ब्राउज़र क्या है? कौन है कमाऊ ! कौन बेहतर, कौन बदतर !!

कंप्यूटर संबंधित समस्यायों के लिए मित्र संपर्क करते हैं तो कई बार पूछना पड़ता है कि ब्राउज़र कौन सा इस्तेमाल करते हैं आप? ज़्यादातर मामलों में मैंने पाया कि वे असहज हो जाते हैं और पूछते हैं कि ये ब्राउज़र क्या होता है? What is Browser? अगर किसी ने बता भी दिया तो अगला प्रश्न होता है कि कौन सा संस्करण – वर्सन? OS कौन सा? तो मासूम सा उत्तर मिलता है -पता नहीं? कैसे देखूँ?

इसी साल की शुरूआत में जब सड़क मार्ग से पंजाब जा रहा था तो ऐसे ही एक वार्तालाप के दौरान झल्ला गए मित्र कि इस उम्र में यह सब क्या चकल्लस है? वापस आ कर लिखना इनके बारे में. समझ नहीं आया तो बार बार पढ़ कर कोशिश करेंगे समझने की.

कल याद आया तो लिखने बैठ गए -ब्राउज़र क्या है? कौन है बेहतर, कौन बदतर !

दरअसल, इंटरनेट के ज़रिये विश्वव्यापी वेब या स्थानीय सर्वर पर उपलब्ध लेख, चित्र, वीडिओ, संगीत और ऎसी ही कई अन्य जानकारियों देखने के लिए जो सॉफ्टवेयर उपयोग में लाया जाता है उसे कहते हैं ब्राऊज़र, वॆब ब्राऊज़र.

विश्वव्यापी वेब मतलब सारी दुनिया में अलग अलग फैले कम्प्यूटर्स का जाल World Wide Web -WWW. आसान भाषा में Internet ! और स्थानीय सर्वर का उदाहरण है किसी संस्थान/ ऑफिस के आपसी कम्प्यूटर्स तक सीमित नेटवर्क जो तकनीकी भाषा में कहलाता है Intranet

… और ब्राउज़र का हिंदी अनुवाद किया जाए तो वो होगा -विचरक, विचरण करने वाला ! इंटरनेट पर विचरण करने का स्थान !! जैसे हम किसी बाग़ बगीचे में टहलते तो हैं एक नित्य नियम के अनुसार, लेकिन इधर उधर नज़र भी जाती रहती है बिना किसी चाहत के. कभी कोई बच्चा मिल गया तो बतिया लिया, मन किया तो कहीं पेड़ के नीचे लेट गए, कभी दौड़े कभी चहलकदमी की, आते जाते मूंगफली ही चबा ली. कभी किसी ख़ास जगह जाना हो तो भी हम अपनी पसंद का कुछ देखते हैं तो उधर ही मुड़ जाते हैं और फिर जायजा ले वापस अपनी मंजिल की ओर.

मतलब एक बंधे नियम से हम जाते तो हैं किसी जगह पर, किसी नई जगह पर, इंटरनेट पर लेकिन हर बार वही कुछ किया जाए यह ज़रूरी नहीं. यही कहलाता है विचरण -ब्राउज़िंग.
ब्राउज़र भीड़
घर, ऑफिस में प्रयुक्त सामान्य व्यक्तिगत कंप्यूटरों पर प्रयोग होने वाले कुछ मुख्य वेब ब्राउजर हैं इंटरनेट एक्स्प्लोरर, मोजिला फ़ायरफ़ॉक्स, सफारी, ऑपेरा, फ्लॉक और गूगल क्रोम. इसके अलावा भी कितने ही अलग अलग क्षमताओं वाले ब्राऊज़र्स उपलब्ध हैं, आप शायद जानते भी ना हों 😀

कितने ब्राउज़र?

मौजूदा समय में इंटरनेट की दुनिया के दस बड़े खिलाड़ी हैं Mozilla Firefox, Google Chrome, Internet Explorer, Safari, Opera, Maxthon, Rockmelt, SeaMonkey, Deepnet Explorer, Avant Browser.

बीते वर्ष 2013 के आंकड़े देखे जाएं तो ब्राउज़र उपयोगकर्ताओं में से करीब 50% ने गूगल क्रोम का उपयोग किया, 25% ने मोज़िला फायरफॉक्स का, 10% इंटरनेट एक्स्प्लोर वाले रहे तो 4% थे सफारी वाले और 2% हिस्सा रहा ओपेरा का. ये सभी ब्राउज़र मुफ्त डाउनलोड किए जा सकते हैं.

और अगर आप जानते ही नहीं हैं क़ि किस ब्राउज़र को कैसे पहचानें क़ि कंप्यूटर पर वो है कहाँ और कौन सा है तो नीचे दिया चित्र देखें.

ब्राउज़र पहचान चिन्ह

यदि जानना हो, तो नीचे दी गई जानकारी देखिए कि आप इस वक्त ब्राउज़र के किस संस्करण पर इस लेख को पढ़ रहे हैं और जिस कंप्यूटर का प्रयोग कर रहे, उसका ऑपरेटिंग सिस्टम -OS कौन सा है


कौन है सबसे तेज

व्यक्तिगत रूप से मुझे मोज़िला फायरफॉक्स ब्राउज़र पसंद है और इंटरनेट एक्स्प्लोरर का इस्तेमाल करता ही नहीं. कभी ज़रूरत भी पड़ी तो ढूंढना पड़ता है कि इंटरनेट एक्स्प्लोरर है कहाँ!?

इंटरनेट के शुरूआती दिनों में भी मैंने इसकी बजाए Netscape Navigator का खूब इस्तेमाल किया. माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ पर चलने वाले आम कम्प्यूटर्स पर इंटरनेट एक्स्प्लोरर अधिकतर पाया जाता है और प्रयोग भी किया जाता है क्योंकि यह माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ के साथ ही मिलता है और ब्राउज़र के नाम browsers-fightसे अधिकतर लोग इसी को जानते पहचानते हैं.

अब तक इंटरनेट एक ऐसा माध्यम रहा जहाँ आप सूचनाओं को तेजी से प्राप्त करना चाहते थे. एक समय था जब विंडोज आधारित पर्सनल कंप्यूटरों के साथ आने वाले इंटरनेट एक्स्प्लोरर की तूती बोलती थी. लेकिन अब ज़रूरत आ पड़ी है इंटरनेट पर आधारित अधिकतर अनुप्रयोगों को उतनी ही तेजी से प्रयोग करने की, जितनी तेजी से डेस्कटॉप आधारित एप्लीकेशन काम करते हैं.

ऎसी ही कई नई तकनीकों के चलते, नए उभरे दबंग ब्राऊज़र्स ने दीन-हीन. फीके से एक्स्प्लोरर को पछाड़ अपनी जगह बनानी शुरू की.

हालिया दिनों में गूगल क्रोम ने स्थापित होने की गति, स्टार्ट होने की गति, वेब पृष्ठ लोड करने की गति, वेब एप्लीकेशन चलाने की गति जैसे कार्यों में बाक़ी सबको पछाड़ा है. लेकिन यह परिणाम उस जावास्क्रिप्ट बेंचमार्क पर आधारित है जो ब्राऊज़र्स के जावास्क्रिप्ट निष्पादन पर निर्भर है.

लेकिन बाक़ी ब्राउज़र निर्माता भी खामोश नहीं बैठे. उन्होंने अपने उत्पादों का पुनर्निर्माण किया, अनुकूलित किया. जैसे कि इंटरनेट एक्स्प्लोरर -Internet Explorer IE9 ने कंप्यूटर की ग्राफिक्स कार्ड के जरिए ब्राउज़र कार्यों की गति बढ़ाने की कोशिश की

ब्राउज़र तुलना
अगर ब्राउज़र की तुलना कुर्सी से की जाए ……….

फिर भी अगर कुछ बिंदु निर्धारित किए जाएं तो वह बिंदु होने चाहिए कि कंप्यूटर शुरू होने के बाद कोई ब्राउज़र कितना समय लेता है शुरू होने में, चलते कंप्यूटर में ब्राउज़र बंद होने के बाद फिर से शुरू होने में कितना समय लेता है, जावास्क्रिप्ट बेंचमार्क पर ब्राउज़र कितना खरा उतरता है, हार्डवेयर के सहारे गति वर्धन कितना है और पेज लोड होने के प्रदर्शन का स्वतंत्र अध्ययन.

इनके परिणाम देखें जाएं तो कंप्यूटर शुरू होने के बाद, चलते कंप्यूटर में ब्राउज़र बंद होने के बाद फिर से शुरू होने में Internet Explorer -IE9 ने बाजी मारी और सबसे पीछे रहा Opera 12. जावास्क्रिप्ट बेंचमार्क में भी यही परिणाम रहा. लेकिन खुद गूगल के Octane Benchmark ने गूगल क्रोम को दूसरे स्थान पर रखा. पहले स्थान पर रहा Maxthon 3.4.

Mozilla Kraken 1.1 Score में पहला स्थान था गूगल क्रोम का और आखिर में इंटरनेट एक्सप्लोरर. Hardware Acceleration संबंधित Psychedelic Browsing जाँच में गूगल क्रोम पहले स्थान पर रहा और आखिर में रहा Maxthon 3.4.

ओपेरा

विभिन्न संस्थाओं, व्यक्तियों द्वारा अपनी अपनी जांच द्वारा इन ब्राऊज़र्स को परखा गया है. अधिकतर को ओपेरा की वह ऑफ रोड विशेषता भाती है जिसमें इंटरनेट की स्पीड कम पाए जाने पर वह खुद ही Turbo Mode में आ कर वेब पृष्ठों को सीधे डाउनलोड करने की बजाय ओपेरा सर्वर से संपर्क करता है और वहाँ से, संचित संपीड़ित वेब पृष्ठ ले आता है.

विशेषज्ञों ने पाया कि बिना Turbo Mode के अगर कोई वेब पृष्ठ 10 MB का डाटा डाउनलोड करता है तो Turbo Mode सक्रिय होने पर केवल 2 MB डाउनलोड किया जाता है. इसलिए अगर अपने इंटरनेट का खर्च बचाना है तो ओपेरा बेहतर है.

फायर फॉक्स

फायर फॉक्स, जिसे हिंदी में अग्नि-लोमड़ कह पुकारा जाना मुझे अच्छा लगता है, अपने Add-ons की वज़ह से भी बहुत लोकप्रिय है. पिछले संस्करणों की यही शिकायत Download: Fast, Fun, Awesomeरही कि यह कंप्यूटर की RAM बहुत ‘खाता’ है लेकिन हालिया संस्करणों में इस शिकायत को दूर कर दिया गया है. तथा SPDY 3.1 जैसी नई तकनीकों को अपना कर सुरक्षा और गति के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है.

अब तो WebRTC का समावेश किया जाने वाला है जिससे वेबसाईट्स, कम्प्यूटरों के माईक और कैमरे तक पहुँच बनाएंगी. अपनी रुचि अनुसार इसका रंग रूप बदल सकना एक अतिरिक्त खूबी तो है ही.

मैं तो इसकी उस खूबी पर लट्टू हूँ जिसमें Address Bar में ही कुछ लिख कर सर्च किए जाने की सुविधा है, बजाए इसके कि गूगल खोल कर सर्च किया जाए. डाउनलोड होती फाइल्स पर निगाह रख पाना, ब्राउज़र में ही पीडीएफ फाइल्स का खुलना तो विशेषता है ही इसकी,

क्रोम

निश्चित तौर पर क्रोम, HTML 5. वॉयस सर्च. जैसी कई विशेषताओं को समेटे अपने प्रतिद्वंदियों को टक्कर दे रहा है. ब्राउज़र में ही फ़्लैश प्लेयर और पीडीएफ रीडर का होना इसे और भी आकर्षित बनाता है.
क्रोम ब्राउज़र टैब खूबीमुझे इसकी वो हालिया खूबी बहुत बढ़िया लगी जिसमें किसी टैब में स्पीकर का चिन्ह तब दिखाई देता है जब उस टैब वाले पृष्ठ पर कोई आवाज़ वाली चीज सक्रिय हो.

कई बार तो ऐसा होता है कि धड़ाधड़ टैब खोलते जाने पर पता चलता है कि कहीं किसी विज्ञापन या वीडियो की आवाज़ आ रही स्पीकर्स से लेकिन मालूम नहीं कि इन 40-50 टैब्स में वो है किधर? इस Noisy Tab सुविधा के चलते एक नज़र में ही पता चला जाता है कि शोर किस टैब से आ रहा.
ब्राउज़र में आवाज़ के सहारे सर्च

भले ही फायरफॉक्स में WebRTC तकनीक आने वाली है, लेकिन क्रोम में यह आ चुकी. जिसके चलते आप अपने कंप्यूटर के माईक द्वारा बोल कर भी सर्च कर सकते हैं गूगल पर.

इंटरनेट एक्स्प्लोरर

भले ही एक्स्प्लोरर ने HTML5 तथा CSS3 का समावेश कर खुद को संभालने की कोशिश की है लेकिन यह अभी भी अपने प्रतिद्वंदियों से पीछे है. HTML5 Test पर ही यह पांच ब्राउज़र की सूची में सबसे नीचे है. रंगरूप में बदलाव, मल्टी टैब सुविधा के अतिरिक्त इसकी इकलौती खूबी नज़र आई है HTML5 touch input support. वरना विंडोज़ के मालिकों का ही विकसित किया ब्राउज़र, विंडोज़ पर ही उल्लेखनीय गति दर्शाता है.

वैसे आपको जानना हो कि आपका कौन सा ब्राऊज़र ज़्यादा अच्छा है तो इस लिंक पर क्लिक कीजिए, जितने ज़्यादा नंबर उतना तेज, अच्छा ब्राउज़र 😀

ऐसी ही और भी ना जाने कितनी ही कसौटियों से गुजर कर कोई ब्राउज़र तकनीकी मानकों पर अपनी खूबियाँ साबित करता है. लेकिन व्यक्तिगत रूप से मुझे सबसे बढ़िया लगता है ऑपेरा. उसके बाद नंबर आता है फायरफॉक्स, फिर सफारी का. क्रोम भी ठीक लगता है लेकिन ये अंदर की बात है कि Trident इंजन पर बनाया  गया SlimBrowser सामान्य उपयोग के लिए सबसे बढ़िया है.

Trident इंजन? जी हाँ, इस वक्त दुनिया के तमाम ब्राउज़र Blink, Gecko, KHTML, Prince, Servo, Trident, WebKit जैसे इंजिन्स पर बनाए जा रहे हैं. इसे कुछ यूँ समझा जाए कि मारुति की वैगन आर जिस इंजन पर चलती है वही इंजन मारुति जेन के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है.

ब्राउज़र मॉडल
अगर ब्राउज़र की तुलना सुंदरियों से की जाए ………

जब यह लेख आधा लिख चुका था तो मैंने अपने जिज्ञासु मित्र को पढवाया. उनका एक प्रश्न और उछला “यार! ये इतने सारे ब्राउज़र आखिर हैं किसलिए और इनको क्या फ़ायदा होता है इस दौड़ में बने रहने से?” मैं हँसा कि यार तुम्हारे मेडिकल काम्प्लेक्स में सभी चालीस दुकानें दवाईयों की हैं अगर एक ही दुकान से काम चलता तो इतनी सारी दुकानें क्यों? सब व्यापार करते हैं, एक ही तरह की दवाईयाँ बेचते हैं और सबको फ़ायदा ही होगा तभी तो जमे हुए हैं अरसे से.

बात समझ तो आ गई उन्हें, लेकिन ब्राऊज़र्स की बात की जाए तो हरेक का अपना एक अलग बिज़नेस मॉडल है. भले ही ये मुफ्त में मिल रहे हों लेकिन कहावत है ना ज़िंदगी में कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता

कमाई भी करते हैं ये!

बात अगर ओपेरा की हो तो उसने दो तरीके अपनाए हैं पहला है इंटरनेट से जुड़ सकने वाले किसी मोबाईल या सेट-टॉप बॉक्स पर पहले से ओपेरा के जड़े जाने का अनुबंध. जिसमें लाइसेंस शुल्क, इंजीनियरिंग शुल्क, रखरखाव शुल्क और बिक्री से होने वाली आमदनी. ये ओपेरा की आय का एक बड़ा हिस्सा है.

दूसरा है डेस्कटॉप कम्प्यूटर्स का. जिसमें सर्च इंजिन्स, ओपेरा ब्राउज़र पर उसके उपयोगकर्ताओं द्वारा की गई विभिन्न खोजों के आधार पर, ओपेरा वालों को भुगतान करते हैं. और ओपेरा ही क्यों! अभी ब्राउज़र इसी के आधार पर चांदी कूट रहे हैं. और इसका भी 90% उस छोटे से सर्च इंजिन वाली जगह से आता है जो ब्राउज़र में पहले से ही डली हुई है.
ब्राउज़र सर्च

यह जान कर हैरान मत होइएगा कि इन्हीं नीतियों के बल पर 2012 में मोज़िल्ला ने 31,10,00,000 डॉलर (18,605,500,000 रुपये) कमाए थे. और यह तिकड़म अधिकतर ब्राउज़र निर्माता अपनाते हैं.

आज तो किसी भी आधुनिक कंप्यूटर का अस्तित्व ब्राउज़र के बिना अधूरा है. जैसे जैसे इंटरनेट पर आधारित कार्यों पर निर्भरता बढ़ते जा रही है वैसे वैसे उपयोग करने वालों की आवश्यकता अनुसार, उन्नत ब्राउज़र तकनीक अपनाते हुए, वे अपने आपको ढाल रहे हैं.

ब्राउज़र विकास क्रम

तो अगली बार आप भले ही ना सोचें कि कौन सा ब्राउज़र आपके लिए ठीक है कौन सा नहीं. आप तो बस इसे अपडेट रखिए और अपना समय बिताते रहें इस पर. जितना समय आप इन पर बिताएंगे उतना ही फ़ायदा होगा इनके निर्माताओं को.

झटका लगा ना?

© बी एस पाबला


 


ब्राउज़र क्या है? कौन है कमाऊ ! कौन बेहतर, कौन बदतर !!
5 (100%) 2 votes

Related posts

25 thoughts on “ब्राउज़र क्या है? कौन है कमाऊ ! कौन बेहतर, कौन बदतर !!

  1. लेख के साथ चित्रों का प्रयोग शानदार लगा !
    टिप्पणीकर्ता रतन सिंह शेखावत ने हाल ही में लिखा है: Indian Army Rally Recruitment Bharti Anantapur, Chittoor, Prakasam, Guntur, Kadapa, Kurnool & Nellore 2014My Profile

    1. बी एस पाबला

      Smile
      प्रयोग होते रहने चाहिए

  2. बढ़ि‍या जानकारी दी है आपने.
    टिप्पणीकर्ता Kajal Kumar ने हाल ही में लिखा है: कार्टून :-नि‍जता के अधि‍कार का उलंघनकर्ता है चुनाव आयोगMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया काजल जी

  3. खूब मेहनत करते हो भाई।
    टिप्पणीकर्ता दिनेशराय द्विवेदी ने हाल ही में लिखा है: विवाह के बाद नाम, उपनाम बदलना उचित नहींMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Aerobics
      मेहनत करनी तो पड़ती है

  4. hemant arora

    बेहतरीन लेख ,जानकारी बढ़ाने के लिए धन्यवाद

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया हेमंत जी

  5. Extremely useful information that too in Vernacular. Kudos to Praji
    टिप्पणीकर्ता PN Subramanian ने हाल ही में लिखा है: ग्राम देवी की प्रतिष्ठा में एक पर्वMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart
      स्नेह बनाए रखिएगा सर

  6. रोचक और उपयोगी जानकारी !

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया वाणी जी

  7. बेहतरीन जानकारी दी हैं आपने.
    हम सबका ज्ञान बढ़ाने के लिए धन्यवाद.
    चन्द्र कुमार सोनी.

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया सोनी जी

  8. बेहतरीन जानकारी के लिए आभार ….!
    मुझे तो मोज़िला फायरफॉक्स ब्राउज़र ही पसंद है|

    RECENT POST आम बस तुम आम हो
    टिप्पणीकर्ता dheerendra singh bhadauriya ने हाल ही में लिखा है: आम बस तुम आम होMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Approve
      मुझे भी फायरफॉक्स ही पसंद है

  9. जानकारी के लिए धन्यवाद पाबला जी. अपन तो तीनों प्रमुख ब्राउज़रों का इस्तेमाल करते हैं… वो क्या है न कि अलग-अलग आइडेंटिटी रखनेवालों को इससे खासी सहूलियत हो जाती है 😉
    टिप्पणीकर्ता Nishant ने हाल ही में लिखा है: उपयोगिता : UtilityMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Ssshh
      ऐसे रहस्य बताये थोड़े ही जाते हैं !

  10. बहुत बढ़िया जानकारी । आगे से इसका भी ध्यान रखेंगे कि कौन सा ब्राउज़र बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है ।

  11. बी एस पाबला

    Smile
    जी , बिलकुल

  12. roiht

    बहुत सी जानकारी से युक्त बेहतरीन लेख आपकी ब्लॉग की सबसे बड़ी खासियत है , उनमे दी जाने वाली लिंक जो आपको इंटरनेट के सागर मे गोते लगाने देती है। जानकारी देने के लिए …हमेशा की तरह ध्न्यवाद

  13. आभार जानकारी के लिए।

  14. बहुत बढ़िया उपयोगी जानकारी प्रस्तुति के लिए आभार!

  15. ajit

    ऐ का तेहां तो गूगल क्रोम के तुलना शौचालय से कर देस! अइसे काबर?

  16. wow mere jaise anaadiyon ke liye bde kaam ki chhej hai ye.
    thanx. waise aapko book likhni chahiye . apne technical knowledge ko apne tk simit mt rkhiye.
    haan ye btaiye ydi koi software install krne pr error show ho to kya krna chahiye??? 😛

Comments are closed.