किसी पर्यटक के लिए तरसते हैं ये सात देश

इन दिनों हिंदी ब्लॉग की दुनिया में हलचल है. परिकल्पना सम्मान समारोह के लिए इस बार भूटान को चुना गया है. इससे पहले दिल्ली, लखनऊ और काठमांडू में इसे आयोजित किया जा चुका है. तीनों अवसरों पर मैं मौजूद था. काठमांडू तो हम तीन ब्लॉगर, छत्तीसगढ़ से कार द्वारा गए और आए. सारी राह मैंने ही गाड़ी चलाई.

इस बार इरादा तो है जाने का वह भी सड़क मार्ग द्वारा. दो विशुद्ध ब्लॉगर तैयार भी हैं साथ देने के लिए. लेकिन फिलहाल तो यह प्रवास निर्भर है पिता जी के स्वास्थय पर.

काठमांडू में भी वीसा की ज़रूरत नहीं थी और भूटान में भी वीसा की ज़रूरत नहीं. ऐसे ही मामलों पर होती चर्चाओं पर बात निकली कि विश्व में 50 से भी अधिक देश ऐसे हैं जहाँ जाने के लिए भारतीय नागरिकों के लिए या तो वीसा की ज़रूरत नहीं या वहां पहुँचते ही वीसा दे दिया जाता है.

तभी यह भी बात सामने आई कि विश्व में ताजमहल जैसे सात आश्चर्य तो मशहूर हैं लेकिन  7 देश ऐसे भी हैं जहाँ वर्ष भर में दस हजार पर्यटक भी नहीं पहुँचते. बेशक इन देशों के नाम यदाकदा खबरों में आ जाते हैं लेकिन पर्यटन के नाम पर ये देश अछूते हैं.

मैंने इस बारे में खोजबीन की तो कई जानकारियाँ सामने आईं. तो इस बार बात हो जाए उन्हीं देशों की

1 – नौरू

सबसे कम पर्यटक पहुंचते हैं नौरू में जो कि दुनिया का ऐसा सबसे छोटा द्वीप राष्ट्र है जो विश्व का सबसे छोटा स्वतंत्र गणराज्य भी है और दुनिया में सिर्फ एकमात्र ऐसा गणतांत्रिक राष्ट्र है जिसकी कोई राजधानी नहीं है.

10,000 की जनसंख्या वाले इस देश का क्षेत्रफल केवल 21 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या सालाना महज 200 है. इस देश की वेबसाइट यहाँ है,  पर्यटन संबंधित जानकारी यहाँ  और एयरलाइन की वेबसाईट यहाँ है.

मूंगें की चट्टानों की मोहक कतारों से घिरा यह देश 1968 में आज़ाद हुआ था.

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नौरू का विहंगम दृश्य
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नौरू में मूंगें की चट्टानों का नज़ारा
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मानचित्र पर नौरू की भौगोलिक स्थिति

2 -सोमालिया

अफ्रीका के पूर्वी किनारे पर स्थित सोमालिया हाल ही तक युद्ध, वर्षों तक एक सरकार की कमी, हिंसक मुस्लिम अतिवादियों के कारण जाना जाता था. अब वहाँ सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है और देश के कई हिस्से सुरक्षित हो गए हैं.

लेकिन अब भी वहाँ जाने से लोग कतराते हैं इसीलिए इस देश में सालाना 500 पर्यटकों के आने का आँकड़ा है. वहाँ की आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहाँ क्लिक करें. सोमालिया की पर्यटन वेबसाइट यहाँ देखी जा सकती है.

अब हमेशा ही पेरिस, हांगकांग, बैंकाक जाना हो तो फिर यह लेख पढ़ने का क्या फायदा

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युद्ध से उबरे देश की मस्ती
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सोमालिया का विहंगम दृश्य
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मानचित्र पर सोमालिया की भौगोलिक स्थिति

3 – तुवालू

तुवालू, प्रशांत महासागर में हवाई और आस्ट्रेलिया के बीच स्थित एक पोलिनेशियाई द्वीपीय देश है. यहाँ कुल मिला कर एक वर्ष में मात्र 1,000 पर्यटक आने का रिकॉर्ड है.

अगर आप भी इस देश की यात्रा करना चाहते हैं तो तैयार हो जाइए क्योंकि जल्द ही ग्लोबल वार्मिंग के चलते यह दुनिया का पहला ऐसा देश होगा जो समुद्र में विलुप्त होने वाला है.

इसके निकटवर्ती देशों में फिजी प्रमुख हैं. 10,000 की जनसंख्या वाला यह दुनिया का तीसरा कम जनसंख्या वाला संप्रभु देश है, क्षेत्रफल के लिहाज से महज 26 वर्ग किमी के दायरे के साथ यह दुनिया का चौथा सबसे छोटा देश है,

इच्छुक पर्यटक इस तुवालू देश की पर्यटन वेबसाइट का सहारा ले सकते हैं या फिर साउथ पैसिफिक टूरिज्म की वेबसाइट को देखें.

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तुवालू का विहंगम दृश्य
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तुवालू का एक द्वीप
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मानचित्र पर तुवालू की भौगोलिक स्थिति

4 – किरिबाती

प्रशांत महासागर में स्थित एक लाख की जनसंख्या वाला यह द्वीपीय देश जलवायु परिवर्तन का पोस्टर ब्वॉय बन गया है क्योंकि समुद्र से बस दो मीटर की ऊंचाई पर बसे किरिबाती द्वीप समूह के 811 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले 32 द्वीपों के अगले 50 साल में समुद्र में समा जाने का अनुमान लगाया जा रहा है.

इस देश में पिछले साल महज 4000 पर्यटक पहुंचे थे. साल भर 25 से 32 डिग्री तापमान के बीच रहने वाले खूबसूरत किरिबाती देश के पर्यटन हेतु इस वेबसाइट का सहारा लिया जा सकता है.

इस देश का नाम सुर्ख़ियों में तब आया था जब 1999 में इसे नई सदी का स्वागत करने वाला सबसे पहला देश माना गया. आजकल यह दुनिया के सबसे अच्छे फिशिंग और डाइविंग वाली जगहों के लिए जाना जाता है.

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किरिबाती संसद भवन का विहंगम दृश्य
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किरिबाती का एक हाईवे
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मानचित्र पर किरिबाती की भौगोलिक स्थिति

5 – मार्शल द्वीपसमूह

छोटे बड़े 1200 द्वीपों, टापूयों को समेटे, 65,000 की जनसंख्या वाला मार्शल द्वीपसमूह प्रशांत महासागर में स्थित है. अमेरिका द्वारा यहाँ दसियों ऐसे परमाणु परीक्षण किये गए जिससे कई द्वीपों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया और विकिरण स्तर खतरनाक स्तर पर जा पहुंचा. अब इसका बिकिनी प्रवालद्वीप संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक धरोहर घोषित किया जा चुका है..

जर्मनी, जापान,अमेरिका की संपत्ति रहे इस देश को 1979 में अपनी स्वयं की सरकार बनाने की स्वतंत्रता मिली. यहाँ आने वाले पर्यटकों का सालाना आंकड़ा महज 4600 का है. पर्यटन के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा मूंगे की चट्टानों की बहुलता वाले इस देश की जानकारी के लिए यह वेबसाइट देखी जा सकती है.

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मार्शल द्वीपसमूह का विहंगम दृश्य
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मार्शल द्वीपसमूह का एक होटल
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मानचित्र पर मार्शल द्वीपसमूह की भौगोलिक स्थिति

6 – मोल्दावा

27 अगस्त 1991 को स्वतंत्र होने तक, पूर्वी यूरोप में स्थित मोल्दावा सोवियत संघ का हिस्सा था. फिलहाल यह यूरोप का सबसे गरीब देश है. वर्ष भर में यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या औसतन 7000 है.

विश्व के सबसे बड़े भूमिगत शराब भण्डार -Wine Cellars का होना इस देश की मुख्य पहचान है. शराब के सैकड़ों कारखानों, शराब निर्माण प्रक्रिया, भंडारण देखने की चाहत में ही अधिकतर पर्यटक यहाँ पहुंचते हैं. यहाँ की शराब विश्व भर में प्रसिद्द है.

34 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले, 35 लाख की आबादी वाले मोल्दावा की राजधानी चिसीनाउ है और इसकी आधिकारिक वेबसाइट यहाँ देखी जा सकती है. पर्यटन के इच्छुक इस वेबसाइट को देख सकते हैं.

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मोल्दावा की राजधानी चिसीनाउ का दृश्य
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मोल्दावा के एक वाइन सेलर का प्रवेश स्थल
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मानचित्र पर मोल्दावा की भौगोलिक स्थिति

7 – तुर्कमेनिस्तान

1991 तक सोवियत संघ का एक घटक गणतंत्र रहा तुर्कमेनिस्तान, मध्य एशिया में स्थित देश है. 4 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 50 लाख है. इसकी राजधानी अश्क़ाबाद है.

अजूबों से भरी हमारी पृथ्वी में एक अजूबा है ‘डोर टू हेल’ जो तुर्कमेनिस्तान के दरवेज़े गाँव में स्थित है. इस गाँव में एक 230 फीट चौड़ा गड्ढा है जिसमे 1971 से अब तक लगातार प्राकृतिक रूप से आग जल रही है. आग लगी कैसे यह भी एक दिलचस्प वाक्या है.

1971 में पूर्व सोवियत संघ के वैज्ञानिक इस रेगिस्तानी इलाके, काराकुम में तेल और गैस खोजने आए और दरवेज़े गाँव के पास एक जगह को ड्रिलिंग के लिए चुना. ड्रिलिंग शुरू करने के कुछ देर बाद ही यह जगह ढह गई और यहाँ पर 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा गड्ढा बन गया. जन हानि तो नहीं हुई पर गड्ढे से बहुत ज्यादा मात्रा में मीथेन गैस निकलने लगी. मीथेन गैस से वातावरण और मानव दोनों पर प्रतिकूल असर होता है. इसलिए गैस को बाहर निकलने से रोकना जरूरी था. अब या तो इस क्रेटर को बंद किया जाता या फिर इस मीथेन गैस को जला दिया जाता. पहला तरीका बेहद ही खर्चीला था. इसलिए वैज्ञानिकों ने गैस उगलते गड्ढे में आग लगा दी. सोचा यह गया कि कुछ एक दिन में सारी मीथेन गैस जल जाएंगी और आग खुद ही बुझ जाएंगी। पर वैज्ञानिकों का यह अंदाजा गलत निकला. आग आज 43 साल बाद भी जल रही है इससे आप अंदाजा लगा सकते है कि उस जगह गैस का कितना विशाल भण्डार है

तुर्कमेनिस्तान के पास विश्व के कुल प्राकृतिक गैस का चार प्रतिशत भंडार है. इसी के चलते 2012 में भारत ने तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (TAPI) गैस पाइप लाइन परियोजना के जरिए प्राकृतिक गैस की खरीद और बिक्री समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. ये पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान के दौलताबाद गैस फील्ड से प्रारंभ होकर अफगानिस्तान के हेरात-कंधार से होते हुए पाकिस्तान के कोएटा और मुल्तान पहुंचेगी और भारत-पाकिस्तान सीमा के फजिल्का में खत्म होगी.

तापी पाइपलाइन की क्षमता प्रतिदिन 90 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करने की होगी. तीस साल तक सप्लाई के लिए तैयार होनेवाली परियोजना साल 2018 से चालू होगी.यह दिलचस्प जानकारी है कि तुर्कमेनिस्तान से 1800 किलोमीटर लंबी एक पाइपलाइन के ज़रिए चीन को पहले ही गैस की सप्लाई जारी है.

वीसा की दुस्ग्वारियों के कारण इस देश में आने वाले पर्यटकों का वार्षिक आँकड़ा 9000 का है. इच्छुक व्यक्तियों द्वारा पर्यटन जानकारी के लिए इस वेबसाइट को देखा जा सकता है और तुर्कमेनिस्तान की वेबसाइट यहाँ है.

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तुर्कमेनिस्तान का एक विहंगम दृश्य
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तुर्कमेनिस्तान का Door to hell
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मानचित्र पर तुर्कमेनिस्तान की भौगोलिक स्थिति

 

अब अगर तुलना करनी हो पर्यटन संबंधी आंकड़ों की तो यह जान लेना चाहिए कि विश्व में सबसे अधिक पर्यटक कहाँ जाते है! इस मामले में 7 देशों की यह अनुमानित ताजा सूची देखी जाए

  1. फ़्रांस – 8 करोड़ 30 लाख पर्यटक प्रति वर्ष
  2. अमेरिका – 6 करोड़ 70 लाख पर्यटक प्रति वर्ष
  3. चीन- 5 करोड़ 80 लाख पर्यटक प्रति वर्ष
  4. स्पेन – 5 करोड़ 70 लाख पर्यटक प्रति वर्ष
  5. इटली – 4 करोड़ 60 लाख पर्यटक प्रति वर्ष
  6. तुर्की – 3 करोड़ 55 लाख पर्यटक प्रति वर्ष
  7. ब्रिटेन – 2 करोड़ 90 लाख पर्यटक प्रति वर्ष

… और भारत में यह आंकडा 65 लाख पर्यटक प्रति वर्ष है

वैश्विक आंकड़ों के लिए, जिज्ञासु मित्र World Economic Forum की 517 पन्नों वाली The Travel & Tourism Competitiveness Report 2013 का गहन अध्ययन कर सकते हैं.

अब मैं सोच रहा हूँ कि भूटान तो ठीक है लेकिन अब इनमें से किसी देश जा सकता हूँ क्या!

आपका क्या इरादा है?

© बी एस पाबला

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किसी पर्यटक के लिए तरसते हैं ये सात देश
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19 Thoughts to “किसी पर्यटक के लिए तरसते हैं ये सात देश”

  1. रोचक और ज्ञानवर्द्धक

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया राज जी

  2. आप जब भी लाते हैं खजाना ले कर आते हैं।

    1. बी एस पाबला

      Heart
      मोगैंबो खुश हुआ

  3. लिखमाराम ज्याणी

    पाबला जी, ऐसी जानकारी दी है जो कल्पनातीत है। इतने सुन्दर फोटो और दुर्लभ जानकारी के लिये आभार।

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      शुक्रिया लिखमाराम जी

  4. काश मैं ये सभी देश देख पाउ 🙁

    1. बी एस पाबला

      I-Wish
      मैं भी यही सोचता हूँ

      1. shiv kumar dewangan

        इतनी अच्छी-अच्छी जानकारिया देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद. आपके ख़ज़ाने में वाकई बहुत सारे मोती हैं. आशा है आगे भी इसी तरह ज्ञानवर्धक जानकारियों से अवगत कराते रहेंगे.

  5. चलो, चलते हैं, चले जिधर रस्ता। 🙂 🙂 🙂
    टिप्पणीकर्ता चलत मुसाफ़िर ने हाल ही में लिखा है: नद्य: रक्षति रक्षित:, नद्य हन्ति हन्त:My Profile

  6. बी एस पाबला

    Approve
    हम भी तैयार चलो

  7. यह जानकारी देने के लिए धन्यवाद

  8. जानकारी देने के लिए धन्यवाद

  9. ritu

    कई दिनों से युरोप के लिए सोलो ट्रेवलिंग पर जानकारियाँ जुटा रही हूँ पर ये पढ कर लगता है कि गंतव्य के चुनाव पर दुबारा नजर डालूँ।क्या हमलोग कोइ ग्रुप नही बना सकते इच्छुक लोगों का।ये कोइ कमर्शियल उद्देश्य के लिए नही पर हमशौकीन लोगों की सुविधा अौर यात्रा के अानंद का जरिया हो.

    1. Heart
      थैंक्स ऋतु
      ग्रुप बना सकते है लेकिन कोई पहल तो करे

  10. Kulwant Singh Saggu

    Rochak एवं उम्दा,ज्ञान से भरपूर जानकारी के लिए धन्यवाद.

  11. shikha varshney

    गजब की जानकारी. कभी मौका लगा तो नौरू जरूर जाना चाहूंगी.

  12. Amit

    सर आप ग्रुप बना लो what’उप पर….

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