रूठी हुई थी… आखिर आ ही गई आज …

आज कुछ लिखने का मन नहीं है। लगता है कि सिर्फ देखता ही रहूँ। आखिर वो रूठने के बाद आ ही गई। कहाँ कहाँ नहीं तलाशा उसे … आँखें पथराने लगी थीं … उम्मीदें टूटने लगीं थीं … आज वो आई तो हम भी झूम उठे … वो गीत है ना? ‘आने से उसके, आये बहार … जाने से उसके, जाये बहार‘ बस उसी की बात कर रहा।

आप भी देखिए और बताईये क्या मैं झूठ बोल रहा!?

दो दिन पहले, घर के पास वाले पेड़ पर पंछी

फिर घुमड़े बादल

आज हुई बारिश

तन मन भीगा …

नज़ारा कुछ यूँ था

टिप टिप बरसा पानी …

… चली आना घर के पिछवाड़े

… घर के सामने

दिल है कि मानता नहीं …

अभी ना जायो छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं …

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19 thoughts on “रूठी हुई थी… आखिर आ ही गई आज …

  1. PD

    vaah.. vahan to aa gayi, yahan (chennai) kab aayegi? 🙁

  2. Sanjeet Tripathi

    apne yaha to raat se hi pahuchi hui hai ji 😉

    subah se to puchhiye mat, abhi 1:30 baje noon tak mast sawan ki jhadi lagi hui thi

  3. ओम आर्य

    kya baat hai ……sundar tasweer hai …tan our man ko shanti deti badali……sundar

  4. अंशुमाली रस्तोगी

    मित्र, बस ज्यादा कुछ नहीं। मजा आ गया।

  5. राज भाटिय़ा

    बहुत सुंदर लगा, इस रुठी हुयी का आना
    धन्यवाद

  6. mehek

    bahut hi khubsurat nazare hai barsat ke,sunder chitra.

  7. आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal)

    हमारे यहां भी आज ही बरसा... आभार

  8. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    आप ने कुछ दिन पहले ऐसी पोस्ट क्यों न लिखी? हमारे यहाँ भी आज बारिश हुई। अच्छी वाली।

  9. Udan Tashtari

    वाह!! आ ही गई आखिर!!

  10. महामंत्री - तस्लीम

    ये बरसात मुबारक हो। ये दिन रात मुबारक हो।

  11. ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey

    बधाई हो! हम तो इन्तजार में ही हैं जोरदार बारिश के।

  12. रंजन

    बधाई.. यहां दिल्ली में तो आई थी..सडक भी नहीं भीगी..

  13. रंजना [रंजू भाटिया]

    अरे कोई इधर भी भेज दो बारिश यहाँ तो सावन सूखा सूखा बीतता जा रहा है 🙁

  14. रंजना [रंजू भाटिया]

    अरे कोई इधर भी भेज दो बारिश यहाँ तो सावन सूखा सूखा बीतता जा रहा है 🙁

  15. रंजना [रंजू भाटिया]

    अरे कोई इधर भी भेज दो बारिश यहाँ तो सावन सूखा सूखा बीतता जा रहा है 🙁

  16. MANVINDER BHIMBER

    बहुत सुंदर लगा, इस रुठी हुयी का आना
    मेरठ भी गीला हो गया है

  17. अजय कुमार झा

    आज पता चला की आप इता कमाल का कैसे सोचते हैं..मेरा जिन्न तो हर्बल स्वर्ग में रहता है..अब तो जिन्दगी रही तो हम भी टपकेंगे घर आपके इन बूंदों की तरह ..पक्का जी पक्का ..

  18. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

    बहुत बहुत बधाई।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  19. anil

    सुन्दर चित्र बहुत बहुत बधाई बारिश की .

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