मानव सभ्यता के खात्मे के लिए रोबोट्स का विद्रोह? वैज्ञानिकों ने गुप्त बैठक की!

कृत्रिम बौद्धिक स्तर वाले उपकरणों के विकास में प्रगति जहां विज्ञान क्षेत्र की कल्पना को खतरनाक तरीके से वास्तविकता के करीब ला रही है, वहीं चिंतित वैज्ञानिकों ने एक ऐसे खतरनाक परिदृश्य की कल्पना की है जिसमें घातक रोबोट विद्रोह कर देंगे। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे अब तक विज्ञान पर आधारित काल्पनिक फिल्मों में ही देखा गया है।

प्रमुख शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि हो सकता है कि हम अत्याधुनिक मशीनें बना रहे हैं, लेकिन इसका नतीजा शायद ऐसी मशीनों के रूप में हो सकता है जो मानव जाति के लिए खतरा पैदा कर दें। ‘दि टाइम्स’ ने खबर दी कि अपने शोध को सीमित कर देने के बारे में चर्चा करने के लिए हुई एक गोपनीय बैठक में शीर्ष वैज्ञानिकों ने आगाह किया कि समाज के बढ़ते कार्यदबाव को साझा करने वाली कम्प्यूटर आधारित प्रणालियां, यानी युद्ध छेड़ने से लेकर फोन के इस्तेमाल तक की प्रौद्योगिकी, पहले से ही विध्वंसक स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
एसोसिएशन फॉर दि एडवांसमेंट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ की ओर से कैलिफोर्निया के मोंटेरी बे में एक कॉन्फ्रेंस स्थापित करने वाले माइक्रोसॉफ्ट के एक अहम शोधकर्ता इरिक होरवित्ज ने आगाह कहा, ‘‘ये शक्तिशाली प्रौद्योगिकियां हैं जिनका इस्तेमाल अच्छे तरीके से या फिर डरावने तरीके से हो सकता है।’’



(संभावित युद्द की कल्पना, टर्मिनेटर फिल्म में)
अधिक जानकारियाँ गूगल बाबा के सौजन्य से यहाँ देखी जा सकती हैं।
और हाँ, क्या आप जानते हैं कि ट्विटर आदि पर किए गए हाल ही के भयंकर सायबर हमले में रोबोट्स का समूह शामिल था?
इतज़ार कीजिए अगली पोस्ट का!
मानव सभ्यता के खात्मे के लिए रोबोट्स का विद्रोह? वैज्ञानिकों ने गुप्त बैठक की!
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7 Thoughts to “मानव सभ्यता के खात्मे के लिए रोबोट्स का विद्रोह? वैज्ञानिकों ने गुप्त बैठक की!”

  1. संगीता पुरी

    वैज्ञानिक रिसर्च भी सोंच समझकर ही किए जाने उचित होते हैं !!

  2. Arvind Mishra

    सचमुच बहुत दहशतनाक मंजर -इसलिए ही आसिमोव ने रोबोटिक्स नियमों को गढा!

  3. दिगम्बर नासवा

    SACH MUCH KAL KI DUNIYA KA NZAARA HAI AAPKI POST MEIN……..

  4. ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey

    रोचक। मुझे बचपन में पढ़ी "ए फॉर एण्ड्रोमीडा" याद आ रही है।

  5. kshama

    समझ नही आता ,कि , ये सुविधाएँ हमारे बन रही हैं , या हम इनके लिए ? कितना भयावह लगता है,ये सब..इंसानी संवेदनाओं से परे जाती हुई एक दुनिया…

  6. Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"

    पाबला जी! आप तो डरा रहे हैं। हमारा दिल बहुत नाजुक है,कहीं हार्ट अटैक वगैरह आ गया तो:)

    वैसे आपका ये ब्लाग बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर आधारित है। धन्यवाद्!

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