बैंगलोर यात्रा: एक दिन पहले

बैंगलोर

बैंगलोर यात्रा का पहला ख्याल आया था पिछले साल, 2015 में. तब बिटिया को पुणे से विप्रो-बैंगलोर गए एक साल हो चुका था.

पिता जी ने भी हामी भर दी साथ चलने की. लेकिन उन्होंने ऐसा बिस्तर पकड़ा कि इस दुनिया से जाने के बाद ही छोड़ा.

उनके जाने के बाद जब अकेलापन एकाएक अधिक ही सताने लगा, तो यह योजना बनी कि इस अवसाद भरे समय की काट में, अपनी स्मार्ट कार से चला जाये बैंगलोर. अकेले जाना मुनासिब ना था और ट्रेन के सफ़र में वह बात नहीं रहती कि कोई दिमागी हलचल हो सके.

सितंबर 2015 में सारी तैयारी होने के बावजूद ऐसा कुछ हुया कि ऐन वक्त पर योजना रद्द करनी पडी. उसके बाद नवंबर – दिसंबर में कार से ही पंजाब की यात्रा हो गई.

फरवरी 2016 में योजना बनी तो बिटिया ने अकेले कार चलाकर बैंगलोर सफ़र करने की योजना वीटो कर दी. लेकिन अब तक अपनी यात्रा के बारे, मुलाकात की इच्छा से कई साथियों को दोबारा अवगत किया जा चुका था.

तब एक औपचारिक सूचना फेसबुक पर डाली कि अपनी स्मार्ट कार से अकेले ही हैदराबाद होते हुए बैंगलोर जाने-आने का प्लान, दादी अम्मा ने वीटो किया. अब लौहपथगामिनी का विचार बन रहा

बैंगलोर की फेसबुक पोस्ट

उसी पर एक कमेंट आया ललित शर्मा जी का – “चलो”! पहले मैंने सोचा मजे लेने को लिखा होगा लेकिन जब मैंने वहीँ पूछा “कब?” तो उनका जवाब आया  “कल”. तब मैंने ताड़ लिया कि वे गंभीर इस यात्रा के लिए.

एक फोन कॉल से ही यह पक्का हो गया कि वे मेरे साथ कार में चल रहे हैं बैंगलोर के लिए. वे इससे पहले भी मेरे साथ कार से काठमांडू की यात्रा में साथ रहे हैं.


साथ कोई चलेगा, इस बात की उम्मीद नहीं थी. इसलिए अब तक लापरवाह था. लंबी यात्रा के लिए तुरंत ही कार को जरूरी बातों की जांच के लिए अधिकृत मारूति वर्कशॉप में भेजा गया. टायर भी बदलवा लिए गए. बैलेंसिंग और एलाइनमेंट भी हो गया. टायरों में नाइट्रोजन भी डलवा ली गई.

बैंगलोर यात्रा के पहले

आम तौर पर ऐसी यात्रायों में सुबह चार बजे ही मंजिल की ओर रवानगी शुरू कर देता हूँ. अब बात उठी कि ललित जी आयेंगे कैसे भिलाई? क्योंकि वे रहते हैं यात्रा की दिशा के विपरीत 65 किलोमीटर दूर. मेरा सुझाव था कि वे 5 मार्च की रात ही आ जाएँ भिलाई या फिर 6 मार्च की सुबह रायपुर तक आ जाएँ.

व्यावहारिक रूप में यह एक दुरूह कार्य था. इसलिए सहमति बनी कि विपरीत दिशा में भिलाई से अभनपुर की ओर गाड़ी  दौडाई जाए और वापिस भिलाई होते हुए नागपुर का रूख लें.

इधर मैक का इंतजाम गड़बड़ा गया. जिस जगह उसे छोड़ कर जाना था वहां संपर्क किया गया तो पता चला कि अभी जगह खाली नहीं है. फटाफट सुनिश्चित किया गया कि घरेलू सहायक युवती उसे संभाले और सामने रहने वाले सिन्हा परिवार की निगाह रहे.

एलपीजी टैंक फुल करवा लिया गया, एक बार फिर से जांच की गई कि बैटरी से चलने वाला हवा का पंप, ट्यूबलेस टायर पंक्चर किट, टॉर्च,  फोल्डिंग छतरी, अतिरिक्त फैन बेल्ट, टो-चेन, अतिरिक्त हेडलाइट बल्ब, फर्स्ट ऐड बॉक्स अपनी अपनी जगह हैं कि नहीं.

किसी आकस्मिक स्थिति में राह के लिए पैकेज्ड खाने की चीजें भी रख ली गईं.

रात को ही बारिश का अंदेशा होने लगा. ललित जी को आशंका बताई तो उनका जवाब मिला कि एक बार सीट पर बैठ गए तो फिर चाहे बम गिरे, बारिश का क्या है!

बैंगलोर यात्रा की शुरूआत

6 मार्च की सुबह ठीक चार बजे, अपनी स्मार्ट कर का इग्नीशन ऑन करने के पहले रवानगी सूचना देते मैंने ललित जी को एस एम एस भेजा -जो बोले सो निहाल…! जवाब आ गया – सति श्री अकाल!!

5 बजे, अभनपुर से दो किलोमीटर पहले ही भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप पर 1000 रूपये का 16.69 लीटर स्पीड पेट्रोल डलवा कर  टैंक का टॉप अप किया गया और ललित जी को सूचना दी कि पांच मिनट में पहुँच रहा.

अभनपुर से बैंगलोर के लिय
ललित जी अपने बेटे उदय सहित घर के सामने ही सड़क पर प्रतीक्षा मिले. दोनों बैग रखा पानी का इंतजाम किया गया. उदय ने अधेंरे में मोबाइल फ़्लैश के सहारे एक फोटो ली हम दोनों की और हम चल पड़े भिलाई की ओर होते हुए बैंगलोर की तरफ.

अब आगे, इस बैंगलोर यात्रा के दौरान हैदराबाद पहुँचने की दास्ताँ पढ़िए यहाँ क्लिक कर

© बी एस पाबला

बैंगलोर यात्रा: एक दिन पहले
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16 Thoughts to “बैंगलोर यात्रा: एक दिन पहले”

  1. नवीन कुमार राजहँस

    मैंने आपकी यात्रा का वर्चुअल एक्सपीरियंस लिया है
    शुरुआती पोस्ट तो देखा था और सोचा की शायद कमेंट के हिसाब से ट्रेन यात्रा ही करेंगे। पर अचानक सुबह सुबह आपका पोस्ट देखकर लगा था की सचमुच ठान कर ही स्टेटस डाला था आपने।

    1. बी एस पाबला

      Pleasure
      अपडेट तो दिया मैंने

  2. सुनील कुमार पाण्डेय

    आगाज ही बहुत सुंदर है ,पाबला जी ,आपका ज़ज्बा सराहनीय है ,काबिले तारीफ़ ,पहला लेख पढ़ कर दिल खुश हो गया ,आगामी का इंतज़ार रहेगा |

    1. बी एस पाबला

      Happy
      शुक्रिया सुनील जी

  3. बढ़िया यात्रा सड़क द्वारा ।
    आज हम भी जा रहे है यात्रा पर लेकिन सफर ट्रेन से और हवाई रहेगा ।

    1. बी एस पाबला

      Smile
      ‘वो’ सुबह कभी तो आएगी

  4. अजब गजब सफ़र की शुरुवात।
    टिप्पणीकर्ता चलत मुसाफ़िर ने हाल ही में लिखा है: रानी तारामती का कुतुबशाही प्रेम: दक्षिण यात्रा-4My Profile

    1. बी एस पाबला

      Pleasure
      आपके साथ

  5. Mukesh Pandey

    आगे की रोमांचक यात्रा पढ़ने की उत्सुकता बढ़ गयी है !

  6. Taarkeshwar Giri

    पूरी यात्रा विवरण पढ़ने का बेशब्री से इंतजार रहेगा , जरा जल्दी से पोस्ट डालियेगा

  7. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ” एक ‘डरावनी’ कहानी – ब्लॉग बुलेटिन ” , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      शुक्रिया ब्लॉग बुलेटिन

  8. बहुत ही बढ़िया और रोमांचक यात्रा की शुरुवात हो गयी हैं, बेंगलोरे यात्रा का पहला संस्करण पढ़ कर मजा आ गया, दूसरा भी पढने जा रहा हूँ.

  9. kamran

    मैं आपका बड़ा फैन हूँ सर आपके यात्रा वृतांत पढता हूँ तो लगता है मैं खुद यात्रा kar रहा हूँ . मन रोमांचित हो उठता है . बहुत मजा आता है सर और और आपकी हिंदी भी बहुत अच्छी है सर

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