प्यार से लोग मुझे पाजी कहते हैं.. तुम्हारा नाम क्या है?

पाजी! कितना प्रचलित शब्द है ना पंजाबियों को संबोधित करने का!! वो भी प्यार से संबोधित करने वाला शब्द

लोगों ने अपने हीरोज़ को कितने मज़े से पुकारा भी है धरम पाजी, कपिल पाजी, सनी पाजी, सिद्धू पाजी, वीरू पाजी, पाबला पाजी

ऑफिस में भी सभी सहकर्मी मुझे पाजी कह के ही बात करते हैं. जब कोई अभिवादन करता है -पाजी नमस्ते! तो मैं पलट कर प्रत्युत्तर देता हूँ -बदमाश नमस्ते!!

वैसे तो सब जानते हैं कि गालियाँ बकते पाजी के साथ बदमाश की जुगलबंदी होते आई है लेकिन पाजी के बदले बदमाश कहे जाने की असल वज़ह बहुत कम लोग जानते हैं.

एक फिल्मी डायलॉग “…कभी तो हंस लिया करो पाजी ” पर अनूप शुक्ल  जी ने एक बार लिखा भी है कि ‘पाजी’ में श्लेष अलंकार की छटा दर्शनीय हैं .’पाजी’ की एक मतलब पंजाबी वाले भाई साहब है. दूसरा मतलब ‘पाजी’ मतलब बदमाश है. मतलब जो हंसेगा नहीं वह ‘पाजी’ कहा जाएगा.

लेकिन वाकई में पाजी का वास्तविक अर्थ है दुष्ट, लुच्चा, अपने दुष्ट आचरण या व्यवहार से सबको तंग या परेशान करने वाला. यह जानने वाले मेरे एक फ़ौजी मित्र पुकारते हैं -प्राजी!

कुछ मित्र पाजी का मतलब जान कर सावधानीपूर्वक पुकारते हैं -भाजी! तब मैं मुस्कुराता हूँ कि यार, ये तो पाव भाजी की याद आ गई!!

एक दिन मेरे लेक्चर से तंग आ कर झल्लाए मित्र ने चेतावनी दी कि सही सही उच्चारण नहीं बताया तो वो दो पैग एक्स्ट्रा मार लेगा फिर अगली जिम्मेदारी मेरी.

मैंने वही बताया जो पहले भी कई बार बता चुका कि पाजी, प्राजी, भाजी जैसा कुछ भी सही नहीं है. वास्तविकता के करीब वाला उच्चारण है -प्राह्जी! प्रा+आधा ह+जी. इसका भावार्थ है -बिग ब्रदर, बड़ा भाई.

पंजाबी में भाई के लिए एक सम्मानजनक उच्चारण है प्राह (प्रा+आधा ह) और फिर आदर वाला -जी. गुरमुखी में लिखा जाए तो ਭਰਾ ਜੀ. जो अपभ्रंश में हो गया पाजी.

पाजी कहोगे क्या

यह सब लिखते मुझे याद आ रही थी एक फिल्मी गीत की पंक्तियाँ -मेरा नाम है शबनम/ प्यार से लोग मुझे शब्बो कहते हैं/ तुम्हारा नाम क्या है/ रीना मीना अंजू मंजू याsssss मधु

तब मेरा मन किया कि कहूँ  -प्यार से लोग मुझे पाजी कहते हैं… तुम्हारा नाम क्या है… पाजी, भाजी, प्राजी… याssss प्राह्जी

लेकिन आप क्या कहेंगे अब?

प्यार से लोग मुझे पाजी कहते हैं.. तुम्हारा नाम क्या है?
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प्यार से लोग मुझे पाजी कहते हैं.. तुम्हारा नाम क्या है?” पर 13 टिप्पणियाँ

      • बड़े भैय्या पाब्ला जी,
        चूंकि मेरे चार पंजाबी मित्र हैं इसलिए मुझे सही उच्चारण मालूम था. पर अगर कोई किसी चीज़ को बार-बार गलत कहता रहे, तो अंततः खुद अपने ऊपर भी शंका होने लगती है. पर आपने मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए हैं प्राहजी………

  1. बहुत अच्छी जानकारी ..
    हमारी गढ़वाली भाषा में बड़े भाई जी को ‘भाजी’ कहते हैं..और छोटे को भुल्ला …
    नमस्ते प्राह्जी!

  2. आपने अच्छी जानकारी दी. लेकिन आपका एक वाक्य कुछ अटपटा सा लग रहा है. जरा ध्यान दें. एक फिल्मी डायलॉग “…कभी तो हंस लिया करो पाजी ” पर अनूप शुक्ल जी भी एक बार लिखा भी है. मेरे विचार से-“अनूप शुक्ल जी ने एक बार लिखा भी है” होना चाहिए. प्राह्जी

    • Approve
      हाँज्जी! गड़बड़ है
      सुधार कर दिया

      शुक्रिया 🙂

  3. पंजाबी होने के नाते समझता हूँ पाजी किसे कहते है।
    परंतु कई लोगों को इसका अर्थ पता न होने की वजह से वह सम्मान पूर्वक इसी शब्द का प्रयोग करते है। बिहार यूपी में बाई किसी कोठेवाली को कहते है,महाराष्ट्र में संभ्रांत स्त्री को बाई से सम्भोदित करते है,अब साला-हरामी महाराष्ट्र में कॉमन शब्द है,परंतु यूपी बिहार में आप किसी को हरामी कहे तो वह आप को नंगा करदेगा।मराठी में
    सहवास यानि हमसफ़र ,यूपी बिहार में इसका कुछ और ही मतलब निकलता है। आप ने विवरण के साथ समझा दिया है-प्राजी यानि भाई साहब। ओये तुसी ग्रेट हो ।

  4. Approve
    सही है हरिवंश जी
    शब्दों के मतलब जगह के हिसाब से बदल जाते हैं

    ग्रेट तो एक ही है दुनिया में! वो ऊपर वाला !!

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