चूहों ने दिखाई अपनी ताकत भारत बंद के बाद, कच्छे भी दिखे बेहिसाब

घुघूती बासूती जी से मुलाकात की सोच रखी थी सतीश पंचम जी से मुलाकात के बाद। यह भी मन में था कि समय रहा तो विवेक रस्तोगी जी से भी मुलाकात कर ली जाए। लेकिन कहा जाता है ना कि जो सोचो वह कभी होता है क्या? उस सोमवार 5 जुलाई को जब तैयार होने लगा तो मामाजी का प्रश्न उछला -कहाँ की तैयारी है? मैंने बताया तो मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि टीवी नहीं देखते ना इसलिए जानते नहीं हो कि आज तो भारत बंद है और यूँ अनजान…

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