भाषा ऎसी चुंबकीय लिखें कि विज्ञापन दिखें

पिछला काफी समय पारिवारिक हादसों से जूझते बीता. अब कहीं जा कर जीवन कुछ सामान्य सा लगने लगा है. इस बीच कई मित्रों की बहुत सी जिज्ञासाएं एकत्रित हो गई हैं, इंटरनेट से संबंधित तकनीकी मुद्दों की. अब कोशिश है कि धीरे धीरे उन पर लिखा जाए. इस बार लिखा गया है, गूगल द्वारा ऑनलाइन लेखन पर दिए जाने वाले विज्ञापन पर.

हालांकि गूगल, इंटरनेट पर उपलब्ध लेखों पर आज की तारीख में जो विज्ञापन देता है वह घोषित रूप से हिंदी भाषा वाले लेखों के लिए नहीं हैं. लेकिन अपने खुद के मापदंडों पर खरा पाये जाने पर गूगल का सर्वर, हिंदी लेखों पर भी अक्सर विज्ञापन दिखाता है.

इसके साथ ही मूल रूप से हिंदी भाषा वाले ब्लॉग/ वेबसाईट वालों को, विज्ञापन दिखाने के लिए अपना खाता बनाने की अनुमति नहीं है. कुछ वर्षों पहले अनुमति तो दी गई थी लेकिन डेढ़ वर्ष में ही हिंदी भाषा वालों की हरकतों से तंग आ कर उसने सारी सुविधा वापस ले ली, ऎसी अफवाहें हैं.

अब तो इसके लिए अंग्रेजी भाषा, अरबी भाषा, जर्मन भाषा, पुर्तगाली भाषा, बल्गेरियाई भाषा, यूनानी भाषा, रोमानियाई भाषा, चीनी भाषा सहित हंगेरी, सर्बियाई, क्रोएशियाई, इंडोनेशियाई, स्लोवाक,चेक, इतालवी, स्लोवेनियाई, डैनिश, जापानी, स्पेनी, डच, कोरियाई, स्वीडिश, लातवियाई, थाई, एस्टोनियाई, लिथुआनियाई, तुर्की, फिनिश, पोलिश, यूक्रेनी, फ्रेंच, नार्वेजियन, वियतनामी भाषा वालों को ही घोषित अनुमति है विज्ञापन खाता बनाने और दिखाने की.

गूगल कीवर्ड से विज्ञापन मस्ती

विज्ञापन किसी भी भाषा के लिए हों, गूगल सर्वर उस भाषा के विज्ञापन दिखाने के लिए प्रमुख रूप से दो तरीके चुनता है. पहला तो, प्रयुक्त हो रहे ब्राउज़र में आपके द्वारा सर्च इंजिन के सहारे कुछ तलाश किये जाने पर आपकी उस रुचि अनुसार दिखे शब्दों से संबंधित विज्ञापन और दूसरा है आपके द्वारा पढ़े देखे जा रहे लेख में आये उन चुनिंदा शब्दों को पकड़ कर वह विज्ञापन दिखाना जिन शब्दों पर आधारित विज्ञापन पहले से ही तैयार हैं.

रूचि अनुसार सामने आये वह विशिष्ट शब्द या लेख के वह ख़ास शब्द, तकनीकी भाषा में कीवर्ड कहलाते हैं. मज़ाक में बात करें तो की-वर्ड वह चाबी वाला शब्द है जिससे विज्ञापनों की तिजोरी का ताला खुल सकता है. अब आते हैं एक मित्र की जिज्ञासा पर कि किसी की-वर्ड पर आधारित ऐसा कोई लेख कैसे लिखा जाए, जिस पर विज्ञापन देने वाले दौड़े चले आयें.

इसका सबसे बढ़िया उपाय है स्वयं गूगल द्वारा उपलब्ध करवाया गया कीवर्ड प्लानर, जो पहले सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था लेकिन हाल ही में वह गूगल एड्वर्ड्स में समाहित कर दिया गया है, जिसके लिए एडवर्ड्स खाता बनाना और लॉग-इन करना आवश्यक है.

इस लेख को लिखे जाने के लिए किसी एक शब्द की तलाश में मैंने फेसबुक पर गुहार लगाई थी लेकिन किसी ने उत्तर नहीं दिया. फिर अचानक ही सुश्री लवली गोस्वामी के स्टेटस पर नज़र पड़ी और मैंने, ये शब्द ‘भाषा’ उड़ा लिया.

मैंने सोचा कि अब एक लेख लिखा जाए भाषा पर, की-वर्ड रूपी चुंबक का उदाहरण देते हुए . निश्चित तौर पर की-वर्ड मैंने माना ‘भाषा’. अब इस शब्द का उपयोग पहले तो मैंने ऑनलाइन लेखन शैली को सर्च इंजिन के अनुकूल रखने के लिए किया. फिर इस शब्द को, कीवर्ड प्लानर पर ले गया.

गूगल कीवर्ड से विज्ञापन

वहाँ बताया गया कि

line-bspablaअंग्रेजी भाषा, उर्दू भाषा, चीनी भाषा, जापानी भाषा, मराठी भाषा, राष्ट्र भाषा हिंदी, राष्ट्र भाषा, हिन्दी, विज्ञापन की भाषा, संस्कृत भाषा, हिन्दी भाषा, हिन्दी भाषा भारत

जैसे भाषा संबंधित शब्दों की तलाश होती है गूगल पर और इन शब्दों को औसतन कितनी बार तलाशा जाता है. साथ ही साथ पता लगा कि इस ‘भाषा’ शब्द के लिए विज्ञापन देने वालों की प्रतिस्पर्धा कम ही है.

वहीँ एक ग्राफ के सहारे जाना जा सकता है कि माहवार, पिछले एक वर्ष में संबंधित ‘भाषा’ वाले शब्दों की तलाश कितनी हुई.

गूगल कीवर्ड से विज्ञापन ग्राफ

मुझे तो बस एक उदाहरण देना है तकनीक का इसलिए अब मैंने इस कीवर्ड प्लान के ज़रिये मिले शब्दों को एक क्लिक से अपने कंप्यूटर पर उतार लिया, डाउनलोड कर लिया और फिर उन्हें इस लेख को लिखे जाने के प्रयास में यहाँ ले आया.

ये शब्द हैं अंग्रेजी भाषा, उर्दू भाषा, चीनी भाषा, जापानी भाषा, मराठी भाषा, राष्ट्र भाषा हिंदी, राष्ट्र भाषा, हिन्दी, विज्ञापन की भाषा, राज भाषा, वैदिक भाषा, संस्कृत भाषा, हिन्दी भाषा और हिन्दी भाषा भारत. अब अगर कुछ मस्ती करते, चालू भाषा, जानबूझ कर बिगड़ी भाषा लिखते इन सभी शब्दों का प्रयोग लेखन में किया जाए तो उपरोक्त सभी शब्द कुछ ऐसे ‘घुसेड़े’ जायेंगे 😀

भाषा पर निबंध

line-bspablaभाषा शब्द, संस्कृत के भाष् धातु से बना है जिसका मतलब होता है बोलना या कहना. अर्थात् भाषा वह चीज है जिसे बोला जाए, जिसके जरिए हम अपने मन की बात को किसी दूसरे के लिए व्यक्त कर सकें. बोलने के लिए हम मुँह से निकली ध्वनियों का उपयोग करते हैं और लिखने के लिए एक वर्णमाला का.  कोई भी भाषा मुख से निकलने वाले शब्दों, वाक्यों वगैरह का वह समूह है जिनके द्वारा अपनी भावनाएं जतलाई जाती हैं.

विश्व में सैकड़ों हजारों प्रकार की भाषाएँ बोली जाती हैं जो सामान्यतया बोलने वाले के समुदाय को छोड़ कर  बाक़ी लोगों की समझ में नहीं आतीं.  भाषा को अपने विचारों के एक्सचेंज का माध्यम भी कहा जा सकता है. भाषा के बगैर मानव अधूरा है. भारतीय वैदिक भाषा से लेकर आज की खिचड़ी हिंगलिश भाषा, समय की मांग रही है. भाषा को राष्ट्र-भाषा या टकसाली-भाषा भी कहा जाता है.

ऐसा बहुधा होता है कि किसी देश, प्रांत में प्रयुक्त होने वाली कोई भाषा अपने गुण-दोष, साहित्यिक प्रसार, जनता में अधिक प्रचलित होने के आधार पर राजकाज के लिए चुन ली जाती है और उसे राज भाषा के रूप में या राष्ट्र भाषा या राज्य भाषा घोषित कर दिया जाता है.

विश्व की भाषाओं की तीन अवस्थाएँ मानी जाती हैं.पहला तो वे प्राचीन भाषाएँ जिनका अध्ययन और वर्गीकरण, पर्याप्त साधनों के अभाव में नहीं हो सका, लेकिन अस्तित्व अभी भी है प्राचीन शिलालेखो, सिक्कों और हस्तलिखित पुस्तकों में. मेसोपोटेमिया की प्राचीन भाषा ‘सुमेरीय’ और इटली की भाषा ‘एत्रस्कन’ इसी श्रेणी की भाषाएँ हैं। दूसरी अवस्था में तमाम वो आधुनिक भाषाएँ हैं, जो की कारणों से पनप ना सकीं. जापानी भाषा, कोरियाई भाषा आदि श्रेणी की हैं.

तीसरी अवस्था में प्रचुर सामग्री, सही अध्ययन और वर्गीकरण वाली भाषाएँ हैं. ग्रीक भाषा, अरबी भाषा, फारसी, संस्कृत, अंग्रेजी भाषा जैसी कई भाषाएँ इसके इसमें मानी जाती हैं.

भाषा संबंधित कई अन्य जानकारियों के लिए महावीर सरन जैन जी का आलेख संसार के भाषा परिवार देखा जा सकता है.

उर्दू भाषा, भारतीय आर्य भाषा है, जो भारतीय संघ की 22 राष्ट्रीय भाषाओं में से एक व पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा है। हालाँकि यह फ़ारसी और अरबी से प्रभावित है, लेकिन यह हिन्दी के निकट है और इसकी उत्पत्ति और विकास भारतीय उपमहाद्वीप में ही हुआ

संसार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा, चीनी भाषा है. यह चीन नामक देश की मुख्य भाषा और राजभाषा है। है। चीनी भाषा चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार में आती है और हकीकत में कई भाषाओं और बोलियों का समूह है. माना यही जाता है कि चीनी भाषा सीखना बहुत कठिन है लेकिन चीनी भाषा सीखने का सरल तरीक़ा बताती एक खबर मैंने बीबीसी पर पढ़ी थी.

जापानी भाषा, द्वितीय विश्व युद्ध से पहले कोरिया, फार्मोसा और सखालीन में भी बोली जाती थी। लेकिन अब कोरिया व फार्मोसा में जापानी जानने वालों की संख्या के बावजूद धीरे धीरे उनकी संख्या कम होती जा रही है। ऑनलाइन जापानी भाषा सीखने के लिए एनएचके वर्ल्ड ने एक पाठमाला उपलब्ध करवाई है जिसे यहाँ देखा जा सकता है

अपने देश की बात की जाए तो भारत की सभी भाषाएँ राष्ट्रभाषा है. राष्ट्रभाषा तो देश की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा होती है, जिसे सम्पूर्ण राष्ट्र में भाषा कार्यों में प्रमुखता से प्रयोग में लाया जाता है। इनमें से प्रमुख है मराठी भाषा जिसे 1966 में महाराष्ट्र की राजभाषा का दर्जा दिया गया। यह भाषा 1300 वर्षों से प्रचलन में है.

विज्ञापन की भाषा बाज़ार को बहुत बाद में समझ आई कि इंडिया में तो हिंदी भाषा ही चलती है. बाज़ार अगर ऐसी भाषा बोले, जो उपभोक्ता नहीं समझता, तो उसका दीवाला ही पिट जाएगा.

चलते चले यह भी बता दिया जाए कि हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यमों की भूमिका पर एक सारगर्भित लेख रचनाकार पर उपलब्ध है जिस पर एक भी टिप्पणी नहीं.

तो देखा आपने? कितनी सफाई से गूगल के उस उपकरण से मिले शब्दों को, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के मानकों पर आधारित लेख का पालन करते, उपरोक्त निबंध में खपा लिया गया, विज्ञापनों को आकर्षित करने के इरादे से. कुल मिला कर 1524 शब्द हैं इस लेख में और भाषा शब्द 108 बार दोहराया गया है.


हिंदी भाषा के कीवर्ड तो, विज्ञापन की बेहद क्षीण संभावनायों वाले थे लेकिन अंग्रेजी भाषा के शब्दों की महिमा देखी जा सकती है इस नीचे दिए स्नैपशॉट में. स्पष्ट दिखता है कि ‘भाषा’ पर आधारित विज्ञापन देने के लिए विज्ञापनदाता मात्र 30 पैसे देने को तैयार है वहीँ ‘Language’ के लिए 63 रूपये तक बोली लगाने वाले एक पैर पर खड़े हैं.

गूगल कीवर्ड से विज्ञापन अंग्रेजी

इस की-वर्ड नामक चीज की संभावनाएं अनंत है, उपकरण और भी हैं, तरीके और भी हैं. जिस पर सारी बातें ब्लॉग मंच www.blogmanch.com पर की जा सकती हैं.

क्या मैंने कोई गुस्ताखी की यह सब बता कर?

© बी एस पाबला

भाषा ऎसी चुंबकीय लिखें कि विज्ञापन दिखें
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24 Thoughts to “भाषा ऎसी चुंबकीय लिखें कि विज्ञापन दिखें”

  1. इतनी सारी रिसर्च कर के लिखना हो तो मैं तो लिखना ही बंद कर दूंगा।

    1. मेरा भी यही मानना है.
      परंतु ये कीवर्ड और एनॉलिसिस उन उपक्रमों के लिए बेहद उपयोगी हैं जिनका उद्देश्य ऑनलाइन रेवेन्यू जेनरेट करना है.

      बीच के समय में तो सिर्फ इन्हीं की-वर्ड के जादू से, बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री से भी लोगों ने लाखों-करोड़ों वारे न्यारे किए, परंतु अब गूगल (जैसे अन्य भी) होशियार हो गया है, और सार्थक सामग्री ही सर्च में ऊपर आ पाती है.

      हालांकि अभी भी गूगल सर्च में बहुत सी खामियाँ हैं – उदाहरण – रचनाकार पर प्रथम प्रकाशित सामग्री को कॉपी-पेस्ट कर प्रकाशित करने वाली तथाकथित कोश जैसी साइटों को सर्च में आगे की पंक्ति मिल रही है – (पर, फिर शायद यह भी सर्च-ऑप्टिमाइज़ेशन किस्म का जुगाड़ हो!)
      टिप्पणीकर्ता रवि ने हाल ही में लिखा है: रेमिंगटन (कृतिदेव ) हिंदी कुंजीपट की समस्या दूर करने माइक्रोसॉफ़्ट का नया इंडिक इनपुट 3 जारीMy Profile

      1. बी एस पाबला

        Smile
        एक विधा है ये,चाहे जैसे भी प्रयोग किया जाए

    2. बी एस पाबला

      Smile
      हर विकासोन्मुख अवधारणा के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट ज़रूरी है

  2. नहीं कि गुस्ताखी

    1. बी एस पाबला

      Heart

  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार को (23-11-2013) “क्या लिखते रहते हो यूँ ही” : चर्चामंच : चर्चा अंक :1438 में “मयंक का कोना” पर भी होगी!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      आभार आपका

  4. काफी गम्भीर लेख है -मन स्थिर हो तो पढूं!

    1. बी एस पाबला

      Wink
      इतनी अस्थिरता क्यों?

  5. सर,,, आपने बहुत अच्छा विश्लेषण किया है की – वर्ड वाकई हमारे ब्लॉगस और वेबसाइटों पर ऑनलाइन विज्ञापन खींचने में बहुत सहायता कर सकते हैं। शोधपरक आलेख।

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU`
      आभार आपका

  6. कार्य जारी है Aerobics , और आपको परेशान करना भी In-pain , ब्लॉगमंच.कॉम जबरदस्त प्लेटफ़ॉर्म है Approve । अभी यात्रा बहुत लम्बी है… Angel
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: घर बैठे, शेयर बाजार से कमायें २५००० से ७५००० रूपये–क्या है यह !! (Earn 25000 to 75000 per month from Share Market, How ?)My Profile

    1. बी एस पाबला

      Yes-Sir

  7. बहुत अच्छा चुंबकीय विश्लेषण !

    1. बी एस पाबला

      Heart
      आभार आपका

  8. ‘भाषा’ पर लिखा आपका यह सूचनापरक निबंध अच्छा बन पड़ा है. पर यह बाजार के उपयोग में ही आने लायक है.
    बाजार के दबाव में आकर हिंदी भाषा कुछ विकृत (?) और हल्की नहीं हुई जा रही.
    फेसबुक पर जिन वाक्यों में एक खास शब्द को पाने के लिए फेसबुक मित्रों से आापने गुहार लगाई थी, यदि उसे विज्ञापन की भाषा माना जाए तो क्या वह आकर्षक है.?

    1. बी एस पाबला

      Smile
      जैसा कि मैं पहले भी लिख आया हूँ कि ये एक विधा है ऑनलाइन दुनिया की
      अब इसे प्रयोग कैसे करना है यह तो लेखक पर निर्भर है, बाज़ार पर नहीं

  9. लेख को पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.. आगे भी इंतज़ार रहेगा।
    आप को पढ़ कर कईं बार ऐसा लगता है कि आप को प्रोफैसर होना चाहिए था, आप कितनी सहजता से अपनी बात पाठकों तक पहुंचा देते हैं।

    आप जी परिवार सहित सदैव चढ़दीयां कला विच रहो, यही अरदास है …
    टिप्पणीकर्ता dr parveen chopra ने हाल ही में लिखा है: सुपर मार्कीट की दही से याद आया……My Profile

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      थैंक यू जी

  10. जरा सारे कीवर्ड बात दें…. सिर्फ १ करोड़ कमाना है…जायदा नहीं..

    1. बी एस पाबला

      Overjoy
      ऎसी भी क्या ज़ल्दी है

  11. अन्तरजाल के जटिल नुस्खे।

  12. केशव देव

    लेख काफी ज्ञान बर्धक है , यद्यपि एकाग्रता से नहीं पढ़ा।

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