बाईक रैली के पुरस्कार, जर्मन युवती और बुल फाईट

मोटरसाइकिल पर विश्व भ्रमण का कीर्तिमान बनाने के लिए, भारत से रवानगी के बाद भिलाई के दो नवयुवक विदेशी धरती पर पहला कदम रख बियर की दीवानगी में रात के नजारो को देखते हुए रवाना हो गए तत्कालीन पश्चिमी जर्मनी की ओर।

मोटरसाइकिल के पिछले चक्के की गड़बड़ी और हेडलाईट बंद होने जैसी बाधायों को पार करते हुए जर्मनी, डेनमार्क, हॉलेंड की खूबसूरती सराहते, बीयर गटकते, समाचार पत्रों की सुर्खियां बनते, वे चल पड़े थे दक्षिण की ओर बेल्जियम की तरफ।

जब वे रोटरडर्म (Rotterdam) होते हुए 4 अगस्त को पहुँचे एंटवर्प (Antwerp) तो पाया कि वहाँ अंतर्राष्ट्रीय मोटरसाइकिल चालकों का सम्मेलन चल रहा। जब वहाँ प्रवेश किया तो सभी की निगाहें इनकी ओर घूम गईं। आखिर पहली बार किसी भूरी चमड़ी वालों को इस तरह के आयोजन में अपने बीच देख रहे थे!

इस की आयोजक एक युवती, मेरियन डे ब्यूस्ट। जिसने इन्हें विशेष ध्यान दिया और हर संभव सहायता के लिए पूरी आश्वस्त किया।

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अंतर्राष्ट्रीय मोटरसाइकिल चालक सम्मेलन की आयोजक युवती, मेरियन डे ब्यूस्ट के साथ

वह रात बीती आमोद-प्रमोद व नए दोस्त बनाने में। इनमें से कुछ बाद में भिलाई भी पहुँचे। वहाँ यूरोप, स्कैन्डिनेविया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए हुए लगभग 500 प्रतिभागी थे।

बाईक रैली में शामिल हो अगली दोपहर वे जब रवाना हुए तो इनके पास था लम्बी दूरी के चालन हेतु द्वितीय पुरस्कार

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जीती हुई ट्रॉफी संभाले सुनील के साथ अनिरूद्ध

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बेल्जियम के अखबार में रैली का समाचार

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भारत के अखबार भी नहीं रहे अछूते
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एंटवर्प से रवानगी का समय

5 अगस्त को आर्त्सेलर (Aartselar) में सौजन्यतावश मोटरसाइकिल की मरम्मत हुई।

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यामाहा शो रूम के बाहर

एक भारतीय आर मलिक के बेटे का जनमदिन मना कर वे रूके 6 अगस्त को ब्रूसेल्स के पास क्लाबेक (Clabecq) में, पियरे बर्ज़ियर व रीटा के घर

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पियरे बर्ज़ियर व रीटा के साथ

अपनी 18वीं वैवाहिक वर्षगांठ मना रहे दम्पत्ति द्वारा की जा रही खातिरदारी से खासा अभिभूत थे सुनील व अनिरूद्ध। 10 अगस्त को क्लाबेक से निकले तो ब्रूसेल्स (Brussels), ब्रूग (Brugge) – 18 सदी का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह, ओस्टेंड (Ostende) तथा वाटरलू (Waterloo) –नेपोलियन की हार का ऐतिहासिक स्थल, जैसी जगहों का जायजा लिया गया।

राह में 13 हॉर्स पावर की मोटरसाइकिल से यात्रा पर निकले एक जोड़े ने इन्हें उस शानदार बाइक की सवारी का मौका भी दिया। भारतीय राजदूत श्री एरिक गोंसाल्विस में मुलाकात हुई।

Moto’80 वाले निकोला जियोविच, AutoKrant पत्रिका के सहायक संपादक, स्थानीय यामाहा मोटरसाइकिल विक्रेता से मिलना भी सुखद रहा।

11 अगस्त को पहुँचे लक्ज़मबर्ग (Luxemburg)। यह एक छोटा सा देश है और बेहद खूबसूरत है। हरियाली से लकदक पहाड़ और घाटियाँ, युद्ध के दौरान शहर को बचाने के लिए किलेबंदी जैसे चारों ओर बने जंगलों की रौनक देखते ही बनते थीं।

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पूर्व भिलाई निवासी श्री एस के राय के साथ, लक्जमबर्ग में

यहीं मुलाकात हुई श्री ए के लूम्बा के नेतृत्व में आए भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) के एक प्रतिनिधि मंडल से।

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स्विट्ज़रलैण्ड में मोटरसाइकिल चालकों का एक सम्मेलन

13 अगस्त को लक्ज़मबर्ग से दक्षिण-पूर्व की ओर वे चले फ्रांस के स्त्रासबोर्ग (Strasbourg), मेट्ज़ (Metz) से होते हुए स्विट्ज़रर्लैंड के ज़्यूरिख़ (Zurich) की ओर। जहाँ भारतीय स्वतंत्रता दिवस की धूमधाम के बाद दूतावास द्वारा आयोजित रात्रिभोज में स्विट्ज़रलैंड में तत्कालीन भारतीय राजदूत श्री थॉमस अब्राहम व अन्य गणमान्य भारतीयों से भेंट का अवसर मिला।

यहीं, शहर में सौजन्यतावश हुई मोटरसाइकिल मरम्मत में पूरा एंजिन ही बदल दिया गया!

हेल्वेटिया (Helvetia) की खूबसूरती प्रकट होते हुए धीरे धीरे धरती का परिदृश्य बदलने लगा था। 16 अगस्त को बर्न (Berne) पहुँचने पर ठहरना हुया दूतावास अधिकारी श्री वाय पी मोटवानी के घर।


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जिनेवा में

17 अगस्त को बारी थी जिनेवा (Geneva) की, वेवे-मोंट्रे (Vevey-Montrey) से होते हुए बरास्ता लॉसेन (Laussanne)। यहीं 18 अगस्त को मौका मिला शाने (Chaney) में चल रहे एक और मोटरसाइकिल चालकों के सम्मेलन में शामिल होने का। इस बार मिला लम्बी दूरी के भ्रमण का व्यक्तिगत प्रथम पुरस्कार

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एफ़िल टावर के नीचे खड़े दिख रहे सुनील व अनिरूद्ध

21 अगस्त को वापस फ्रांस में दाखिल हुए और चल पड़े फ्रेंच एल्पस के शामोनिक्स (Chamonix) पहाड़ों की ओर, फिर मॉँट ब्लांक (Mont Blanc) और फिर ग्रेनोबल (Grenoble) व गाप (Gap) जैसे कुछ गिने-चुने प्यारे रास्तों से गुजरते हुए, टुर- डे नेपोलियन के सहारे।

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टुर- डे नेपोलियन की राह पर

पहाड़ व घाटियों के नज़ारे देखते हुए तम्बू ताना गया 22 अगस्त को नाईस (Nice) में।

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मोनक्को का प्रवेश द्वार

अगला दिन, 24 अगस्त बीता मोनक्को (Monaco) के मॉँटे कार्लो (Montecarlo) में। जहाँ मुलाकात हुई अंतर्राष्ट्रीय मोटरसाइकिल चालक महासंघ के अध्यक्ष (भ्रमण) से

नाईस से रवानगी हुई कान्स (Cannes) के सामुद्रिक किनारों से चलते हुए और फिर डेरा डला गया रात को, सेंट ट्रोपेज़ के नज़दीक। ऐसा लग रहा था कि पूरा यूरोप गर्मी की छूट्टियाँ मनाने यहाँ उमड़ पड़ा हो। पूरे समुद्री तट पर पर्यटकों का जमावड़ा था।

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कांस की सडकों पर

यह वही कान्स है जहाँ होने वाले फिल्म फ़ेस्टिवल की धूम रहती है हिन्दुस्तानी टीवी चैनलों पर!

नशीले पदार्थों के लिए कुख्यात मार्शेल्स से होते हुए 26 अगस्त को जा पहुँचे मोंटेपेलियर (Monte Pellier)। जहाँ थी तंग गलियां, 500 वर्ष पुराने एक होटल सहित सदियों पुरानी पत्थर के बनी इमारतें, रोमन पुल आदि।

यहाँ मेहमाननवाज़ी की, डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही खूबसूरत जर्मन युवती एलेन ने।

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मोंटेपेलियर में मेज़बान जर्मन युवती एलेन के साथ

29 अगस्त को पहुँचे इन नौज़वानों ने पाया कि स्पेन बाकी यूरोप से कुछ अलग ही है। मीलों दूर तक फैली चट्टानें, चमकते सूरज के बावज़ूद धूल भरे वातावरण के कारण कुछ देख पाना मुश्किल ही था।

गांवों-कस्बों में पत्थरों से बने घरों में रहन-सहन का स्तर भी निम्न ही मिला।

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स्पेन में , एक निर्जन स्थान पर
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स्पेन के एक स्थानीय समाचारपत्र में सुर्खियाँ बनी सुनील व अनिरूद्ध की यात्रा

राह में ही विपरीत दिशा से आ रहे कनाडा के एक दम्पत्ति मिले जो साढ़े ग्यारह हॉर्स पावर वाली मोटरसाइकिल से भ्रमण पर निकले थे।

31 अगस्त को बार्सिलोना के बाद अलकैंज़ (Alcainz) आदि नज़ारों के बाद 1 सितम्बर को मेड्रिड (Madrid) पहुँच कर देखी विश्वप्रसिद्ध बुल फाईट और चल पड़े उत्तर की ओर पाम्पलोना के लिए!  ठंडक व हरियाली बढ़ रही थी।

मोटरसाइकिल से किये गए विश्व भ्रमण के संस्मरणों को कुल 10 आलेखों में संजोया गया है. सारे आलेखों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें»


5 सितम्बर को फ्रांस में फिर प्रवेश हुआ दुनिया की बेहतरीन शराब निर्माण स्थल बोर्डेक्स (Bordeaux) में अंगूरों के बागों से गुजरते हुए.

अब चला जाए सफर के अगले पड़ाव पर, जहाँ 7 सितम्बर को पहुँचना हुआ पेरिस, जहाँ की रंगीनियों की बस चर्चा ही सुनी थी.

बाईक रैली के पुरस्कार, जर्मन युवती और बुल फाईट
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7 Thoughts to “बाईक रैली के पुरस्कार, जर्मन युवती और बुल फाईट”

  1. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अरे वाह!
    चित्रों से सजी-सँवरी पोस्ट तो
    बहुत बढ़िया लग रही है!

  2. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    आज का विवरण तो सुंदर है। आपने दो दिनों की कसर पूरी कर दी।

  3. Jandunia

    सबसे पहले भिलाईवासियों को बधाई। दूसरी बात ये कि आपने अच्छी कोशिश की है।

  4. dhiru singh {धीरू सिंह}

    हौले हौले हम भी पीछे है आपके सफ़र मे

  5. घटोत्कच

    यात्रा विवरण तो रोमांचक है
    आज पहली बार पढकर अच्छा लगा।

  6. ताऊ रामपुरिया

    बहुत बेहतरीन यात्रा वृतांत है. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

  7. शरद कोकास

    सौजन्यतावश हुई मोतरसाइकिल की मरम्मत मे पूरा इंजन ही बदल दिया गया ……मतलब नया इंजन लगाया गया होगा ना ?
    क्या करें भैया अपन ठहरे हिन्दुस्तानी आदमी अपने यहाँ बदलने का मतलब कुछ और होता है ।

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