अजय झा परिवार, वापस भिलाई आने का दिन, फिर उनका ब्लॉगिंग को अलविदा कहना!!

अजय जी के साथ तकनीकी जानकारियाँ साझा करतेकरते 17 तारीख की सुबह ढ़ाई बज गए तो हम अगले दिन का कार्यक्रम बनाते बिस्तर पर जा पहुँचे। सुबह नींद देर से खुली। बुआ जी पिछले दिन फोन कर दिल्ली वापस आ जाने की बात बता चुकी थी तो उनसे मिलना ज़रूरी हो गया था। बलबीर नगर के लिए वर्षों बाद शाहदरा पहुँच कर लोनी रोड पर घर तलाशने में मुझे कुछ संशय सा था पुराने सीमाचिन्ह गायब होने के बावज़ूद मात्र अंदाज़ से ही ठीक घर के सामने ही आटो रिक्शा रूकवाने में कामयाब रहा।

दोपहर के भोजन के बीच पारिवारिक बातों के बाद बुआ जी के घर से, अजय झा के निवास पर लौटा तो अजय जी ने सलाह दी कि ट्रेन के समय से कम से कम 2 घंटे पहले ही घर से चल पड़ना चाहिए। ट्रैफिक जाम का कोई भरोसा नहीं। बात सही भी थी। अब तो लगता है कि यह समस्या लगभग हर बड़ेछोटे शहर में आम सी हो गई है और लोग आदी भी हो गए हैं।

बी एस पाबला, अजय झा

अजय जी के परिवार के साथ बिताए यह 4 दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। श्रीमती झा तो खुश थीं मेरे जैसा एक भाई मिल जाने से। उनकी प्यारी सी बेटी बुलबुल और उसके भाई आयुश की धमाचौकड़ी से सारा घर गुंजायमान रहता था। हम जब अजय जी के लैपटॉप पर झुके किसी विषय पर बातें करते रहते थे तो बुलबुल की जैसे यह जिज्ञासा रहती थी कि आखिर इसमें है क्या?

रवाना होने से पहले इस खुशहाल परिवार की खुशी को हमारे कैमरे ने कैद किया। अजय जी कुछ भावुक से हो गए थे। उनसे जब रहा नहीं गया तो वे बोल ही पड़े कि आप पहुँचिए भिलाई, मैं भी आता हूँ अगले महीने।

ajy-jha-family

मैं तो पहुँच गया भिलाई। एक लम्बी चौड़ी पोस्ट भी लिख ली थी, दिल्ली के अंतिम दिन की। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम में एक दिन सुबह सुबह जब मिथिलेश दुबे की पोस्ट से पता चला कि अजय झा ब्लॉगिंग को अलविदा कह रहे हैं तो थोड़ी हैरानी हुई। मुझे कोई एसएमएस भी नहीं मिला था। माथा ठनका कि रात को तो सब ठीक था, एकाएक क्या हुया! अजय जी को फोन लगाया तो मोबाईल बंद! उनकी श्रीमती जी के मोबाईल पर सम्पर्क किया गया तो पता चला कि अजय जी के मोबाईल की बैटरी खराब है। बात करवाने को कहा तो बताया गया कि कल रात एकाएक नेट कनेक्शन बंद हो गया था तो उसे ‘धमकाने’ गए हुए हैं। अजय जी के वापस आने पर बात हुई तो मैंने बताया कि क्या अफवाह फैली हुई है उनके बारे में।

अजय भी भौंचक्के रह गए। उन्होंने साफ इंकार कर दिया कि ऐसा कोई मैसेज भेजा गया है। मैंने जब जोर दे कर सारी बात बताई तो उन्होंने अपना मोबाईल, देर शाम नई बैटरी लगा कर, खंगाला। पता चला कि उन्होंने कल रात एकाएक नेट बंद हो जाने पर उस समय चैट पर गूफ़्तगू कर रहे लोगों के मोबाईल पर एक मैसेज भेजा था कि blogging ko aj vida kaha, aapke sneh ke liye shukriya संयोगवश वह मैसेज एक एसएमएस ग्रुप को भी चले गया। उस ग्रुप में जिन लोगों के नम्बर थे, उन्होंने भी उस मैसेज को पढ़ लिया इस बीच गड़बड़ यह हो चुकी थी कि मैसेज लिखते हुए अजय जी से j के बदले l (जे के बदले एल) टाईप हो गया था। साथियों के मोबाईल पर संदेश गया blogging ko alvida kaha, aapke sneh ke liye shukriya ! मतलब कि करेला और नीम चढ़ा! मैसेज भी गलत टाइप हो गया और अनचाहे साथियों के पास भी पहुँच गया!!

परिवार में वैवाहिक कार्यक्रम के सिलसिले में देर शाम घर लौटे अजय जी को तो जैसे साँप सूँघ गया हो। ब्लॉगिंग से अलविदा!? मैंने ऐसा तो नहीं कहा था!! मैंने हँसते हुए उनसे कहा कि लोग तो पोस्ट और टिप्पणी लिख मौज लेते हैं आपने तो एसएमएस भेज कर मौज ले ली।अब क्या किया जाए वाले भाव में उन्होंने सलाह मांगी तो झट से एक पोस्ट लिख कर स्थिति बताने को कह दिया हमने। अजय ने बड़े निराशा वाले स्वर में बताया कि केबल वाला एक दो दिन लगाएगा नई वायर डालने में, तब कहीं जा कर इंटरनेट चालू हो पाएगा और कैफ़े जाने का अब मन नहीं करता।

तब तक खुशदीप जी की पोस्ट भी आ चुकी थी। मुझे शरारत सूझी। मैंने कहा कि अब आप तो बस मौज लो। यही देखिए कि आपके इस गलती वाले संदेश की प्रतिकिया क्या होती है। कुछ तो लोग कहेंगे ही। कौन कितना शुभचिंतक है पता तो चले।

लेकिन हद तो तब हो गई जब उनकी इस कथित ब्लॉगिंग से अलविदा की वज़ह मुझे बताया जाने लगा कान के कच्चे कान के पूरे एक ब्लॉगर ने फुरसत पा कर मौज लेते हुए अजय जी को कह दिया कि तुम्हारी ब्लॉगिंग तो बंद होनी ही थी, एक ब्लॉगर को घर पर ठहराने का यही नतीजा होता है। पिछली बार दिनेशराय द्विवेदी, अरूण अरोरा के घर रूके थे तो उनकी ब्लॉगिंग बंद हो गई, ब्लॉग बंद हो गया। अब तुम्हारे साथ भी यही हुया!

उद्देलित अजय जी को शांत करते हुए मैंने हंसते यहीं किसी ब्लॉग में लिखी हुई लाईनें दोहरा दीं कि जिसको जितनी अकल होती है, वह वैसी ही बात करता हैऔर जो जैसा होता है वैसा ही दूसरे के बारे में सोचता है!

कल शाम से अजय झा के घर पर नई केबल डाल कर इंटरनेट चालू कर दिया गया है। लेकिन अब अजय का मन खट्टा हो गया है। मेरा ख्याल है कि उन्हें इस मनस्थिति से उबर कर ब्लॉगिंग में पुन: हम सब शुभचिंतकों का साथ निभाना चाहिए। खुशनुमा ब्लॉगिंग के लिए मेरी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं।

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अजय झा परिवार, वापस भिलाई आने का दिन, फिर उनका ब्लॉगिंग को अलविदा कहना!!
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25 Thoughts to “अजय झा परिवार, वापस भिलाई आने का दिन, फिर उनका ब्लॉगिंग को अलविदा कहना!!”

  1. ललित शर्मा

    पावला जी-तो ऐ गल हैगी, हुण मैनु समझ आया के तुहाडे कोळ क्युं नही आया, चंगा जी, चंगी पोस्ट दी, बधाई कबुल करो तुस्सी,

  2. ललित शर्मा

    पावला जी-तो ऐ गल हैगी, हुण मैनु समझ आया के तुहाडे कोळ "मेसेज" क्युं नही आया, चंगा जी, चंगी पोस्ट दी, बधाई कबुल करो तुस्सी, मेसेज छुट गया था।

  3. अर्शिया

    हमें विश्वास है कि झा जी चाह कर भी ब्लॉगिंग को अलविदा नहीं कह पाएंगे।
    ——————
    सांसद/विधायक की बात की तनख्वाह लेते हैं?
    अंधविश्वास से जूझे बिना नारीवाद कैसे सफल होगा ?

  4. Anil Pusadkar

    happy blogging

  5. संगीता पुरी

    मुझे तो विश्‍वास ही नहीं था कि अजय जी ब्‍लॉगिंग छोड सकते हैं !!

  6. vinay

    मेरे को विशवास नहीं हुआ था,एक अजय जी जिन्होने बलोगरों को आमत्रित किया था,वह ही बलोगिंग छोड़ रहे हैं ।
    यह भी खूब रही पावला जी ।

  7. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    नंबर एक बात तो यह कि ब्लागीरी में आने का रास्ता तो है। वापस जाने का नहीं है। लेकिन ब्लागीरी जीवन की पहली, दूसरी या तीसरी आवश्यकता नहीं है। मुझे पता भी नहीं कि इस का क्रम कौन सा है, लेकिन कभी कभी इस पर वरीयता प्राप्त जरूरतें उठ खड़ी होती हैं तो पहले उन से निपटना जरूरी हो जाता है। अनेक बार ट्रेफिक जाम जैसे अवरोध भी आ खड़े होते हैं। लेकिन इस का अर्थ यह तो नहीं कि कोई ब्लागर ब्लागीरी बंद कर देता है। एक बार जो हो गया वह ब्लागर ही रहता है, आजीवन। ये तो काली कमली है इस पर दूसरा रंग नहीं चढ़ता।

  8. IRFAN

    ab to main bhi soch raha hoon.

  9. 'अदा'

    हम्म…
    तो ये बात है…अब जब केबल लग चुका है और सब कुछ दुरुस्त है तो फिर देर किस बात की…
    झा जी का सभी इंतज़ार कर रहे हैं….बस आज ही एक दो लाइना हो जाए…
    पाबला जी आपकी और झा जी की दोस्ती दिन दूनी रात चौगुनी बढती ही जाए..
    मेरी शुभकामना…!!

  10. Dr. Mahesh Sinha

    अजय भी इन्तेजार कर रहे हैं . कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना ……………………..

  11. Dr. Mahesh Sinha

    पाबला जी अब आपका ही ब्लॉग एक कोने में दिखा रहा है
    bspabla
    Last seen 4 months ago

  12. विनोद कुमार पांडेय

    एक भावनात्मक रिश्ता ..ब्लॉग के द्वारा बहुत अच्छा लगा ..

  13. Arvind Mishra

    "कान के कच्चे कान के पूरे एक ब्लॉगर ने फुरसत पा कर मौज लेते हुए अजय जी को कह दिया कि तुम्हारी ब्लॉगिंग तो बंद होनी ही थी, एक ब्लॉगर को घर पर ठहराने का यही नतीजा होता है।"
    आपने मानों मुंह की बात मेरे छीन ली ! राहत हुयी !
    श्याम कर्ण और बुद्धि विबर लोगों के कलेजें पर सचमुच सांप लोट गया होगा –
    तब वे एस एम् एस न मिलने की चुटकी ले रहे थे अब मानो सांप सूघ गया है

  14. राज भाटिय़ा

    झा जी जल्दी आओ , पाबला जी धन्यवाद, वेसे मैने अपनी टिपण्णी मै लिखा भी था की झा जी नही जा सकते हो सकता है उन की तबीयत खराब हो, लेकिन यहा तो नेट की तबीयत खराब थी

  15. cmpershad

    ‘ खुशनुमा ब्लॉगिंग के लिए मेरी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं।’

    हम भी आपके साथ हैं जी 🙂

  16. venus kesari

    देख तमाशा ब्लोगिन्ग का 🙂

    कन्फ़्यूजन से कन्फ़ुजन होता गया तो नतीज़ा तो

    "कन्फ़ूज़" 🙂 ही निकलना था

    वीनस

  17. खुशदीप सहगल

    अब तो झा जी के लिए मुझे भी गीत बदलना पड़ रहा है…

    ज़रा सामने तो आओ छलिए,
    छुप छुप छलने में क्या राज़ है,
    यूं छुप न सकेगा परमात्मा,
    मेरी आत्मा की ये आवाज़ है…

    जय हिंद…

  18. राजीव तनेजा

    शुक्रिया उस 'खुदा'…उस 'परवरदिगार'…उस 'अल्लाह-ताला' का…जिसने अजय झा जी से सम्बन्धित सब कनफ्यूज़न दूर कर दिए…

    अब उनकी वापसी पर एक बार फिर से कोई ब्लॉगर मीटिंग रखनी चाहिए …

  19. वाणी गीत

    रोचक रहा ये कन्फ्यूजन भरा सफ़र …!!

  20. R S

    वाह
    ब्लोगिंग को आज विदा के बदले ब्लोगिंग को अलवीदा बन गया
    एक लेटर साला आदमी को ब्लोगिंग से बाहर कर सकता है
    blogging ko aj vida
    या
    blogging ko alvida
    वाह वाह

  21. गिरिजेश राव

    धत्तेरे की। ये तो नुक्ते के कारण ख़ुदा के जुदा होने जैसा मुआमला हो गया। वैसे हमें शुरू से ही यकीं था कि जे बात में दम नहीं है।
    साथ ही साथ संचार संवाद के नए त्वरित माध्यम कैसी गड़बड़ी फैला सकते हैं – ये भी समझ में आया।
    ..पुराने जमाने की चिठ्ठियों में कुछ तो अच्छाई थी ही।

  22. सुलभ सतरंगी

    कन्फ्यूजन कन्फ्यूजन कन्फ्यूजन
    .
    .
    .
    पर्दा हटाओ पर्दा गिराओ
    .
    .
    .
    नए शो का वक़्त हो गया है. दर्शक भी अधीर हो रहे हैं.
    झा जी को पेश किया जाये.
    और आगे से पाबला जी को आजीवन काल के लिए ब्लोगर बोर्ड का अध्यक्ष माना जाये.
    .
    .
    .
    भूल चूक लेनी देनी

  23. काजल कुमार Kajal Kumar

    अच्छा है
    शायद यही बात का बतंगड़ कहलाता होगा

  24. jai

    ये तो बहुत बडा मजाक हो गया
    लोग तो नही नही
    नही

    नही

    नही

    नही

    नही

    नही

    नही

    नही

    नही

    करते रह गये

    बाद मे पता चला
    सुबह का भुला शाम को घर आया

  25. Mahfooz Ali

    बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट…..

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