चिट्ठाजगत वालों से बात हुई तो स्वार्थ सामने दिखा उनका

पिछले वर्ष जब हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर चिट्ठाजगत यकायक ओझल हो गया तो इसकी आदत डाल चुके बहुतेरे ब्लॉगर निराश होते दिखे थे। आँख-मिचौली का खेल खेलते कभी कभी इसकी झलक दिखती भी रही लेकिन आखिरकार वापस लौटने की तमाम अटकलों को झुठलाते हुए चिट्ठाजगत विलुप्त हो गया। फिर एकाएक पहले की तरह नए ब्लॉगों की सूचना देती ई-मेल आनी शुरू हो गईं। तब से अब तक इसका मोबाईल संस्करण ही उपलब्ध है लेकिन आधा-अधूरा। कई बार मन किया कि अच्छे खासे चलते फिरते गैरविवादास्पद रहे इस एग्रीगेटर के कर्णधारों से…

Read More

ब्लॉगवाणी की नीति और नीयत कोई बतला सकता है क्या!?

इस विषय पर मैं किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं देना चाह रहा था, किन्तु आज एक ब्लॉगर साथी की प्रतिक्रिया देख कर रहा नहीं गया। मामला कुछ यूँ है कि पिछले दिनों 4 मई 2010 को मैंने संबंधियों-सहयोगियों के आग्रह पर अपने अनुभवों को साझा करने के दृष्टिकोण से कम्प्यूटर सुरक्षा संबधित एक नया ब्लॉग बनाया था। एग्रीगेटरों में इसे शामिल करवाने की एक सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत, अन्य एग्रीगेटरों के साथ-साथ 4 मई को ही ब्लॉगवाणी व चिट्ठाजगत से भी निश्चित प्रक्रिया के अनुरूप अनुरोध किया गया। 5 मई…

Read More