ब्लॉगिंग को बकवास ठहराते पुण्य प्रसून बाजपेयी से हुई मुठभेड़

रविवार का वह खुशनुमा दिन एक साथ बिता, सभी के दिल-ओ-जुबां पर अगली मुलाकात का वादा था। एक एक कर जब सभी प्रफुल्लित मन से विदा लेने लगे तो, अजय झा ने अंत में रह गए द्विवेदी जी से अपने निवास पर आमंत्रित किया। कुछ दुविधा में पड़े, वल्लभगढ़ जाने वाले, द्विवेदी जी को जब देर शाम बॉर्डर पर लगने वाले ट्रैफिक जाम का खाका खींच कर बताया गया तो उन्होंने वह रात अजय जी के निवास पर बिताने का आग्रह स्वीकार कर लिया। एक बार फिर यह समय था,…

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द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा: अंतिम दिन, अभिनंदन, मुलाकातें तथा रवानगी

द्विवेदी जी, समय पाते ही हमारे उस ‘कारखाने’ की युवती ‘रोज़’ के साथ काम पर लग जाते थे। उधर ब्लॉगर साथी चकित थे कि अगले दस दिनों तक कोटा से बाहर रहने की बात कर द्विवेदी जी एकाएक कैसे प्रकट हो जाते हैं। कई साथियों ने छेड़ा भी कि कहीं झूठ-मूठ की बातें तो नहीं कर रहे थे!? उस दिन 30 जनवरी की सुबह द्विवेदी जी ने बताया कि उनके एक परिचित, भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत हैं। यदि उनसे मुलाकात हो पाये तो बढ़िया। अपने विभाग से टेलीफोन पर…

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द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा: दूसरा दिन, वैन की समस्या, रायपुर प्रेस क्लब तथा हमारे कारखाने की युवती

द्विवेदी जी के साथ जब देर रात उस पारिवारिक रेस्टोरेंट से लौटे तो उनकी आँखों में नींद साफ देखी जा सकती थी। उन्होंने कोशिश तो की कम्प्यूटर के सामने कुछ समय बिताने की लेकिन आँखे बोझिल होते ही फिर दीवान पर जा पहुँचे। हमने भी कुछ वक्त बिताया नेट पर और अगले दिन रायपुर यात्रा के बारे में सोचते हुये दूसरे शयन कक्ष की ओर बढ़ चले। सुबह जब 10 बजे तक रायपुर के लिए रवाना होने का इरादा बन चुका था तो आरंभ वाले संजीव तिवारी जी का फोन…

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द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा: पहला दिन, डेज़ी की उछल कूद, भाई से मुलाकात व अगले दिन की योजना,

हालांकि शब्दों के सफर वाले अजित वडनेरकर जी के निवास से रवाना होकर द्विवेदी जी छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से भिलाई आ रहे थे। किंतु गफलत ना हो जाये इसलिये उन्हें एक छोटी सी जानकारी भी दे चुका था कि वे दुर्ग स्टेशन पर ही उतरें, मैं वहाँ मौज़ूद रहूंगा। दरअसल भिलाई एक ऑद्योगिक टाऊनशिप का आकार लिये हुये है तथा इसी नाम के रेल्वे स्टेशन से सड़क परिवहन की सुविधा संतोषप्रद नहीं है। दुर्ग, इस क्षेत्र का एक जंक्शन स्टेशन है व रेलगाड़ियों के रूकने का समय भी किंचित अधिक ही…

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दिनेशराय द्विवेदी जी को बधाई देने का दिन है आज!

कल जब  मैंने द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा का विवरण लिखना शुरू किया था, तो आज 18 मई की विशेषता का ध्यान ही नहीं रहा था। नाईट शिफ्ट के बाद आधे दिन की नींद ले, तरोताज़ा होकर जब कम्प्यूटर के सामने बैठा तो सामने यह जानकारी दिखी कि  आज आदरणीय दिनेशराय दिवेदी जी की वैवाहिक वर्षगांठ है। सन 2000 में उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन की सिल्वर जुबली भी मना डाली है। इस लिहाज से आज 34वीं वर्षगांठ हुयी। (सन 2000 में सिल्वर जुबली मनाते शोभा जी- द्विवेदी जी, साथ में उनके सुपुत्र…

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द्विवेदी जी की भिलाई यात्रा: प्रयोजन, उनकी उलझन, मेरी नाराजगी

इस वर्ष फरवरी माह के पहले,  तीसरा खंबा व अनवरत ब्लॉग के लेखक व कोटा, राजस्थान में वकालत कर रहे दिनेशराय द्विवेदी जी का, उनके सुपुत्र सहित भिलाई प्रवास हुया था। मैंने तब ही यह निश्चय कर लिया था कि इस प्रवास की कुछ बातें तभी साझा करूँगा जब उनके भिलाई प्रवास का उद्देश्य पूरा हो जायेगा। उद्देश्य की पूर्ति तो इसी माह, मई के प्रथम सप्ताह में हो गयी किंतु उसके बावज़ूद शिफ्ट ड्यूटी से पनपी आलस्यता से कुछ दिन और गुजर गये। इस सप्ताह नाईट शिफ्ट है तो…

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