कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम

यात्रा संस्मरण

चूहों द्वारा अपनी ताकत दिखाए जाने के दूसरे दिन, 9 जुलाई को हमें पनवेल स्टेशन से मुम्बई-मडगांव जनशताब्दी 2051 पर सवार हो कोंकण रेल्वे की राह से गोवा के लिए रवाना होना था। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से शुरू होने वाली यह ट्रेन पनवेल स्टेशन पर सुबह 6:30 पर आती है।

मारूति वैन की बैटरी चार्जिंग के लिए दे चुके थे. बदले में अस्थाई बैटरी मिली नहीं। सो हम पिता-पुत्री, रिमझिम बारिश में खारघर से आटो-रिक्शा की सवारी कर 6 बजे के पहले ही पनवेल पहुँच गए। ट्रेन अपने समय पर ही आईऔर हम रवाना हो गए गोवा की ओर।

रेल आरक्षण करवाते हुए जब श्रेणी की बात आई थी तो मैंने वातानुकूलित कुर्सीयान की बजाय साधारण कुर्सीयान का चुनाव किया था। मेरा यह सोचना था कि प्रकृति के नज़ारों को जी भर देखने, मौसम का आनंद लेने, प्लेटफॉर्म की हलचलों से मचलने, ताज़ी हवा को नथुनों में भर लेने के लिए बंद शीशों वाले वातानुकूलित डब्बे से बात नहीं बनेगी। मुझे बाद में अपने इस निर्णय पर कोई अफ़सोस भी नहीं हुआ।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

बारिश रूक रूक कर हो रही थी। हम भी तब तक काँच बंद नहीं करते थे जब तक फुहारें अपना जलवा दिखाना न शुरू करें। गर्वीले पहाड़, सुरम्य हरियाली, गहरी खाईयाँ, लम्बी सुरंगें, उड़ते बादल, बल खाती नदियाँ, ऊँचे पुल, शानदार जलप्रपात देखते हुए इस सफर में जो कुछ अनुभव हुया उसे शब्दों में बखान कर पाना बहुत मुश्किल है। मोबाईल में बचे-खुचे गड्मगड हो गए चित्र ही शायद हमारे आनंद को दर्शा सकें।

10 बजे पहला स्टेशन आया। नाम था चिपळून! मुझे सुरेश चिपळूनकर जी की याद आई और झट ही उनके मोबाईल पर घंटी बजा दी। चिपळूनकर जी ने हँसते हुए पहला ही प्रश्न किया कि आज सुबह-सुबह कैसे याद आ गई हमारी? कहाँ हैं आप अब?

जब उन्हें बताया कि चिपळून में खड़ा हूँ तो चहक से उठे वो! ट्रेन चलने तक जो भी बातचीत हुई उससे उनके पूर्वजों का नाता उस स्थान से होने संबंधित संक्षि्प्त वार्तालाप ही हुया।

चिपळून कस्बा

नवी मुम्बई से 350 किलोमीटर दूर साढ़े ग्यारह बजे अगला स्टेशन था रत्नागिरि। वही रत्नागिरि जहाँ के अल्फांसो (हापुस) आम, विश्व-प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि इस वर्ष इस प्रजाति का एक आम 333 रूपए में बिका था। आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, नागपुर का संतरा वाली तर्ज़ पर स्टेशन पर नज़र दौड़ाई रत्नागिरि के आम के लिए, लेकिन मायूसी ही हाथ लगी। यहाँ तक कि किसी फेरी वाले की आवाज़ तक के लिए कान तरस गए।

ट्रेन रवाना हुई तो यह शहर मुझे प्रदूषणयुक्त कारखानों से घिरा ज़्यादा महसूस हुआ। वैसे भी यात्रा के बीच एकाएक हरियाली और पहाड़ों के बीच यकायक धुँआ उगलती चिमनियों वाले कारखाने दिख ही जाते थे। कनकावली व कुदाल स्टेश्नों का नाम मेरे लिए अपरिचित ही जान पड़ा।

3 बजे थिविम स्टेशन के आते आते गोवा की झलक मिलने लगी थी। विदेशी पर्यटकों की आवाजाही से नजदीक ही किसी समुद्रतट का भान हो गया था। बाद में पता चला कि इसके पहले से ही समुद्र तटों की शृंखला शुरू हो जाती है।

अरब सागर के समान्तर हो रही सैकड़ों सुरंगों व पुलों के बीच चल रही इस रेल ने कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग 17 को पार किया। इनमें एक सुरंग तो 6 किलोमीटर से भी ज्यादा लम्बी थी!

मनोरम दृश्यों से आनंदित करती भारत के कुछ गिने चुने रेल मार्गों में से एक, इस कोंकण रेल यात्रा के आखिर में 9 जुलाई को निर्धारित समय शाम के 4 बजे, सही समय पर मुम्बई से 800 किलोमीटर दूर मडगाँव स्टेशन की झलक दिखी तो हमने अपने छोटे-छोटे बैग संभाले और उत्सुकता भरी निगाहों से बहुचर्चित गोवा के लिए इस स्टेशन पर उतरने के लिए तैयार हो गए।


आप तैयार हैं ना इस मौके पर नीचे टिप्पणी करने के लिए? आगे बताते हैं कि वहीं हमने देखी बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट

कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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31 thoughts on “कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम

  1. प्राकृतिक नज़ारों की बेहद खूबसूरत तस्वीरें …

  2. आप तो भारतीय पर्यटन के राजदूत बन गए हैं, क्‍या बढिया वर्णन और फोटोज लगाए हैं। आनन्‍द आया।

  3. कोंकण की सुन्दरता को शब्दों में ढालना वाकई बहुत कठिन है. लगता है आपने पूरा आनंद उठाया है. चित्र जता रहे हैं.

  4. कोंकण रेल्वे इंजीनियरिंग का अदभुत नमूना है और पूरा इलाका प्रकृति प्रदत्त खूबसूरती से भरपूर… कई वर्षों से इच्छा होने के बावजूद आज तक उधर नहीं जा पाए…।

    हमारी जड़ों का ज़िक्र करके आपने भावुक कर दिया… इसको वही समझ सकता है जिसे जड़ों से जबरन उखाड़ दिया गया हो…

    खैर… कोंकण की मछली, नारियल, साफ़ समुद्र तटों और फ़ेनी के बारे में भी लिखिये… 🙂

  5. इस पोस्ट को पढ़ने के बाद यदि कोई सज्जन कोंकण रेल्वे घूमने जाने वाले हों तो मेरा अनुरोध होगा कि जून से अक्टूबर के बीच ही जायें…। ट्रेन से जाने वाले हों तो किसी पैसेंजर ट्रेन को पकड़ें जो हर स्टेशन पर रुके, और सड़क मार्ग से जाने वाले हों तो खुद का वाहन लेकर जाएं ताकि जहाँ मन करे रुक सकें… तभी आप कोंकण की असली खूबसूरती को आत्मसात कर सकेंगे…

  6. आज की पोस्ट बहुत सुन्दर लगी जी
    प्राकृतिक नजारों की तस्वीरों के लिये आभार

    प्रणाम स्वीकार करें

  7. बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.
    प्रकृति के नज़दीक जाने का अपना ही आनंद होता हैं.
    कभी वक़्त निकाल कर वहाँ जाने का प्लान बनाउंगा.
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  8. वाह…. कितनी खूबसूरत तस्वीरें हैं ..हम तो वही देखते रह गए पढ़ा कुछ नहीं ..अब पढ़ने बाद में आयेंगे.

  9. सच में आनंद आ गया.. गज़ब का प्राकृतिक सौन्दर्य बटोर लाये आप कैमरे में.

  10. खूबसूरत पिक्चर्स हैं.

    हमारीवाणी को और भी अधिक सुविधाजनक और सुचारू बनाने के लिए प्रोग्रामिंग कार्य चल रहा है, जिस कारण आपको कुछ असुविधा हो सकती है। जैसे ही प्रोग्रामिंग कार्य पूरा होगा आपको हमारीवाणी की और से हिंदी और हिंदी ब्लॉगर के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओँ और भारतीय ब्लागर के लिए ढेरों रोचक सुविधाएँ और ब्लॉग्गिंग को प्रोत्साहन के लिए प्रोग्राम नज़र आएँगे। अगर आपको हमारीवाणी.कॉम को प्रयोग करने में असुविधा हो रही हो अथवा आपका कोई सुझाव हो तो आप "हमसे संपर्क करें" पर चटका (click) लगा कर हमसे संपर्क कर सकते हैं।

    टीम हमारीवाणी

    हमारीवाणी पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि

  11. चिपलूनकरजी के नाम का रहस्य आज पहली बार पता चला।
    जानकारी क लिए आभार।

  12. बहुत ही खूबसूरत तस्वीरें हैं, जय मोबाइल कैमरे की। अगली बार गोवा जायेगें तो हम भी ए सी को ठेंगा दिखा देगें और पैसेंजर ट्रेन में जायेगें या ड्राइव कर के जायेगें।
    एक और भी कोई जगह है जिसके लिए कहते हैं कि ट्रेन झरने से हो कर गुजरती है आप डिब्बे में बैठे बैठे फ़ुहारों का आनंद ले सकते हैं। शायद उस जगह का नाम क्षीर सागर है। कभी उसका भी आनंद उठाइएगा

  13. From Feed:

    बहुत सुंदर यात्रा विवरण आपका ,मजी हुई ही कलम आपकी ,आनंद देते रहिये ,लेते रहिये ,यही तो जीवन है/आभार

    Dr.Bhoopendra Singh
    T.R.S.College,REWA 486001
    Madhya Pradesh INDIA

  14. हम साथ साथ चल रहे हैं जी।
    एक आलसी टीप – कॉपी पेस्ट 🙂
    आप तो भारतीय पर्यटन के राजदूत बन गए हैं, क्‍या बढिया वर्णन और फोटोज लगाए हैं। आनन्‍द आया।

  15. अहा ! मजा आ गया..

    आज तक हम तो गोवा नहीं गये आज आपके साथ गोवा तक जरुर पहुँच गये.. वो भी कोंकण रेल्वे से… मजा आ गया..

    अब तो जाना ही पड़ेगा जल्दी ही..

  16. आप से ईर्ष्या हो रही है। अफसोस भी कि इस सफर में आप के साथ क्यों न हुआ।

  17. पाबला जी ,आप को इस जीवंत यात्रा विवरण के लिए बहुत बहुत बधाई.चित्रों ने रोमांचित कर दिया /भेजने के लिए धन्यवाद.

  18. बिटिया व उसका पति अभी हाल में ही कार से हैदराबाद से नवीं मुम्बई व यहाँ से गोवा गए थे। मैं तो उनसे फोटो मिलने की राह ही देख रही थी। आपने फोटो दिखा कर अनुग्रहित किया। सच में इस रास्ते पर प्रकृति की छटा निराली ही है।
    घुघूती बासूती

  19. wah, chiplunkar jee ke sirname k pichhe ke is tahtya ke baare me to idea hi nai tha.

    shukriyaa jankari badhaane ke liye..

  20. संजीत महाराष्ट्र के लोग अपना सरनेम अपने गाँव के नाम से रखते हैं । शायद यह ब्रांहण करते हैं ।

  21. दुसरो के फोटो इस्तेमाल करने के लिए परमिशन लेना जरुरी है.

  22. Sir प्रस्तुत चित्र क्या आप के खींचे हुए नहीं हैं? वैसे जिसके भी हैं Photography कमाल की है।

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