ब्लॉगिंग में गर्व करने लायक कुछ है भी?

हिंदी ब्लॉगिंग में पांच वर्ष का समय बिताने के दौरान मेरा सामना ऐसे कई बयानों से हुआ कि यहाँ कुछ नहीं रखा हुआ, ऐरे गैरे आते हैं गालीगलौज बकवास कर चले जाते हैं, अपनी ढपली अपना राग है सबका, भाषाकीसमझनहीं, बात करने का सलीकानहीं, कोई किसी को लतियारहाहै कोई किसी धार्मिकआस्थाकोचोट पहुंचा रहा, कोई निंदारस में डूबा हुआ है, लोग कुंठाएंनिकालरहे हैं, कुत्ते–बिल्लीसाझगड़ा करते हैं… वगैरह वगैरह! बात किसी हद तक सही दिखती भी थी क्योंकि लोकप्रिय एग्रीगेटर पर अक्सर ही इसी तरह के ब्लॉग चमकते दमकते दिखते थे। हद…

Read More