सपने में दिखी जगह पर पहुँच गए अचानक

दशकों से साथ रहे मेरे एक मित्र अक्सर कहते हैं कि दुनिया में जो अनोखा होता है तेरे साथ ही होता है. और कई बातों को उनहोंने सामने रख कर अपने कथन को सही साबित किया. ऐसा ही कुछ इस बार भी हुया.

पिछले सप्ताह पुणे में रह रही बिटिया ने फोन पर संपर्क कर उसे दिखे एक अजीब से स्वप्न का ज़िक्र किया. लब्बोलुआब यह था कि छत्तीसगढ़ में बालोद के आसपास कोई भव्य मंदिर बन रहा हनुमान जी का और कोई धवल वस्त्रधारी उस मंदिर निर्माण के लिए सहयोग मांग रहा.

अब मैं चकराया. ये क्या बात हुई? मेरा यह मानना रहा है कि सपने जैसी चीज और कुछ नहीं बस कंप्यूटर के स्क्रीन सेवर हैं. अवचेतन मष्तिस्क में वर्तमान की जो खुशियाँ, चिंताएं होती हैं, अतीत की यादें होती है, भविष्य की जो आशंकाएं, कल्पनाएँ, योजनायें होती हैं, वही हमें स्वप्न के रूप में दिखता है.

जैसा कुछ बिटिया ने बताया, उससे याद आया कि पिछले वर्ष हम मित्रों का समूह बालोद क्षेत्र के सिया देवी मंदिर गया था. शायद वहां के चित्र उसे याद हों. लेकिन उसने सिरे से इस बात को नकार दिया.

अब मैंने पूछताछ शुरू की. स्थानीय निवासियों ने ऐसे किसी मंदिर की जानकारी से इनकार किया. फिर रूख किया मैंने अपने ड्राईवर का» उसने तुरंत बताया कि बालोद के लोहारा क्षेत्र में पाटेश्वर धाम नामक एक स्थान पर भव्य मंदिर बन रहा है वर्षों से. शायद वही हो

उसे साथ ले चलने का इरादा बनाए मैंने बुधवार, 24 अप्रैल का दिन चुना. ज़वाब मिला, गाँव में शादी है नहीं जा सकूंगा. मैंने अपने चार पहिया वाहन के GPS निर्देशित उपकरण को डौंडी लोहारा के लिए निर्देश दिए और गाड़ी दौड़ पड़ी सुबह सुबह.

11 उपग्रहों से जुड़ चुके जीपीएस नेविगेटर ने राजनांदगांव हो कर जाना बेहतर समझा था. लेकिन मुझे बालोद हो कर जाना ठीक लगा क्योंकि आधी सदी से अधिक समय का साथ है उन सड़कों का. वापस आना हो तो भले ही राजनांदगांव से होते आयें।

गुंडरदेही के मशहूर मूँग बड़ों व जलेबी का नाश्ता कर बालोद की ओर जाने वाली राह पर पलाश के फूलों से लदे वृक्षों तथा बादलों के कारण सुहाने हो चुके मौसम संग हम जा पहुँचे बालोद। सेटेलाईट आधारित पथप्रदर्शक ने ना तो हमें कहीं गाड़ी धीमी करने का मौका दिया और ना ही किसी से राह पूछने का।

पलाश

BS Pabla

लोहारा की ओर जाती सड़क पर मुझे याद आया कि इसी क्षेत्र में एक ‘कुकुरदेव मंदिर’ है। जिसे मैंने स्कूली दिनों में देखा था। कुकुरदेव मंदिर याने कि कुत्ते का मंदिर! बचपन में भले ही अज़ीब लगी हो बात लेकिन अब जीते जागते मानवों का मंदिर देख लगता है जिस श्वान प्रेमी ने वह मंदिर बनवाया उसने कतई गलत नहीं किया।

किवदंती वही है जो हर काल में बताई जाती है। एक स्वामीभक्त कुत्ते पर शक कर गुस्से में उसके मालिक ने मार डाला और वास्तविकता पता चलने पर पश्चाताप स्वरूप उसकी याद में यह मंदिर बनवा दिया।

सर्च इंजिन गूगल ने जानकारी दी कि यह मंदिर खपरी गाँव में है जो इसी सड़क पर बालोद से 6 किलोमीटर दूर है। चलते वाहन से वह गाँव कहीं नज़र नहीं आया और हम बढ़ते चले गये।

लोहारा में पता चला कि कथित पाटेश्वर धाम, पश्चिम की ओर करीब 30 किलोमीटर दूर है।

Balak Das
संचालक राम बालक दास महात्यागी

कोलतार की सड़क सुनसान दिख रही थी। पतझड़ के बाद गर्म मौसम में घने जंगलों के बीच अगर कोई उत्साही साथी होता तो अवश्य फुसफुसाता ‘यह नक्सलियोँ का इलाका है’। अंत मे एक स्थान पर पाटेश्वर धाम का स्वागत द्वार दिखा। उधर मुड़ते ही उपग्रहों ने हमारी पक्की सड़क को पहचानने से इंकार कर दिया, बस यही दिखाते रहे कि हमारा अक्षांश, देशांश क्या है।

करीब 8 किलोमीटर पहाड़ों पर चढ़ते जाने के बाद रंग बिरंगे ध्वजों वाला परिसर नज़र आया। यही था पाटेश्वर धाम।

एक दिन बाद ही हनुमान जयंती की तैयारियाँ जोरों पर दिखीं। खड़ाऊँ पहने, धवल वस्त्रों में एक गोरे से सज्जन, स्थानीय श्रद्धालुयों को निर्देश देते दिखे तो मैंने उन्हें अभिवादन कर अपने आने का प्रयोजन बताया।

वे थे उस धाम के सर्वेसर्वा, राम बालक दास महात्यागी. उन्होंने कुछ बातें पूछीं और अपने साथ चल रहे सहयोगी को आवश्यक निर्देश दे एक श्रद्धालु की पुकार पर चले गये।

जो जानकारी मिली उसके अनुसार श्री पाटेश्वर धाम की स्थापना को करीब 40 वर्ष हो रहे हैं और यहाँ 20 करोड़ से भी अधिक की लागत से 108 फीट ऊंचाई एवं 108 फीट चौड़ाई क्षेत्र में श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

पिछले वर्ष, 2012 अपैल को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत भी पाटेश्वरधाम आये थे तथा धर्म सभा व संत सम्मेलन में भाग लेते हुए रात्रि विश्राम भी किया था.

निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर - पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर – पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर - पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर – पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर - पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर – पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर - पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर – पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर - पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
निर्माणाधीन पंचमुखी हनुमान मंदिर – पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
हनुमान जयंती की तैयारियाँ - पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
हनुमान जयंती की तैयारियाँ – पाटेश्वर धाम, लोहारा, दुर्ग
ऎसी काया, तो सीढ़ियाँ चढ़ना हमें नहीं भाया
ऎसी काया, तो सीढ़ियाँ चढ़ना हमें नहीं भाया

अब मैंने जायजा लेना शुरू किया परिसर का. बड़े बड़े लाल पत्थरों को काट तराश कर जमीन को गहरा कर जो निर्माण किया जा रहा वह तो अभी सतह तक ही पहुँच पाया है. पास ही की पहाडी पर एक आराधना स्थल है जहाँ जाने के लिए चौड़ी सीढ़ियाँ बनाई गई हैं लेकिन अपनी काया और स्थल की ऊँचाई देख वहां जाने का इरादा त्यागना पडा.

कुछ अधिक जानकारी लेने के लिए बिटिया को संपर्क करने की कोशिश में पता चला कि कोई भी मोबाईल नेटवर्क काम नहीं करता वहाँ. हो सकता है यही वो जगह हो जो उसने अपने सपने में देखी हो. मैंने दान स्वरूप कुछ राशि दे रसीद ली और राजनांदगाँव के रास्ते रवाना हो गया वापस भिलाई के लिए.

हाल ही में बन कर तैयार हुई फोरलेन के टोल प्लाज़ा पर जब 73 रूपये मांगे गए तो महसूस हुया कि ये कुछ ज़्यादा ही हैं आसपास के बाक़ी वसूली केन्द्रों से!

अब पता नहीं जिस बिटिया ने कभी इस मंदिर के बारे में कभी पढ़ा सुना नहीं, हम या हमारा परिवार कभी उस इलाके में नहीं गया, उस बिटिया को सपने में दिखा स्थल यही निर्माणाधीन हनुमान मंदिर था या कोई और होगा. ये तो वह इन चित्रों को देख कर ही बता सकेगी. वैसे, तलाश अभी भी जारी है.

लेकिन कुल घटनाक्रम पर हैरान होते हुए मेरे मित्र ने एक बार फिर अपनी वही बात दोहरा दी जिसे वे दशकों से कहते चले आ रहे.

आप क्या कहते हैं?

सपने में दिखी जगह पर पहुँच गए अचानक
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53 Thoughts to “सपने में दिखी जगह पर पहुँच गए अचानक”

  1. कुछ भी रहा हो लेकिन बिटिया का सपना साकार हुआ यह देख बहुत अच्छा लगा ….

    पाटेश्वर धाम का बहुत सुन्दर चित्रण …यात्रा की सजीव तस्वीरें मन मोह रही है ….हनुमान जयंती के सुअवसर पर सुन्दर प्रस्तुति से दर्शन कराने हेतु आभार … शुभकामनायें …

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU

  2. जीवंत चित्रण …. ऐसी बातें बड़ी अद्भुत होती हैं
    अच्छा लगा आज हनुमान जयंती के अवसर पर ये पोस्ट पढना ….
    टिप्पणीकर्ता Dr. Monica Sharrma ने हाल ही में लिखा है: हे राम…बेटियों के वंदन और मानमर्दन का कैसा खेलMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart

  3. shikha varshney

    सपने तो इस तरह के शायद बहुतों को आते हैं कई बार हमें भी . उत्सुकता तो होती है,पर फिर उसे सपना समझ के ही भूल जाते हैं. उनका अर्थ जानने और फिर उसे खोजने वाले आप जैसे विरले ही होते हैं.
    सुन्दर मंदिर निर्माण की फोटो . और एक रोमांचक वर्णन सुनाने का आभार.

    1. बी एस पाबला

      Smile

  4. हमने अभी तक जीपीएस का उपयोग नहीं किया है, सोच रहे हैं कि एन्ड्रायड फ़ोन ले लें..

    ऐसी कई घटनाएँ जो आँखों के सामने घट रही होती हैं.. कई बार ऐसा लगता है कि मैं इन घटनाओं को दुबारा देख रहा हूँ और उन घटनाओं से मैं जुड़ा हुआ महसूस करता हूँ, कोई तकलीफ़ नहीं होती है, ऐसा लगता है कि यह सब तो मैं पहले से ही जानता हूँ ।
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: आधुनिक श्रम में पिछड़ते कर्मचारीMy Profile

    1. बी एस पाबला

      iPhone
      जी पी एस आजकल अधिकतर फोन्स में रहता है

      घटनायों को पहले देखे जाने का आभास तो होता है कई बार

  5. खैर! आप बिटिया के निर्देश पर खोजते खोजते हो आए। इस बहाने एक खूबसूरत यात्रा हो गई।
    टिप्पणीकर्ता दिनेशराय द्विवेदी ने हाल ही में लिखा है: ओ……..! सड़कवासी राम! …My Profile

    1. बी एस पाबला

      Approve

  6. अंजु(अनु) चौधरी

    कभी कभी सपनों में देखा हुआ सच भी होता है ….ऐसा हमने भी सुना है ……..यात्रा जारी रखे

    1. बी एस पाबला

      .Heart

  7. प्रकृति के अजीबोगरीब रहस्‍य हैं ..
    सबको समझ पाना नामुमकिन है !!

    1. बी एस पाबला

      Approve.

  8. that’s very nice pabla ji. The dream came true…

    1. बी एस पाबला

      Smile.

  9. धीरू सिंह

    एक और यात्रा आपके माध्यम से हो गई । बहुत दिनों बाद आपसे मुलाक़ात हुई आगे निरन्तरता बनी रहेगी

    1. बी एस पाबला

      Yes-Sir

  10. बिटिया के सपनों की खोज इतनी शिद्दत से एक पिता ही कर सकते हैं … वैसे आपभी लाभ में रहे एक नयी जगह देखने को मिल गयी 🙂

    1. बी एस पाबला

      Happy

  11. vivek sao

    बिटिया को शुक्रिया आपकी बिटिया की वज़ह से हमें एक मनोराम स्थल को देखने और जानने का मौका मिला और हनुमान जयंती पर उनका वृहत मंदिर देखने को मिला.

  12. vivek sao

    बिटिया को शुक्रिया जिनके सपने की वज़ह से हमें एक मनोराम स्थल को देखने और जानने का मौका मिला और हनुमान जयंती पर उनका वृहत मंदिर देखने को मिला.

    1. बी एस पाबला

      Heart..

  13. anupam

    बेहतरीन लेखन, फोटोग्राफ का बेजोड मिश्रण। पाबला जी कुछ जगहों में मुझे भी महसूस हुआ है कि इसे मैने पहले देखा है, जबकि मैं वहां पहली बार गया था।

    1. बी एस पाबला

      :THANK-YOU

  14. bahut sunder vivaran…

    1. बी एस पाबला

      :Heart

  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (26-04-2013) जय जय श्री हनुमान : चर्चा मंच १२२६ में “मयंक का कोना” पर भी है!
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

  16. आपने बिटिया के स्वप्न को साकार कर दिखाया..

    1. बी एस पाबला

      Smile
      कोशिश की, सफल हुए

  17. बहुत सुन्दर प्रस्तुति | दार्शनिक स्थलों का जीवंत चित्रण | सपना सच होने की हार्दिक बधाई | जय श्री राम | बजरंगबली महाराज की जय |

    टिप्पणीकर्ता Tushar Raj Rastogi ने हाल ही में लिखा है: डर लगता हैMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Pleasure

  18. जीवन का विज्ञानं भी अनोखा है। कई बार अनजानी जगहे और लोग जाने पहचाने लगते हैं , जो भी हो , बिटिया के सपने से एक भव्य मंदिर की जानकारी मिली !

    1. बी एस पाबला

      :Approve

  19. जब भी आप की ओर आना हुआ तो कोशिश यही रहेगी कि एक यात्रा हमारी भी हो आपके साथ इसी भव्य मंदिर की … I-Wish
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: महान फिल्म निर्देशक सत्यजित रे की २१ वीं पुण्यतिथि पर विशेषMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart
      आपका स्वागत है

  20. घुमक्कड़ी जिंदाबाद.
    टिप्पणीकर्ता Dr. Zakir Ali Rajnish ने हाल ही में लिखा है: …वोट से इतिहास बनाने का समय है।My Profile

    1. बी एस पाबला

      Cool

  21. श्रीकांत सुखात्मे

    ७३ रुपये आपने दिये उसका ऊपाय यह है कि टोल प्लाजा के पहले ठाकुर टोला गांव से मुड्ने से वो रास्ता सोमनी गांव में निकलता है। जिससे टोल प्लाजा बाई पास हो जाता।वैसे आपके द्वारा दी गयी जानकारी बहुत ही रोचक है।

    1. बी एस पाबला

      Delighted
      बढ़िया जुगाड़

  22. जिस तरह जीपीएस से मिले सिगनलों से आप गंतव्य तक पहूंचते हैं उसी प्रकार पृकृति या ईश्वर से भी हमें सिगनल्स मिलते हैं जिन्हें हर कोई नही पकड पाता. कुछ लोग उन्हें जाग्रत या स्वप्नावस्था में पकड लेते हैं, कुछ उनको याद रखने की क्षमता रखते हैं कुछ भूल जाते हैं.

    बिटिया की अपनी अतिंद्रीय क्षमता काफ़ी विकसित लगती है. यदि इस तरफ़ वो प्रयास करे तो यह क्षमता और भी दूर के सिगनल पकड सकती है, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.
    टिप्पणीकर्ता ताऊ रामपुरिया ने हाल ही में लिखा है: तेरा नाम क्या है रे कालिया? : गब्बर सिंहMy Profile

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU_

  23. anu

    बढ़िया वृतांत….
    सुन्दर तस्वीरें…….
    हमें भी लगता है कि सपने में जो जगहें दिखती हैं वो होती हैं कही न कहीं…..
    हम भी खोजेंगे अब…

    सादर
    अनु
    टिप्पणीकर्ता anu ने हाल ही में लिखा है: डायरी का मुड़ा पन्ना ….My Profile

    1. बी एस पाबला

      _Heart_

  24. राजेंद्र कुमार

    बिटिया को शुक्रिया जिनके सपने की वज़ह से हमें एक मनोराम स्थल को देखने और जानने का मौका मिला,आपके द्वारा दी गयी जानकारी बहुत ही रोचक है

    1. बी एस पाबला

      .Pleasure

  25. विधना की करामात. शायद आने वाले वर्षों में विज्ञान इसका हल निकाल सके.
    टिप्पणीकर्ता indian citizen ने हाल ही में लिखा है: पुलिस का रवैयाMy Profile

    1. बी एस पाबला

      I-Wish

  26. श्रीमान जी,सादर प्रणाम |
    अवचेतन मन त्रिकाल दर्शी हैं ,और सर्वशक्तिमान हैं ,इस पर कोई आश्चर्य वाली बात नही हैं कई बहन ने जो सपने में देखा हुबहू वैसा ही नजारा आपने हकीकत में देखा ,मेरा ये वाला लेख देखियेंगा ,जिसमे मैंने इस संदर्भ में थोडा लिखा हैं http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/09/23/%E0%A4%86%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80/
    टिप्पणीकर्ता अजय ने हाल ही में लिखा है: जिन्दंगी भाग-१My Profile

  27. Ek Achhi Rachna Ka Jikra Aapke Dwara. Is Tarah Ki Rachnayen Badi Hi Rochak Hoti Hai.

    Thank You For Sharing.

  28. अद्भुत….बिटिया को तस्वीर दिखाई कि यहि जगह देखी थी क्या उसने??
    टिप्पणीकर्ता समीर लाल “भूतपूर्व स्टार टिपिण्णीकार” ने हाल ही में लिखा है: नारे और भाषण लिखवा लो- नारे और भाषण की दुकानMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Approve
      जी यही थी

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