पति ने दहेज नहीं माँगा तो नाराज़ दुल्हन आत्महत्या करने चल दी

दशकों पहले, पत्रकारिता का कोर्स करते हुए सबसे पहले पाठ में मुझे खबर की परिभाषा बताई गई कि

“कुता आदमी को काटे यह आम बात है लेकिन आदमी कुत्ते को काटे तो यह खबर है”

यही वाक्य मुझे तब याद आया जब मेरी नज़रों में यह किस्सा आया।

यह तो अक्सर ही सुनने में आता है कि पति या ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग की और इससे जुड़ी कई घटनायों में या तो महिलाओं को मार दिया जाता है या फिर महिलाएं तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेती हैं.

लेकिन वड़ोदरा में कुछ अलग किस्म की घटना सामने आई है। यहाँ एक पत्नी ने पति द्वारा दहेज़ न मांगे जाने पर आत्महत्या करने की कोशिश की।

 

dowry

एक सज्जन, आदित्य पांडे का विवाह लगभग डेढ़ महिने पहले हुआ। आदित्य सेंट्रल एक्साइज में इंस्पेक्टर के पद पर हैं, जबकि नवविवाहिता, जयाबहेन सेन्ट्रल एक्साइज में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। दुल्हन के पिता भी सेंट्रल एक्साइज में ही पदस्थ हैं।

इनके विवाह में ससुराल पक्ष की ओर से दहेज नहीं लिया गया और शादी साधारण तरीके से ही संपन्न हुई थी। लेकिन जयाबहेन को कार का बहुत शौक था इसलिए वह चाहती थी कि पति आदित्य दहेज में कार की मांग करे, लेकिन आदित्य ने इसके लिए मना कर दिया। इसी बात पर गुस्सा होकर जयाबहेन ने लगभग दस जहरीली गोलियां खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अब बताईए यह खबर है कि कुछ और?

पति ने दहेज नहीं माँगा तो नाराज़ दुल्हन आत्महत्या करने चल दी
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25 Thoughts to “पति ने दहेज नहीं माँगा तो नाराज़ दुल्हन आत्महत्या करने चल दी”

  1. ajit gupta

    अक्‍सर देखा गया है कि लड़किया अपने माता-पिता से मांगना या उनसे उपहार लेना जायज मानती हैं और अपना हक भी मानती है। इसी कारण दहेज प्रथा समाप्‍त नहीं हो पाती। हाथी के दांत दिखाने के और होते हैं और खाने के और।

  2. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    हे भगवान! क्या ऐसे लोग कभी बडे होंगे?

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    हे भगवान! क्या ऐसे लोग कभी बडे होंगे?

  4. गगन शर्मा, कुछ अलग सा

    छोटी सी, अनिश्चित जिंदगी, कब क्या हो जाए, ऐसे में कामनाएं पूरी होनी चाहिएं चाहे जैसे भी हों नहीं तो बाद में भटकती आत्मा को कौन संभालेगा ?

  5. गगन शर्मा, कुछ अलग सा

    छोटी सी, अनिश्चित जिंदगी, कब क्या हो जाए, ऐसे में कामनाएं पूरी होनी चाहिएं चाहे जैसे भी हों नहीं तो बाद में भटकती आत्मा को कौन संभालेगा ?

  6. इंदु पुरी

    दहेज के लिए कई कारक जिम्मेदार है.कभी वर पक्ष,कभी वधु पक्ष का समाज क्क दिखाने की इच्छा और कभी…..बेटी को 'देने' का श्रद्धा भाव.
    मेरी बेटी अप्पू के ससुराल वालों ने एक साड़ी में बहु को ले जाने की इच्छा व्यक्त की.यहाँ मैं उनकी बात मान लेती ? कैसे उसे एक साड़ी में विदा कर देती.मैंने जो दिया जेवर,कपड़े ..उसे दहेज कहेंगे?
    मन में शांति है कि बेटी जिस घर में जा रही है उसे दहेज के नाम पर दुखी नही किया जाएगा.हा हा हा
    जयाबहन की गलती नही ,बढते भौतिक वाद ने सपनो को भी विस्तार दे दिया है और लोगों में उन्हें अपने बूते पर पूरा करने के लिए धैर्य नही है.बस उसी का परिणाम ही यह घटना.

  7. Rahul Singh

    घटना की एकांगी प्रस्‍तुति, पूरी बात समझने के लिए अन्‍य पक्षों को जानना जरूरी है.

  8. ePandit

    दहेन न लेने पर एक पत्नी के नाराज होने की घटना का मैं चश्मदीद गवाह हूँ।

  9. रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

    इस घटना को देखकर/पढकर को कह सकते है कि इधर कुआं उधर खाई. बेचारा पति दोनों तरफ मरता है.अब अगर मान लो इसकी पत्नी की मृत्यु हो जाती तब इसके परिजन कहते कि दहेज के लिए तंग किया जाता था. किसी को अपनी बेटी का कसूर दिखाई नहीं देता. इस जीता-जगाता सबूत हैं मेरा केस मेरे बिना किसी प्रकार का दहेज लिए ही कोर्ट मैरिज की थी. मगर दिल्ली पुलिस के अंधे पुलिस अधिकारीयों ने रिश्वत खाकर या सिफारिश से मेरे खिलाफ दिल्ली के मोतीनगर थाने में 13 मई 2010 को धारा 498ए और 406 के तहत केस दर्ज कर रखा है. जिसकी एफ आई आर नं. 138/10 है. अब जांच अधिकारी से लेकर सरकारी वकील और जज तक जमानत देने के लिए पैसों की मांग कर रहे हैं.

  10. वन्दना

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (4-7-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

  11. डॉ टी एस दराल

    हैरानी की कोई बात नहीं । यह तो डिपार्टमेंटल मामला लगता है । ( अगर समझ में आए तो )

  12. ali

    तो क्या शौक में हद से भी ना गुजरें 🙂

  13. Atul Shrivastava

    दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं।
    अजीत जी के विचारों से सहमत।

  14. जाट देवता (संदीप पवाँर)

    ऐसा भी होता है, अगर मर गयी तो, फ़ंसेगा बेचारा पतिदेव

  15. प्रवीण पाण्डेय

    है मन की कमजोरी,
    आशायें हो थोरी।

  16. डॉ. दलसिंगार यादव

    मैंने दहेज़ प्रथा के खिलाफ़ 1984 से 1988 तक काम करता रहा परंतु तब भी यही सच था जो आज है। यह प्रथा नहीं समाप्त हो सकती है क्योंकि सारी सुख सुविधा बिना कमाए और एक बार में ही मिल जाए इसलिए लड़का लड़की कहीं मूक रूप से शामिल होते हैं तो कहीं सक्रिय रूप से। हर माँ बाप इस बात को अच्छी तरह समझता है परंतु कुछ कर नहीं सकता है। अतः आँख मूँदकर बेटी को दहेज़ दें, बेटे की शादी लें या न लें। यदि दहेज़ नहीं लेते हैं तो गाड़ी खुद खरीदकर दे दें। मुझे ऐसा ही करना पड़ा अपने बेटे की शादी में मैंने दहेज़ नही लिया।

  17. vandana

    पढ़े लिखे लोगों में साक्षरता आई है शिक्षा की कमी है बिना विवेक शिक्षा तो केवल अक्षर ज्ञान ही कहलाता है

  18. विष्णु बैरागी

    यह तो केवल एक खबर नहीं, खबरों को पुलिन्‍दा है।

  19. rashmi ravija

    ओह!! ये तो बड़ी अजीब सी खबर सुनायी आपने…

    हालांकि दो बहनों में दहेज़ के नाम पर मन मुटाव अक्सर देखा गया है..एक को ज्यादा मिला..दूसरे को कम…बोझ तो पिता पर ही पड़ा….ये बात उनकी समझ में नहीं आती.

  20. anitakumar

    आज कल लड़का या लड़की हर कोई यही सीख रहा है कि चाहे कैसे भी रास्ते अपनाने पड़ें सपने पूरे होने चाहिएं, मंजिल का महत्त्व है रास्ते का नहीं। साथ ही धैर्य की भी सख्त कमी है।

  21. निर्मला कपिला

    जिस महकमे मे वो काम कर रही है उसकी मर्यादा का ध्यान लडकी नही रखेगी तो कौन रखेगा? हा हा हा। बढिया।

  22. anshumala

    अखबारों में निकली ऐसी खबरों का कोई माई बाप नहीं होता है खबरों का कैसे उलटा पलटा जाता है और चटखारे दार बनाया जाता है मुझे पता है | कुत्ता आदमी को कटे तो खबर नहीं बनती आदमी कुत्ते को कटे तो बड़ी खबर बनती है इस किस्से में भी वही है | फिर संभव है ये भी है की पति ने अपने बचाव में कुछ भी लिखा दिया और खबर देने वालो को तो बस ऐसी ही खबरों का इंतजार होता है | वैसे इस बात में भी कोई दो राय नहीं है की कुछ लड़किया दहेज़ दिए जाने को बरता नहीं मानती है किन्तु इसके लिए वो आत्महत्या करने पर उतारू नहीं हो जाती है |

  23. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    वाकई ये खबर है। इसलिए कि यह रीति से अलग है।

  24. चंद्रमौलेश्वर प्रसाद

    अक्सर ऐसा होता है कि यदि दहेज ना मांगा जाय तो लड़कीवालों को शक होता है ज़रूर इसके पीछे कोई लड़के का अवगुण है।

  25. शोभा

    इस खबर को पढने पर कुछ और बाते दिमाग में आई . हो सकता है वो पिता के घर खूब शानो शौकत से रही हो और अब भी वो ये ही चाहती हो और पति ऊपर की कमाई में विश्वास नहीं करता हो इसी स्तिथि में यहाँ पिता का दोष हुआ ना. फिर भी सारी बाते जाने बगैर हम कुछ नहीं कह सकते है.

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