हम दोनों कूदे और तुरंत ही तीन हो गए

डेज़ी होती थी उन दिनों जब की यह बात है। समय बिल्कुल निश्चित होता था उसका मुझे टहला कर लाने का! क्या मज़ाल कि 5-10 मिनट ज़्यादा हो जाए। अगर मैं सोते रहूँ तो मेरे ऊपर कूद कर मचल कर किसी भी तरह बिस्तर से नीचे उतरवा लेती थी भले ही चीखते चिल्लाते रहूँ। यही हाल तब होता था जब कम्प्यूटर के सामने बैठा कोई ‘ज़रूरी’ काम निपटाने में मग्न रहूँ। बहलाने फुसलाने से कुछ देर शांत रहने के बाद उसका सब्र खत्म हो जाने पर पिछले पंजों पर खड़े…

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‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला

अपनी समझ से सारी तैयारी कर भिलाई से, 27 जून को जब हम अपनी मारूति वैन में मुम्बई की ओर रवाना हुए तो मौसम सुहाना ही था। बारिश के आसार पुन: दिख रहे थे। जुड़वां शहर, दुर्ग-भिलाई की सीमा, शिवनाथ नदी छोड़ ही चुके थे कि बिटिया को एकाएक शून्य की ओर ताकते पाया। एक गहरी सी सांस लेते हुए बातों का सिलसिला प्रारंभ करना चाहा तो जैसे वह नींद से जगी हो। उसका चेहरा मेरी ओर हुआ तो कहीं ऐसा लगा कि उसकी आंखें गीली हैं। आखिर हम उस…

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सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना

भिलाई से सड़क मार्ग द्वारा महाराष्ट्र, मुंम्बई की यात्रा की तैयारी का संस्मरण

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जब माताजी की आँखों में एकाएक आँसू आ गये और लौटने को तत्पर हो गयीं

मुंबई यात्रा समाप्त हुए हालांकि एक माह से ऊपर हो चुका है, लेकिन एक घटना अब भी याद आ जाती है, जिसने कम से कम तीन प्राणियों के स्वभाव में फर्क ला दिया। अब तक आप पढ़ चुके हैं कि कैसे हावडा-मुंबई एक्सप्रेस से मुंबई पहुँच कर हमारा परिचय टॉफियों के कारोबारी से हुया, Domino Pizza के बाहर खडी आधुनिक युवती की हरकत को देख यूनुस जी से नाराज हुया, ममता जी से मिलने से इनकार भी कर दिया, अपनी बेबसी के आगे अनिता जी के बिन्दासपने का जिक्र किया…

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