थी. AFP आधारित इस खबर की लिंक यहाँ है

नकली दुनिया का चावल भारत में
इस लेख को लिखे जाने के लगभग दो माह बाद यह खबर दिखी 9 जुलाई 2015 को

नकली दुनिया का तेल

पढने में यह बेहद वीभत्स लगता है लेकिन सच्चाई यही है कि खाने पकाने के बाद जो तेल बड़े बड़े होटलों रेस्टारेंट्स के द्वारा फेंक दिया जाता है तेल माफिया इकट्ठा करवा लेता है. फिर इसे रसायनों से साफ़ कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं.

इसे बोलचाल की भाषा में गटर-ऑयल कहा जाता है क्योंकि इसके लिए ना केवल कूड़े में फेंके गए तेल सने पदार्थों को इकट्ठा किया जाता है बल्कि गटर में बहा दिए गए तैरते तेल को भी उठा लिया जाता है.

नकली दुनिया का तेल

यह तेल बनाया कैसे जाता है इसके लिए ऊपर दिए वीडिओ को वहीँ क्लिक कर देखा जा सकता है.

वाशिंगटन पोस्ट तो शीर्षक लगाता है कि उसकी रिपोर्ट पढ़ने देखने के बाद आप सड़क किनारे के ठेलों से खाना बंद कर देंगे. यहाँ क्लिक कर देखिये रिपोर्ट.

बीबीसी हिंदी की एक खबर भी यहाँ क्लिक कर पढ़िए

नकली दुनिया का असीमित आकाश

किस्सा यहीं ख़त्म नहीं होता. सीमेंट भरे अखरोट, गत्ते के कागज़ को कास्टिक सोडा में डुबो कर बनाई नकली बन्स, आटे और गारे को मिला कर बनाया गया काली मिर्च का नकली पाउडर, मेलामाइन से बना दूध पाउडर भी इसी चीन की ईजाद हैं

कहने की कोई ज़रूरत ही नहीं कि इन सब नकली चीजों से कैंसर जैसे बीमारी तो होती ही है, किडनी लीवर आँखें भी स्थायी रूप से खराब होने की संभावना है. स्मृति लोप और लकवा भी इसी की देन हो सकता है.

मैंने यहाँ किसी मिलावट वाली चीज की बात नहीं की है बल्कि प्राकृतिक, असल जैसी नज़र आने वाली कृत्रिम, नकली खाने पीने की बात कही है. ये तो शाकाहारियों की चर्चा हुई है, मांसाहारी वस्तुयों की बात होगी तो हाहाकार ही मचेगा.

क्या इससे पहले आप यह सब जानते थे?

© बी एस पाबला

क्या आपने खाने पीने की नकली दुनिया में सैर की है?
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25 Thoughts to “क्या आपने खाने पीने की नकली दुनिया में सैर की है?”

  1. कमाल की पोस्ट है।
    टिप्पणीकर्ता दिनेशराय द्विवेदी ने हाल ही में लिखा है: क़ायदा-ए-ज़मानत ज़ारी रहेMy Profile

  2. तौबा ….तौबा
    इंसानी खोपड़ी क्या क्या सोच लेती है
    .
    नकली खाद्य पदार्थों का ऐसा नकली संसार
    कैसे और कब तक बचेंगे लोग
    .
    महत्वपूर्ण और सचेत करता आलेख
    आभार
    टिप्पणीकर्ता प्रकाश गोविन्द ने हाल ही में लिखा है: छोटे तिवारी और बोर्ड की परीक्षा 🙂My Profile

    1. Smile
      जानकारी ही बचाव है प्रकाश जी

  3. mayank kumar

    पाबला साब,,,, फोकटिया चुपचाप ब्लॉग पढ़ने की आदत रखने वाला हु… 2 साल पहले एक कमेंट लिया था आपके ब्लॉग पर और आज दूसरा कर रहा हूँ…
    पर कमेंट समस्या बताने के लिए कर रहा हूँ….
    स्मार्टफोन हो या फीचर फोन…मेरी आदत ओपेरा मिनी और uc ब्राऊज़र से ही ब्लॉग या नेट कंटेंट पढ़ने की रही है ( मासूम 2g यूजर होना वजह है )
    हां तो समस्या ये है की आपका ब्लॉग uc browser mini पर नही खुलता…plz इस समस्या को सही कर दीजिये
    धन्यवाद ।

    1. Pleasure
      चुपके चुपके पढ़ने के लिए आभार मयंक जी

      यूसी ब्राउज़र के लिए इंतज़ाम करता हूँ

  4. क्या इससे पहले आप यह सब जानते थे?

    नहीं

    1. Pleasure

      अब तो जान ही गए हैं ना रमेश जी!

  5. ललित कुमार वर्मा

    पाबला जी , हमेशा की तरह आपके इस नए आलेख ने ना सिर्फ दिल को बल्कि दिमाग को भी छुआ । मिलावट से तो आदमी बच सकता है लेकिन नकली खाद्य पदार्थ तो मानव की जिंदगी और अस्तित्व को ही खतरे में डाल देंगे । सजग कर देने वाले लेख के लिए हमेशा की तरह बधाई और शुभकामनायें

  6. suresh dubey

    जानकारी बहुत अच्छी हे कृपया इसे जाँच करने के घरेलु तरीके की जानकारी भी मिल जाती तो बहुत अच्छा होता

    1. Smile
      मिलावटी चीजों की तो जांच हो जाएगी सुरेश जी
      लेकिन नकली वस्तुओं का तो उपयोग बाद ही पता चल पाता है

  7. Mukesh Pandey

    हे भगवान !!!!!!!!

      1. बहुत अछि जानकारी दी है बी भला साब

  8. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ४२ साल की क़ैद से रिहाई – ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

    1. THANK-YOU
      थैंक्यू शिवम जी

  9. कमाल का लेख और हमेशा की तरह बहुत उपयोगी । और कहने की जरूरत नहीं कि पुरानी सभी पोस्टों के मुकाबले इस लेख को साझा करना बेहद जरूरी है ।
    टिप्पणीकर्ता raj shekhar sharma ने हाल ही में लिखा है: Jupiter Transit in Leo | Horoscope ReadingsMy Profile

    1. Heart
      शुक्रिया राज शेखर जी

  10. वाह ..मुझे तो देख कर ही मुंह में पानी आ गया :)))
    टिप्पणीकर्ता सुमन कपूर ने हाल ही में लिखा है: शबनमी मोतीMy Profile

  11. dj

    दूध घी तेल के बारे में तो सुना था मगर अंडा पनीर चावल और यह तक कि पत्तगोभी भी नकली ??????
    दिमाग का दही हो गया पढ़ कर नकली नहीं असली। किसी को जरुरत हो तो लेजाओ मगर नकली बना कर तो मत बेचो। … . 🙂
    सचेत करता सार्थक आलेख सर धन्यवाद ये सब बताने के लिए।

    1. बी एस पाबला

      Heart
      शुक्रिया दिव्या जी

  12. कमाल की जानकारी , कैसे पहचानेंगे असली और नकली में फर्क ?

    1. Sad
      नंगी आँखों से तो भेद कर पाना मुश्किल है आशा जी

  13. बहुत सार्थक और जागरूक करने वाला लेख सर|

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