जब मोबाइल को चैन से बांध कर सो गया मैं !

2015 की जुलाई में एक बेहद निजी यात्रा पर ट्रेन से यात्रा करनी पड़ीं पंजाब आने जाने के लिए. पिछले कई वर्षों से हर छोटी बड़ी यात्राएं मैंने अपनी स्मार्ट कार से ही की हैं. यहाँ तक कि काठमांडू आने जाने के लिए भी मेरी कार मेरे साथ रही.

ट्रेन में भी अब सफ़र एसी कोच में होने लगा है. इससे दो लाभ होते हैं. एक तो ओढ़ने बिछाने के कपड़ों को साथ रखने की, संभालने की मुसीबत से मुक्ति और दूसरा पान, सिगरेट, तम्बाखू के आदी सहयात्रियों से छुटकारा. यात्रा का सारा प्रबंध खुद ही अकेले करने की बाध्यता भी एक कारक है.

इस बार मुझे एक अलग ही समस्या से सामना करना पडा. वह थी मोबाइल संभालने की. इससे पहले जब भी यात्रा की तब मेरे पास रहा एक मामूली सा मोबाइल या फिर सैमसंग गैलेक्सी सीरीज का मोबाइल.

इन सबके साथ एक सुविधा थी कि इनमें एक लंबी सी डोरी लगाई जा सकती थी जिसके कारण चाहो तो मोबाइल को गले से लटका लो, चाहो तो डोरी को कलाई में लपेट कर रखो, चाहो तो शर्ट, टी-शर्ट के ऊपरी बटन लगाने वाले छेद के सहारे ‘बांध’ कर निश्चित हो कर सो जाएँ.

लेकिन इस बार मेरे पास जियोनी एम3 मोबाइल था जिसमें ऐसा  कुछ संभव नहीं

मोबाइल की डोरी

बहुत कोशिश की मैंने दुकान दुकान घूम कर कि कोई जुगाड़ जम जाए तो निश्चिन्त हो सफ़र शुरू करूँ लेकिन असफल रहा.

हार कर मैंने उस एंड्राइड एप्प का सहारा लिया जिसका उपयोग अब तक नहीं कर पाया था.

इसके पहले भी 7 वर्ष पहले 2008 में जब मैंने अपने लैपटॉप को चोरी होने से बचाने वाली पोस्ट लिखी थी –दो क्लिक में, अपना लैपटॉप गलत हाथों में जाने से बचाएँ . तब भी सोचता था कि चोरी जाने से बचने के लिए मोबाइल में भी होना चाहिए कोई जुगाड़. तब एंड्राइड नहीं था लेकिन अब तो है!

फिर क्या था! मैंने यह Anti Theft Alarm -Motion Alarm एप्प एक्टिवेट किया. मोबाइल को चार्जिंग में लगा कर सामने होल्डर में ही रख दिया और सो गया. होना कुछ नहीं था और कुछ हुआ भी नहीं.

लेकिन जब होना होगा तो बहुत कुछ हो सकता है. इसलिए आप भी आजमा सकते हैं इस एप्प को.

इसे डाउनलोड किया जा सकता है यहाँ क्लिक कर.

मोबाइल चोरी से बचाव

सेटिंग में भी बहुत विकल्प हैं. यह तय कर सकते हैं कि यूँ ही किसी हलचल से अलार्म बजे या चार्जर निकालने से बजे? दूर कहीं बैठे इंटरनेट के सहारे इसके अलार्म को एक्टिवेट-डीएक्टिवेट कर सकते  हैं, इतना समय सेट कर सकते हैं कि एक्टिवेट करने के बाद सही जगह रखने का समय मिल जाए, इतना समय सेट कर सकते हैं कि मोबाइल के अलर्ट होने के कितनी देर में वह चिल्लाना शुरू करे, मोबाइल को समझा सकते हैं कि हल्की फुल्की थपकी से ही अलर्ट हो जाए या किसी तगड़े झटके तक रुके.

आप मोबाइल को यह भी बता सकते हैं कि अलर्ट होने पर वो जिस ‘चोर’ की फोटो खींचेगा वह एक सेकेण्ड में कितनी फोटो ले! और फोटो ले कर किस ई-मेल पते पर भेजे. और भी है बहुत कुछ, अगर आप इसे आजमा कर देखें.

हो सकता है आपकी पीठ पीछे कोई कभी चुपके से चार्जर निकाल कर आपके मैसेज पढ़ ले, कभी कोई टेबल पर पड़े मोबाइल को छू कर चुपचाप आपकी आई गई कॉल जांच ले, कभी कोई शरारत के लिए मोबाइल उठा कर छुपाने की कोशिश करे.

ऐसे मौकों पर  कभी आपको इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई?

जब मोबाइल को चैन से बांध कर सो गया मैं !
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24 Thoughts to “जब मोबाइल को चैन से बांध कर सो गया मैं !”

    1. बी एस पाबला

      Heart
      थैंक्यू जी

  1. अजय आर्य

    अच्छी जानकारी के लिए आपका अभी नंदन

    1. बी एस पाबला

      Happy
      शुक्रिया जी

  2. मजेदार और जरूरी लेख है।

    1. बी एस पाबला

      Delighted
      शुक्रिया जी

  3. chander kumar soni

    मैंने अभी तक इस एप्लीकेशन को अपनाया नहीं हैं.
    पता ही नहीं था, इस तरह के किसी एप्लीकेशन के होने का.
    आज ही ट्राई करता हूँ इस एप को. वैसे मैं जल्दी से कही बाहर आना जाना कम ही करता हूँ.
    अच्छी और काम की जानकारी देने के लिए धन्यवाद.
    चन्द्र कुमार सोनी.

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया जी

  4. बहुत खूब ! कई एप तो वाकई समझ से परे काम करते हैं.
    टिप्पणीकर्ता Rajeev Kumar Jha ने हाल ही में लिखा है: तेरियां ठंढियां छावांMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Approve
      सही बात

  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, खुशहाल वैवाहिक जीवन का रहस्य – ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !
    टिप्पणीकर्ता ब्लॉग बुलेटिन ने हाल ही में लिखा है: खुशहाल वैवाहिक जीवन का रहस्य – ब्लॉग बुलेटिनMy Profile

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      शुक्रिया ब्लॉग बुलेटिन

  6. बेहद जरूरी और काम का एप्प लगा यह तो … आज के इन स्मार्टफोनों मे डोरी का विकल्प न जाने क्यूँ कंपनी वालों ने बंद कर दिया !? Thinking
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: अमर शहीद जतिन नाथ दास जी की ८६ वीं पुण्यतिथिMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Smile
      नई तकनीकें कई बार असुविधा भी ले आती है

  7. बहुत उपयोगी जानकारी…

    1. बी एस पाबला

      Pleasure
      आभार आपका

  8. बहुत दिनों बाद आपको पढ़ा ,बस मजा आ गया .

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया जी

  9. Ranbir Singh Raman

    पाबला साहब इतनी उपयोगी जानकारी के लिए आपका आभार एवम हार्दिक धन्यवाद।मैं जानना चाहता हूँ कि क्या चोरी हुए फोन को तलाश करने में ये एप सहायक हो सकती है।मेरा सैमसंग नोट २ जुलाई महीने महीने यात्रा के दौरान पंजाब में रात के समय मेरे बैग से चोरी कर लिया गया था।यदि कोई उपाय हो तो अवश्य बताऐं आपकी बहुत मेहरबानी होगी।धन्यवाद।

    1. बी एस पाबला

      Sad
      दो महीना तो बहुत लंबा समय हो गया
      आप मुझसे ई-मेल पर संपर्क करें

  10. बड़े काम की जानकारी हैं..
    प्रस्तुति हेतु धन्यवाद

    1. बी एस पाबला

      Smile
      शुक्रिया जी

  11. ऐसे एंटी थैफ्ट एप्लिकेशन हैं तो अच्छे लेकिन दिक्कत ये है कि कोई चोर उन्हें अनइंस्टॉल कर सकता है या फिर फोन को फैक्ट्री रीसैट कर सकता है जिससे वे बेकार हो जाते हैं। ऐसी सुविधा ऑपरेटिंग सिस्टम में इनबिल्ट होनी चाहिये जो कि फैक्ट्री रीसैट करने पर भी सैटिंग सेव रहें, पासवर्ड डालकर ही बदली जा सकें।

    आज तक का सबसे कारगर एंटी थैफ्ट सिस्टम मुझे बरसों पहले लिये एक ढाई हजार के इंटैक्स मोबाइल में लगा था जिसमें सुविधा थी कि फोन में नया सिम डालने पर उसका नम्बर एक पहले से तय फोन नम्बर पर मैसेज हो जाता था। इस सैटिंग को बदलने के लिये पासवर्ड चाहिये होता जिससे कि चोर न बदल पाता। फोन में इसे रीसैट करने का तरीका न था। इस सुविधा से आदमी किसी पुलिस आदि पर निर्भर न रहकर अपना फोन ट्रैक कर सकता है।

    बाद में मैंने कई फोन देखे पर किसी स्मार्टफोन में ऐसी सुविधा नहीं दिखी। अधिकतर के एंटी थैफ्ट फीचर में सिम बदलने पर मैसेज जाता है तो बस सिम बदले जाने का मैसेज जाता है, नया डाला गया नम्बर नहीं। साथ ही इनमें रिमोट वाइप जैसी सुविधा होती हैं। अपने ऍण्ड्रॉइड फोन के लिये भी इंटैक्स वाले जैसी सुविधा मैंने कई एंटी थैफ्ट ऍप में खोजी पर बात बनी नहीं, अधिकतर सिम बदलने पर मैसेज में बस बदले जाने का मैसेज भेजती हैं।

    उस इंटैक्स फोन जैसी फीचर हर स्मार्टफोन में इनबिल्ट होनी चाहिये, हैंडैसट निर्माता कम्पनियों के लिये यह कोई असंभव बात नहीं। साथ ही यह भी होना चाहिये कि फोन को फैक्ट्री रीसैट करने पर इस तरह की फंक्शनैलिटी/ऍप हटे नहीं। ऍण्ड्रॉइड के नये संस्करण में शायद ऐसा कुछ हद तक हो रहा है।

  12. नमस्ते पाबला जी,

    क्या “डोरा पॉकेट वाला” इसका बेहतर विकल्प नहीं है? हा हा!
    टिप्पणीकर्ता Nishant ने हाल ही में लिखा है: अच्छे पॉइंट्स – The Good PointsMy Profile

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