जब हाथी के नीचे आते बचे हम

उस दिन जब मैंने बजाज स्कूटर के नशा उतार देने वाली बात बताई तो कई पुराने मित्रों ने उन सब किस्सों को लिखने के लिए उकसाया जिन्हें आज भी ठहाकों के साथ याद किया जाता है.

वाकई में अब याद आता है कि हम अविवाहित मित्रों की अलग अलग टोली कितना हुडदंग करती थी और मौत के मुंह में जाने लायक ना जाने कितने ही ऐसे काम किये जिसकी खबर हमारे घरवालों को आज तक नहीं है.

वह उमर ही ऐसी होती है जब तमाम बंदिशें तोड़ देने को मना करता है, भले ही उनसे आगे चल नुकसान हो.

भयंकर किस्म की बातें फिर कभी. आज एक ऐसी मासूम सी बात बताता हूँ जिसे सुन कर एकाएक कोई यकीन ही नहीं करता. यकीन कर भी ले तो दसियों सवाल उछल जाते हैं मेरे ध्यान और ख्यालों पर.

बात है सन 1987 की. तब हमारे नियोक्ता भिलाई इस्पात संयत्र की ओर से अपने कार्मिकों को वाहन खरीदने के लिए ऋण की सुविधा दी जाती थी. मैंने भी तब खरीदी काइनेटिक हौंडा.

उस समय वह तकनीक और स्टाइल का एक नायाब नमूना थी. मेरे साथ ही नौकरी में आने वाले मित्र विकास किरवई ने भी इच्छा जाहिर की इसे खरीदने की.

ऑफिस से निकल ऋण के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई के लिए हम सिविक सेंटर पहुंचे सुपर बाज़ार. काम ख़त्म होने पर मैं उसे ले आया घर और फिर चाय नाश्ते के बाद मैं चल पड़ा उसे पॉवर हाउस बस स्टैंड तक छोड़ने के लिए.

अंधेरा छा चुका था. फ़ॉरेस्ट एवेन्यू पर उतई तिराहे से धीरे धीरे काइनेटिक होंडा चलाते मैं पीछे बैठे विकास से बातें भी करता रहा. कई मौके पर पीछे की ओर चेहरा भी कर लेता. मैं पहुँच चुका था उस जगह जहाँ मैत्री बाग़ से आती सड़क जुडती है.

किसी बात पर ठहाका लगाते मैंने गर्दन पीछे मोड़ एक गाली दी और वापस सामने चेहरा करते ही हैरान रह गया यह देख कर कि बीच सड़क पर एक पेड़ खड़ा है. पलक झपकते ही महसूस हुआ कि हवा से उस पेड़ के पत्ते भी झूम रहे.

मैंने अविश्वास भरी आवाज़ में पीछे बैठे विकास को पुकारा. निगाह उधर जाते ही वह भी चिल्लाया -अबे ये पेड़ कहाँ से आ गया सड़क पर! ब्रेक मार ब्रेक मार.

… और ब्रेक मार जब तक गाड़ी खड़ी हो, हमारी आँखें अँधेरे का अभ्यस्त हो चुकीं. तब सामने आया असल मामला.

हाथी के नीचे
ऐसा ही कुछ सीन होगा तब

हुआ यह था कि जो सड़क, मुख्य सड़क से आ कर जुड़ रही वहां से एक बड़े हाथी की पीठ पर किसी कटे पेड़ की डालियाँ इक्कट्ठा कर महावत घर जा रहा. चमकीले हरे पत्ते तो समझ आ गए लेकिन शाम का सुरमई रंग और हाथी का रंग एक हो जाने से मतिभ्रम हुआ कि पेड़ है सड़क पर. 

वो तो हम ही जानते हैं कि रोकी गई काइनेटिक हौंडा को जमीन पर टिके दो पैरों के सहारे संभाले हुए जब चंद क़दमों की दूरी से वह हाथी गुजरता दिख रहा तो हमारे दिल कैसे धाड़ धाड़ बज रहे थे.

आज भी मित्र विकास का कहना है कि अगर समय पर ब्रेक ना लगाई होती तो यह पक्का था कि चलती गाड़ी पर सवार हम उस हाथी के नीचे पैरों के बीच से या तो निकल जाते या कुचले जाते.

है ना मजेदार?

© बी एस पाबला

जब हाथी के नीचे आते बचे हम
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12 thoughts on “जब हाथी के नीचे आते बचे हम

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 21-05-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा – 1982 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU
      थैंक्यू दिलबाग जी

  2. बच गए गुरू!!!
    टिप्पणीकर्ता दिनेशराय द्विवेदी ने हाल ही में लिखा है: क़ायदा-ए-ज़मानत ज़ारी रहेMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Heart
      बच तो गए थे लेकिन अब हंसी आती है वो क्षण याद कर

  3. suresh dubey

    आप की इस लेख की मुझे जानकारी थी इसे में अपने बहुत से मित्रो को सुना chuka हूँ की गाय भेस से तो कोई भी टकरा लेता हे मुझे गर्व हे की मेरा दोस्त हाथी से टकराने का दम रखता हे

    1. बी एस पाबला

      Pleasure
      उस समय तो दम निकल गया था

  4. हाहाहाहा!! अच्छा है कि आप कभी सड़क पर चलती दो मोटरसाइकिलों (बस!) के बीच से नही निकले या एक आँख वाली बस के करीब से… 😛 ऐसा कुछ मेरे साथ हुआ है और बचपन में तो मैंने अपनी दरियादिली का परिचय देते हुए एक नयी नयी साइकिल सीखती लड़की की साइकिल को अपने उपर से गुज़र जाने दिया था. 😀
    टिप्पणीकर्ता Rashmi Swaroop ने हाल ही में लिखा है: मम्मी का पहला हेयर कट..My Profile

    1. बी एस पाबला

      Delighted
      इत्ती दरियादिली ठीक नहीं

  5. chander kumar soni

    “खतरों के खिलाड़ी” तो असल में आप हो.
    टीवी वाले पता नहीं कैसे कैसे नकली से बन्दे लाते हैं.
    अच्छा लगा पढ़कर.
    थैंक्स.
    चन्द्र कुमार सोनी.

    1. बी एस पाबला

      Heart
      दिल खुश कर दित्ता सोनी जी

  6. कई बार पुरानी यादें याद आकर बहुत रुलाती भी है और हंसा भी देती है. जाने वाले चले जाते हैं और रह जाती है केवल यादें और केवल यादें.

  7. जनाब , पाबला साहब आपके इस लेख को पढ़कर रोंगटे खड़े हो गये. जानकर अच्छा लगा की आप लोगो ने समझ से काम लिया… अल्लाह की रहमत आप पर थी. .. खुदा आपके साथ था… .. . . Smile
    टिप्पणीकर्ता Abdul Ahmad ने हाल ही में लिखा है: Learn Tally In Hindi – टैली सीखे हिंदी में। Advance LevelMy Profile

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