23 साल, वो डरावनी रात और पहाड़ों पर अकेली लड़की से मुलाक़ात

तारीख तो याद नहीं लेकिन वो जनवरी 1989 के आखिरी दिन ही थे. पल पल बदलते मौसम ने आखिरकार ठान ही लिया था कि ठण्ड को अब जाना ही होगा.

ऎसी ही एक शाम चाय की चुस्कियां लेते घुमक्कड़ी के शौकीन मन में इच्छा हुई कि बहुत अरसा हो गया चाचा जी के परिवार से मिले हुए क्यों ना अचानक पहुँच कर चौंकाया जाए उन्हें

चाचा जी का स्थानान्तरण मध्यप्रदेश के रीवा में हुए 5 वर्ष हो चुके थे और रीवा है भिलाई से करीब 650 किलोमीटर.

उन दिनों हमारे पास थी नई नई आई कायनेटिक होंडा. बस मन किया और कार्यक्रम बन गया अगली सुबह निकल चलने का.

एक चादर और कुछ नाश्ता रख श्रीमती जी और ढाई वर्षीया बिटिया के साथ हम चल दिए रायपुर, बिलासपुर, अमरकंटक की ओर.

उन दिनों फोरलेन आदि का चलन नहीं था वैसे संकरे से हाईवे पर उतना ट्रैफिक भी नहीं होता था. फ़िल्म तेज़ाब के ‘…एक, दो, तीन..’ गीत की धूम मची हुई थी. नन्ही बिटिया अपनी मस्ती में कैडबरी, फाईव स्टार खाते हुए वही गीत गुनगुनाती कभी आगे कभी पीछे खड़े होते बैठते मज़े लेती रही.

kinetic honda

बिलासपुर के बहुत बाद, राह के एक महत्वपूर्ण पड़ाव केंवची पर चाय-पकौड़ों का नाश्ता कर बड़े आराम से हम जा पहुंचे अमरकंटक. वापसी में इस हिल स्टेशननुमा स्थान के भ्रमण का इरादा पहले ही बना लिया गया था सो बढ़ गए शहडोल की ओर जाती राह पर.

लेकिन दोपहर 3 बजे अमरकंटक से निकलते ही यह अहसास हो गया कि मौसम ने अपना मिजाज़ फिर एक बार बदल लिया है. तीखी ठंडी हवा ने चलती गाड़ी में हम तीनों को बचाव की मुद्रा अपनाने पर मज़बूर कर दिया. ऊपर से मुसीबत यह हुई कि पोडकी गाँव के बाद लंबे पहाड़ी रास्ते का पुनर्निमाण हो रहा था और ऐसे ही एक स्थान पर जब लंबे डायवर्सन की राह पकड़ी तो भटक गए. उधर शाम, रात में बदलने को तैयार हो चुकी थी.

धूल भरी अनजान कच्ची राह ख़त्म ही नहीं हो रही थी. बार बार नक़्शे को निकाल कर हैड लाईट की रोशनी में देखते हुए सही राह तलाशने की असफल कोशिश होती रही. जंगल इतना घना था कि आसमान के तारे भी नहीं दिख रहे थे. ठण्ड से बचने का जुगाड़ यही किया जा सका कि पिकनिक के नाम पर लाई गई इकलौती चादर को कम्बल सरीखे लपेट लिया जाए. लेकिन उसे संभालूं कि गाड़ी चलाऊँ? फिर श्रीमती जी के जूड़े की सुईयां काम आईं जिन्हें सेफ्टीपिन सरीखे उपयोग कर चादर का एक लबादा सा बनाया गया.

उस डरावनी रात के वक्त कच्ची राह से जब एक पक्की सड़क पर आ पाए पहाड़ की उस ठण्ड ने कंपकंपा दिया. मन कर रहा था कि कोई ठिकाना मिले तो रात यहीं गुजार दी जाए. लेकिन वहां तो दूर दूर तक ना आदम ना आदमजात!

उन ऊंचे पहाड़ों पर एकाएक दूर एक आग की रोशनी दिखाई. भय की एक लहर दौड़ी, रोमांच भी हो आया. धीरे धीरे रोशनी के नज़दीक पहुंचते गए और जब मामला साफ़ हुआ तो पता चला कि वह सड़क किनारे किसी झोपड़ी में जल रही दिए की एक लौ है.

डरते डरते झोपड़ी के सामने गाड़ी रोकी तो एक रस्सी की खाट दिखी. बिटिया ने चहक कर पूछा ‘डैडी! यहीं सोयेंगे क्या?‘ तब तक कहीं से एक बारीक आवाज़ गूंजी ‘हाँ बाबू जी, कच्छू चाही का?’ साथ ही ‘अंदर’ से निकल कर आई एक कन्या! मैं हैरानी से उसे देख रहा था कि इस बियाबान में यह लड़की! अकेली!! कहीं कोई भुतहा कहानी साकार तो नहीं होने जा रही या अभी कोई गीत गूँजने वाला है ‘…कहीं दीप जले कहीं दिल…’

लेकिन उसने सारी बात बताई कि उस झोपड़ी के पीछे ही उसका गाँव है और वह यह चाय का ‘होटल’ चलाती है. लकड़ी की आग पर बनी चाय के जब बड़े बड़े गिलास थामे तो कुछ चैन मिला ठण्ड से. हमने वहीं रात गुजारने की बात की तो उसने हँसते हुए कहा कि कुछ किलोमीटर बाद ही पहाड़ ख़त्म हो जाएगा और फिर शहडोल मिलेगा वहीं रूकिये कहाँ बच्चे के साथ टूटी खाट पर रात गुजारेंगे.

बात सही भी थी. हम उसका शुक्रिया अदा कर बढे लेकिन आगे मिला किरार घाट का उतराव. घुप्प अँधेरे में एक ऐसा ट्रक मिला जो बुरी तरह ओवरलोडेड था. हिम्मत ही नहीं हुई उसे ओवरटेक करने की. बस उसके पीछे पीछे लगे रहे धीमी गति से. आज उस ट्रक वाले को धन्यवाद कहने को मन करता है कि वो ना होता तो निश्चित ही उस लंबे से अनजान बल खाते पहाड़ी घाट पर अंधेरी रात में हम किसी खड्ड में जा गिरे होते और नामोनिशान ना मिलता हमारा

मैदानी इलाका आया तो अनूपपुर की कोयला खदानों से गुजरते शहडोल को तलाशते बढे जा रहे थे कि दिखा एक कस्बा, बुढार और नज़र आया नया नया बना चमचमाता होटल राजा. हिम्मत बची नहीं थी और आगे जाने की सो सीधे काउंटर पर पहुंचे, कमरे की चाबी ली, खाने का ऑर्डर दिया, नीचे ही दुकान से ली व्हिस्की की आधी बोतल और फिर जब आंख खुली तो सुबह के 9 बज चुके थे.

बुढार से रवाना हो, शहडोल से गुजर कर आगे बढे तो ब्योहारी पहुंचते भूख लग आई. गहमागहमी वाले रीवा सीधी तिराहे पर चूल्हे और चिल्ल्हर संभालती बुजुर्ग महिला ने ऐसे अंडे की भुर्जी और परांठे खिलाए कि आज भी स्वाद जहन में बना हुआ है.

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निर्माणाधीन बाणसागर बाँध की पृष्ठभूमि में हमारी बिटिया

आगे फिर पक्की सडक के बदले कच्चे रास्ते का डायवर्सन मिला. निगाह में आया कि एक भारी भरकम काम चल रहा किसी बाँध का. वह था बाणसागर प्रोजेक्ट.

धूल भरी राह ख़त्म हुई तो दिखा गोविन्दगढ़ का किला. वही जगह जो रीवा महाराजा की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी. मन तो बहुत किया इसका जायजा लेने का लेकिन अब तो बस रीवा पहुँचने की जल्दी मची थी सो चल दिए आगे.

पारिवारिक बातों को छोड़ दिया जाए तो चाचा जी की दो सलाहों पर अमल किया गया. 40 किलोमीटर दूर चित्रकूट पहाड़ियों के मुहाने पर तमसा नदी पर बने भारत के तेइसवें सबसे ऊँचे (130 मीटर) चचाई जलप्रपात का नज़ारा सचमुच अद्भुत था. हालांकि पानी बहुत कम था लेकिन अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि वह नियाग्रा समान तो दिखता ही होगा उफान के दिनों में

chachai waterfall
विशालकाय चचाई जलप्रपात की पृष्ठभूमि में हमारी बिटिया और मेरा चचेरा भाई

 

उस विशालकाय गहरे बियाबान में कहीं कोई अदृश्य चरवाहा जो बाँसुरी बजा रहा था उसे सुनने के लिए किसी डीजे की ज़रूरत नहीं थी और उसकी वह सुरीली धुन आज भी कानों में गूंजती है.

वहीं मौजूद है केवटी जलप्रपात जहां सुकून से हम सबने नहाया

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केवटी जलप्रपात में हमारी बिटिया

वापस लौटते हुए सिरमौर के व्यस्त चौराहे पर खोए की जलेबियाँ और मुंगोड़े जितने पेट में समा सकते थे आने दिए और अन्धेरा होने के पहले हो लिए वापस

दूसरे दिन था पड़ाव रीवा-सतना मार्ग पर स्थित राम वन. जहाँ धार्मिक वातावरण में मन लगाने के साथ साथ एक नायाब पुरातत्व संग्रहालय के भी दर्शन किए. जहाँ शताब्दियों पुरानी भारतीय कला कृतियाँ संग्रहित हैं. अब तो इस स्थान की वेबसाईट भी बन चुकी

ram van bspabla
राम वन में हम दोनों

रीवा से भिलाई लौटना हुआ उसी राह लेकिन जब अचानक मार बदमाशों ने पीछा कर हमें रोका तो क्या हुआ यह बताते हैं अगली बार

आपने कभी नियाग्रा जैसा वाटरफाल देखा है भारत में?

23 साल, वो डरावनी रात और पहाड़ों पर अकेली लड़की से मुलाक़ात
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44 Thoughts to “23 साल, वो डरावनी रात और पहाड़ों पर अकेली लड़की से मुलाक़ात”

  1. shikha varshney

    बाप रे ६५० किलोमीटर वो भी कायनेटिक होंडा से..गज़ब हिम्मत है.

    1. Amazed
      लगता है आपने वो 16 कड़ियों वाले महाराष्ट्र-गोवा वाले संस्मरण नहीं पढ़े जिसके अंत में हमने आग से धधकती वैन से कूद कर जान बचाई थी!

  2. शिखा जी से सहमत … साथ साथ गजब कि स्मरण शक्ति है जी आपकी … इतनी पुरानी बात है पर आज भी सिलसिलेवार लिख डाली आपने … जय हो महाराज !
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: एक अमर जवान को हमारा सलाम … जय हिंद … जय हिंद की सेना !!My Profile

    1. Smile

      अभी कोई उमर थोड़े ही हुई है स्मरण शक्ति कमजोर होने की

      1. सहमत
        टिप्पणीकर्ता Viral Trivedi ने हाल ही में लिखा है: आज तक न्यूज़ चेनल और महात्मा गांधी का वधMy Profile

  3. कमाल कर दिया! और बड़े खुशनसीब हैं कि आपकी श्रीमती जी इतनी दूर जाने को तैयार हो गयीं.
    यहाँ तो अब मोटरसाइकिल से ५० किमी भी नहीं जाने देतीं. 🙁
    टिप्पणीकर्ता indian citizen ने हाल ही में लिखा है: घोटालों पर घोटाले हैं,My Profile

    1. Pleasure
      कहीं बंदा गायब ना हो जाए यह सोच कर साथ चल देती थीं वो

  4. बडे कमाल के हो आप पाबला जी।
    बगैर गियर की गाडी से इतना लंबा सफर तक लिया और वो भी पूरे परिवार के साथ।
    आगे क्‍या हुआ…. इसका इंतजार रहेगा।
    टिप्पणीकर्ता अतुल श्रीवास्‍तव ने हाल ही में लिखा है: अध्‍ययन यात्रा बनाम दारू पार्टी…. !!!!!My Profile

    1. Smile
      वक्त वक्त की बात है

  5. वाह क्या बात है

  6. सच में कमाल किया आपने तो … दुपहिये पर ऐसा और इतना लम्बा सफ़र .
    टिप्पणीकर्ता Dr. Monika Sharma ने हाल ही में लिखा है: भावनात्मक लगाव या अलगाव …!My Profile

    1. Pleasure
      यही तो जीवन के कुछ रोमांच होते हैं

  7. अचानकमार अभ्यारण्य की घुमक्कडी का ब्यौरा बाद में पढ़ लेंगे पर अभी इस पोस्ट के लिए कुछ टाइटिल सूझ रहे हैं 🙂

    उनके आने के रोमांच से झोपड़ी में चिराग जल उट्ठे 🙂

    काइनेटिक होंडा सवार के आगे पहाड़ के हौसले पस्त 🙂

    जोड़ीदार के जोड़े की पिन वाली चादर से ठण्ड भी लस्त 🙂

    अंधेरे में चाय को अधरों से सुड़कते हुए सोने की तलाश 🙂

    ओवरलोडेड ट्रक और ओवरलोडेड होंडा से घाटियाँ गहरा गईं 🙂

    अंधेरों और पहाड़ ने घबरा कर उसे मैदान तक जाने दिया 🙂

    पाबला से मिलते ही व्हिस्की की बरसों पुरानी मुराद पूरी हुई 🙂

    पहले दुकान से ली फिर उसके साथ एक लंबीS रात गुजारी 🙂

    1. Overjoy

      मोगांबो खुश हुआ
      (अब वो कहीं भी हो)

  8. जिगरा चाहिये अनजाने रास्तों पर बिना बताये निकल जाने के लिये…रोचक विवरण
    टिप्पणीकर्ता प्रवीण पाण्डेय ने हाल ही में लिखा है: सुकरात संग, मॉल मेंMy Profile

    1. Approve
      मैं खुद भी कभी मुड़ कर देखता हूँ तो अचंभित होता हूँ
      लेकिन फिर कोई ना कोई ऐसे क्षण जीने की इच्छा होती है

  9. अजब गजब लिखा है आपने अपनी यात्रा के बारे में, ऐसी ही कई यादें हमारे भी जहन में हैं, खैर आपके ब्लॉग से बहुत सारे अच्छे लिंक भी मिल जाते हैं, और सामान्य ज्ञान बढ़ जाता है।
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: देखा पापा टीवी पर विज्ञापन देखकर IDBI Life Childsurance Plan लेने का नतीजा, “लास्ट मूमेंट पर डेफ़िनेटली पैसा कम पड़ेगा”।My Profile

    1. Heart
      अपनी ही राम कहानी कहते जाने से क्या फायदा!
      और वैसे भी बिना चित्रों और बाहरी – उपयोगी लिंक्स के लेखन रूखा सा लगता है

  10. जवाब नहीं पाबला जी आपका! परिवार सहित इतनी लम्बी यात्रा करना, वह भी कायनेटिक होंडा से, हर किसी के बस की बात नहीं है।

    अत्यन्त रोचक यात्रा संस्मरण!
    टिप्पणीकर्ता जी.के. अवधिया ने हाल ही में लिखा है: सामान्य ज्ञान प्रश्नावली – 286 (General Knowledge Quiz in Hindi)My Profile

    1. THANK-YOU
      वैसे आप हैं कहाँ
      टिप्पणी भ्रमण से दूर हैं क्या?

  11. अन्तर सोहिल

    पढ लो दोनों जाट मुसाफिरों (नीरज जाट और संदीप पंवार)
    काम आयेंगी ये बातें
    और खडे होकर एक पैर पटककर सैल्यूट मारो, सरदार जी को

    प्रणाम

    1. Yes-Sir
      फिलहाल तो यह काम मैं कर लेता हूँ

  12. पाबला जी ,जिंदाबाद ! आज कल बच्चों को डराते बहुत हो ..:-)))
    और मेरा ताज़ा लेख भी नही दिखाते ….खैर !
    खुश और स्वस्थ रहो !

    1. Thinking
      अभी तो मैंने कुछ किया नहीं सर जी
      और
      ताज़ा लेख दिखाना ना दिखाना तो आप खुद ही तय करते हैं

  13. .अनोखा और डरावना माहौल लगता हैं की आज भी पीछा कर रहा हैं … ? भारत का नायग्राफाल देखने का इरादा जोर मार रहा हैं ..कृपया जल्दी करे !!!!!!!!
    टिप्पणीकर्ता darshan kour dhanoe ने हाल ही में लिखा है: प्यार और दिल्लगी *****My Profile

  14. अब लोगो में वो दिलेरी क्यूँ नहीं……आजकल शायद ही कोई पत्नी और बच्ची सहित बाइक से इतनी लम्बी यात्रा को सोचे पर फिर ऐसे रोमांचकारी अनुभव से भी तो महरूम रहते हैं.

    1. Sad

      ऐसा नहीं है कि अब दिलेरी नहीं लोगों में
      हाँ यह ज़रूर है कि जीवन की आपाधापी ओढ़ ली है अधिकतर ने

      वैसे सपत्नीक हमने करीब एक लाख किलोमीटर तो बाईक पर शहर से बाहर गुजारे हैं 😀

  15. Dr T S Daral

    रहस्यमयी शीर्षक पढ़कर ही रोमांचित हो गए ।
    सफ़र तो और भी खतरनाक निकला ।
    चार बदमाशों से कैसे निपटा गया , यह जानने की उत्सुकता रहेगी ।

    1. Heart
      आगे आगे देखिए होता है क्या

  16. अरे वाह!! आप तो हमारे इलाके में, मेरे पहुंचने के पहले ही जा चुके हैं 🙂 और रामवन भी. यानि सतना भी आये थे 🙂 क्या बात है. बहुत रोचक संस्मरण है. आगे की कथा जल्दी सुनाएं. बड़े रोमांचक मोड़ पर छोड़ दिया है अपने 🙂 🙂
    टिप्पणीकर्ता वन्दना अवस्थी दुबे ने हाल ही में लिखा है: सूरजप्रकाश जी, किताबें और रश्मि…..My Profile

    1. Smile
      बहुत ज़ल्द होगी वापसी की बातें

  17. आप तो बडे खतरनाक पर्यटक निकले। खुद ही नहीं परिवार को भी खतरे में डाल रहे हैं!!!!!!
    टिप्पणीकर्ता चंद्र मौलेश्वर ने हाल ही में लिखा है: ज़रा सोचियेMy Profile

  18. प्रेरक
    टिप्पणीकर्ता रौशन जसवाल ने हाल ही में लिखा है: गांधी जीMy Profile

  19. anitakumar

    पढ़ते हुए ऐसा लग रहा था जैसे नटवरलाल गा रहा हो ‘…इक किस्सा सुनो’ और हम सब सांस रोके सुन रहे हों ‘आगे क्या हुआ?’

    स्कूटर पर एक लाख किलोमीटर सफ़र कर चुके हैं? धन्य हैं जी। कभी लेह भी गये थे क्या स्कूटर पर?
    अभी तो खैर उन डाकुओं वाले किस्से का इंतजार है।

  20. AK Tiwari

    मै सोचा था आप की हिन्दी साइट में कुछ हिन्दी से संबधित ज्ञान की बातें मिंलेगी , पंरतु आप तो अपनें व्यक्तिगत चर्चाओं का पिटारा ही खेाल दिया, आपको एक पटल मिला है आप इसमें एैसी बाते रखें जिससे लोगो को कोई जानकारी प्राप्त हो जैसे षिक्षा, तकनिक, चिकित्सा , कानून आदि से सबंधित । क्षमा किजीएगा मै आपकी आलोचना नही कर रहा हू परंतु मैं एैसा इसलिए कह रहा हॅ कि मै भी आपके प्रदेष का हूॅ और कोई हमारे किस्से से हमारा परिहास करें, एैसा अवसर न दे तो बेहतर है ।

    1. Smile
      तिवारी जी
      यकीन कीजिए मैं आपकी इस आलोचना से कतई व्यथित नहीं
      बल्कि मुस्कुरा रहा हूँ
      क्योंकि ऐसा लगता है कि आपने गंभीरता से इस वेबसाईट और मेरे प्रोफाईल को नहीं देखा

      आप यदि इसी वेबसाईट के ऊपरी हिस्से में दिए गए
      इंटरनेट से आमदनी
      कम्प्यूटर सुरक्षा
      कल की दुनिया
      ब्लॉग बुख़ार
      जैसे लिंक पर क्लिक कर मिले सैकड़ों ब्लॉग लेख देख लेते तो ऐसा नहीं कहते

      आप यदि मेरे गूगल प्रोफाईल पर क्लिक कर
      हजारों जानकारियों वाले हिंदी Blogs In Media
      शोध व सर्वे
      हिन्दी ब्लॉगर्स
      ब्लॉग गर्व
      ब्लॉग मंच
      जैसी मेरे नियंत्रनाधीन वेबसाईट्स का भ्रमण कर लेते तो ऐसा नहीं कहते

      आप यदि मेरे अप्रत्यक्ष सहयोग वाली
      हजारों लेखों वाली
      अदालत
      तीसराखंभा
      जैसी वेबसाईट्स देख लेते तो ऐसा नहीं कहते

      आप यदि इंटरनेट पर भ्रमण कर हजारों ब्लॉग लेखकों को दी गई मेरी निस्वार्थ तकनीकी सहायता की जानकारी देख लेते तो ऐसा नहीं कहते

      मुझे किंचित हैरानी है कि आपको इस ब्लॉग लेख में
      भिलाई-रींवा का के मार्ग का मानचित्र
      अमरकंटक के हिल स्टेशन होने
      अनूपपुर में कोयला खदाने होने
      किरार घाट की भयावहता
      बाणसागर प्रोजेक्ट, गोबिंदगढ़ का किला, पुरातत्व संग्रहालय, जलप्रपातों की उंचाई बतलाती लिंक्स
      जैसी जानकारियाँ बेमानी लगीं

      मैं मुस्कुरा रहा हूँ क्योंकि मुझे मालूम है कि बेमेतरा में रिलायंस नेटवर्क का उपयोग करते आप ऐसा नहीं कहते

      स्नेह बनाए रखिएगा
      कभी भिलाई आए तो मिलिएगा

  21. इतना ही कहूंगा एक रोमांचक यात्रा का ज़िक्र जो सुन्दर कहानी बन गयी
    टिप्पणीकर्ता Krishna ने हाल ही में लिखा है: कुछ नुकूश लाया हूं, इस कायनात से….कृष्णMy Profile

    1. बी एस पाबला

      THANK-YOU ..

  22. आपका सफरनामा हमेशा जबरदस्त होता है। आपके तो किसी भी पेज को खोल कर पढ़ लिया जाए….देखी-अनदेखी जगह आंख के आगे साकार हो जाता है। ये भी बड़े भाग्य की बात है कि आपकी श्रीमती जी आपके जुनून में साथ देती थीं…भले ही आपके गायब होने के डर से ही….

  23. हिम्मती पाबलाजी
    टिप्पणीकर्ता धीरु ने हाल ही में लिखा है: लौट के आना ही होगाMy Profile

    1. बी एस पाबला

      Pleasure

  24. SUJEET MAURYA

    it’s very horrorful story.

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