वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में

पुलिस वालों के साथ कारों की दौड़ सरीखे फिल्मी अंदाज़ के बाद दूसरे ग्रह की सैर का आनंद लेने से वंचित हो हम परभनी शहर से रवाना हो 15 जुलाई की सुबह 8 बजे दाखिल हुए गुरूद्वारों का शहर कहलाते नांदेड़ शहर में।

पिछले कई वर्षों से यह इच्छा मन में थी कि नांदेड़ के विश्व प्रसिद्ध (सचखंड) हुजूर साहिब गुरूद्वारे के दर्शन किए जाए। परिवार के सभी सदस्य यहाँ अपना शीश नवा चुके थे, केवल मैं ही बचा हुआ था।

सबसे पहले हम पहुँचे यात्री निवास। जहाँ रजिस्टर में आवश्यक जानकारियाँ दर्ज करवा हमें एक कमरे की चाबी मिली। तरो-ताज़ा हो हम पिता-पुत्री चल पड़े थोड़ी ही दूर स्थित सचखंड गुरूद्वारे की ओर।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»
(पथ प्रदर्शक पटल)
(यात्री निवास का बाहरी दृश्य)
(यात्री निवास का एक अन्य दृश्य)

 

इसके पहले बिटिया ने मुझे सूचित किया था कि गुरूद्वारा प्रबंधन द्वारा बस सेवा द्वारा श्रद्धालुओं को नांदेड़ स्थित गुरूद्वारों के दर्शन करवाए जाते हैं।

पतासाजी किए जाने पर सूचना मिली कि यह बस सेवा दिन में केवल एक बारही है सुबह 9 बजे। हम इससे चूक चुके थे।

सचखंड गुरूद्वारे का ऐतिहासिक मह्त्व बताता पटल, क्लिक कर वृहद रूप में देखिए
(हुजूर साहिब-सचखंड गुरूद्वारे का ऐतिहासिक मह्त्व बताता पटल, क्लिक कर वृहद रूप में देखिए)
दर्शन ड्योढ़ी
दर्शन ड्योढ़ी
सचखंड साहब
सचखंड साहब
सचखंड साहब परिसर
सचखंड साहब परिसर
सचखंड साहब परिसर
सचखंड साहब परिसर

 

किसी भी धर्मस्थल पर मुझे उसकी स्थापत्य कला, प्रबंधन व वातावरण अधिक आकर्षित करता है। इस बार भी सम्पूर्ण गुरूद्वारा परिसर व आसपास का हाल देख मुझसे तारीफ़ किए बिना रहा नहीं गया। तात्कालिक प्रतिक्रिया यही थी कि यह तो अम्रृतसर के स्वर्ण मंदिर से भी अधिक भव्य है।

बावली

बावली

गुरुद्वारा

 

पारंपरिक तरीके से दर्शन कर, शीश नवा हमने पूरे परिसर का जायजा लिया। कैमरा जल जाने के कारण अधिकतर फोटो व वीडियो नहीं हैं। कुछ अन्य चित्र यहाँ देखे जा सकते हैं।

सचखंड परिसर

सचखंड परिसर

परिसर स्वच्छता

परिसर स्वच्छता

 

चकाचक परिसर को देख कार्यरत सफ़ाई कर्मियों की ओर ध्यान गया तो महसूस हुआ कि साफ़-सफ़ाई का कार्य शायद किसी बाहरी संस्था को दिया गया है।

 

लंगर साहब

लंगर साहब

 

लंगर स्थल पर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर, तृप्त हो हम लौट आए यात्री निवास के अपने कमरे में। लंगर स्थल पर लगातार होने वाली श्रमसाध्य साफ़-सफ़ाई के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग देख विज्ञान के चमत्कार को नमन करने को भी मन कर आया।

सांध्यकाल में पुन: हम थे परिसर में। कुछ ही दूरी पर एक अन्य गुरूद्वारे की जानकारी मिली। हम चल पड़े उस ओर्। अंधेरा गहराने लगा था। राह में दिख रही तोड़फोड़ से आभास हुआ कि कतिपत मानव बसाहट को हटाया जा रहा है। बाद में हमें बताया गया कि सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया के तहत गुरूद्वारा प्रबंधन उचित मुआवजा दे संबंधित व्यक्तियों को अन्यत्र पुनर्स्थापित किया जा रहा है।

यात्री निवास के पास ही स्थित बड़ी सी दुकानों वाली इमारत में से छोटे से चलताऊ खान-पान केन्द्र में एक बुज़ुर्ग को बर्तन धोते देख मैंने उनसे पूछ लिया कि यहाँ कब से काम कर रहे हैं आप? उसने लगभग तमकते हुए कहा कि ‘कब से मतलब? मेरी पाँचवी पीढ़ी चल रही इस शहर में और यह मेरी दुकान है’ मैं सकपका गया। बाद में पता चला कि सचखंड गुरूद्वारा परिसर के विस्तार अंतर्गत उन्हें मुआवजे के तौर पर यह दुकान मिली है। मूल तौर पर वह और वहाँ की व्यवस्था देख रहे उनके पुत्र-पौत्र दक्षिण भारतीय हैं लेकिन सिक्ख वेशभूषा धारण कर फर्राटे की पंजाबी बोलते हैं! जहाँ तक मैं देख सका पूरे शहर में ऐसी ही स्थिति दिखी।

गणेश टाकीज के पास ही स्थित गोविन्द बाग गुरूद्वारा परिसर एक धार्मिक स्थल से अधिक एक भव्य, व्यव्स्थित, लम्बा चौड़ा बाग लगा। गुरूद्वारे का मुख्य द्वार बंद था, लोग जैसे कि सैर-सपाटे के लिए ही आते जा रहे हों।

दिन भर के थके हम पिता-पुत्री ने रात को, इस यात्रा के दौरान लिए गए सभी चित्रों, वीडियो का आनंद लिया और निद्रा देवी के हवाले हो गए अगले दिन, 16 जुलाई को प्रारंभ होने वाली यात्रा के अंतिम चरण की योजना बनाते।

लेकिन नियति में क्या है कोई नहीं जानता। क्योंकि धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई थी हमने

अपडेट@10-11 Dec 2010: अनिता कुमार जी ने जिज्ञासा प्रकट की है कि बम्बई से कितने घंटे लगते हैं, क्या यात्री निवास में पहले से बुकिंग करवानी पड़ती है?

भारत भर से नांदेड़ यात्रा हेतु इस लिंक का अवलोकन किया जा सकता है। इसके अलावा बुकिंग आदि के लिए हुज़ूर साहिब की आधिकारिक वेबसाईट भी देखी जा सकती है.

वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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36 Thoughts to “वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में”

  1. शिवम् मिश्रा


    बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

  2. ललित शर्मा

    आपके साथ हमने भी हजूर साहब के दर्शन कर मत्था टेक लिया।
    अब कभी कार्यक्रम बनाना है यहां जाने का।

    नि्यति के आगे किसी का बस नहीं चलता,सही कहा है आपने। ध्रुव सत्य है।

    आभार

  3. Rahul Singh

    वाहे गुरु.

  4. ajit gupta

    क्‍या भव्‍यता है? आनन्‍द आ गया।

  5. अन्तर सोहिल

    प्रबंधन, वातावरण और रखरखाव में गुरुद्वारों से सीख लेनी चाहिये, भारत के अन्य धार्मिक स्थलों को

    सचखंड हुजूर साहिब के दर्शन करवाने के लिये आभार

    अच्छा लग रहा है, अब आपके घर में सब स्वस्थ होंगे और सब सामान्य हो गया होगा।

    प्रणाम

  6. शिवम् मिश्रा

    सुबह वार्ता लगाने की जल्दी में एक सरसरी निगाह डाली थी पोस्ट पर …. अब पूरी पढ़ी है !
    चलिए इस बहाने हम ने भी दर्शन कर लिए !
    अब जल्दी आगे की कथा सुनाइए ! इंतज़ार रहेगा … अपना ख्याल रखें !

  7. shikha varshney

    आपके साथ हमने भी माथा टेक लिया हजूर साहब पर सुन्दर तस्वीरें हैं .

  8. anitakumar

    नांदेड के बारे में सुना भर ही था, अब आप की पोस्ट पढ़ने के बाद जाके देखने की भी इच्छा बलवती हो गयी है। बम्बई से कितने घंटे लगते हैं, क्या यात्री निवास में पहले से बुकिंग करवानी पड़ती है?
    गुरुप्रीत की तबियत कैसी है?

  9. P.N. Subramanian

    वास्तव में बड़ा ही भव्य है. आभार.

  10. vinay

    जो अन्तर सोहिल जी ने कहा,बिलकुल आपका लेख पड़ते समय यही बात मेरे मन में आ रही थी,आपको स्वस्थ जानकर अच्छा लगा ।

  11. एस.एम.मासूम

    सुंदर प्रस्तुति

  12. डॉ टी एस दराल

    फिर से यात्रा वर्णन शुरू हुआ । यानि आप अपनी दुनिया में लौट आए । शुभकामनायें ।

  13. बी एस पाबला

    @ All

    जीवन सामान्यावस्था की ओर अग्रसर है
    गुरूप्रीत भी अब पहले से बेहतर है

    मंगलकामनाओं हेतु आप सभी का आभार

  14. बी एस पाबला

    @ anitakumar तथा नांदेड़ भ्रमण के इच्छुक अन्य

    आप यह लिंक देखें

  15. राज भाटिय़ा

    बहुत सुंदर यात्रा विवरण, धन्यवाद

  16. dhiru singh {धीरू सिंह}

    वाहे गुरु दा खालसा बाहे गुरु दी फ़तह
    सब ठीक हो रहा जान कर सन्तोष प्राप्त हुआ .

  17. Suresh Chiplunkar

    चित्र देखकर, विवरण पढ़कर तथा सचखण्ड साहिब में साफ़-सफ़ाई देखकर मन अभिभूत हुआ…। नांदेड़ के बारे में पढ़ा-सुना था, लेकिन आपके कैमरे से थोड़ा अलग ही लगा… 🙂 🙂 ऐसे घुमाते-फ़िराते रहिये हमें…

  18. Kajal Kumar

    वाह इतने शुभ स्थानों की यात्रा एक ही पोस्ट में करवा दी आपने

  19. बी एस पाबला

    संस्मरण के अंत में दो जानकारियाँ जोड़ी गई हैं।
    आप सभी के सूचनार्थ ,यह टिप्पणी

  20. बी एस पाबला

    From Feedburner:

    इस यात्रा के लिए विशेष बधाई पाबला जी .चित्रों को भी आप ने एक साढ़े हुए चितेरे की तरह उकेरा है ,फिर बधाई.

    – Suresh Yadav

  21. शरद कोकास

    आज ही यात्रा से लौटकर आने के बाद आपकी पोस्ट देखी , अभी पढी नही है लेकिन आपकी उप्स्थिति देखकर अच्छा लगा .. कहते हैं ना शो मस्ट गो ऑन.. ।

  22. निर्मला कपिला

    इतनी सुन्दर तस्वीरें देख कर तो अपना मन भी वहाँ जाने का हो रहा है। बधाई।

  23. Harman

    nice pics..

    mere blog par bhi kabhi aaiye waqt nikal kar..
    Lyrics Mantra

  24. Anupam Singh

    आस्था, भव्यता और सौंदर्य, नांदेड साहिब का जैसा वर्णन आपने किया है, इच्छा हो रही है कि एक बार मै भी मत्था टेक आउं। पोस्ट पढकर शांति महसूस कर रहा हूं।

    1. बी एस पाबला

      Smile
      श्रद्धा भाव शांति देता है

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