ब्लॉगरो सावधान! गूगल ने असली लेखन को बढ़ावा देने अपने कोड बदलने शुरू किए


निश्चित तौर पर यह खबर उनके लिए बेहद निराशा ले कर आ रही है जो किसी अन्य के लेखन या खबर को आधार बना कर या ‘प्रेरणा’ ले कर अपने कथित लेख लिखते हैं।

हुआ यह है कि खोज इंजन परिणामों में, नकल किए गए लेखों, स्पैम को कम करने के लिए गूगल टीम की साप्ताहिक बैठक में गूगल सर्च इंजिन Algorithm बदले जाने को अनुमोदित कर इस प्रकिया को इसी सप्ताह लागू कर किया गया है।

इस कवायद का मकसद, सर्च इंजन के द्वारा, खोजकर्ता को मूल साइट की सामग्री की नकल की बजाय मूल सामग्री को दिखाया जाना है। गूगल ने इस गणना के लिए असली नकली के बीच कुछ प्रतिशत नियत किए हैं जो मूल आलेखों का आईना बने  नकल किए गए आलेख से मिलान कर अपना निर्णय लेगें।  गूगल के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन है।

यह देखना अभी बाकी है कि इसका असर उन साइट ऑपरेटरों, ब्लॉगरों पर क्या पड़ता है जो केवल किसी अन्य वेबसाईटों पर उपलब्ध खबरों जैसी सामग्री के बलबूते अपना ब्लॉग या साईट चला रहे हैं।

यह तो गूगल के खोज इंजन और अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए एक शुरूआत है। इन परिवर्तनों के वास्तविक परिणाम अभी भी अज्ञात है।

कुछ संक्षिप्त, आधिकारिक जानकारी आप यहाँ पा सकते हैं

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14 Thoughts to “ब्लॉगरो सावधान! गूगल ने असली लेखन को बढ़ावा देने अपने कोड बदलने शुरू किए”

  1. ललित शर्मा

    अच्छी खबर हैं जी।
    शुभकामनाएं।

  2. cmpershad

    कापीकैट के लिए खतरे की घंटी… सावधान हो जाइये 🙂

  3. निशांत मिश्र - Nishant Mishra

    हिंदी ब्लॉग में असली लेखन?
    यह किस चिड़िया का नाम है?:)

  4. Vivek Rastogi

    अच्छा है कम से कम मूल स्त्रोत का पता तो चलेगा। वैसे इसका असर क्या होता है यह तो आनेवाले दिनों में ही पता चलेगा।

  5. Kajal Kumar

    कार्टूनिस्टों को भी डरना चाहिये !

  6. Arvind Mishra

    यह हुयी न कोई बात ..आखिर बौद्धिक संपदा चोरी पर कुछ तो प्रतिबन्ध हो !

  7. राज भाटिय़ा

    वो मारा पापड वाले को…

  8. वन्दना

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (31/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

  9. DHEERAJ

    हर तकनीक के कुछ फायदे और कुछ नुकसान तो होते ही हैं। खैर देखते हैं क्या होता है।

  10. राजीव तनेजा

    बहुतों के पसीने छुडा देने में सक्षम बढ़िया…दमदार खबर

  11. अविनाश वाचस्पति

    अब मौलिक लिखना पड़ेगा
    उसके लिए भी गूगल की गोगल काम में लायेंगे
    जेब में सबकी, मौजूद हैं बापू

  12. डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति

    प्रेरणा स्त्रोतों को भी पढ़ते रहना और सजदा करना दिल को खुशी देता है.. ..किन्तु मौलिक लिखना ही भाता है…
    अब इसमें फायदा ज्यादा पह्लूवों में है किन्तु नुक्सान भी है.. क्योंकि कई ब्लॉग में अच्छे लेख और कविताये पढ़ने को मिलती है..

  13. Suresh Chiplunkar

    कम से कम मेरे लिये तो यह खुशखबरी ही है…

  14. प्रवीण पाण्डेय

    यह तो बड़ी अच्छी खबर है, मौलिकता को प्रश्रय मिले।

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