रिमोट कंट्रोल गुम गया? कोई बात नहीं, अपना चेहरा इस्तेमाल करें

अमेरिका के एक कंप्यूटर विज्ञान विशेषझ ने अपने चेहरे को रिमोट कंट्रोल में बदलने में कामयाबी हासिल की है। फिलहाल इससे विडियो कीगति को कम या ज़्यादा किया जाना संभव है। यह तकनीक भविष्य में रोबॉट को, चेहरे के भाव पढ़ना और समझना सिखाने की विधि का एक हिस्सा है। जैकब वाइटहिल नाम के यह विशेषज्ञ, कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने एक ऐसे, आकार में छोटे, डिटेक्टर को बनाने में कामयाबी हासिल की है, जो उनके चेहरे को रिमोट कंट्रोल में तब्दील कर सकता है। यह उपकरण, कंप्यूटर को भी साधारण किस्म के निर्देश भेज सकता है।

वैज्ञानिक की टीम ने चेहरे के भावों को पढ़ने की तकनीक विकसित करने के लिए एक सेट अप बनाया। इसके बाद विडियो टेप के जरिए दिखाए जाने वाले एक व्याख्यान की गति में बदलाव किए गए। इस तरीके से देखने वाला जैसे चाहे वैसे ही विडियो की गति घटा बढ़ा सकता है। इस सेट अप को वाइट हिल ने एक विडियो के जरिए दिखाया। उनका कहना है कि मान लीजिए मैं छात्र होता और मेरा अध्यापक, कोई रोबॉट। मैं पढ़-पढ़ कर थक चुका हूं, लेकिन फिर भी रोबॉट मुझे नई चीजें बताता रहता है। ऐसा बताना किसी काम का नहीं है। लेकिन अगर रोबॉट मेरे चेहरे की तरफ देखे, रुके और कहे अरे लगता है तुम थक गए। क्या तुम्हें आराम की जरूरत है? मैं कहूं जी हां निश्तित तौर पर, रुकने के लिए शुक्रिया।

नीचे दिए गए ५५ सेकंड के वीडियो में एक झलक इस तकनीक की



फिल्मी-सा लगता यह संवाद तकनीक को इंसान की सुविधाओं के लायक बनाने की कवायद का एक हिस्सा है। बदलते दौर में रोबॉट जैसी मशीनों द्वारा ज्यादा से ज्यादा काम के लिए यह तकनीक जुटी है, इन मशीनों को भावनाएं समझने और उसी के हिसाब से कार्य करने लायक बनाने में। वाइट हिल ने एक बयान जारी कर जांच विधि के बारे में बताया। कठिन व्याख्यान को सुनने के दौरान लोगों के चेहरे पर अलग-अलग भाव आते थे। मशीन इन सबको रेकॉर्ड करती रहती है। जब व्याख्यान आसान होता है तो व्याख्यान सुनने वाले की आखें ज्यादा मिचमिचाती हैं, जबकि कठिन लेक्चर के दौरान ऐसा कम होता है। ऐसी ही तमाम खूबियों का अध्ययन कर तकनीक विकसित की जा रही है।

सोचिये कि टीवी पर बेहूदा कार्यक्रम चल रहा है, शरीर सुस्त हुया पडा है और रिमोट कंट्रोल कहीं दूर है। ऐसे में दिमाग में एक ही ख्याल कौंधता है कि काश! हम टीवी को गुस्से में आंखें दिखाते और चैनल चेंज हो जाता। साइंस ऐसी ही तमाम कल्पनायों को सच करने में जुटा है।

कुछ अधिक जानकारी यहाँ पायी जा सकती है तथा वीडियो के लिए यहाँ क्लिक करें।

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2 Thoughts to “रिमोट कंट्रोल गुम गया? कोई बात नहीं, अपना चेहरा इस्तेमाल करें”

  1. Udan Tashtari

    रोचक जानकारी!! ..आभार.

  2. Anonymous

    अब ‘पीसी’ के लिए इको फ्रेंडली सीडी!पसर्नल कंप्यूटर में सीडी के इस्तेमाल ने क्रांति ला दी है। चूंकि अधिकांश सीडी प्लास्टिक से बनती है, इसलिए वह इको फ्रेंडली नहीं होती। देखा जाए तो सीडी के बिना कंप्यूटर पर कामकाज करना एक तरह से असंभव ही है। चाहे आपको लैपटॉप पर कोई प्रोग्राम लोड करना हो, फिल्म देखनी हो या बैकअप के लिए किसी मटीरियल को स्टोर करना है, यह सभी काम सीडी के बिना आप करने की सोच भी नहीं सकते।

    कई बार जरूरत पूरी हो जाने के बाद भी आप सोचते होंगे कि इन सीडी का क्या किया जाए। लेकिन जब आप इसे बेकार समझकर कूड़े के ढेर में फेंकते हैं, तो आप ई-जंक या वातावरण में प्रदूषण ही फैलाते हैं। आज सीडी का इस्तेमाल घर-घर में किया जाता है। हो सकता है कि आपके पास इतनी सीडी हो कि उससे एक छोटा सा पहाड़ बनाया जा सकता हो। सीडी बनाने में प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर सीडी की लाइफ काफी लंबी होती है। हो सकता है कि स्क्रैच की वजह से वह खराब हो जाए, लेकिन उसकी हालत आपके बोर होने के बाद बिन बुलाए मेहमान की तरह हो जाती है।

    अपने आसपास प्रदूषण रहित माहौल बनाने के लिए आप ऐसी सीडी खरीद सकते हैं, जिसमें प्लास्टिक का काफी कम इस्तेमाल किया गया हो। इसके अलावा आप इको फ्रेंडली का लेबल देखकर सीडी खरीद सकते हैं। आप इसे एक्सट्रा प्लास्टिक पैकिजिंग के बगैर भी इसे खरीद सकते हैं। आजकल बहुत से लोग न्यू ट्रेंड को फॉलो करते हुए इसी तरह की सीडी खरीद रहे हैं। अगर आपको कंप्यूटर के लिए सीडी की बहुत कम जरूरत पड़ती है, तो आप सीडी की जगह ब्लैंक डीवीडी खरीद सकते हैं।

    इसमें आप सीडी की तुलना में ज्यादा से ज्यादा इंफर्मेशन स्टोर कर सकते हैं और आपके पास सीडी का पहाड़ भी नहीं लगता। हालांकि इस समय सीडी बनाने में पॉली कॉर्बोनेट प्लास्टिक का यूज़ किया जाता है। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जितनी कम से कम सीडी यूज़ की जाए, उतना ही अच्छा होगा। अगर आप रि-राइटेबल सीडी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो आप सीडी पर कोई भी इंफर्मेशन केवल एक बार ही स्टोर कर सकते हैं। इससे बचने के लिए आप फ्लैश मेमॉरी के साथ पैन ड्राइव क्यों नहीं खरीदते?

    हालांकि वह महंगी मिलती है, लेकिन इसका आप बार-बार यूज़ कर सकते हैं। इसलिए अगली बार जब आप सीडी खरीदने जाएं, तो उसे प्लास्टिक केस के साथ न खरीदे। इसके लिए आपको और किसी केस की जरूरत नहीं होगी। आजकल सीडी बनाने में रिसाइकल्ड पैकिजिंग की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इन-ले और कवर प्रिटिंग में इस्तेमाल होने वाली इंक को भी रि-साइकल्ड किया जा सकता है। इको फ्रेंडली सीडी में प्रयोग होने वाली इंक को वेज़िटेबल ऑयल से बनाया जाता है। हालांकि इंडस्ट्री लिनसीड ऑयल (अलसी के तेल) को प्रेफरंस देती है, जिसे इको सेंसेटिव माना जाता है।

    अगर आप सीडी को कार्डबोर्ड या पेपर केस में खरीदेंगे, तो आप अपने आसपास स्वच्छ पर्यावरण को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे। इसलिए अगली बार सीडी खरीदने से पहले लेबल पर ध्यान जरूर दें। आप सोच सकते हैं कि हम आपको यह कैसा आइडिया दे रहे हैं? दरअसल कागज पेड़ों से आता है और जंगल सिकुड़ते जा रहे हैं। लेकिन इन दोनों ऑप्शन के बीच प्लास्टिक की जगह पेड़ों का इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प है। पेड़ फिर से उगाए जा सकते हैं, पर प्लास्टिक को बनाने में पेट्रोलियम का यूज़ किया जाता है, जिसका दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पेट्रॉल के कारण ही दुनिया कई बार युद्ध के मुहाने पर भी पहुंच चुकी है। नई टेक्नॉलजी को खरीदना आपके लिए थोड़ा महंगा हो सकता है, लेकिन यह लांग रन में आपको काफी सस्ती पड़ेगी और फिर यह इको फ्रेंडली तो है ही।

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