चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब

घुघूती बासूती जी से मुलाकात की सोच रखी थी सतीश पंचम जी से मुलाकात के बाद। यह भी मन में था कि समय रहा तो विवेक रस्तोगी जी से भी मुलाकात कर ली जाए। लेकिन कहा जाता है ना कि जो सोचो वह कभी होता है क्या?

उस सोमवार 5 जुलाई को जब तैयार होने लगा तो मामाजी का प्रश्न उछला -कहाँ की तैयारी है? मैंने बताया तो मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि टीवी नहीं देखते ना इसलिए जानते नहीं हो कि आज तो भारत बंद है और यूँ अनजान शहर में तुम गाड़ी लेकर जायोगे?

सिवाय दिन भर घर में टीवी पर हुड़दंग की खबरें देखते रहने के कुछ नहीं कर सका। बैठे बैठे अलबेला खत्री, विवेक रस्तोगी, रिज़वाना कश्यप, दिनेशराय द्विवेदी, कृष्ण कुमार मिश्रा, अजय कुमार झा, ललित शर्मा, नीरज जाट, प्रतिभा कटियार, इंदु पुरी, अनिता कुमार, नीरज गोस्वामी से बातें ही कर लीं।

पुणे की संभावनायों पर विचारकरते हुए देवाशीष, अभिषेक ओझासे सम्पर्क करने की असफल कोशिश हुई, बाद में पता चला कि दोनों देश से बाहर हैं।

6 जुलाई को सुबह से इतनी बारिश हो रही थी कि लगा प्रलय आ गई!

दोपहर के भोजन के बाद कोई और चारा ना देख जो नींद के नशे में डूबे तो सीधे शाम 7 बजे आंखें खुलीं। कूद-फांद कर बाथरूम में घुसे और वो तबीयत से नहाए कि आधी रात होते होते बुखार के साथ हाथ-पैरों में दर्द शुरू हो गया। मामी जी ने गरम-सरद का व्याख्यान देते हुए नई पीढ़ी की जम कर खबर ले डाली। मुम्बई में फैले मलेरिया को भी जी भर लानतें भेजी गईं। अपन भी भीगी बिल्ली बने दुबके रहे।

अगले दिन 7 जुलाई की सुबह का मैंने रेल आरक्षण करवाया हुया था, गोवा जाने के लिए। बहुत नाम सुना था कोंकण रेल का। दोस्तों ने सलाह दी थी कि अपनी गाड़ी से नहीं जाना है तो रेल से जाईए, बहुत आनंद आयेगा प्राकृतिक नज़ारों का। लेकिन बुखार की वजह से कार्यक्रम गड़बड़ा गया। तुरंत उस आरक्षण को रद्द कर मैंने 9 जुलाई का नया आरक्षण करवा लिया।

सड़क मार्ग से की गई इस यात्रा की संक्षिप्त जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें»

 

7 की दोपहर तक बुखार से मुक्ति मिल चुकी थी, शायद मेरी ही किसी गलती की चेतावनी दी थी शरीर ने। शाम को अंधेरा घिर आने के बाद, टहलते हुए पास ही के एक मॉल तक बिटिया ले गयी। उस मॉल का नाम था लूट-मार… ओह लूट-मार नहीं लूट-मार्ट। वह अपनी पसंद की वस्तुएँ छांटती रही, अपन घूम घूम कर आंखों की ताकत बढ़ाते रहे! कभी कभी भ्रम होता था कि किसी गाँव में तो नहीं। वही पुराने फैशन में बंडी कहे जाने जैसी बिना बाँहों की बनियान और धारीदार कच्छों जैसे सादे रंग वाले घुटने तक जाते कच्छे ओह सॉरी… बरमूदा! और कोई कपड़ा तन पर नहीं! लोग कहते होंगे कि फैशन बदल गया लेकिन मुझे लगा कि केवल कपड़ों का रंग बदल गया। पास की इमारत के कॉरीडोर में ढ़ाबोली, दही-बड़े, आईसक्रीम से मुँह का स्वाद बदलने की कोशिश की और घर लौट आए।

8 जुलाई को तो मैंने ठान लिया था कि यहाँ तो बारिश होती ही रहेगी। चाहे जो हो जाए अब तो कोई रोके या टोके निकल पड़ना है गाड़ी ले कर जो होगा देखा जाएगा। बिटिया को तैयार होने का निर्देश दे हम भी पहुँच गए अपनी मारूति वैन के पास कि जो कुछ अव्यव्स्थित है उसे ठीक कर लिया जाए। लेकिन यह क्या! गाड़ी तो स्टार्ट ही नहीं हो रही!! कई बार इग्नीशन की चाबी घुमाई, गैस-पेट्रोल विकल्प का स्विच ऊपर-नीचे कर लिया, गैस की जाँच की, पेट्रोल में कोशिश कर ली। सब कुछ दुरूस्त लेकिन नतीजा कुछ नहीं 🙂

जाँच के दूसरे चरण में ध्यानपूर्वक सुना तो पता चला कि गैस, पेट्रोल के सोलेनॉईड ही काम नहीं कर रहे। आखिर ईंधन भी तो चाहिए ना इंजिन को। टटोलना शुरू किया तो तारों के कुछ टुकड़े हाथ में आ गए! अरे ये क्या हुआ!? पता चला कि चूहों ने अपने दांतों की जाँच करने के लिए इन तारों का प्रयोग किया था और वे सफल रहे इन्हें काटने में 🙂

पास ही के बाज़ार से नई तारें लेकर मैंने अगले एक घंटे में तारों की पूरी प्रणाली दुरूस्त कर जब इग्नीशन की चाबी घुमाई तो ऐसा लगा कोई रूक रूक कर दरवाज़ा खटखटा रहा। लीजिए, हमने इतनी बार इग्नीशन का सहारा लिया था कि बैटरी ज़वाब दे चुकी। तब तक दोपहर के डेढ़ बज चुके थे। उमस के मारे बुरा हाल था। पसीने से लथपथ जब वापस पंखे के नीचे बैठा तो भोजनोपरांत दुबारा शाम के 4 बजे ही पुन: सक्रिय हुआ।

बैटरी को चार्जिंग के लिए, उत्सव चौक से कुछ आगे की मोटर मैकेनिक दुकानों के बीच एक्साईड प्यॉईंट पर गया तो स्पष्ट कर दिया गया कि बैटरी वापस मिलेगी 10 तारीख शनिवार को, क्योंकि शुक्रवार को दुकानें बंद रह्ती हैं। सातह गए ममेरे भाई ने सुझाव दिया कि घर के पास वाली पुणे हाईवे पर एक और दुकान पर पतासाजी कर ली जाए। वहाँ उनके स्टाफ ने एक मशीन पर जाँच कर दिखा-बता दिया कि बैटरी बिल्कुल ठीक है, आप अपनी गाड़ी किसी मैकेनिक को दिखा दीजिए। ममेरे भाई ने मेरी ओर ऐसे देखा जैसे मैं परले सिरे का अहमक हूँ।

बैटरी को वैसे ही लेकर लौटते हुए भाई ने बड़े ही नरम स्वर में कहा कि भईया जिद नहीं करते, आपकी गाड़ी में ही समस्या होगी, उसे मैकेनिक को दिखला देते हैं। लेकिन मैं जानता था कि मेरी उस वैन में कोई खराबी नहीं है, आखिर अपने बच्चों जैसे उसके हर रूख से वाकिफ़ था। मैंने एक बार फिर बैटरी वापस लगाई, इग्नीशन घुमाया और नतीजा फिर वही। मैंने बैटरी निकाली, वापस दुकान पहुँचा और उनकी सलाह को अनसुना करते हुए सीधे उसे चार्जिंग में लगा देने को कह लौट आया।

अगली सुबह, 9 जुलाई को साढ़े छह बजे पनवेल स्टेशन से मुम्बई-मडगांव जनशताब्दी 2051 पर सवार हो हमें रवाना होना था गोवा के लिए। गोवा में रूकने का कोई कार्यक्रम नहीं था। हम तो केवल रेल-मार्ग से आने जाने का आनंद लेना चाह्ते थे।

अब पता नहीं आपको मेरी इस व्यथा-कथा में आनंद आ रहा है कि नहीं? ये तो आप नीचे टिप्पणी कर के ही बताएँगे. हालांकि इसके बाद सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि का आम भी था।

चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
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जून-जुलाई 2010 में की गई इस यात्रा का संस्मरण 20 भागों में लिखा गया है. जिसकी कड़ियों का क्रम निम्नांकित है.
मनचाही कड़ी पर क्लिक कर उस लेख को पढ़ा जा सकता है

  1. सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना
  2. ‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला
  3. ‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’
  4. खौफ़नाक आवाजों के बीच, हमने राह भटक कर गुजारी वह भयानक अंधेरी रात
  5. शिरड़ी वाले साईं बाबा के दर से लौटा मैं एक सवाली
  6. नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई
  7. आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई
  8. रविवार का दिन और अपने घर में, सफेद घर वाले सतीश पंचम जी से मुलाकात
  9. चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब
  10. सुरेश चिपलूनकर से हंसी ठठ्ठे के साथ कोंकण रेल्वे की अविस्मरणीय यात्रा और रत्नागिरि के आम
  11. बैतूल की गाड़ी, विश्व की पहली स्काई-बस, घर छोड़ आई पंजाबिन युवती और गोवा का समुद्री तट
  12. सुनहरी बीयर, खूबसूरत चेहरे, मोटर साईकिल टैक्सियाँ और गोवा की रंगीनी
  13. लुढ़कती मारूति वैन और ये बदमाशी नहीं चलेगी, कहाँ हो डार्लिंग?
  14. घुघूती बासूती जी से मुलाकात
  15. ‘बिग बॉस’ से आमना-सामना, ममता जी की हड़बड़ाहट, आधी रात की माफ़ी और ‘जादू’गिरी हुई छू-मंतर
  16. नीरज गोस्वामी का सत्यानाश, Kshama की निराशा और शेरे-पंजाब में पैंट खींचती वो दोनों…
  17. आधी रात को पुलिस गश्ती जीप ने पीछा करते हुए दौड़ाया
  18. किसी दूसरे ग्रह की सैर करने से चूके हम!
  19. वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई, गुरूद्वारों के शहर नांदेड़ में
  20. धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

… और फिर अंत में मौत के मुँह से बचकर, फिर हाज़िर हूँ आपके बीच

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28 Thoughts to “चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब”

  1. शिवम् मिश्रा

    क्या बात कर दी सर जी …………….आप आनद कि बात करते है यहाँ इंतज़ार रहता है आपकी पोस्ट का ! अब तो अगली पोस्ट में ही पता चलेगा गोवा की मस्ती के बारे में !

  2. Sonal Rastogi

    बहुत मज़ा आ रहा है ,आप सैर करवाते रहिये

  3. राज भाटिय़ा

    मजेदार जी, लेकिन यह बेटरी चार्ज करवाने की जरुरत ही नही थी, अगर आप की बेटरी सही है ओर कुछ डाऊन है तो एक बार कार को स्टारट कर के एक घंटा कम से कम चलाये, वो खुद चार्ज हो जाती है, मेरे साथ एक बार हुआ था, मकेनिक के कहने से मैने ऎसा ही किया,लेकिन आप की यात्रा है मस्त, मजा आ रहा है जी

  4. चन्द्र कुमार सोनी

    गोवा बहुत ही अच्छी और रोमांटिक जगह हैं.
    आप वहाँ मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा एन्जॉय — मौजमस्ती करेंगे.
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  5. अजय कुमार झा

    sir …..mujhe to shuru se hee saaree poston ko naye sire se padhna hai …,main is rochak yaatraa ke harek kshan kaa maja lena chaahtaa hoon , chaliye kal parson kee chutti kaa pooraa faayda uthaya jaayega . sir abhi baraha install nahin kiya hai isliye aise teepna pada …

  6. H P SHARMA

    aisee koi kathaa nahee hai
    jismai thodee vyathaa nahee hai
    dhoodhe jo aaanand vyathaa mai
    sharmaa aisaa gadhaa nahee hai

    ham ye soch rahe hai ki jab aap jaise khilaade ko ye gaadiyaa itnaa naach naachaa letee hai phir ham jaise anaadee ke saath jo hotaa hai use kya kahenge.

  7. डॉ महेश सिन्हा

    गड्डी जान्दी है परानदा लाल नी

  8. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    जयपुर के लिए निकल रहा हूँ, वापस लौट कर पढ़ूंगा।

  9. Arvind Mishra

    ई आपकी गड्डी शुरू से ही परेशां किये हुए है –

  10. ताऊ रामपुरिया

    बहुत सुंदर वृतांत, गणेश चतुर्थी एवम ईद की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

  11. vinay

    बहुत व्यथित कर दिया,आपकी गड्डी ने ।

  12. अन्तर सोहिल

    बहुत मजा आ रहा है जी
    आप बस लिखते रहिये

    प्रणाम

  13. dhiru singh {धीरू सिंह}

    बहुत अच्छे और सस्ते कच्छे .लिखते रहिये मज़ा आ रहा है

  14. POOJA...

    sahi sir ji… mama ji daant padi, koi baat nahi… gaddi ne dhokha diya, koi gal nahi… yatra to acchhi thi na… bas aur ki chahiye… thank you so much for writting againa "mazedaar post"

  15. ajit gupta

    आनन्‍द आ रहा है जी आपतो इसे चालू रखो। आपके जीवट को प्रणाम। वैसे मॉल का चित्रण खूब पसन्‍द आया।

  16. काजल कुमार Kajal Kumar

    सुंदर विवरण के लिए धन्यवाद.

  17. अविनाश वाचस्पति

    आप एक बार मोबाइल की बैटरी तो ट्राई करते। जरूर सफल होते।

  18. super-bazar

    बेसब्री से इंतजार हम भी यायावर प्रेमी है ओ गडडी जाने दो000000

  19. Sanjeet Tripathi

    are sahab to ghughuti ji se mukkalat oops i mean mulakat hui ya nahi ye to aapne bataya hi nai ji….

    matlab is post ke vakfe me to nahi hi hui isiliye ullekh nahi hai, shayad aage hui ho…

    lekin ek baat ka to sabse jabardast afsos mujhe hai pata nahi aapko hai ya nahi ya agle ko hai ya nahi, vo ye ki aapki mulakat devashish sahab se nahi ho saki….. jaruri thi mere nazariye se yah mulakat aur is mulakat me hone wali batein…bt filhal only afsos…..

    आंखों की ताकत badhaane wali har jagah pe eye tonic lene ke liye mujhe jarur yaad kiya kariye, chashmaa mujhe lagaa hai, aapko nahi 😉

  20. Anupam Singh

    गोवा वाली सफर के लिए अब दूसरे पोस्ट का इंतजार करना होगा! पाबला जी मजा आ रहा है, बस आप लिखते रहें, हम आपकी यात्रा का मजा ले रहे हैं।

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU

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