भोपाल मीडिया चौपाल में कुछ घंटे …

जुलाई के आखिरी दिनों में एक दोपहर Blogs In Media के संदर्भ में आवारा बंजारा संजीत त्रिपाठी जी ने बातचीत के मध्य ही बताया कि 12 अगस्त को वे भोपाल में रहेंगे तो मैं चौकन्ना हुआ.

जिज्ञासा जाहिर हुई तो उन्होंने बताया कि भोपाल के विज्ञान भवन में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित इस ‘राष्ट्रीय मीडिया चौपाल’ में बड़े बड़े पत्रकार रहेंगे, सीमित लोगों को ही बुलाया गया है. अपन मन मार के रह गए कि यह तो हमारे कार्यक्षेत्र के बाहर का कुछ है.

लेकिन एक दिन नज़र पड़ी इंडिया वाटर पोर्टल के एक आलेख पर जिसमे साफ़ साफ़ लिखा था कि ‘विकास की बात, विज्ञान के साथ : नये मीडिया की भूमिका’ विषय पर देशभर के स्तंभकार, ब्लॉगर्स, वेब संचालकों के साथ ही न्यू मीडिया के साथ कार्यरत संचारक बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे. इन विधाओं से जुड़े संचारक, अनिल सौमित्र, स्पंदन फीचर्स, से anilsaumitra0@gmail.com, spandanbhopal@gmail.com, +919425008648 पर संपर्क कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं.

अरे! दर्जन भर हिंदी वेबसाईट संभालते हैं हम, तकनीकी में भी खासा दखल है, ब्लॉगर तो हैं ही, हम क्यों नहीं जा सकते? झट से अनिल जी को फोन किया गया. नाम बता कर पूछा कि पहचाने कि नहीं? हंसते हुए ज़वाब आया कि हिंदी ब्लॉगिंग में आपको कौन नहीं जानता! अब भले ही यह अतिश्योक्ति थी लेकिन मैं मुस्कुराया.

फिर मैंने पूछा कि हमें प्रवेश मिलेगा आपके आयोजन में? खेद भरे स्वर में कहा गया कि कई लोग छूट रहे हैं आपका भी ख्याल नहीं आया. झट से उनकी ई-मेल आ गई औपचारिक आमंत्रण देते हुए. बाद में यह खबर वेब दुनिया पर भी दिखी, in.com पर भी और यहाँ भी

बमुश्किल 12 घंटे का सफ़र है भिलाई से भोपाल का, अगर नागपुर से हो कर जाया जाए. आरक्षण मिल नहीं पाया तो बिलासपुर की ओर से जाने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस का सहारा लिया गया. शनिवार, 11 अगस्त की शाम भिलाई से रवानगी ले कर दूसरे दिन सुबह भोपाल और उसी दिन शाम को भोपाल से रवाना हो कर सोमवार की सुबह भिलाई! साप्ताहिक अवकाश का बढ़िया सदुपयोग होगा.

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ट्रेन रवाना हुई तो याद आया रिजर्वेशन, स्लीपर का मिला है एसी का नहीं. आदत ही नहीं रही सो घर से ओढ़ने बिछाने को कुछ ले कर ही नहीं निकले थे. सुपुत्र को फोन किया गया तो आधे घंटे बाद आने वाले रायपुर स्टेशन पर उसने अपने मित्र को दौड़ाया इंतज़ाम के साथ

सुबह नींद खुली तो बेहद खुशनुमा मौसम. शांति पहुंचाती ठंडी हवा, हलकी हलकी फुहार. स्टेशन था नरसिंहपुर. यूं ही लेटे लेटे निगाह में आए बादलों से ढके पहाड़ तो चौंका. कहीं कोंकण क्षेत्र तो नहीं ये? फटाफट कैमरा निकाला और दे दनादन फायरिंग शुरू. सहयात्री भी सोच रहे होंगे कि अचानक इसे क्या हो गया 🙂

नरसिंहपुर – पिपरिया के बीच 

भोपाल स्टेशन पर उतरते ही ऑटो-रिक्शा वाले प्री-पेड बूथ पर उलझन में पड़ गया. बताया गया कि दो विज्ञान भवन है कौन से वाले पर जाना है? अनिल सुमित जी को संपर्क किया गया तो लगातार बिजी मिला फोन, सुरेश चिपलूनकर जी ने फुसफुसा कर क्या कहा सुनाई नहीं पडा. दोबारा अनिल जी को फोन किया गया तो लोकेन्द्र सिंह मिले और उनके बताए स्थान की ओर हुए रवाना हम

अपने मोबाईल का वॉयस नेवीगेशन शुरू कर दिया था हमने. एक चौराहे पर ऑटो वाले ने कहा कि यहीं तक की पर्ची कटी है आगे आप पैदल चले जाईए. मैं मोबाईल उसके कान के पास कर दिया और कहा कि ये मोहतरमा जैसे जैसे कहती है वैसे चलते जाओ.

पहले तो उसने पूछा कि ये इंटरनेट से चलता है क्या ये सब? फिर उसने खिल्ली सी उड़ाते हुए कहा कि 28 साल से ऑटो चला रहा हूँ भोपाल में, चप्पे चप्पे से वाकिफ हूँ ये क्या बताएगी! वीरान सड़क पर भागते हुए जब मोबाईल वाली कन्या ने बाएं मुड़ने को कहा तो ड्राईवर ठहाका लगा कर बोला यहाँ कहाँ कोई मोड़ है. लेकिन था वहां मोड़, जो विज्ञान भवन का प्रवेश द्वार था. वह इतना ही कह सका ‘गज़ब की तकनीक आ गई है ज़नाब’

साढ़े ग्यारह बज रहे थे जब मैंने स्वागत अधिकारी से जानकारी ले इमारत में प्रवेश किया. सभागार के बाहर ही दैनिक भास्कर में समीक्षक, पटकथा लेखक डॉ महेश परिमल (संवेदनाओं के पंख) ने मुझे बांहों में भर लिया. ख्यात वेब तकनीकविद रवि रतलामी (छींटे और बौछारें) भी वहीं गर्मजोशी से मिले. उस समय सभागार में सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल जी की आवाज़ गूँज रही थी.रेडियो मास्को की ब्रॉडकास्टर रहीं, स्तंभकार शिखा वार्ष्णेय (स्पंदन) सत्र का संचालन करती दिखीं.

बैठते ही साहित्य अकादमी के सदस्य गिरीश पंकज (सद्भावना दर्पण) हाथ लहराते दिख गए, मैंने भी प्रत्त्युत्तर में अभिवादन किया. सभागार में नज़र दौडाई तो स्वतंत्र पत्रकार ललित शर्मा (ललितडॉटकॉम), वरिष्ठ पत्रकार संजीत त्रिपाठी (आवारा बंजारा), P7 News के बिजनेस एडीटर हर्षवर्धन त्रिपाठी (बतंगड़), जनोक्ति डॉट कॉम के संचालक जयराम विप्लव (जनोक्ति), स्तंभकार आशीष अंशु (बतकही), डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के ब्यूरो प्रमुख आवेश तिवारी (नेटवर्क6), मीडिया कम्पनी संचालक संजय बेंगानी (तरकश), ख्यात ब्लॉगर सुरेश चिपलूनकर (महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर) दिख गए. दैनिक भास्कर के फीचर संपादक चण्डीदत्त शुक्ल (चौराहा) बाहर की ओर निकलते अपना परिचय दे गए जबकि पहले भी हम मिल चुके थे.

ललित शर्मा, शिखा वार्ष्णेय, बी एस पाबला, संजीत त्रिपाठी, गिरीश पंकज
ललित शर्मा, शिखा वार्ष्णेय, बी एस पाबला,
संजीत त्रिपाठी, गिरीश पंकज

 बी एस पाबला, आवेश तिवारी, ललित शर्मा, संजीत त्रिपाठी
बी एस पाबला, आवेश तिवारी,
ललित शर्मा, संजीत त्रिपाठी

बी एस पाबला, शिखा वार्ष्णेय
बी एस पाबला, शिखा वार्ष्णेय

राह, भोजन स्थल की ओर
राह, भोजन स्थल की ओर

सुरेश चिपलूणकर, रवि रतलामी, संजीत त्रिपाठी, बी एस पाबला, ललित शर्मा
सुरेश चिपलूणकर, रवि रतलामी, संजीत त्रिपाठी,
बी एस पाबला, ललित शर्मा

बी एस पाबला, ललित शर्मा, संजीत त्रिपाठी, आशीष अंशु, रवि रतलामी, महेश परिमल
बी एस पाबला, ललित शर्मा, संजीत त्रिपाठी,
आशीष अंशु, रवि रतलामी, महेश परिमल

 बी एस पाबला, हर्षवर्धन त्रिपाठी
बी एस पाबला, हर्षवर्धन त्रिपाठी

बी एस पाबला, संजय बेंगाणी
बी एस पाबला, संजय बेंगाणी

कई ऐसे जाने पहचाने चेहरे भी दिखे जिनके नाम ही याद नहीं आ रहे थे और अब भी याद नहीं :-). सत्र के बीच हुए कुछ अंतराल के दौरान परिचय के आदान प्रदान में राजस्थान पत्रिका के लोकेन्द्र सिंह, प्रवक्ता डॉट कॉम के मुख्य संपादक संजीव सिन्हा, ‘दीपकमल’ मासिक पत्रिका के समाचार संपादक पंकज झा से भी औपचारिक अभिवादन का आदान प्रदान ही हो पाया.

दोपहर भोजन के पहले का सत्र, मुख्य वक्ताओं द्वारा स्थापित प्रिंट माध्यम और नए वेब मीडिया के गुण दोषों की चर्चा, व्याख्या में ही बीत गया. यू-ट्यूब पर इन सबके वीडियो, साथियों द्वारा अपलोड किए गए हैं, जिन्हें आवश्यकतानुसार देखा जा सकता है

भोजनावकाश में ही अनिल सौमित्र जी ने आग्रह किया कि एक किनारे बने अस्थाई काउन्टर पर अपना यात्रा टिकट दे कर व्यय की प्रतिपूर्ति प्राप्त कर लें. संकोचवश मैं उधर गया ही नहीं. लेकिन, डॉ महेश परिमल जी के ‘समझाने’ पर एक फॉर्म में औपचारिक जानकारियाँ दे आने जाने में हुए खर्च का भुगतान ले लिया. तब तक भोजन के लिए लोकेन्द्र जी ने एक बार फिर आग्रह किया तो हम चल दिए परिसर के दूसरे हिस्से की ओर.

सूप, स्वादिष्ट भोजन, आइसक्रीम के साथ छोटे छोटे मित्र समूह विभिन्न चर्चाओं में लीन हो गए. मैं उमस के मारे पसीने पसीने हुआ जा रहा था एक किनारे सीढ़ियों के पास चैनल गेट लगे स्थान से हवा के झोंके मिले तो वहीं अकेले खड़े भोजन करता रहा.

दूसरा सत्र पारस्परिक संवाद का था जिसमे एक तरफ तो नए वेब मीडिया के न्यूनतम खर्च से, बिना सेंसर से गुजरे, बिना किसी मालिक, संपादक के दबाव के और त्वरित पहुच द्वारा प्रभावी होते जाने की चर्चा थी तो दूसरी ओर इसी माध्यम पर राष्ट्रवादियों के बहुमत होने की बात भी थी. इस वेब मीडिया को धनाभाव से बचाने के लिए सरकारी संस्थायों से विज्ञापन की बात थी तो ऐसा होने पर स्वतंत्र विचारों के संकुचित होने की बात भी थी.

ज़्यादातर समय दो-चार वक्ताओं के बीच नोक-झोंक में ही बीता. एक बार तो गरमागरम बहस का रूप भी सामने आया और उसे शांत कराने के लिए संचालक को खासी मशक्कत करनी पड़ गई

मीडिया चौपाल 2012 वीडियो - 1
मीडिया चौपाल 2012 वीडियो – 1

मीडिया चौपाल 2012 वीडियो - 2
मीडिया चौपाल 2012 वीडियो – 2

मीडिया चौपाल 2012 वीडियो - 3
मीडिया चौपाल 2012 वीडियो – 3

एक बात तो बहुमत से स्वीकारी गई कि इस वेब माध्यम के पत्रकारों को भी सरकारों के द्वारा अन्य माध्यमों की तरह ही अधिमान्यता दी जाए तथा इस तथ्य को स्पष्ट किया कि ‘नए वेब मीडिया’ का मतलब केवल व्यक्तिगत प्रयासों द्वारा संचालित वेब माध्यम ही है. कोर्पोरेट अखबारों के वेब संस्करणों को इस दायरे में नहीं रखा जा सकता.

इस ‘मीडिया चौपाल’ 2012′ पर एक स्पष्टीकरण भी था कि बहुत से लोग और शामिल हो सकते थे, लेकिन हमारे पास संसाधन सीमित हैं। आने वाले समय में हर एक नए चौपाल के साथ, पुराने मित्रों के साथ-साथ कुछ नए मित्र जुड़ते जाएंगे।’

कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं की आसंदी पर अलग अलग समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह संपर्क प्रमुख राममाधव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक प्रोफेसर प्रमोद वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति बृजकिशोर कुठियाला, सामना, मुम्बई के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल , राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक डॉ. मनोज पटेरिया, ग्लोबल फाउंडेशन फॉर सिविलाइजेशन हार्मोनी (भारत) के निदेशक तथा मुख्य संपादक केजी सुरेश दिखते रहे.

संध्या के 5 बज रहे थे. मैं, संजीत त्रिपाठी, ललित शर्मा सहित तैयार था लौटने के लिए. जाना था स्टेशन. अनिल सौमित्र जी को शिकायत की कि सामने बठे इने गिने लोगों को दस दस बार बोलने का मौक़ा मिल रहा और हमें एक शब्द बोलने का मौक़ा नहीं? (मेरे रहते तक) सुरेश चिपलूणकर, संजय बेंगाणी जैसे मुखर ब्लॉगरों को भी मौक़ा नही? लेकिन वे भी असहाय से दिखे. अब सोच रहा हूँ कि अगले किसी लेख में वो बातें लिखी जाएं जो प्रतिक्रिया स्वरूप मैं इस चौपाल पर नहीं कह पाया.

मीडिया चौपाल 2012, भोपाल

 

अनिल जी ने वाहन की व्यवस्था कर सौजन्यता पूर्वक साथियों सहित हमें विदाई दी. इस बीच ललित शर्मा और मैंने अपने अपने वेटिंग टिकटों की जांच की तो पता चला कि दोनों को ही RAC मिला है और एक ही डब्बे S6 में एक ही सीट नंबर 15 भी. शायद रेलवे को भी पता चल गया होगा कि ये एक ही नस्ल के साथी ब्लॉगर हैं 🙂 7 बजे चली ट्रेन में हम दोनों आधी रात तक विभिन्न विषयों पर चर्चा करते रहे. इस बीच उनकी सीट किसी दूसरी जगह आबंटित होने की सूचना मिल चुकी थी.

इस तरह बीते हमारे कुछ घंटे भोपाल में, जाने पहचाने मित्रों के साथ. नए मित्र भी बने. एक सफल और सार्थक आयोजन के लिए अनिल सौमित्र सहित उनके सभी आयोजक साथी, संस्थाएं बधाई के पात्र हैं.

यदि किसी संदर्भ में कोई नाम छूट गया हो तो टिप्पणी में अवश्य बताएं और इस आयोजन पर तो आप कुछ कहेंगे ही ना?

भोपाल मीडिया चौपाल में कुछ घंटे …
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35 Thoughts to “भोपाल मीडिया चौपाल में कुछ घंटे …”

  1. रिपोर्टिंग में बाकी सब तो ठीक है, लेकिन हमारी फ़ोटू इतनी बुरी भी नहीं है कि आप उसे लगाएं ही नहीं… 🙂 🙂
    टिप्पणीकर्ता सुरेश चिपलूनकर ने हाल ही में लिखा है: अनुवाद कार्य के लिए “अवकाश” की सूचना एवं पाठकों हेतु शुभकामना संदेश…My Profile

    1. बी एस पाबला

      Smile
      गलती से मिस्टेक हो गई सुरेश जी
      भूल सुधार कर लिया गया है

  2. shikha varshney

    :):)..badhiya report .

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU

  3. हिंदी मे ‘न्यू मीडिया’ को लेकर बहुत कुछ हो रहा है…पढकर मजा आया!
    टिप्पणीकर्ता shekhar patil ने हाल ही में लिखा है: Comment on दादांना अटक करण्यामागे राजकीय षडयंत्र by bhusavalkarMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart

  4. girish pankaj

    मज़ा आ गया. आपकी शैली में साहित्यिक अंदाज़ है. बेहद सहज-सरल और बाँध कर रखने वाली. बिलकुल आँखों देखा हाल. अब हम दिल्ली और लखनऊ में भी मिलेंगे..शुभकामनाये…

    1. बी एस पाबला

      Smile
      स्नेह बनाए रखिएगा गिरीश जी

  5. बहुत ही ,सजीव वर्णन ,पाबला जी …..|
    आपकी शैली में जीवन्तता हैं |
    Approve

    1. पाबला जी,आप से विनम्र अनुरोध हैं की एकाध लेख आप मोबाईल तकनीकों ,खासकर मैप्स का यूज कैसे करते हैं ??एंद्रायद फोन पर लिखिये ताकि हम जैसे आपके पाठकों को कुछ मजे आये आपके आलेख यात्रा सम्बन्धी /तकनीकी पढते समय बहुत खूबसूरत अनुभव होतें हैं |सादर अभिवादन|
      टिप्पणीकर्ता अजय यादव ने हाल ही में लिखा है: आजादी की ६६वी वर्षगाँठ कैसे मनायी जा रही हैं??[live]My Profile

      1. बी एस पाबला

        Yes-Sir

    2. बी एस पाबला

      ` THANK-YOU

  6. सर इलाहाबाद से पोस्ट करने पर भी ये हैदराबाद क्यूँ दिखा रहा हैं ?????????????
    टिप्पणीकर्ता अजय यादव ने हाल ही में लिखा है: आजादी की ६६वी वर्षगाँठ कैसे मनायी जा रही हैं??[live]My Profile

    1. बी एस पाबला

      iPad
      यह स्वचालित तकनीक आपके इंटरनेट सर्वर का स्थान बताती है, आपकी नहीं

  7. अनिल सौमित्र जी को शिकायत की कि सामने बठे इने गिने लोगों को दस दस बार बोलने का मौक़ा मिल रहा और हमें एक शब्द बोलने का मौक़ा नहीं? (मेरे रहते तक) सुरेश चिपलूणकर, संजय बेंगाणी जैसे मुखर ब्लॉगरों को भी मौक़ा नही?

    ठीक शिकायत की !
    टिप्पणीकर्ता Praveen Trivedi ने हाल ही में लिखा है: जो गुरु बसै बनारसी, सीष समुन्दर तीरMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Pleasure

  8. 27 को लखनऊ मिलन के बाद भी एक ऐसी ही रिपोर्ट की उम्मीद है … और है गलती से कोई भी मिस्टेक नहीं चलेगी … मेरी फोटो लगानी पड़ेगी … 😉

    बहुत बढ़िया रेपोर्टिंग सर जी !
    टिप्पणीकर्ता शिवम मिश्रा ने हाल ही में लिखा है: १८ अगस्त १९४५ और नेताजी सुभाष चंद्र बोसMy Profile

    1. बी एस पाबला

      . Yes-Sir

  9. पाबला जी !
    तुसी ग्रेट ,,तुआडी रिपोर्टिंग वी ग्रेट ,फोटोग्राफी वी ग्रेट …:-)))
    खुश रहो,मस्त रहो !
    टिप्पणीकर्ता अशोक सलूजा ने हाल ही में लिखा है: लो फिर याद आ गई ….वो भूली दास्ताँ !!!My Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart
      स्नेह बनाए रखिएगा सर जी

  10. मेरे प्रश्न का जवाब तो यहाँ भी नहीं ब्लागरों के चयन का मानक क्या था –
    पिक और चूज?
    टिप्पणीकर्ता arvind mishra ने हाल ही में लिखा है: ईद मुबारक!My Profile

    1. बी एस पाबला

      Thinking
      विशुद्ध ब्लॉगर तो शायद कोई नहीं था सर जी!
      लगभग सभी की अपनी वेबसाईट है या फिर प्रिंट/ इलेक्ट्रौनिक मीडिया से किसी ना किसी तरह जुड़े हैं.
      अपवाद स्वरूप यदि कोई होगा भी तो निश्चित ही उसकी पकड़ किसी एक ही विषय पर होगी,

      वैसे भी, हमारा तो चयन हुआ ही नहीं था. वो तो हमने चयन किया वहाँ शामिल होने का 😀

  11. रेल के चित्रों की चित्रावली..ऐसा ही माहौल बना रहे..
    टिप्पणीकर्ता प्रवीण पाण्डेय ने हाल ही में लिखा है: यह कैसी आतंक पिपासाMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Approve

  12. धन्य भाग हमारे कि आप वहाँ पधारे। न जाते तो हमको इतनी अच्छी तस्वीरें और वर्णन कैसे मिलता।:)

    1. बी एस पाबला

      Happy-Grin

  13. बहुत अच्‍छी रिपोर्टिग … काश मैं भी वहां होती !!!!!

    1. बी एस पाबला

      Smile .

  14. जैसे ही आपका पदार्पण हुआ तो मैं इस चिंता के मारे दुबला हुआ जा रहा था की आपको बिठाउ कहाँ? क्योंकि उस वक़्त पिक्चर हाउस फुल चल रही थी आपसे मिल कर बहुत प्रसन्नता हुई. मेरा bhi photo नहीं लगाया है अपने

    1. बी एस पाबला

      Worry
      हमारी आपकी फोटो खिंची थी?
      याद नहीं

  15. वाह मजा आ गया ! खैर हमें तो इसका पता ही नहीं था, और पता भी होता तो कौन सा पहुँच ही जाते 🙂 क्योंकि हम आराम करने के मूड में थे, आखिर थकान जो थी, और ये तकनीक मोबाईल वाली विस्तार से किसी पोस्ट में बताईये, अपने को तो तभी समझ में आयेगी, फ़ोटो खींचने का सनकपन अपने को भी है, विमान में मोबाईल बंद करने की चेतावनी होती है और अपने ई६३ में फ़्लेश कैसे बंद करते हैं, पता ही नहीं है सो इस बार अपना कैमरा निकाल कर रख लिया था, और बादलों के मंजर के फ़ोटो खींचे गये परंतु गलती से हमने उस मेमोरी कार्ड को फ़ोर्मेट मार दिया वो भी कैमरे से ही।

    बातें क्या हुई इस सत्र में इस पर भी जरा विस्तार से बतायें। ऊफ़्फ़ ऐसा लग रहा है कि हम बहुत डिमांडिंग हो गये हैं 😉
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: हवाई अड्डे पर इंतजार और शटल जेद्दाह यात्रा भाग १ (Mumbai Airport & Shuttle Jeddah Travel Part 1)My Profile

    1. बी एस पाबला

      Yes-Sir
      कोशिश करते हैं

  16. साहब लखनऊ यात्रा पर कब लिख रहें हैं ?इन्तेजार हैं|मैं इसी आस में आपकी वेबसाईट पर रोजाना आता हूँ पर एक खास बात हैं की इसपर इतने लेख हैं की कही महीने पढ़ने के लिए काफी कुछ हैं ,सादर प्रणाम
    टिप्पणीकर्ता अजय यादव ने हाल ही में लिखा है: रेखा मैडम { शिक्षक दिवस [jagran junction forum]}My Profile

    1. बी एस पाबला

      Happy
      लीजिए, हाजिर है पोस्ट

      लखनऊ सम्मान समारोह – यादें याद आती हैं……………
      http://www.bspabla.com/?p=2765

  17. सजीव वर्णन, अपुन तो बोलने वालों में से थेच्‍च नहीं। मैं तो ऐसे कार्यक्रमों में इसीलिए शामिल होता हूं कि लोगों से मिलना जुलना हो जाए। मैं शाम को बोलने के लिए कहा गया, तो मैने कह दिया कि अपनी स्थिति बोल राधा बोल जैसी है। अंधेरे से पहले घर पहुंचना होता है,इसलिए हम तो निकल लिए पतली गली से। वैसे पाबला जी के साथ समय गुजरता नहीं, भागता है। इसलिए पता ही नहीं चल पाया कि समय कहीं ठहरा भी था। खूब मजा आया। पाबला जी की लेखनी कमाल की है। सजीव चित्रण मिल गया।

    डॉ महेश परिमल
    टिप्पणीकर्ता Dr. Mahesh parimal ने हाल ही में लिखा है: जयराम रमेश ने कतई गलत नहीं कहा.My Profile

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