जनमदिन के मौके पर हुई दो ब्लॉगरों से पहली मुलाक़ात

इस बार जनमदिन पर पोस्ट लिखना टलते चला आ रहा था क्योंकि सभी वेबसाईट्स के सर्वर बदले जा रहे थे और बिंदास तरीके से लिखने का समय ही नहीं मिला। सर्वर संबंधित काम तो खतम हो गया लेकिन कई छोटी छोटी बातें अभी भी तनाव बढ़ा रहीं। इस बार मन कुछ उदास सा था जनमदिन के मौके पर, जैसा कि मैंने बताया था पिछली बार। इस उदासी को तोड़ा शुभचिंतकों ने, जब 20 सितंबर से ही उनकी बधाईयाँ एसएमएस व मोबाईल द्वारा मिलनी शुरू हुईं। ठीक आधी रात को सुपुत्र…

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आधी सदी का सफ़र और एक नई शुरूआत

आज 21 सितंबर को, इस धरा पर मानव जीवन का सफ़र तय करते पाश्चात्य गणना पद्धति के हिसाब से आधी सदी का वक्त बीत गया। इस मौके पर कल रात माँ बहुत याद आई। सिर्फ़ कल्पना ही कर पाया कि वह कैसे बलैंय्या लेती अपने इस बच्चे की। इससे पहले मन कुछ और उदास होता, दादी की डाँट सुन मुस्कुराते हुए फिर चल पड़ा अपने कर्मपथ पर। दादी 1987 में ही दुनिया छोड़ गई थी लेकिन आज भी मेरे सामने अपनी प्यार भरी डाँट के साथ तब हाजिर होती है…

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बधाई ब्लॉगरों को मिलनी चाहिए कि बंद होने जा रहे इस अनोखे ब्लॉग को!?

यह न तो किसी तरह की प्रतियोगिता है और न ही कोई पहेली! इसके बावज़ूद मैं यह यह कहना चाहूँगा कि क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आज ऐसी कौन सी खास बात हो रही है ? मुझे मालूम है कि भले ही आप इसे कितना भी चाह्ते हों या इसकी चर्चा करते हों किंतु शायद ही कोई बूझ पाए सही सही उत्तर! इसलिए अब बता ही देता हूँ कि आप सबके दुलारे हिन्दी ब्लॉगरों के जनमदिन ने 500 बधाईओं का आँकड़ा छू लिया है। 500वीं बधाई मिली है…

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माँ के बिना अकेले रह गए पिता जी का जनमदिन

आज कल समयाभाव इतना रहने लगा है कि विचारों को तुरत फुरत शब्दों में ढ़ाल देना थोड़ा मुश्किल सा लगता है। कल  पिताजी के बारे में लिखने बैठा था किन्तु कुछ ऐसा कार्य आ गया शहर के दूसरे कोने तक जाना पड़ा। देर रात कुछ सूझा नहीं तो थोड़े बहुत बदलाव के साथ यह पुरानी पोस्ट आपके सामने है। ————————————————————– पिछले दिनों जब भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षायों का परिणाम घोषित हुया तो सुबह-सुबह अपने पिता के चेहरे पर मुस्कुराहट देख कर मुझे आभास हुया कि उन्हें कोई पुरानी बात याद…

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क्या जनमदिन वाला ब्लॉग बंद कर दिया जाए?

बस यूँ समझ लीजिए कि किसी भावावेश में आ कर सुधी पाठकों से यह प्रश्न कर रहा हूँ कि क्या जनमदिन वाला ब्लॉग बंद कर दिया जाए?

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हिन्दी ब्लॉगिंग में आया भूकम्प, देखिए चपेट में आने वालों की सूची

दो दिन पहले 20-21 सितम्बर 2010 की मध्य रात्रि से कुछ पहले हिन्दी ब्लॉगिंग क्षेत्र में कुछ हलचलें होनी शुरू हुई तो मुझे भी अंदाज़ नहीं था कि यह सब कुछ ऐसे भूकम्पों में बदल जाएगा जिसे कम से कम मैं तो आजीवन याद रखूँगा। हालांकि यह भूकम्प एक के बाद एक आए और इनका स्थान अलग अलग था किन्तु जैसे जैसे समय बीतता गया इनकी क्षमता तीव्र होते गई तथा फिर इनने काफी बड़े क्षेत्र पर अपना प्रभाव दिखाया। सैकड़ों ब्लॉगरों ने इन क्षणों में अपनी अपनी भावनाएँ व्यक्त…

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क्या आप ब्लॉगरों की खुशियाँ साझा करने वाले इस नन्हे-मुन्ने को बधाई नहीं देंगे!?

यह न तो कोई पहेली है और न ही किसी तरह की प्रतियोगिता। इसके बावज़ूद मैं यह यह कहना चाहूँगा कि क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आज किसका जनमदिन है? मुझे मालूम है कि शायद ही कोई बता पाए सही सही उत्तर! भले ही आप इसे कितना भी चाह्ते हों या इसकी चर्चा करते हों। यह भी बता दूँ कि आज से ठीक एक वर्ष पहले इसका जनम हुआ था। हालांकि करीब तीन माह बाद इसने आंखे खोलीं और खुशी के मारे उछल पड़े कीर्तिश भट्ट जी। फिर…

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मेरी पोस्ट पर मठाधीशों की बात करने वाला कुत्ते का पिल्ला है!!

यह बिल्कुल सत्य घटना है, ना तो होली के मूड वाली कोई पोस्ट है और ना ही किसी तरह की मौज या हास्य व्यंग्य वाली पोस्ट। शीर्षक भी बिल्कुल ठीक ही है। कोई गलतफहमी ना रह जाए इसलिए एक बार फिर लिख देता हूँ कि मेरी पोस्ट पर मठाधीशों की बात करने वाला कुत्ते का पिल्ला है। हुआ यह कि आम तौर पर मेरी पोस्ट्स पर बेनामी या बिना प्रोफाईल वालों की टिप्पणियाँ लगभग नहीं के बराबर आती हैं। पहले एकाध वाक्ये में ऐसा हुआ कि मेरे ब्लॉग के लेख…

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रचना जी की चाहत, मेरी उलझन, आपकी भावनाएँ: क्या करूँ?

आज दोपहर नारी ब्लॉग की सूत्रधार व हिंदी ब्लॉगिंग की देन वाली रचना सिंह की ईमेल मुझे आई है। इस ईमेल में उन्होंने एक अप्रत्याशित आग्रह किया है, जिसे लेकर मैं दुविधा में पड़ गया हूँ। दरअसल रचना जी ने अपरिहार्य कारणों से, हिंदी ब्लॉगरों के जन्मदिन वाले ब्लॉग पर अपने जनमदिन की बधाईनुमा पोस्ट को हटा देने की इच्छा जताई है। मेरी दुविधा यह है कि संगीता पुरी, दिनेशराय द्विवेदी, डॉ. मनोज मिश्र, उड़न तश्तरी, रंजना (रंजू भाटिया), एम वर्मा, सैयद, सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट), अनिल कान्त,…

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शरद कोकास जी से जबरन ली गई और सहर्ष दी गई जन्मदिन पार्टी

अलबेला खत्री जी के छत्तीसगढ़ प्रवास के अंतिम दिन जब मैं व संजीव तिवारी उन्हें विदा करने दुर्ग रेल्वे स्टेशन पहुँचे तो शरद कोकास जी ने सूचना दी कि वे भी आ रहे हैं स्टेशन। ट्रेन रवाना हो गई शरद जी का अता पता नहीं। बाहर आ कर उनके मोबाईल पर सम्पर्क किया गया तो पता चला कि वे अपनी कार पार्क कर रहे हैं। जब मुलाकात हुई तो वे सफाई देने लगे कि मोबाईल पर आ रहे बधाई वाले कॉल्स के कारण कार चलाने में बाधाएँ आ रही थीं…

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जनमदिन पर आपके स्नेह ने मुझे भावुक कर दिया

अब तक स्तब्ध हूँ, हतप्रभ हूँ, मुदित हूँ। 20-21 सितम्बर की मध्य रात्रि से शुरू हुया स्नेहाशीषों का सिलसिला अब तक जारी है। इस बार शुरूआत हुई 20 सितम्बर की शाम से। अजय झा जी की एक समस्या का निराकण करते हुए GTalk पर चल रही बातों के बीच सोमवार 21 सितम्बर (ईद) की छुट्टी का जिक्र आया। अजय जी ने बस यूँ ही पूछ लिया कि कल क्या कर रहे हैं? मैंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए बताया कि सोच रहा हूँ अपने मोबाईल बंद कर किसी नदी के…

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आज मेरी अगली पीढ़ी, 23 वर्ष की हो गयी

सन 1986 के मई माह का वह एक रविवार था। शाम को दूरदर्शन पर फिल्म चल रही थी -हमराही। 9 बजे ही थे एकाएक ही रिमोट कंट्रोल बोल उठा ‘हॉस्पिटल’। हमने अपनी जावा मोटरसायकल उठायी और रिमोट कंट्रोल के साथ धीमे-धीमे चल पड़े अपने संस्थान के अस्पताल की ओर। ऑपरेशन थियेटर के दरवाज़े के सामने अकेले खड़े-खड़े अनचाहा तनाव बढ़ते ही जा रहा था। 25-26 मई की मध्य रात्रि 12 बज कर 20 मिनट पर वह दरवाजा खुला। आधे लटके हुये मास्क के पीछे से एक मुस्कुराता सा चेहरा नज़र…

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