आखिर अनिता कुमार जी से मुलाकात हो ही गई

मौत से बचकर जब हम नवी मुम्बई अपने मामाजी के निवास पर पहुँचे तो 30 जून की मध्य रात्रि के पौने एक बज चुके थे। पूरा परिवार ही हमारी प्रतीक्षा कर रहा था। थोड़ी देर के धमाल के बाद मैं तो चले गया सोने लेकिन बिटिया ने रौनक लगाए रखी। जब मेरी आँख खुली तो 1 जुलाई की दोपहर होने को आई थी। टॉफ़ियों का व्यापारी कुछ शुरूआती उलझनों के बाद आखिर मुझे पहचान ही गया और उसने इतने मासूम प्रश्न दागे कि कई बार बगलें झांकने की नौबत आई।…

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नासिक हाईवे पर कीड़े-मकौड़ों सी मौत मरते बचे हम और पहुँचना हुया नवी मुम्बई

शिरड़ी में साईं बाबा के दर्शनों के बाद, विचलित मन में कई सवाल लिए नासिक की ओर जाने के इरादे से जब मैंने शहर से बाहर, मनमाड़ की ओर सड़क का रूख किया तो दोपहर के दो बज चुके थे। करीब छह किलोमीटर बाद ही नासिक के लिए बाईं ओर मुड़ने का निर्देश, बोर्ड पर दिखा। सड़क खराब थी कुछेक किलोमीटर तक। भूख लगनी शुरू हुई तो राह में एक स्थान पर आलू के परांठे और चाय का आनंद लिया गया। वहीं से नवी मुंबई में बेटों-पोते-पोतियों के साथ निवासरत…

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आज उस लड़की का जनमदिन है

अपनी मुंबई यात्रा के संस्मरण की आखिरी पोस्ट में जब मैंने कहा था कि अब अगली पोस्ट में बताउँगा, प्लेटफार्म पर हुई बातों के सन्दर्भ में, द्विवेदी जी के सौजन्य से, अब जिनसे अक्सर घंटों बात होती है, वो कौन थी! तो विष्णु बैरागी जी ने टिप्पणी की थी कि बातों वाली के बारे में जानने की जिज्ञासा आपने जगा दी है। जल्‍दी पूरी कीजिएगा। कई ऐसे कारण हुए कि देर होते चले गयी। अभी जब लिखने बैठा तो याद आया कि आज, 18 मार्च को उनका जन्मदिन है। जैसा…

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