तनख्वाह लेने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?

जब से मैने सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने की सुगबुगाहट देखी-पढ़ी-सुनी है तब से मुझ जैसे तुच्छ सरकारी जन-सेवक का मन, विचारों की नैय्या सरीखा अशांति के समन्दर में डगमगा रहा। क्या करूँ? क्या इस नैय्या को ओसामा (जी) बिन लादेन की तरह समन्दर में ही डुबो दूँ हमेशा के लिए या फिर कोई इसे सोमालियाई डाकूओं के हमले से बचाने जैसा काम कर किनारे सुरक्षित ले आएगा?

सचिन (जी) को भारत रत्न की बात पर मैंने सबसे पहले तो यह ढ़ूँढ़ा कि इससे पहले यह सम्मान किन्हें दिया गया है। सूची कुछ इस प्रकार मिली:

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, डॉक्टर चंद्रशेखर वेंकट रामन, डॉक्टर भगवान दास, सर डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या, पं. जवाहर लाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. धोंडो केशव कर्वे, डॉ. बिधान चंद्र राय, पुरुषोत्तम दास टंडन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, डॉ. पांडुरंग वामन काणे, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गाँधी, वराहगिरी वेंकट गिरी, के. कामराज, मदर टेरेसा, आचार्य विनोबा भावे, ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान, मरुदुर गोपाला रामचन्द्रन (एम जी आर), डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर, नेल्‍सन मंडेला, राजीव गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मोरारजी देसाई, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जे. आर. डी. टाटा), सत्यजीत रे (राय), ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, गुलज़ारीलाल नन्दा, अरुणा असिफ़ अली, एम.एस. सुब्बालक्ष्मी, सी. सुब्रह्मणियम, जयप्रकाश नारायण, पं. रवि शंकर, अमर्त्य सेन, गोपीनाथ बोरदोलोई, लता मंगेशकर, उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ां, पं.भीमसेन जोशी

भारत रत्न

फिर मैंने तलाशा कि यह सचिन तेंदुलकर कौन हैं? पता चला कि यह उस एक भारी-भरकम क्लब के कर्मचारी हैं जो Board of Control for Cricket In India (BCCI) कहलाता है। विशुद्ध व्यवसायिक नज़रिये सरीखे इस प्रतिष्ठान के दो मशहूर प्रोजेक्ट हैं जिन्हें नाम दिया गया है टीम इंडिया और आईपीएल। इन दोनों के अपने अपने ग्रुप मेंबर हैं जिन्हें निश्चित वेतन के अलावा अच्छा प्रदर्शन करने पर आम कारखाने जैसे बोनस भी दिया जाता है।

बात कुछ जमी नहीं! क्योंकि तभी ख्याल आया इन्कम टैक्स वाले उस झंझट का जिसमें इनकम टैक्स अफसर द्वारा सवाल ज़वाब किए जाने पर सचिन (जी) ने कहा था कि he is a non-professional cricketer और playing cricket is not his profession इसलिए फॉर्म में लिखा गया कि Income from playing cricket is reflected as ‘income from other sources’!

यह सब Sachin R. Tendulkar vs. Assistant Commissioner of Income-tax, Range 193/ IT APPEAL NOS. 428 TO 430 AND 6862 (MUM.) OF 2008 के आधिकारिक दस्तावेज़ में दर्ज़ है। तो इन भाई सा’ब को खेल के लिए कोई सम्मान कैसे दे सकती है सरकार? जब वह खुद कह रहे हों कि he is a popular model who acts in various commercials for endorsing products of various companies… A major part of the income derived by him during the year is from the exercise of his profession as an ‘actor’ in these commercials... the income derived by him from ‘acting’ has been reflected as income from “business & profession”!!

मतलब यह हुआ कि मुख्य कमाई तो विज्ञापनों की शूटिंग, मॉडलिंग से है क्रिकेट तो बस यूँ ही कभी कभी खेल लेते हैं ज़नाब!

इन सब बातों के बीच भारत सरकार के इन्कम टैक्स अफ़सर ने इसी दस्तावेज़ के अनुसार कह डाला कि He is engaged in the activity of playing cricket as a paid job rather than as an amateur.

अब मेरा मन किया कि कुछ और बातें टटोली जाए इनके रोजगार दाता के बारे में। खोजने निकला तो निजी चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में तमिलनाडु से रजिस्टर्ड लेकिन विशुद्ध रूप से एक मुनाफा कमानेवाले व्यावसायिक संगठन बीसीसीआई को दी गई भारत सरकार की धमकी दिखी कि अपने आप को खेल मंत्रालय की नीतिओं के अधीन लाओ वरना India शब्द का प्रयोग बंद कर दो!

मैं भी सोचता रहा कि क्रिकेट मैच का आयोजन करना, इसके लिए पैसे लेकर प्रायोजक ढूंढना, विज्ञापन से धन अर्जित करना, टेलीविजन पर प्रसार का अधिकार देकर मुनाफा कमाना, खेल मैदान के अंदर भी विज्ञापन प्रदर्शित कर धन लेना और यहां तक कि खिलाडिय़ों की पोशाक को भी विज्ञापन का माध्यम बनाकर धन अर्जित करना, धर्मार्थ अर्थात चैरिटीका काम कैसे हो गया? इस पर अभी भी खींचतान चल ही रही है। इस लेख से पता चला कि बीसीसीआई तो अपने कर्मचारिओं से गुलामों जैसा बर्ताव करती है।

चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि शपथपत्र देकर खुद खिलाड़ी और यह बोर्ड अदालत में कह चुके हैं कि हम भारत देश के लिए नहीं खेलते, अपने बोर्ड को मुनाफा दिलवाने के लिए खेलते हैं और खिलाड़ी ठेके, कॉंट्रेक्ट पर रखे जाते हैं जिनका भुगतान किया जाता है उन्हें, मुनाफा लाने पर। साथ ही यह भी कह डाला कि ना तो हम भारत का तिरंगा फहराते हैं और ना ही किसी राजकीय चिन्ह का प्रयोग कहीं करते हैं!! तो फिर भारतीय टीम क्यों कहलाती है इन वेतनभोगी नौकरों की?

इस पर (62 पृष्टों वाली) बहुत लंबी चली बहस पर मैंने भी हिस्सा लिया था। इस बहस में कहा गया था कि जब टाटा, विप्रो, इंफ़ोसिस जैसी कम्पनियाँ अरबों, खरबों का मुनाफा कमाते हुए दुनिया में बहादुरी के साथ अपने झंडे गाड़ती है तो क्यों नहीं उन्हें टीम इंडिया कहा जाता। ख्याल यही आता है कि इनके कर्मचारिओं को क्यों नहीं कोई सम्मान दिया जाता भारत सरकार की ओर से?

ऐसे ही एक मौके पर सुपरिचित हिंदी ब्लॉगर जीतू चौधरी ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि जहाँ भी क्रिकेट से कमाई की बात आती है तो ये अपने आप को भारत के प्रतिनिधि कहते, सारा माल कमाते, बटोरते और हजम कर जाते हैं। लेकिन जहाँ भी सरकार इनसे कुछ फ्री में मांगना चाहती तो ये लोग फ़टाक से एक प्राइवेट क्लब मे बदल जाते।

और तो और, न्यायालय मे दिए शपथपत्र (जो अब इनकी नाक की नकेल बन जाएगा) मे ये लोग चीख चीख कर कहते कि हम तो भारत का प्रतिनिधित्व ही नही करते, ना ही हम सरकार से जुड़े है, हम तो सिर्फ़ एक क्लब है जहाँ कुछ खिलाड़ी हमारे कर्मचारी है, और अपने कर्मचारियों को खेलने के लिए हम विदेशों मे भेजते है। ना तो हम भारत मे क्रिकेट के सरोकार से जुड़े है और ना ही हम खेल मंत्रालय के अधीन है। पूरा शपथ पत्र अगर आप पढे तो आप इनकी महानता के गुण गाने लग पड़ो।

गज़ब है भई! अब कौन इससे अधिक जानकारियाँ देख कर भ्रमित होता रहे। अपने राम फिर भारत रत्न की ओर मुड़ लिए और पढ़ डाले कि यह किसी व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और देश के प्रति उसकी अत्यन्त समर्पण भावना के लिए यदा-कदा दिया जाने वाला अलंकरण है। यह उन आदर्श महान पुरुषों को ही दिया जाता है जिनकी जीवन गाथा पुण्य-भागीरथी के समान है, जिसे जानकर एक साधारण मनुष्य अपने आप को पाप मुक्त और निर्मल पाता है। (दिए जा चुके) ‘भारत-रत्न’ में ऐसी विभूतियों के दिव्य चरित्र हैं जिन्होंने जीवन को इतनी ऊँचाइयों तक पहुँचाया जहाँ की कोई कल्पना नहीं कर सकता। ‘भारत-रत्न’ अनेक महान व्यक्तियों की जीवन-गाथा के साथ भारत के उस काल का इतिहास भी है, जिस काल से इन आदर्श पुरुषों का संबंध रहा।

लो जी, यह प्रश्न तो अब भी सामने खड़ा कि तनख्वाह ले कर अपने मालिक को मुनाफ़ा दिलवाने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?

अब आप ही सहायता करो!

तनख्वाह लेने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?
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तनख्वाह लेने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?” पर 37 टिप्पणियाँ

  1. भले ही खेल के आधार पर सचिन का फैन हुआ जा सकता है, लेकिन राष्‍ट्रीयता को दांव पर किसी भी सूरत में नहीं लगाया जा सकता। आपके लेख में दिए लिंक बाद में पढूंगा, लेकिन अब तक समझ में यह आया है कि देश के नाम नाच गा और कमा रहे लोग देश को कुछ भी देने के लिए तैयार नहीं है और अब एक क्‍लब का खिलाड़ी मनोरंजन के जरिए पैसा कमाकर भारत रत्‍न हासिल करने की स्थिति में आ रहा है।

    दुखद है..

    आपके लेख के लिए हृदय से आभार्….

  2. अरे पाबला जी, इतने सार नाम… यह भारत रत्न है पद्मश्री नहीं… 🙂

  3. फिर तो मैं भी सचिन से बडा दावेदार हुआ। कम से कम भारत सरकार का कर्मचारी तो हूं। इमकम टैक्स भी देता हूं। भेजो मेरा नाम क्या पता मिल ही जाये।

  4. सचिन सरकारी कर्मचारी हैं तो विशेष ही होंगे. साधारण कर्मचारी को तो केवल मीमो ही मिल सकता है :))

  5. चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी,

    यह लिस्ट भारत रत्न की ही है, पद्मश्री की नहीं 🙂

  6. आश्चर्यजनक तथ्य …
    शुभकामनायें आपको !

  7. प्रश्न तो बहुत दुरुस्त है, विचार निश्चय ही करना होगा।

  8. विचारणीय प्रश्न हैं।
    आभार

  9. पाबला जी, आज किसी भी पोस्‍ट पर काफी दिनो बाद टिप्‍पणी कर रहा हूँ, आपकी पोस्‍ट वाकई वक्त की जरूरत है… कम से कम जब तक सच‍िन खेल रहे है तब तक तो भारत रत्न की बात करना भी बेमानी होगी.. खेल के क्षेत्र मे तो ऐसे रत्‍न पड़े हुये है जो वकाई भारत रत्न है.. और वे ही इस सम्‍मान के हकदार है।

  10. पाबला जी यह एक दस्तावेज रख दिया आपने सामने ….खोजी दृष्टि को सलाम!मान गए आपको !

  11. पाबला जी, इस विषय पर मैंने भी एक पोस्‍ट लिखी थी-
    क्‍या सचिन रमेश तेंदुलकर को भारत रत्‍न मिलना चाहिए?
    उसपर अच्‍छी खासी बहस हुई थी। आपने इस बहस को एक नया आयाम दिया है।
    आपकी इस सार्थक पोस्‍ट के लिए जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
    ——
    चोंच में आकाश समा लेने की जिद..
    इब्‍ने सफी के मायाजाल से कोई नहीं बच पाया।

  12. पाबला जी, वैसे अगर यह सिलसिला शुरू हो जाए, तो आपके और हमारे लिए भी तो राह खुलती है। 🙂

  13. आवश्‍यक विचारणीय पक्ष की ओर ध्‍यान दिलाया आपने.

  14. फीडबर्नर के प्रत्युत्तर में:

    तुस्सी छा गये सर जी! जोर का झटका पुरजोर तरीके से !! वाह, वाह। अब तो मैं भी माँग करूँगा – 'हमहूँ भारत रत्न'।

    -गिरिजेश राव

  15. भारत रत्न को मज़ाक बना दिया गया है . इस को अपने फ़ायदे के लिये इस्तेमाल किया जाता रहा है
    सरदार भगत सिंह ,चन्द्र्शेखर आज़ाद तो इस लायक नही माने गये लेकिन मन्डेला ,टेरेसा , एम.जी.आर को दिया गया .

    सचिन को भारत रत्न अभी देना उनका अपमान होगा जिनके आगे हिटलर तक नत मस्तक हो गया था .

  16. हमारे देश में आम आदमी की पूछ कहाँ ? ..यहाँ तो सिर्फ A Raja , B-Raja , C-Raja…चलते हैं!

  17. सचिन ने पिछले २० से अधिक वर्षों में ऐसा कुछ किया है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं।
    फिर उन्हें भारत रत्न दिए जाने के प्रस्ताव पर भी।

  18. भीमसेन जोशी, लता मंगेसकर भी तो पैसे के सिवाय और किसी काम में कोई योगदान नहीं किया। लता मंगेसकर ने तो मुंबई के लोगों की कठिनाई दूर करने के लिए बनाए जाने वाले फ़्लाई ओवर को वर्षों रोके रखा। फिर भी उन्हें सम्मान दिया। इस प्रकार किसी को भी सम्मान दिया जा सकता है।

    मेरे विचार में तो उन खिलाड़ियों को तो कोई भी राष्ट्रीय सम्मान देना तो ठीक है जो खेल को व्यवसाय नहीं राष्ट्रीय स्मिता की पहचान समझते थे।

    अतः सचिन तो कभी इसमें फ़िट होते ही नहीं। दूसरे, वे सदैव अपने निजी रिकार्ड के लिए खेलते हैं। अभी वे तब तक खेलेंगे जब तक कि उनका शतक का रिकार्ड नही बन जाता।
    मेरे विचार में तो सचिन को यह सम्मान नहीं मिलना चाहिए।

  19. यह किसी व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और देश के प्रति उसकी अत्यन्त समर्पण भावना के लिए यदा-कदा दिया जाने वाला अलंकरण है। यह उन आदर्श महान पुरुषों को ही दिया जाता है जिनकी जीवन गाथा पुण्य-भागीरथी के समान है, जिसे जानकर एक साधारण मनुष्य अपने आप को पाप मुक्त और निर्मल पाता है।

    अब इसके बाद कहने की शायद ही कोई जरूरत है, पर आज कल जो ना होजाये वो कम है.

    रामराम.

  20. अरे इनकी और भी खूबियाँ है पाबला जी.. मसलन आई.पी.एल. में जब पैसे बरस रहे थे तो खूब खेले और जब टेस्ट सीरीज़ में वेस्ट इंडीज़ जाने की बारी आई तो थक गए.. वैसे भी "टेनिस एल्बो" की पीड़ा से डॉक्टर की सलाह पर भी बहुत आराम किया है इन्होने.. वो तो खून पर हंगामा मच गया था वरना वो भजी बिक जाता (किताब में इनके खून के हरफ से छपाई हुई थी ऐसा बताया गया था).. अब ऐसे देश के लिए खून देने वाले को तो भारत रत्न मिलनाइच् माँगता है!!

  21. आपकी खोजी प्रवृत्ति को सलाम.. काश देश का हर नागरिक ऐसा ही तार्किक हो जाए…

  22. आपके इस खोजी लेख से क्रिकेट के अतिव्यव्सायिक रूप पर नज़र पड़ती है जो खेल देखते या खेल की बातों के दौरान छुपा रह जाता है। विचारोत्तेजक लेख ।

  23. सिद्धार्थ जोशी जी से सहमत हूँ। भारत रत्न केवल उनको मिलना चाहिये जो देश सेवा मे अपना जीवन लगा देते हैं। आभार

  24. इस देश के लोग भेड़चाल वाले हैं। बिना सोचे समझे नारा लगाते हैं। हम तो यही कहेंगे कि प्रभु इनको बुद्धि दे।

  25. अपनी खेल क्षमता के आधार पर सचिन निशित ही
    भारत रत्न के हक़दार हैं।जायज तरीकों से पैसा बनाना
    अपराध नहीं है,हाँ उस कमाई को कर अधिकारियों से
    छुपाना गलत है।आपने तथ्यात्मक बात सामने रखी
    है,इसके लिए आपको बधाई।

  26. एक सवाल मन में उठा और इतनी खोज कर डाली? 🙂
    बात सही कही आप ने

  27. आपका आलेख आँखें खोलने वाला है सर! लेकिन क्या करें उन पढे लिखों का जिन्हें सच नहीं सिर्फ भावनाएँ दिखती हैं।

    सादर

  28. नमस्कार पाबला जी आप का उठाया गया प्रशन सही है . भारत रतन ऐसी विभूतियो को दिया जाता है जो आम जनमानस के लिया अनुकर्निय होते है .

  29. पाबला जी,
    आपने तो कमाल कर दिया !
    आपका आभार

  30. अत्यंत सार्थक लेख-भारत रत्न इस देश का सर्व श्रेष्ट सम्मान है,इसका चयन-निर्धारण करते हुवे,निष्पक्ष रूप से उसे ही दिया जाना चाहिए जिसकी अपने देश के प्रति आत्मतीय भाव से सम्पूर्ण निष्ठां से निशुल्क सेवा की हो।और भारत को गौर्वागित किया।
    मोरारजी देसाई को पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान “निशाने पाक ” से सम्मानित किया गया था
    नोबल पुरुस्कार विश्व सम्मान है। क्या भारत रत्न से उन भारतीय को सम्मानित करना चाहिए जिन्हें नोबल शांति से पुरुस्कृत हुवे..

  31. अंधाधुंध दरबार में गधे पंजीरी खा रहे हैं। धन्यवाद अद्भुत जानकारी के लिए। मेजर ध्यान चंद बेचारे आज भी ऊपर बैठ कर इंतज़ार कर रहे हैं।

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