क्या हिन्दी के लिए गूगल एडसेंस वापस आ रहा!?

हिंदी ब्लॉगिंग में कभी कभी कुछ ऐसा नज़र आ जाता है कि दिल की धड़कने बढ़ जाती हैं, आंखों पर भरोसा नहीं होता, कल्पना के घोड़े दौड़ने लग जाते हैं, मन शेखचिल्ली जैसा हो जाता है। ऐसा ही अभी कुछ देर पहले हुया। आज संध्या जब दीपावली पर एक पोस्ट लिखने की मंशा से ब्लॉगस्पॉट पर मैंने लॉग इन किया तो कुछ खटका निगाह में। मामला यह था कि डैश बोर्ड की भाषा को मैं अक्सर बदलता रहता हूँ। पिछले दो सप्ताह से इसे मैंने हिंदी में किया हुया है।…

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