ब्लॉग पढ़वाने के लिए ईमेल क्यों भेजना? आपकी पोस्ट खुद चल कर जाती है, ईमेल में!

ब्लॉग बुख़ार

आजकल हिंदी ब्लॉगजगत में ताजा विवाद छिड़ा हुआ है कि जाने-अनजाने ब्लॉगर साथियों को ईमेल भेज कर अपना ब्लॉग पढ़वाया जाए कि नहीं? सभी की अपनी धारणायें हैं, अपने विचार है। कोई इसे सही कहता है कोई गलत। मैं इस विवाद में कूदने की बजाये इतना ही कहना चाहूँगा कि हर ब्लॉगर की तमन्ना होती है कि जितनी बार वह पोस्ट लिखे उतनी बार उसका प्रचार किया जाए, उस पर प्रतिक्रिया पाई जाए। इस चक्कर में बहुत मेहनत कर इक्कठा किए गये ईमेल्स पर अपनी शैली में आग्रह भी किया जाता है। एकाध बार तो परवाह नहीं की जाती और पढ़ भी लिया जाता है। बात तब बिगड़ती है जब यह आग्रह बार-बार आना शुरु हो जाता है।

उत्साही ब्लॉगर द्वारा इस बार बार की जाने वाली इस प्रक्रिया में खुद उसका समय तो खपता है लेकिन ईमेल पाने वाले पर इसका प्रभाव नकारात्मक पड़ता है। सौजन्यतावश भले ही कोई कुछ ना कहता हो किन्तु मेरे जैसे पता नहीं कितने ही लोग ऐसी मेल को स्पैम घोषित कर देते हैं, फिर उस ब्लॉगर द्वारा भेजे जाने वाली भविष्य की सभी ईमेल्स, पाने वाले के इनबॉक्स में आती हीं नहीं, भले ही उसमें कितनी भी अच्छी जानकारी हो।
इन सब से पार पाने की बहुतेरी युक्तियाँ हैं, जिससे दोनों पक्ष खुश रह सकते हैं। एक युक्ति है कि जितनी बार ब्लॉग में पोस्ट छपे, उतनी बार उस पोस्ट की सूचना आपके चाहने वाले की ईमेल में खुद ही चली जाए, बिना आपके कोई अतिरिक्त प्रयास किए। इसके लिए, पोस्ट छापने वाले और पोस्ट की सूचना पाने के इच्छुक को मात्र एक बार, कुछ माऊस क्लिक करना होगा, फिर हमेशा के लिए मौज़ां ही मौज़ां! आईए देखें यह कैसे किया जा सकता है।
आपने विभिन्न ब्लॉगों पर अक्सर ही देखा होगा कि कुछ शब्दों या चित्र के माध्यम से कहा जाता है Subscribe by Email या New post in your Inbox या ईमेल द्वारा नई पोस्ट प्राप्त करें या ताज़ा लेख ईमेल पर पाने के लिए अपना ईमेल पता भरें या फिर ऐसा ही कुछ कुछ्। इस ब्लॉग पर भी आपको ऐसा ही कुछ मिल जाएगा
आइए देखें इस मुफ्त की सुविधा को कैसे लिया जा सकता है
मुझे इसके लिए फीडबर्नर बहुत पसंद है। यह गूगल की ही सम्पत्ति है, इसलिए जीमेल वालों को अलग से खाता नहीं बनाना पड़ता, जीमेल के ही आईडी/ पासवर्ड से इसमें पहुँचा जा सकता है।
1- फीडबर्नर की साईट पर जाएँ, अपनी जीमेल की आईडी/ पासवर्ड डालें। यदि जीमेल की आई डी नहीं है तो पहले फीडबर्नर में अपना खाता बनाएँ
2- सामने खुले पृष्ठ पर Burn a feed right this instant के नीचे अपने ब्लॉग का URL डालें, Next पर क्लिक करें
3- अगले पृष्ठ पर, बेहतर होगा दूसरे रेडियो बटन RSS को चुनें, Next पर क्लिक करें

4- अब खुले पृष्ठ पर Feed Title में अपने ब्लॉग का

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26 thoughts on “ब्लॉग पढ़वाने के लिए ईमेल क्यों भेजना? आपकी पोस्ट खुद चल कर जाती है, ईमेल में!

  1. सही है, आप ने मेल भेजने वालों को कुछ दिन के लिए तो व्यस्त कर ही दिया है।

  2. सही है आमंत्रण या निमंत्रण एक बार तक सीमित रहे तो अच्छा है अन्यथा spam ही कहलायेगा . दरअसल ईमेल के भी नियम हैं जो ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम हैं

  3. वाह पाब्ला जी….क्लिनिक में इसका भी इलाज निकल ही आया…मजा आ गया…

  4. पहले भी यह सब कई बार बताया गया है ..आपको क्या लगता है पाबला जी लोगों को इस बारे में नही पता होगा ..मैं तो त्रस्त हो गई हूँ अवांछित इ मेल भेजने वालों से.

  5. हा हा यह स्पैमर्स के लिए आईडिया नहीं है ज्ञानदत्त जी!

    जब तक कोई चाहेगा नहीं तब तक मेल जाएगी ही नहीं उसके पास

    वांछित और अवांछित में फर्क तो होता ही है 🙂

    यहाँ ताली दोनों हाथों से बजेगी।
    मेल भेजने जैसा तमाचा नहीं पड़ेगा

  6. डाक्टर साहब! इस बीमारी का सही इलाज बताने के लिए धन्यवाद्…:)

  7. main to iska upyog last 2 yrs se kar raha hun.. lekin yah ilaaj sahi nahi hai.. mere blog par fir bhi koi nahi aata hai..ab mujhe bhi spam ka hi sahara lena parega.. 🙁

    ha ha ha.. 🙂

  8. PD आपने लिखा था आप ब्लॉग गूगल रीडर से पढ़ते हैं , इसलिय आपको पता नहीं चलता आपके ब्लॉग में कितने लोग आ रहे हैं . अपनी मित्र संख्या पर भी नजर रखें 🙂

  9. देखिए एक बार तो सूचना मैं देता ही हूं। बार बार भेजता भी नहीं हूं सिर्फ अपनी पोस्‍टों की नहीं, अच्‍छी पोस्‍टों की भी जानकारी देता हूं और टिप्‍पणी पाने की तमन्‍ना नहीं रखता। जिसे जब समय होगा, और पढ़ना चाहेगा तो पढ़ लेगा। नहीं पढ़ना चाहेगा तो मुझे सूचित कर देगा कि मत भेजिए मुझे सूचना। मैं उन्‍हें ई मेल भेजना बंद कर देता हूं। भेजने वाले पतों में सारे पतों का उल्‍लेख करना उचित नहीं है परंतु जब तक इसकी जानकारी नहीं थी, तब तक ही ऐसा किया है। पर अब नहीं करता।
    मानस के मोती एक गूगल समूह बना लिया है। जिसके जरिए भेजी जाने वाले मेल में पतों की गोपनीयता भी भंग नहीं होती और जो मना करना चाहते हैं, वे इसे वहीं पर अनसब्‍सक्राइव वाले ऑप्‍शन पर क्लिक कर सकते हैं या मुझे भी सूचित कर देते हैं।
    मैं खुद भी ऐसी पोस्‍टों की सूचना पाना चाहता हूं जो कि मेरी निगाह से बच जाती हैं जब मुझे मेल में सूचना मिल जाती है तो पूरी कोशिश करता हूं कि उसे पढ़ा जाए। पर कभी कभी अपवाद भी हो सकता है।
    फिर भी इस संबंध में जो आमराय बनेगी, उसे मैं अवश्‍य स्‍वीकारूंगा।

  10. सही कहा। मैंने तीन-चार रोज पहले ही जोड़ा है!!!:)

  11. अपने पोस्ट के बारे में भला किसी को जबरन ईमेल क्यों करना? यदि पोस्ट अच्छा है तो पाठक स्वयं खोज कर उसे पढ़ लेता है।

    मैं तो अपने मेलबॉक्स में आने वाली ऐसे मेल को बिना पढ़े ही डिलीट कर दिया करता हूँ।

  12. देखते हैं आपके इस प्रयास से कितनी सौजन्यता आती है? वर्ना परेशानी के अलावा सरफ़ुट्टोवल अलग से देखने में आती है.:)

    रामराम.

  13. E mail subscription sabse umda upay hai apne blog ke prashanshakon jo khud blogger nahin hain, tak pahuchne ka. Bahut hi umda lekh tha Pabla ji !

  14. इलाज बताने के लिए धन्यवाद्

    धन्यवाद्

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    C.M. को प्रतीक्षा है – चैम्पियन की

    प्रत्येक बुधवार
    सुबह 9.00 बजे C.M. Quiz
    ********************************
    क्रियेटिव मंच

  15. अच्छी जानकारी दी है आपने.. यह सुविधा आपकी मेल को चाहने वाले लोगों तक ले जाने का सबसे नैतिक तरीका मुहैया कराती है.. हैपी ब्लॉगिंग.

  16. अच्छी जानकारी दी है आपने.. यह सुविधा आपकी मेल को चाहने वाले लोगों तक ले जाने का सबसे नैतिक तरीका मुहैया कराती है.. हैपी ब्लॉगिंग.

  17. धन्यवाद आपका.

    कुछ पूछना हो तो बतायेंगे?

  18. चावला जी, आपने तो बहुत बढ़िया जानकारी दे दी। मैं आपके द्वारा बताए गए रास्ते पर चलना चाहूंगा जैसा आपने बताया है, स्टैप बाय स्टैप, सफल हुआ तो आप इसके लिए बधाई के पात्र हैं।

  19. मैं भी अपने सभी ब्‍लॉग पर ऐसा ही करूंगा और सबको सलाह दूंगा कि ऐसा ही करें पर पहले खुद करके देखूंगा। सफल हो पाता हूं कि नहीं। नहीं हो पाया तो पाबला जी जिन्‍दाबाद।
    फिर मानस के मोती से सप्‍ताह में एक ई मेल वो भी अन्‍य अच्‍छे ब्‍लॉगों की जानकारी देती हुई। आखिर मानस के मोतियों को यूं ही बिखेरा तो नहीं जा सकता न।

  20. इस तरह के एमैल्स से तंग तो हम सभी आ चुके हैं…जी करदा है जी करदा है….बस डिलीट करन दा जी करदा है…:):)

  21. पाबला जी , पोस्ट तो फोलोवर बनकर खुद ही चली आती हैं । फिर इ मेल की भी क्या ज़रुरत है ?

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