रैनसमवेयर की दुनिया

रैनसमवेयर के सहारे 12 मई 2017  को एक बड़े साइबर अटैक में ब्रिटेन, तुर्की, वियतना फीलीपींस, रूस और जापान समेत दुनिया के करीब 100 देशों के अरबों कम्प्यूटरों को हैक कर लिया गया. सभी देशों के कम्प्यूटर सिस्टमों को रैनसमवेयर से ही हैक किया गया.

आज ऑफिस में मित्रों ने पूछा  कि यह रैनसमवेयर है क्या चीज? मुझे याद आया कि इस बारे में एक लेख मार्च के महीने में नवभारत टाइम्स को भेजा था. संपादक जी को फोन पर उसका स्टेटस पूछा  तो बताया गया कि उसे तो अप्रैल के महीने में ही छाप दिया गया!

जब वह लेख दिखा तो पता चला कि बहुत सी कांटछांट  हो चुकी उसमें. तब मैंने सोचा कि उस पूरे आलेख को यहीं लिख दिया जाए

कंप्यूटर की दुनिया में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, शेयरवेयर जैसे शब्द बेहद प्रचलित है, हालाँकि इससे पहले भी समाज में किचनवेयर, वुडेनवेयर, टेबलवेयर की धूम रही.
वेयर (ware) का एक सामान्य सा अर्थ है –चीजें.

उपयोग की किसी वस्तु के साथ जोड़ कर इसे एक विशेषण बना दिया गया. रसोई की चीजें किचनवेयर, लकड़ी की चीजें वुडेनवेयर, टेबल की चीजें टेबलवेयर कहलाईं. चीजों को रखने का गोदाम हो गया वेयरहाउस.

आजकल की डिजिटल दुनिया में अब एक शब्द बड़ी तेजी से चर्चा का विषय बन रहा है. वह शब्द है ‘रैनसमवेयर’.

रैनसमवेयर मतलब फिरौती मांगने वाला वायरस

रैनसम, अंग्रेजी का शब्द है जिसका मतलब है फिरौती. जी हाँ! वही फिरौती जिसके लिए भारत का एक राज्य बेहद कुख्यात रहा. हालांकि, किसी इंसान का अपहरण कर, धन प्राप्त कर उसे वापस छोड़ देने का यह अपराध विश्वव्यापी है.

पिछले कुछ वर्षों की खबरें बताती हैं कि मुंबई में लुटेरों ने एक लक्जरी बस को किराए पर ले कर ड्राइवर की आंख में मिर्च डालकर बस को हाईजैक कर लिया और बस लौटाने के बदले में बस मालिक से 50 लाख की फिरौती मांगी. नई दिल्ली में एक पूर्व पार्षद के बेटे को अगवा कर 50 करोड़ की फिरौती मांगी गई, दिल्ली में ही एक डॉक्टर का अपहरण कर 25 करोड़ मांगे गए.

रैनसमवेयर की दुनिया

और तो और अमेरिका ने बंधक बनाए गए अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस पाने के लिए ईरान को 1.7 अरब डॉलर की ‘फिरौती’ विद्रेशी मुद्रा में दी.

लेकिन फिरौती दिए जाने के बाद गारंटी नहीं कि सब ठीक ही हो. फिरौती पाने के बाद भी अपहरण किये जाने वाले को मार डालने की खबरें बहुत हैं. उधर, मुंबई में दो नाबालिग बच्चों ने अपने ही पड़ोस में रहने वाली साढ़े 3 साल की मासूम का अपहरण किया और फिरौती ना मिलने पर उसकी ह्त्या कर दी.

हैकिंग की बातें तो आपने बहुत सुनी होंगी. वह कुछ नहीं, महज एक शरारत है. जैसे राह चलते किसी कुत्ते को लात मार देना. वैसे ही किसी वेबसाइट पर अपनी दादागिरी दिखा देना. हासिल किसी को कुछ नहीं होता, बस अपनी धौंस भर दिखा पाते हैं यह.

रैनसमवेयर की करतूतें

लेकिन हैकिंग से आगे की खबरें हैं कि ऑस्ट्रिया के होटल में ठहरे लोग अपने कमरों का ताला नहीं खोल सके क्योंकि होटल का सारा कंप्यूटर सिस्टम बंधक बना लिया गया था रैनसमवेयर के सहारे. ना तो इलेक्ट्रौनिक कार्ड वाले कमरों के ताले खुले ना ही रिजर्वेशन करवाने वालों को उनके कमरों का पता चला.

सारा होटल बुक था और मैनेजमेंट लाचार. ना पुलिस मदद कर पाई ना बीमा वाले. हार कर होटल वालों ने कुल्हाडियों से सैकड़ों दरवाजे तोड़ डालने की बजाए फिरौती देना ठीक समझा. हजारों डॉलर की फिरौती पाते ही शातिर अपराधी ने होटल के कंप्यूटर सिस्टम को छोड़ा और लोग अपने कमरों में जा पाए.

अब होटल वालों ने इलेक्ट्रॉनिक कार्ड वाले तालों के बदले पुराने, असल चाबी वाले ताले लगाने का फैसला लिया है.

रैनसमवेयर की दुनिया

इससे पहले रैनसमवेयर के सहारे हॉलीवुड के एक अस्पताल का सारा कंप्यूटर सिस्टम बंधक बना लिया गया. मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड तक डॉक्टरों की पहुंच नहीं हो पाई. दवाइयाँ नहीं मिल पाईं, ऑक्सीजन सप्लाई रुक गई. अस्पताल ने लाखों रूपये हैकर को दिए और कंप्यूटर सिस्टम छुडाया.

रोमानिया में एक व्यक्ति को संदेश दिखा कि आपके कंप्यूटर पर अश्लील फिल्में डाउनलोड करने की गैरकानूनी गतिविधियों के सबूत मिले हैं जिसके लिए आपको जुर्माने का भुगतान करना होगा. हजारों डॉलर देने में असमर्थ व्यक्ति ने बदनामी के डर से आत्महत्या कर ली.

अमरीका में तो टियुक्सबरी पुलिस के मुख्य सर्वर को रैनसमवेयर हमले की चपेट में आने के बाद भुगतान किया गया था.

फरवरी में ही हैकरों के एक ग्रुप ने एपल के सिस्टम में घुसने का दावा किया. ‘टर्किश क्राइम फैमिली’ नाम के हैकर्स ने कंपनी के सामने बिटक्वाइन में 75 हजार डॉलर (करीब 50 लाख रुपए) या एक लाख डॉलर के आईट्यून गिफ्ट कार्ड की फिरौती माँगी है. इसने चेतावनी दी कि पैसे नहीं मिले तो वह 20 करोड़ आई-क्लाउड अकाउंट के डेटा डिलीट कर देगी. यानी इतने आईफोन-आईपैड ‘फैक्टरी रीसेट’ मोड में चले जाएंगे. हैकरों ने पैसे देने के लिए आने वाले 7 अप्रैल तक की मोहलत दी. लेकिन फिर क्या हुआ इसकी खबरें नहीं मिली हैं.

ऐसा नहीं कि यह घटनाएं विदेशों में ही हुईं. मई 2016 में महाराष्ट्र सरकार के तक़रीबन 150 कंप्यूटर लॉक हो चुके. उन कंप्यूटरों में दर्ज फ़ाइलों को खोला या पढ़ा नहीं जा सका. हालाँकि उन्हें फिरौती दिए बिना रिकवर कर लिया गया क्योंकि सारे डाटा का बैकअप सुरक्षित था.

रैनसमवेयर का तरीका 

अलग अलग रूप में अब यह अपराध वास्तविक दुनिया की बजाए कंप्यूटर की दुनिया में तेजी से अपनी जगह बनाते जा रहा. इसके काम करने की शैली बेहद सामान्य सी है. कंप्यूटर की फाइल्स या डाटा का ‘अपहरण’ कर उनका फॉर्मेट बदल देना, प्रकार बदल देना और ऐसा बदल देना कि उन्हें अपने सामान्य रूप में उपयोग ना किया जा सके. जैसे कि वर्ड की फाइल को बेकार कर देना.

रैनसमवेयर की दुनिया

फाइल का फॉर्मेट बदल देने के बाद एक संदेश भी कंप्यूटर पर दिखाया जाता है कि फलां फलां खाते में इतना इतना धन जमा करवा दिया जाए तो उन ‘अपहरण’ की गई फाइल्स को वापस अपने पुराने रूप में ला कर उपयोग करने के लिए बना दिया जाएगा.

यह तो एक आसान उपाय दिखता है किसी व्यक्ति को, उसके लैपटॉप को, कंप्यूटर को बंधक बना कर धन पाने का. लेकिन बात अब शातिराना तरीके से एक व्यक्ति की बजाए समाज तक पहुँच गई है.

रैनसमवेयर आता कैसे है?

अब सवाल यह कि ये रैनसमवेयर आता कहाँ से है? इसके लिए दरवाजा कौन खोलता है? सीधा सा जवाब यही कि आप हैं जिम्मेदार!

किसी भी बेमतलब की ई-मेल में दिए गए बटन या लिंक को क्लिक करते ही संभावना बढ़ जाती है संदिग्ध गतिविधि की. किसी डॉक्यूमेंट में दिए लिंक को क्लिक करवाते हुए मैक्रोज को हरकत में ला कर भी इस कारनामे को अंजाम दिया जा सकता है. गलत साइट्स से डाउनलोड किये गए सॉफ्टवेयर, वीडियो भी इस मामले में कमाल दिखाते है..

…और फिर पलक झपकते ही कंप्यूटर की फाइल्स और डाटा हो जाता है हैकरों के कब्जे में.

इस तरह के बढ़ते खतरे, किसी भी संस्था या देश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकते हैं.

2014 के आंकड़े बताते हैं कि 86 देशों की हजारों संस्थाएं इसकी चपेट में आईं, व्यक्तिगत शिकारों की तो गिनती ही नहीं. अमेरिका, इंग्लॅण्ड, जर्मनी, जापान के बाद पांचवे स्थान पर भारत ही है

रैनसमवेयर की दुनिया

एक आम धारणा के विपरीत यह काम मानव की बजाए मशीनें ही संभालती हैं. संस्थायों के बदले इनकी निगाहें घरेलू कंप्यूटर वालों पर ज्यादा रहती है क्योंकि वे बैकअप नहीं रखते, कंप्यूटर सुरक्षा के प्रति जागरूक नहीं होते, लालची या डरपोक होने के नाते अंजान लिंक पर क्लिक कर बैठते हैं, सोचते हैं कि भगवान सब ठीक करेंगे. हालाँकि यही सब बातें संस्थायो पर भी लागू की जा सकती है.

कुछ कुख्यात रैसमवेयर के नाम CryptoLocker, Locky, CrytpoWall हैं.

रैनसमवेयर से कैसे बचें

बचा कैसे जा सकता है?
• महत्वपूर्ण फाइल्स केवल कंप्यूटर पर ना रखें
• ड्रापबॉक्स/ गूगल ड्राइव/ वन ड्राइव आदि का प्रयोग करें. लेकिन हमेशा ऑन ना रखें. दिन में एक बार सिंक करें और बंद कर दें.
• कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर और एंटी-वायरस जैसे सुरक्षा सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें.
• रोजमर्रा के कामों के लिए एडमिनिस्ट्रेटर बन लॉग इन ना करें, गेस्ट अकाउंट के सीमित अधिकार सहारे काम निपटाएं.
• माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के सॉफ्टवेयर में मैक्रो ऑफ रखें
• ब्राउज़र में एडोबी फ़्लैश, एडोबी रीडर हटा दें, जरूरत पड़ने पर ही अपनाएं.
• अनजान या संदिग्ध ई-मेल के बटन या लिंक कभी ना क्लिक करें.

सबसे बेहतर बचाव है अपनी फाइल्स और डाटा का बैकअप रखना

अगर रैनसमवेयर के शिकार हो ही गए हैं और पैसे देने को भी तैयार हैं तो समझ लीजिये कि फिरौती देना गारंटी नहीं है कि आपको अपना कंप्यूटर, फाइल्स वापस मिल ही जाएँ. कई मामलों में ये पैसे ले कर चंपत भी हो जाते हैं और आप कुछ कर भी नहीं पायेंगे.

रैनसमवेयर की दुनिया

अधिकतर शिकारी अपना भुगतान ‘बिटकॉइन’ में चाहते है, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो. आभासी दुनिया का पहला ओपन पेमेंट नेटवर्क, बिटकॉइन फाइनैंशियल ट्रांजैक्‍शन के लिए सबसे तेज और कुशल माना जाता है. बिटकॉइन को आजकल ब्‍लैक मनी, हवाला और आतंकी गतिविधियों में ज्‍यादा इस्‍तेमाल किया जा रहा है. भारत में रिजर्व बैंक ने इसे कानूनी मान्‍यता नहीं दी है.

लेकिन रैनसमवेयर की चपेट में आने की आशंका में कुछ कंपनियों ने तो पहले से ही बिटकॉयन अकाउंट बनवा रखे है.

यह भी पाया गया कि दुनिया के किसी कोने में बैठे ये लालची ऑनलाइन अपराधी एक बार फिरौती पाने समझ जाते हैं कि इस बन्दे को अगली बार भी शिकार बनाया जा सकता है. जैसे ही आप भुगतान करते हैं, शोषकों की सूची में आ जाते हैं और हो सकता है कि आपसे फिर संपर्क किया जाए. यह अपराधियों के लिए आसानी से हाथ में आपने वाले फल की तरह है

हालांकि ये कुख्यात रैनसमवेयर इतने शातिर लोगों द्वारा बनाए जाते हैं कि इनका तोड़ मुश्किल होता है लेकिन नामुमकिन नहीं.

रैनसमवेयर की दुनिया
दिल्ली के नवभारत टाइम्स में इस आलेख का संक्षिप्तीकरण

अगर आप कंप्यूटर तकनीक से परिचित हैं तो इन सबसे तोड़ पाने के लिए सैकड़ों टूल भी मौजूद हैं. दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े शहरों में कई प्रोफेशनल सेवाएं हैं जो आपको इन रैनसमवेयर से छुटकारा दिलवाती हैं. लेकिन इस काम में धैर्य रखना होता है.

निचोड़ यह कि  जरूरी फाइल्स का बैकअप रखें, अनजान सॉफ्टवेयर, लिंक, वेबसाइट पर सावधानी से काम करें. रैनसमवेयर की चपेट में आ ही जाएँ तो फिरौती ना दें, रैनसमवेयर हटाने के उपायों का प्रयोग करें या अपने कंप्यूटर को फॉर्मेट कर फाइल्स के बैकअप से काम जारी रखें.

© बी एस पाबला

रैनसमवेयर की दुनिया
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8 Thoughts to “रैनसमवेयर की दुनिया”

  1. शानदार व काम की जानकारी

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU

  2. अच्छा आलेख है. इसे इलेक्ट्रानिकी पत्रिका में प्रकाशनार्थ प्रेषित किया है.

    1. बी एस पाबला

      In Love
      अरे वाह

      आपके भेजने से छप ही जाएगा
      हमने दो लेख भेजे, कोई जवाब ना आया

  3. Shashank

    बहुत देर से आये पर दुरुस्त आये, पिछली पोस्ट जुलाई २०१६ की थी |

    1. बी एस पाबला

      Sad
      समझ सकते हैं मेरी व्यथा

  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व दूरसंचार दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर …. आभार।।

  5. महत्वपूर्ण जानकारी…।
    टिप्पणीकर्ता Sudha devrani ने हाल ही में लिखा है: “सैनिक—देश के”My Profile

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