उत्तर भारत की यात्रा: दो नौजवान ब्लॉगरों से हुई पहली मुलाकात

12 ब्लॉगरों की खुशनुमा शाम के बाद अगले दिन 20 दिसम्बर को मुझे भिलाई लौटना था। हजरत निज़ामुद्दीन स्टेशन से दोपहर 3:25 को चलने वाली ट्रेन में वातानूकूलित शयनयान का आरक्षण करवाते समय नवम्बर माह में भी वेटिंग दर्शा रहा रहा था। अब इंतज़ार था चार्ट बनने का। तब कहीं जा कर पता चलता बर्थ नम्बर का। पिछले शाम की बैठक में, भिलाई रवाना होने के पहले संजू-राजीव तनेजा दंपति द्वारा उनके निवास पर दोपहर-भोज के आग्रह को स्वीकार कर चुका था। इस लिहाज से मुझे जल्दी निकलना था। राजीव…

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उत्तर भारत की यात्रा: वह खुशनुमा शाम, 12 ब्लॉगरों के नाम

एक दूसरे से पहली बार मिले चार ब्लॉगरों की 18 दिसम्बर को हुई लम्बी बैठक के बाद अजय जी के निवास पर उनकी कई कम्प्यूटर संबंधित तकनीकी उलझनों का शमन करते आधी रात के बाद जो सोया तो दूसरे दिन कब नींद खुली, कितनी देर हुई इसका अंदाज़ इस बात से लगाया जा सकता है कि झा दम्पत्ति दोपहर भोजन की तैयारियाँ करते धूप का आनंद लेते दिखे। हमने झट अपना कैमरा उठाया और अजय कुमार झा की यह अनोखी अदा कैद कर ली। इस बीच कई ब्लॉगर साथियों से…

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उत्तर भारत की यात्रा: दिल्ली के एसीपी से पंगा लेने/ ना लेने का कारण

मैं चल तो पड़ा लुधियाना से शान-ए-पंजाब में सवार हो, लेकिन उसे नई दिल्ली पहुँचते इतनी देर हो गई कि मेट्रो नहीं मिली शाहदरा जाने के लिए। वहाँ मेरी बुआ जी रहती हैं। अब आटो रिक्शा वगैरह कर भी लेता तो इतनी रात गए उन्हें असुविधा में डालने का मन नहीं किया। तुरंत ही निर्णय ले एक होटल का रूख किया। रिसेप्शन वाले ने कहा कि पहले कमरा देख लीजिए। एक नज़र मारी -फ्रिज़, टीवी, टेलीफोन, डबल बेड, गीज़र, आलमारी सब दिखे। एडवांस दे कर, कमरा नम्बर 306 का ताला…

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अजय झा परिवार, वापस भिलाई आने का दिन, फिर उनका ब्लॉगिंग को अलविदा कहना!!

अजय जी के साथ तकनीकी जानकारियाँ साझा करते–करते 17 तारीख की सुबह ढ़ाई बज गए तो हम अगले दिन का कार्यक्रम बनाते बिस्तर पर जा पहुँचे। सुबह नींद देर से खुली। बुआ जी पिछले दिन फोन कर दिल्ली वापस आ जाने की बात बता चुकी थी तो उनसे मिलना ज़रूरी हो गया था। बलबीर नगर के लिए वर्षों बाद शाहदरा पहुँच कर लोनी रोड पर घर तलाशने में मुझे कुछ संशय सा था। पुराने सीमाचिन्ह गायब होने के बावज़ूद मात्र अंदाज़ से ही ठीक घर के सामने ही आटो रिक्शा…

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ब्लॉगिंग को बकवास ठहराते पुण्य प्रसून बाजपेयी से हुई मुठभेड़

रविवार का वह खुशनुमा दिन एक साथ बिता, सभी के दिल-ओ-जुबां पर अगली मुलाकात का वादा था। एक एक कर जब सभी प्रफुल्लित मन से विदा लेने लगे तो, अजय झा ने अंत में रह गए द्विवेदी जी से अपने निवास पर आमंत्रित किया। कुछ दुविधा में पड़े, वल्लभगढ़ जाने वाले, द्विवेदी जी को जब देर शाम बॉर्डर पर लगने वाले ट्रैफिक जाम का खाका खींच कर बताया गया तो उन्होंने वह रात अजय जी के निवास पर बिताने का आग्रह स्वीकार कर लिया। एक बार फिर यह समय था,…

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मेरी दिल्ली यात्रा: पहली बार राजीव तनेजा, खुशदीप, इरफ़ान, विनीत से रुबरू होने का रोमांच

बेशक विनीत कुमार के मोबाईल नम्बर पर हुए वार्तालाप के बाद मुझे कुछ असहजता सी लगी हो, किन्तु अगले दिन ब्लॉगर साथियों से रूबरू होने का ख्याल मुझे रोमांचित कर रहा था। 14 नवम्बर को उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब के कई साथियों ने सम्पर्क किया और मिलने की उत्कंठा बताते हुए आ पाने का प्रयास किए जाने की सूचना दी। अजय जी ने एक बार बैठक वाले स्थान तक हो आने का प्रस्ताव दिया तो मैंने आलस्य के मारे उन्हें मना कर दिया। 15 नवम्बर की सुबह हम दोनों करीब साढ़े…

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मेरी दिल्ली यात्रा: सूचना मिलते ही मुरैना स्टेशन पर पहुँचे भुवनेश शर्मा जी

पिछले माह, अक्टूबर की 11 तारीख को आधी रात बीत रही थी। अजय कुमार झा चैट पर बतिया रहे थे। एकाएक उनकी ओर से लिखा हुआ आया ‘… सोच रहा हूं आप लोगों से मिलने आ जाउं… शायद इसी साल आपकी हमारी मुलाकात हो जाये…बिल्कुल आमने सामने… शायद दिसम्बर में’। तब तक वर्षों से मेरी भी एक दबी हुई इच्छा जोर मारने लगी थी। मैंने लिखा ’14 नवंबर का ट्रेड फेयर अटेंड किए कई वर्ष हो गए… इस बार सोच रहा हूँ कि… प्रगति मैदान की प्रगति देख ही लें…

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अजय झा के स्नेह भरे शब्द और मेरा दिल्ली पहुंचना

पिछले महीने की एक शाम अजय कुमार झा जी से जीटाक पर बातचीत चल रही थी। किसी बात पर अजय जी ने बड़े स्नेह से कह दिया कि अब तो आपसे गले मिलने की तमन्ना है। मैं कुछ क्षण सोचता ही रह गया कि ब्लॉग जगत को आख़िर कब तक आभासी माना जाता रहेगा? बस उन्ही क्षणों में मैंने निश्चय कर लिया कि इस बार दिल्ली की यात्रा हिंदी ब्लॉग्गिंग के नाम पर की जाए। कुछ ही मिनटों में मैंने रेल आरक्षण कर अजय जी को सूचित कर दिया कि…

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